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*🔹ससुराल मे कोई तकलीफ🔹*
*👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें …उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें..भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाए, दूध रोटी खा लें..शुक्ल पक्ष की तृतीया को..अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें …नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाए बस……अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल*
*👉 माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया*
*👉 वैशाख शुक्ल तृतीया*
*👉 भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया*
*जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें …नमक बिना का भोजन करें ….जरुर लाभ होग. ..ऐसा व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधती ने किया था…. ऐसा आहार नमक बिना का भोजन…. वशिष्ठ और अरुंधती का वैवाहिक जीवन इतना सुंदर था कि आज भी सप्त ऋषियों में से वशिष्ठ जी का तारा होता है , उनके साथ अरुंधती का तारा होता है…आज भी आकाश में रात को हम उन का दर्शन करते हैं …*
*शास्त्रों के अनुसार शादी होती तो उनका दर्शन करते हैं ….. जो जानकार पंडित होता है वो बोलता है…शादी के समय वर-वधु को अरुंधती का तारा दिखाया जाता है और प्रार्थना करते हैं कि , “जैसा वशिष्ठ जी और अरुंधती का साथ रहा ऐसा हम दोनों पति पत्नी का साथ रहेगा..” ऐसा नियम है….*
*चन्द्रमा की पत्नी ने इस व्रत के द्वारा चन्द्रमा की यानी २७ पत्नियों में से प्रधान हुई….चन्द्रमा की पत्नी ने तृतीया के व्रत के द्वारा ही वो स्थान प्राप्त किया था…तो अगर किसी सुहागन बहन को कोई तकलीफ है तो ये व्रत करें* *….उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें … कुम-कुम का तिलक ख़ुद को भी करें उत्तर दिशा में मुख करके …. उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाये॥*
*👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें …उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें..भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाए, दूध रोटी खा लें..शुक्ल पक्ष की तृतीया को..अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें …नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाए बस……अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल*
*👉 माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया*
*👉 वैशाख शुक्ल तृतीया*
*👉 भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया*
*जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें …नमक बिना का भोजन करें ….जरुर लाभ होग. ..ऐसा व्रत वशिष्ठ जी की पत्नी अरुंधती ने किया था…. ऐसा आहार नमक बिना का भोजन…. वशिष्ठ और अरुंधती का वैवाहिक जीवन इतना सुंदर था कि आज भी सप्त ऋषियों में से वशिष्ठ जी का तारा होता है , उनके साथ अरुंधती का तारा होता है…आज भी आकाश में रात को हम उन का दर्शन करते हैं …*
*शास्त्रों के अनुसार शादी होती तो उनका दर्शन करते हैं ….. जो जानकार पंडित होता है वो बोलता है…शादी के समय वर-वधु को अरुंधती का तारा दिखाया जाता है और प्रार्थना करते हैं कि , “जैसा वशिष्ठ जी और अरुंधती का साथ रहा ऐसा हम दोनों पति पत्नी का साथ रहेगा..” ऐसा नियम है….*
*चन्द्रमा की पत्नी ने इस व्रत के द्वारा चन्द्रमा की यानी २७ पत्नियों में से प्रधान हुई….चन्द्रमा की पत्नी ने तृतीया के व्रत के द्वारा ही वो स्थान प्राप्त किया था…तो अगर किसी सुहागन बहन को कोई तकलीफ है तो ये व्रत करें* *….उस दिन गाय को चंदन से तिलक करें … कुम-कुम का तिलक ख़ुद को भी करें उत्तर दिशा में मुख करके …. उस दिन गाय को भी रोटी गुड़ खिलाये॥*
Forwarded from Hindu Panchang
*🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞*
*दिनांक 04 मई 2022*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत - 2079*
