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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦ मलद्वार की शुद्धि
♦ शुद्धि का प्रकार
♦ मलद्वार की शुद्धि के लाभ
♦ मूत्रेंदिये की शुद्धि
♦मूत्रेंदिये स्नान
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
To be Continue..........
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦ मलद्वार की शुद्धि
♦ शुद्धि का प्रकार
♦ मलद्वार की शुद्धि के लाभ
♦ मूत्रेंदिये की शुद्धि
♦मूत्रेंदिये स्नान
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कैसा चल रहा है ब्रम्हचर्य पालन 🧘♂️ ?
Anonymous Poll
32%
बोहोत अच्छा 😇
24%
कोशिश कर रहा हु 💪
28%
अच्छा चल रहा था, पर फिर से भटक गया हु 😔
15%
जी इस सफर मै आने वाले अनुभव साथियों से साझा कर सके तो और आसान होगा...👬👭
किसी कारणवश् मुझे कुछ दिनों के लिए चैनल पर सक्रिय होना संभव नहीं इसलिए चैनल को मेरा दूसरा सहयोगी चलाएगा (Opreat) करेगा .
उससे कोई भूल या गलती हो तो क्षमा करिये। 🙏
~Owner 😇
उससे कोई भूल या गलती हो तो क्षमा करिये। 🙏
~Owner 😇
🙏🙏💪💪 सफलता आसानी से किसी को नहीं मिलती, सफलता पाने के लिए दिन रात संघर्ष करना पडता है, अपना घंमड खत्म करना होता है ||
अगर आप भी सफलता पाने चाहते हैं तो ब्रह्मचर्य आपके लिए एक औषधि का कार्य करेगा, क्योंकि ब्रह्मचर्य हमे जीवन में त्याग, तपस्या, संघर्ष सिखाता है ||
आप भी आज से ही ब्रह्मचर्य की शुरुआत कर दे
Join - @bramachrya01
अगर आप भी सफलता पाने चाहते हैं तो ब्रह्मचर्य आपके लिए एक औषधि का कार्य करेगा, क्योंकि ब्रह्मचर्य हमे जीवन में त्याग, तपस्या, संघर्ष सिखाता है ||
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦ साबुन का प्रयोग
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#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦ साबुन का प्रयोग
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#celibacybookssummary
‼️ आपकी सबसे बुरी आदत ‼️
"कल करूँगा", "कुछ दिनों में करूँगा" या "एक बार बस ऐसा हो जाए, फिर करूँगा", यदि एक क्षण को रुक कर आप यह सोचेंगें कि अपने जीवन में आप इन वाक्यों का कितना प्रयोग करते हैं तो आप भी चौंक जाएँगे!
इसी से जुड़ी है हमारी सबसे बुरी आदत, जानते हैं कौनसी?
जीवन में जो चीजें हम जानते हैं कि सही हैं उन्हें तो हम कल पर टालते रहते हैं। और जो कुछ भी इच्छाओं की पूर्ति के लिए होता है वो सब जल्द-से-जल्द करना चाहते हैं। अब इस पूरी भागदौड़ में कब जीवन बीत जाता है उसका हमें कभी पता ही नहीं चलता। जो 'आवश्यक' है, वो 'चाहत' के आगे छुप जाता है।
इसका कारण और समाधान समझते हैं महाभारत की एक कहानी से:
एक बार युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा, "समय के साथ जैसे जीवन बीतता जाता है ऐसे में व्यक्ति एक सही जीवन जीने के लिए क्या कर सकता है?"
इस प्रश्न के उत्तर के तौर पर पितामह ने उन्हें एक संवाद के विषय में बताया जिसे 'पुत्र गीता' कहा जाता है। यह संवाद 'मेधावी' नाम के बालक और उसके पिता के बीच हुआ था।
इसी संवाद से कुछ श्लोक आपके साथ साझा करते हैं:
11. जब एक-एक रात बीतने के साथ ही आयु बहुत कम होती चली जा रही है, तब छिछले जल में रहने वाली मछली के समान कौन सुख पा सकता है?
