ब्रह्मचर्य ⚜⚜⚜⚜⚜
ब्रह्मचर्य शब्द का अर्थ क्या होता है ?
ब्रह्म +चर्य = ब्रह्म मे आचरण करना
ब्रह्मचर्य शब्द का स्थूल अर्थ होता है वीर्य की रक्षा करना
लेकिन यह शब्द बहुत व्यापक है इतने सीमित अर्थ मे इसकी व्याख्या नहीं कि जा सकती
ब्रह्मचर्य का अर्थ काम वासना का दमन नहीं होता है बल्कि उस ऊर्जा को ईश्वर परमात्मा की भक्ति में रूपांतरण करना होता है
सभी को अच्छे से समझ लेना चाहिए
की ऊर्जा का कभी दमन नहीं किया जा सकता है वीर्य को कुछ सही कार्य मे रूपांतरण किया जा सकता है
जब हम किसी कार्य को अपना लक्ष्य बनाते है तब यह ऊर्जा उधर रूपांतरित होती है
दमन करना विकृति लाता है
ओर उसका क्षय ( ऊर्जा का नाश) व्यर्थ ही जब इस ऊर्जा को निकालते है तो यह कामवासना हमे नरक की ओर धकेलती हे
इसलिए दोनों ही गलत हे
अत्येव हमे इसका रूपांतरण करना होता है
यह ऊर्जा भक्त ज्ञानी गृहस्थी वैज्ञानिक , विद्यार्थी सभी को उनके कार्य मे सफलता दिलाती है
योगी अष्टांग योग के द्वारा इस ऊर्जा को रूपांतरित करते है ओर इससे उन्हे साधना मे लाभ मिलता है ओर वह समाधि तक पहुंचता है ।
स्वप्नदोष इसी कारण होता है जब हमारी ऊर्जा रोकते हे ओर उसका उपयोग नहीं करते
वीर्य साधन हे साध्य नहीं है
साध्य तो ईश्वर ही हे
इसलिए हम ईश्वर प्रेम मे अपनी ऊर्जा को लगाना चाहिए केवल रोकने भर से काम नहीं चलेगा ।
#meditation
#bramhachryamotivation
#Celibacy
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ब्रह्मचर्य शब्द का अर्थ क्या होता है ?
ब्रह्म +चर्य = ब्रह्म मे आचरण करना
ब्रह्मचर्य शब्द का स्थूल अर्थ होता है वीर्य की रक्षा करना
लेकिन यह शब्द बहुत व्यापक है इतने सीमित अर्थ मे इसकी व्याख्या नहीं कि जा सकती
ब्रह्मचर्य का अर्थ काम वासना का दमन नहीं होता है बल्कि उस ऊर्जा को ईश्वर परमात्मा की भक्ति में रूपांतरण करना होता है
सभी को अच्छे से समझ लेना चाहिए
की ऊर्जा का कभी दमन नहीं किया जा सकता है वीर्य को कुछ सही कार्य मे रूपांतरण किया जा सकता है
जब हम किसी कार्य को अपना लक्ष्य बनाते है तब यह ऊर्जा उधर रूपांतरित होती है
दमन करना विकृति लाता है
ओर उसका क्षय ( ऊर्जा का नाश) व्यर्थ ही जब इस ऊर्जा को निकालते है तो यह कामवासना हमे नरक की ओर धकेलती हे
इसलिए दोनों ही गलत हे
अत्येव हमे इसका रूपांतरण करना होता है
यह ऊर्जा भक्त ज्ञानी गृहस्थी वैज्ञानिक , विद्यार्थी सभी को उनके कार्य मे सफलता दिलाती है
योगी अष्टांग योग के द्वारा इस ऊर्जा को रूपांतरित करते है ओर इससे उन्हे साधना मे लाभ मिलता है ओर वह समाधि तक पहुंचता है ।
स्वप्नदोष इसी कारण होता है जब हमारी ऊर्जा रोकते हे ओर उसका उपयोग नहीं करते
वीर्य साधन हे साध्य नहीं है
साध्य तो ईश्वर ही हे
इसलिए हम ईश्वर प्रेम मे अपनी ऊर्जा को लगाना चाहिए केवल रोकने भर से काम नहीं चलेगा ।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम की मात्रा
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ नियमित व्यायाम
♦ व्यायाम की इच्छाशक्ति
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
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🛑🛑🛑
आप ऊर्जा के अभ्यस्त नहीं हैं, जैसे ही ब्रह्मचर्य / वीर्यरक्षा / नोफेप पर दिन बढ़ते हैं, आपकी ऊर्जा बढ़ने लगती है। यह ऊर्जा आपके लिए अपनी वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए बहुत शक्तिशाली है। आप इसमें सहज नहीं हैं। आप इसे प्रबंधित नहीं कर सकते, इसलिए आपको इस ऊर्जा को बाहर निकालने का मन करता है।
