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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान और उष:पान
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#celibacybookssummary
To be Continue..........
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान और उष:पान
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ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ) pinned «25 वर्ष की उम्र तक ब्रह्मचर्य क्यों? 🔰 हालांकि आयुर्वेद मानता है कि मनुष्य लगभग 113 वर्ष तक जीवित रह सकता है। हिंदू धर्म अनुसार इंसान की 100 वर्ष की आयु के चार भाग हैं। 25-25 वर्ष में विभाजित इन चार भागों को चार आश्रमों में बांटा गया है, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ…»
जो अपनी ग़लती स्वीकारेगा नहीं,
उसकी सज़ा ये होगी कि
वही अपनी ग़लती दोहराएगा।
ग़लती स्वीकार लो,
ग़लती से मुक्त हो जाओगे!
उसकी सज़ा ये होगी कि
वही अपनी ग़लती दोहराएगा।
ग़लती स्वीकार लो,
ग़लती से मुक्त हो जाओगे!
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⭕⭕⭕⭕⭕⭕ ATTENTION ⭕⭕⭕⭕⭕⭕⭕
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हमारे ब्रम्हचारी युवा और युवती हम अपने ब्रम्हचर्य की जानकारी को जादा लोगो से साझा करने हेतू, उन तक पोहोचने के हेतू काम कर रहे हैं ऊसी दौरान हमको cross promotion करना पड रहा है......
आप सभी हम पर विश्वास कीजिये.......
हम सिर्फ ब्रम्हचर्य का प्रसार करने मैं जुटे हुए है और आगे भी पुरे भारतवर्ष मैं ब्रम्हचर्य का ही प्रसार करेंगे !
धन्यवाद🙏
@bramachrya01
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आप सभी हम पर विश्वास कीजिये.......
हम सिर्फ ब्रम्हचर्य का प्रसार करने मैं जुटे हुए है और आगे भी पुरे भारतवर्ष मैं ब्रम्हचर्य का ही प्रसार करेंगे !
धन्यवाद🙏
@bramachrya01
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🔰Note:-तुलसीदास जी कहते है,कि राम की भक्ति का आश्रय जब से लिया, तब से काम से प्रीति न रही,✅
अर्थात
🔰हर बुरी आदत, काम वासना व अश्लील चिंतन से बचने का एक सबसे सरल उपाय है परमात्मा से प्रेम करना✅
🔰जैसे जैसे व्यक्ति परमात्मा का चिंतन करेगा,उनका ध्यान करेगा,। वैसे वैसे उसकी बुराई और वासनाये, जो उसे नीच काम के लिये धकेलती थी। वे सभी नष्ट हो जाती है✅
🔰और जब व्यक्ति ईश्वर के रूप को ध्यान से निहारने लगता है,। तब वही छवि उसके मन मे बसने लग जाती है।
और जहाँ ईश्वर विराजे, भला वे आंखे गन्दी नाली और अश्लीलता के दर्शन से कैसे सुखी हो सकती है????
आप खुद विचार कीजिये,😊
🔰अर्थात ईश्वर से यारी कीजिये। वो आपको हर बुराई से बचाएंगे। यदि आप बोहत गन्दे काम भी कर चुके है,तो भी वे तुम्हे प्यार करेंगे।✅
🔰 यदि आप पतित है,तो वे आपको पावन बनाएंगे🙏
बस उन्हें पुकारने कि देर है😊
अर्थात
🔰हर बुरी आदत, काम वासना व अश्लील चिंतन से बचने का एक सबसे सरल उपाय है परमात्मा से प्रेम करना✅
🔰जैसे जैसे व्यक्ति परमात्मा का चिंतन करेगा,उनका ध्यान करेगा,। वैसे वैसे उसकी बुराई और वासनाये, जो उसे नीच काम के लिये धकेलती थी। वे सभी नष्ट हो जाती है✅
🔰और जब व्यक्ति ईश्वर के रूप को ध्यान से निहारने लगता है,। तब वही छवि उसके मन मे बसने लग जाती है।
और जहाँ ईश्वर विराजे, भला वे आंखे गन्दी नाली और अश्लीलता के दर्शन से कैसे सुखी हो सकती है????
आप खुद विचार कीजिये,😊
🔰अर्थात ईश्वर से यारी कीजिये। वो आपको हर बुराई से बचाएंगे। यदि आप बोहत गन्दे काम भी कर चुके है,तो भी वे तुम्हे प्यार करेंगे।✅
🔰 यदि आप पतित है,तो वे आपको पावन बनाएंगे🙏
बस उन्हें पुकारने कि देर है😊
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦मल मूत्र रोकने से हानियाँ
♦ यदि शौच ना आये तो
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
(द्वितीय भाग)
चक्षु स्नान, उष:पान और शौच
३ शौच
♦मल मूत्र रोकने से हानियाँ
♦ यदि शौच ना आये तो
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*पौराणिक धातु विज्ञान और शारीरिक लाभ*
कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि हो सकते हैं, जानिये..
*●●●सोना●●●*
● सोना एक गर्म धातु है।
● सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।
*●●●चांदी●●●*
● चांदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है।
● शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है।
*●●●कांसा●●●*
● कांसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है।
● काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है।
● कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3% ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
*●●●तांबा●●●*
● तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है।
● तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए।
*●●●पीतल●●●*
● पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती।
● पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7% पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
*●●●लोहा●●●*
● लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ाता है।
● लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला व पीलिया रोग को खत्म करता है।
● लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए,बुद्धि कम होती है । ● लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।
*●●●स्टील●●●*
● इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।
*●●●एलुमिनियम●●●*
● एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है।
● इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है।
● इससे हड्डियां कमजोर होती है।
● मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है।
● उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है।
● एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से 87% पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
*■◆● मिट्टी ●◆■*
● मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे।
● इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं।
● आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए।
● दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन।
मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100% पोषक तत्व मिलते हैं।
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कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि हो सकते हैं, जानिये..
*●●●सोना●●●*
● सोना एक गर्म धातु है।
● सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।
*●●●चांदी●●●*
● चांदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है।
● शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है।
*●●●कांसा●●●*
● कांसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है।
● काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है।
● कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3% ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
*●●●तांबा●●●*
● तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है।
● तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए।
*●●●पीतल●●●*
● पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती।
● पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7% पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
*●●●लोहा●●●*
● लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ाता है।
● लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला व पीलिया रोग को खत्म करता है।
● लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए,बुद्धि कम होती है । ● लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।
*●●●स्टील●●●*
● इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।
*●●●एलुमिनियम●●●*
● एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है।
● इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है।
● इससे हड्डियां कमजोर होती है।
● मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है।
● उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है।
● एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से 87% पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।
*■◆● मिट्टी ●◆■*
● मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे।
● इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं।
● आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए।
● दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन।
मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100% पोषक तत्व मिलते हैं।
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