12. जिस रात के बीतने पर मनुष्य कोई शुभ कर्म न करे, उस दिन को विद्वान् पुरुष 'व्यर्थ ही गया' समझे। मनुष्य की कामनाएँ पूरी भी नहीं होने पातीं कि मौत उसके पास आ पहुँचती है।
13. जैसे घास चरते हुए भेड़ों के पास अचानक शेरनी पहुँच जाती है और उसे दबोचकर चल देती है, उसी प्रकार मनुष्य का मन जब दूसरी ओर लगा होता है, उसी समय सहसा मृत्यु आ जाती है और उसे लेकर चल देती है।
14. इसलिए जो शुभ कार्य हो, उसे आज ही कर डालिए। आपका यह समय हाथ से निकल न जाए; क्योंकि सारे काम अधूरे ही पड़े रह जाएँगे और मौत आपको खींच ले जाएगी।
15. कल किया जाने वाला काम आज ही पूरा कर लेना चाहिए। जिसे सायंकाल में करना है, उसे प्रात:काल में ही कर लेना चाहिए; क्योंकि मौत यह नहीं देखती कि इसका काम अभी पूरा हुआ या नहीं।
22. कोई दुर्बल हो या बलवान, शूरवीर हो या डरपोक तथा मूर्ख हो या विद्वान, मृत्यु उसकी समस्त कामनाओं के पूर्ण होने से पहले ही उसे उठा ले जाती है।
काल की गति कुछ ऐसी ही है! कैसे बचेंगे?
➖➖➖➖
इस बीतते हुए साल के साथ जीवन के महत्व को समझें, सालों से मन में घर कर चुकी परेशानियों का आखिरी समाधान करें।
"कल करूँगा", "कुछ दिनों में करूँगा" या "एक बार बस ऐसा हो जाए, फिर करूँगा", यदि एक क्षण को रुक कर आप यह सोचेंगें कि अपने जीवन में आप इन वाक्यों का कितना प्रयोग करते हैं तो आप भी चौंक जाएँगे!
इसी से जुड़ी है हमारी सबसे बुरी आदत, जानते हैं कौनसी?
जीवन में जो चीजें हम जानते हैं कि सही हैं उन्हें तो हम कल पर टालते रहते हैं। और जो कुछ भी इच्छाओं की पूर्ति के लिए होता है वो सब जल्द-से-जल्द करना चाहते हैं। अब इस पूरी भागदौड़ में कब जीवन बीत जाता है उसका हमें कभी पता ही नहीं चलता। जो 'आवश्यक' है, वो 'चाहत' के आगे छुप जाता है।
इसका कारण और समाधान समझते हैं महाभारत की एक कहानी से:
एक बार युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा, "समय के साथ जैसे जीवन बीतता जाता है ऐसे में व्यक्ति एक सही जीवन जीने के लिए क्या कर सकता है?"
इस प्रश्न के उत्तर के तौर पर पितामह ने उन्हें एक संवाद के विषय में बताया जिसे 'पुत्र गीता' कहा जाता है। यह संवाद 'मेधावी' नाम के बालक और उसके पिता के बीच हुआ था।
इसी संवाद से कुछ श्लोक आपके साथ साझा करते हैं:
11. जब एक-एक रात बीतने के साथ ही आयु बहुत कम होती चली जा रही है, तब छिछले जल में रहने वाली मछली के समान कौन सुख पा सकता है?
12. जिस रात के बीतने पर मनुष्य कोई शुभ कर्म न करे, उस दिन को विद्वान् पुरुष 'व्यर्थ ही गया' समझे। मनुष्य की कामनाएँ पूरी भी नहीं होने पातीं कि मौत उसके पास आ पहुँचती है।
13. जैसे घास चरते हुए भेड़ों के पास अचानक शेरनी पहुँच जाती है और उसे दबोचकर चल देती है, उसी प्रकार मनुष्य का मन जब दूसरी ओर लगा होता है, उसी समय सहसा मृत्यु आ जाती है और उसे लेकर चल देती है।
14. इसलिए जो शुभ कार्य हो, उसे आज ही कर डालिए। आपका यह समय हाथ से निकल न जाए; क्योंकि सारे काम अधूरे ही पड़े रह जाएँगे और मौत आपको खींच ले जाएगी।
15. कल किया जाने वाला काम आज ही पूरा कर लेना चाहिए। जिसे सायंकाल में करना है, उसे प्रात:काल में ही कर लेना चाहिए; क्योंकि मौत यह नहीं देखती कि इसका काम अभी पूरा हुआ या नहीं।
22. कोई दुर्बल हो या बलवान, शूरवीर हो या डरपोक तथा मूर्ख हो या विद्वान, मृत्यु उसकी समस्त कामनाओं के पूर्ण होने से पहले ही उसे उठा ले जाती है।
काल की गति कुछ ऐसी ही है! कैसे बचेंगे?
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इस बीतते हुए साल के साथ जीवन के महत्व को समझें, सालों से मन में घर कर चुकी परेशानियों का आखिरी समाधान करें।