*⛅शक संवत - 1944*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - चतुर्थी सुबह 07:33 से 5 मई सुबह 10:00 बजे तक*
*⛅नक्षत्र - मृगशिरा पूर्णरात्रि तक*
*⛅योग - अतिगण्ड अपरान्ह 05:08 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:37 से 02:15 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:05*
*⛅सूर्यास्त - 07:08*
*⛅दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:37 से 05:21 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.14 से 12:58 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
*⛅ विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹लू से बचने के लिए🔹*
*लू से बचने के लिए तेज धूप में घर से बाहर निकलते समय पानी पीकर एवं जूते व टोपी पहन के ही निकलें | एक साबुत प्याज साथ में रखें | लू लगने पर मोसम्बी के रस का सेवन बहुत ही लाभदायी हैं |*
*ऋषिप्रसाद – मई २०२०*
*🔹सिर का सहज सुरक्षा-कवच टोपी🔹*
*👉धूप से अपने सिर की रक्षा करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है । धूप में नंगे सिर घूमने से सिर,आँख,नाक व कान के अनेक रोग होते हैं । सिर में गर्म हवा लगने एवं बारिश का पानी पड़ने से भी अनेक रोग होते हैं । धूप के दुष्प्रभाव से ज्ञान तंतुओं को क्षति पहुंचती है, जिससे यादशक्ति कम हो जाती है।*
*👉पूर्वकाल में हमारे दादा-परदादा नियमित रूप से टोपी या पगड़ी पहनते थे और महिलाएँ हमेशा सिर ढक कर रखती थी । इस कारण उन्हें समय से पूर्व बाल सफेद होना, अत्यधिक बाल झड़ना (गंजापन), सर्दी होना, सिर दर्द होना तथा आँख,कान,नाक के बहुत-से रोग इनका इतना सामना नहीं करना पड़ता था ।*
*👉यदि आप अपने शरीर के उपरोक्त महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता लम्बे समय तक बनाये रखना चाहते हैं तो धूप से अपने सिर की रक्षा कीजिये । इसके लिए टोपी अत्यंत सुविधाजनक तथा उपयोगी है।*
*आयुर्वेद कहता है*
*उष्णीषं कान्तिकृत्केश्यं रजोवातकफापहम् ।।*
*लघु यच्छस्यते तस्मात् गुरुं पित्ताक्षिरोग कृत् ।।*
*'मस्तक पर उष्णीष (पगड़ी, साफा, टोपी आदि) धारण करना कांति की वृद्धि करने वाला,केश के लिए हितकारी,धूलि को दूर करनेवाला अर्थात धूलि से बालों को बचानेवाला और वात तथा कफ का नाशक होता है। परंतु ये सब उत्तम लाभ तभी होते हैं जब वह हलका हो। यदि उष्णीष बहुत भारी हो तो पित्त की वृद्धि और नेत्र संबंधी रोग को उत्पन्न करने वाला होता है।*
*(भावप्रकाश पु.लं., दिनचर्या दी प्रकरण ५.२३७)*
*👉सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा एवं होंठों के कैंसर का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती हैं। ये किरणें काँचबिंदु जैसी आँखों की विकृतियों को भी जन्म देती है ।*
*👉वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी टोपियाँ जिनमें किनारों पर कम-से-कम ३ इंच की पट्टी चारों तरफ लगी है,सिर,चेहरा,कानों तथा गले* *को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती हैं, जिससे स्किन कैंसर से बचाव हो जाता है । घुमावदार टोपियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं।*
*👉चुनाव-प्रचार में बाँटने वाली सिंथेटिक टोपियां लाभकारी नहीं होतीं टोपियाँ मोटे कपड़े की होनी चाहिए |*
*📚 ऋषि प्रसाद / मई २००९*
*दिनांक 04 मई 2022*
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत - 2079*
*⛅शक संवत - 1944*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - चतुर्थी सुबह 07:33 से 5 मई सुबह 10:00 बजे तक*
*⛅नक्षत्र - मृगशिरा पूर्णरात्रि तक*
*⛅योग - अतिगण्ड अपरान्ह 05:08 तक तत्पश्चात सुकर्मा*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:37 से 02:15 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:05*
*⛅सूर्यास्त - 07:08*
*⛅दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:37 से 05:21 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.14 से 12:58 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