यह वह जगह है जहां यौन परिवर्तन आता है, आपको इस ऊर्जा को नियंत्रित करना सीखना चाहिए, और इसे अपने लाभ के लिए निर्देशित करना चाहिए। मेरा सुझाव है कि आपको जब भी कोई वासना सताए तो आप ध्यान करें, अपनी ऊर्जा पर ध्यान दें। स्वम् को अपने विचारों से अलग कर के मस्तिष्क में चल रहे विचारों को देखें, बिना उनपर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया या जजमेंट दिए कि ये बुरी विचार है या अच्छी । आप जानते हैं कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ
वीर्यरक्षा से आपकी आवाज मधुर हो जाती है, आपकी आंखें देवदूत हो जाती हैं, आपका दिल प्यार और करुणा से भर जाता है, भोजन अच्छा लगता है, आप बात करते हैं और आत्मविश्वास और उद्देश्य से चलते हैं, भले ही आप चुप रहें, आपकी चुप्पी का अर्थ होना शुरू हो जाएगा। आपके चारों ओर एक सकारात्मक आभा होगी, लोग ऊर्जा को महसूस करेंगे, आपकी ओर आकर्षित होंगे।
ये सभी चीजें हैं जो मैंने व्यक्तिगत रूप से अनुभव की हैं, मैं आमतौर पर एक बहुत ही तार्किक व्यक्ति हूं और "जादुई" चीजों में विश्वास नहीं करता, लेकिन मेरा मानना है कि हम अपने शरीर के बारे में बहुत कम जानते हैं और बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है।
आप केवल इस बात से अवगत नहीं हैं कि आप कितनी ऊर्जा में सक्षम हैं, आप इसकी कल्पना नहीं कर सकते हैं, आप इसे केवल स्वयं अनुभव कर सकते हैं। आपके पूर्वजो ने बाघों और शेरों से लड़ाई लड़ी है, आप अरबों वर्षों के सफल विकास का परिणाम हैं, यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। जब आप वीर्यनाश करते हैं, तो असल में आपके दिमाग को लगता है कि आपने अपना जीवन का उद्देश्य पूरा कर लिया है इसलिए भोगी आदमी को कुछ करने का मन नहीं करता । अगर हमारे मन को सेक्स और अच्छा भोजन मिलते रहे तो वो क्यों कुछ करना चाहेगा ।इसलिए जब आप वीर्यनाश रोकेंगे, तो आप देखेंगे कि मानव शरीर की असली सुंदरता क्या है और यह क्या करने में सक्षम है।
आप ऊर्जा के अभ्यस्त नहीं हैं, जैसे ही ब्रह्मचर्य / वीर्यरक्षा / नोफेप पर दिन बढ़ते हैं, आपकी ऊर्जा बढ़ने लगती है। यह ऊर्जा आपके लिए अपनी वर्तमान स्थिति को संभालने के लिए बहुत शक्तिशाली है। आप इसमें सहज नहीं हैं। आप इसे प्रबंधित नहीं कर सकते, इसलिए आपको इस ऊर्जा को बाहर निकालने का मन करता है।
यह वह जगह है जहां यौन परिवर्तन आता है, आपको इस ऊर्जा को नियंत्रित करना सीखना चाहिए, और इसे अपने लाभ के लिए निर्देशित करना चाहिए। मेरा सुझाव है कि आपको जब भी कोई वासना सताए तो आप ध्यान करें, अपनी ऊर्जा पर ध्यान दें। स्वम् को अपने विचारों से अलग कर के मस्तिष्क में चल रहे विचारों को देखें, बिना उनपर किसी प्रकार की प्रतिक्रिया या जजमेंट दिए कि ये बुरी विचार है या अच्छी । आप जानते हैं कि मैं किस बारे में बात कर रहा हूँ
वीर्यरक्षा से आपकी आवाज मधुर हो जाती है, आपकी आंखें देवदूत हो जाती हैं, आपका दिल प्यार और करुणा से भर जाता है, भोजन अच्छा लगता है, आप बात करते हैं और आत्मविश्वास और उद्देश्य से चलते हैं, भले ही आप चुप रहें, आपकी चुप्पी का अर्थ होना शुरू हो जाएगा। आपके चारों ओर एक सकारात्मक आभा होगी, लोग ऊर्जा को महसूस करेंगे, आपकी ओर आकर्षित होंगे।
ये सभी चीजें हैं जो मैंने व्यक्तिगत रूप से अनुभव की हैं, मैं आमतौर पर एक बहुत ही तार्किक व्यक्ति हूं और "जादुई" चीजों में विश्वास नहीं करता, लेकिन मेरा मानना है कि हम अपने शरीर के बारे में बहुत कम जानते हैं और बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है।
आप केवल इस बात से अवगत नहीं हैं कि आप कितनी ऊर्जा में सक्षम हैं, आप इसकी कल्पना नहीं कर सकते हैं, आप इसे केवल स्वयं अनुभव कर सकते हैं। आपके पूर्वजो ने बाघों और शेरों से लड़ाई लड़ी है, आप अरबों वर्षों के सफल विकास का परिणाम हैं, यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। जब आप वीर्यनाश करते हैं, तो असल में आपके दिमाग को लगता है कि आपने अपना जीवन का उद्देश्य पूरा कर लिया है इसलिए भोगी आदमी को कुछ करने का मन नहीं करता । अगर हमारे मन को सेक्स और अच्छा भोजन मिलते रहे तो वो क्यों कुछ करना चाहेगा ।इसलिए जब आप वीर्यनाश रोकेंगे, तो आप देखेंगे कि मानव शरीर की असली सुंदरता क्या है और यह क्या करने में सक्षम है।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम का समय
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#celibacybookssummary
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( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम का समय
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🔥रोग मन मेंं है़ ✨
-मोह हमें संसार में बांधे रखने का काम करता है ।
-जब प्रेम कुछ लोगों से होता है, हद में होता है, सीमित होता है, तब वह मोह कहलाता है।
-हम चाह कर भी मोह को नहीं छोड़ पाते।
-मोह का मतलब होता है आसक्ति, जो गिने-चुने उन लोगों या चीजों से होती है जिन्हें हम अपना बनाना चाहते हैं, जिनके पास हम ज्यादा-से-ज्यादा समय गुजारना चाहते हैं। मोह वहां होता है जहां हमें सुख मिलने की उम्मीद हो या सुख मिलता हो।
- सांसारिक प्रेम मोह कहलाता है ।
- मोह की वजह से व्यक्ति कभी सुखी, तो कभी दुखी होता रहता है।
-मोह की वजह से बनीं कब्ज के कारण से दाद जैसे कष्टदायी रोग उत्पन्न हो जाते है़ ।
- दाद खुजलाने में पहले खुशी और बाद में दर्द होता है।
-मोह में किसी वस्तु की प्राप्ति में पहले सुख परन्तु प्राप्त न होने पर मन में बहुत दु:ख होता है़ ।
- मोह से ही सारे मानस रोग उत्पन्न होते हैं।
-मोह हमें संसार में बांधे रखने का काम करता है ।
-जब प्रेम कुछ लोगों से होता है, हद में होता है, सीमित होता है, तब वह मोह कहलाता है।
-हम चाह कर भी मोह को नहीं छोड़ पाते।
-मोह का मतलब होता है आसक्ति, जो गिने-चुने उन लोगों या चीजों से होती है जिन्हें हम अपना बनाना चाहते हैं, जिनके पास हम ज्यादा-से-ज्यादा समय गुजारना चाहते हैं। मोह वहां होता है जहां हमें सुख मिलने की उम्मीद हो या सुख मिलता हो।
- सांसारिक प्रेम मोह कहलाता है ।
- मोह की वजह से व्यक्ति कभी सुखी, तो कभी दुखी होता रहता है।
-मोह की वजह से बनीं कब्ज के कारण से दाद जैसे कष्टदायी रोग उत्पन्न हो जाते है़ ।
- दाद खुजलाने में पहले खुशी और बाद में दर्द होता है।
-मोह में किसी वस्तु की प्राप्ति में पहले सुख परन्तु प्राप्त न होने पर मन में बहुत दु:ख होता है़ ।
- मोह से ही सारे मानस रोग उत्पन्न होते हैं।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम करने वाले का भोजन
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