*⛅ विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹लू से बचने के लिए🔹*
*लू से बचने के लिए तेज धूप में घर से बाहर निकलते समय पानी पीकर एवं जूते व टोपी पहन के ही निकलें | एक साबुत प्याज साथ में रखें | लू लगने पर मोसम्बी के रस का सेवन बहुत ही लाभदायी हैं |*
*ऋषिप्रसाद – मई २०२०*
*🔹सिर का सहज सुरक्षा-कवच टोपी🔹*
*👉धूप से अपने सिर की रक्षा करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है । धूप में नंगे सिर घूमने से सिर,आँख,नाक व कान के अनेक रोग होते हैं । सिर में गर्म हवा लगने एवं बारिश का पानी पड़ने से भी अनेक रोग होते हैं । धूप के दुष्प्रभाव से ज्ञान तंतुओं को क्षति पहुंचती है, जिससे यादशक्ति कम हो जाती है।*
*👉पूर्वकाल में हमारे दादा-परदादा नियमित रूप से टोपी या पगड़ी पहनते थे और महिलाएँ हमेशा सिर ढक कर रखती थी । इस कारण उन्हें समय से पूर्व बाल सफेद होना, अत्यधिक बाल झड़ना (गंजापन), सर्दी होना, सिर दर्द होना तथा आँख,कान,नाक के बहुत-से रोग इनका इतना सामना नहीं करना पड़ता था ।*
*👉यदि आप अपने शरीर के उपरोक्त महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता लम्बे समय तक बनाये रखना चाहते हैं तो धूप से अपने सिर की रक्षा कीजिये । इसके लिए टोपी अत्यंत सुविधाजनक तथा उपयोगी है।*
*आयुर्वेद कहता है*
*उष्णीषं कान्तिकृत्केश्यं रजोवातकफापहम् ।।*
*लघु यच्छस्यते तस्मात् गुरुं पित्ताक्षिरोग कृत् ।।*
*'मस्तक पर उष्णीष (पगड़ी, साफा, टोपी आदि) धारण करना कांति की वृद्धि करने वाला,केश के लिए हितकारी,धूलि को दूर करनेवाला अर्थात धूलि से बालों को बचानेवाला और वात तथा कफ का नाशक होता है। परंतु ये सब उत्तम लाभ तभी होते हैं जब वह हलका हो। यदि उष्णीष बहुत भारी हो तो पित्त की वृद्धि और नेत्र संबंधी रोग को उत्पन्न करने वाला होता है।*
*(भावप्रकाश पु.लं., दिनचर्या दी प्रकरण ५.२३७)*
*👉सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें त्वचा एवं होंठों के कैंसर का महत्वपूर्ण कारण मानी जाती हैं। ये किरणें काँचबिंदु जैसी आँखों की विकृतियों को भी जन्म देती है ।*
*👉वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसी टोपियाँ जिनमें किनारों पर कम-से-कम ३ इंच की पट्टी चारों तरफ लगी है,सिर,चेहरा,कानों तथा गले* *को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती हैं, जिससे स्किन कैंसर से बचाव हो जाता है । घुमावदार टोपियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं।*
*👉चुनाव-प्रचार में बाँटने वाली सिंथेटिक टोपियां लाभकारी नहीं होतीं टोपियाँ मोटे कपड़े की होनी चाहिए |*
*📚 ऋषि प्रसाद / मई २००९*
Forwarded from Hindu Panchang
*🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~ 🌞*
*⛅दिनांक 05 मई 2022*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत - 2079*
*⛅शक संवत - 1944*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - चतुर्थी सुबह 10:00 बजे तक तत्पश्चात पंचमी*
*⛅नक्षत्र - मृगशिरा सुबह 06:07 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग - सुकर्मा अपरान्ह 05:08 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहुकाल - दोपहर 02:15 से 03:53 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:04*
*⛅सूर्यास्त - 07:09*
*⛅दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:37 से 05:20 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.14 से 12:58 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - श्री रामानुजाचार्य जयंती*
*⛅ विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹कमर-दर्द मिटाने व शक्ति बढ़ाने हेतु🔹*
*🔹रात में 60ग्राम गेहूँ व 2बादाम पानी में भिगो दें।सुबह गेहूँ और बादाम (छिलके निकाल के ) 30ग्राम खसखस के साथ मिला के बारीक पीस लें।*
*🔹इस मिश्रण को दूध में पकाकर खीर बना लें 2हफ्ते खाने से कमर का दर्द दूर होता है तथा ताकत भी बढ़ती है।- ऋषि प्रसाद*
*🔹पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:🔹*
*➡️पीपल के कोमल पत्तों का मुरब्बा बड़ी शक्ति देता है | इसके सेवन से शरीर की कई प्रकार की गर्मी-संबंधी बीमारियाँ चली जाती है | यह किडनी की सफाई करता है | पेशाब खुलकर आता है | पित्त से होने वाली आँखों की जलन दूर होती है | यह गर्भाशय व मासिक संबंधी रोगों में लाभकारी है | इसके सेवन से गर्भपात का खतरा दूर हो जाता है |*
*➡️पीपल के पत्ते ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए | पहले पीपल देवता को प्रणाम करना कि ‘महाराज ! औषध के लिए हम आपकी सेवा लेते हैं, कृपा करना |’ पीपल को काटना नहीं चाहिए | उसमें सात्विक देवत्व होता है |*
*➡️मुरब्बा बनाने की विधि*: *पीपल के २५० ग्राम लाल कोमल पत्तों को पानी से धोकर उबाल लें, फिर पीसकर उसमें समभाग मिश्री व ५० ग्राम देशी गाय का घी मिलाकर धीमी आँच पर सेंक लें | गाढ़ा होने पर ठंडा करके सुरक्षित किसी साफ बर्तन ( काँच की बरनी उत्तम है ) में रख लें |*
*🔹सेवन-विधि: १०-१० ग्राम सुबह-शाम दूध से लें |*
*🔹हृदय मजबूत करने के लिए : १०-१२ ग्राम पीपल के कोमल पत्तों का रस और चोथाई चमम्च पीसी मिश्री सुबह-शाम लेने से हृदय मजबूत होता है, हृदयघात (हार्ट -अटैक) नहीं होता | इससे मिर्गी व मूर्च्छा की बीमारी में लाभ होता है |*
*- Lok Kalyan Setu March' 2012*
*⛅दिनांक 05 मई 2022*
*⛅दिन - गुरुवार*
*⛅विक्रम संवत - 2079*
*⛅शक संवत - 1944*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - ग्रीष्म*
*⛅मास - वैशाख*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - चतुर्थी सुबह 10:00 बजे तक तत्पश्चात पंचमी*
*⛅नक्षत्र - मृगशिरा सुबह 06:07 तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*⛅योग - सुकर्मा अपरान्ह 05:08 तक तत्पश्चात धृति*
*⛅राहुकाल - दोपहर 02:15 से 03:53 तक*
*⛅सूर्योदय - 06:04*
*⛅सूर्यास्त - 07:09*
*⛅दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
*⛅ब्रह्म मुहूर्त- प्रातः 04:37 से 05:20 तक*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12.14 से 12:58 तक*
*⛅व्रत पर्व विवरण - श्री रामानुजाचार्य जयंती*
*⛅ विशेष- चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
*🔹कमर-दर्द मिटाने व शक्ति बढ़ाने हेतु🔹*
*🔹रात में 60ग्राम गेहूँ व 2बादाम पानी में भिगो दें।सुबह गेहूँ और बादाम (छिलके निकाल के ) 30ग्राम खसखस के साथ मिला के बारीक पीस लें।*
*🔹इस मिश्रण को दूध में पकाकर खीर बना लें 2हफ्ते खाने से कमर का दर्द दूर होता है तथा ताकत भी बढ़ती है।- ऋषि प्रसाद*
*🔹पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:🔹*
*➡️पीपल के कोमल पत्तों का मुरब्बा बड़ी शक्ति देता है | इसके सेवन से शरीर की कई प्रकार की गर्मी-संबंधी बीमारियाँ चली जाती है | यह किडनी की सफाई करता है | पेशाब खुलकर आता है | पित्त से होने वाली आँखों की जलन दूर होती है | यह गर्भाशय व मासिक संबंधी रोगों में लाभकारी है | इसके सेवन से गर्भपात का खतरा दूर हो जाता है |*
*➡️पीपल के पत्ते ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए | पहले पीपल देवता को प्रणाम करना कि ‘महाराज ! औषध के लिए हम आपकी सेवा लेते हैं, कृपा करना |’ पीपल को काटना नहीं चाहिए | उसमें सात्विक देवत्व होता है |*
*➡️मुरब्बा बनाने की विधि*: *पीपल के २५० ग्राम लाल कोमल पत्तों को पानी से धोकर उबाल लें, फिर पीसकर उसमें समभाग मिश्री व ५० ग्राम देशी गाय का घी मिलाकर धीमी आँच पर सेंक लें | गाढ़ा होने पर ठंडा करके सुरक्षित किसी साफ बर्तन ( काँच की बरनी उत्तम है ) में रख लें |*
*🔹सेवन-विधि: १०-१० ग्राम सुबह-शाम दूध से लें |*
*🔹हृदय मजबूत करने के लिए : १०-१२ ग्राम पीपल के कोमल पत्तों का रस और चोथाई चमम्च पीसी मिश्री सुबह-शाम लेने से हृदय मजबूत होता है, हृदयघात (हार्ट -अटैक) नहीं होता | इससे मिर्गी व मूर्च्छा की बीमारी में लाभ होता है |*
*- Lok Kalyan Setu March' 2012*
