स्वप्नदोष अधिकतर किशोरावस्था में होने वाली बहुत ही आम अवस्था है। ये कोई चिंता का या डरने का या आत्मग्लानि का विषय नहीं है। वैसे तो इसके कई उपचार ईंटरनेट की दुनिया मे मिल जायेंगे। परन्तु सबसे आसान एक उपचार मैं आपको यहाँ बता रहा हूँ। ये उपचार सबसे पहले मैंने स्वयं पर किया और सफल भी रहा। उसके कुछ सालों बाद मेरे एक मित्र को भी ये ही उपचार बताया और वो उसने किया तो उसे भी इस दोष से मुक्ति मिल गयी। अब मैं ये उपचार आप सबको बताता हूँ।
आपको इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना है। बस इसमे सूखे आँवले का चूर्ण और पिसी हुई मिश्री की जरूरत पड़ेगी।
मात्रा :- सूखे आँवले का चूर्ण पाव भर और पिसी हुई मिश्री आधा किलो।
अथवा आप चाहे तो अपनी इच्छानुसार भी ये मिश्रण बना सकते है।
ध्यान देने योग्य बात :- आप जितना आँवले का चूर्ण ले रहे है उससे दुगुनी मात्रा में पिसी हुई मिश्री लेनी है।
आँवले को पानी में भिगोकर निकाल ले और उसे धूप में सुखा दे। सूखने के पश्चात इसे बारीक पीस ले या चाहे तो बाजार से भी सूखे आँवले को घर लाकर पीस सकते है या चाहे तो आप सूखे आँवले का चूर्ण भी बाज़ार से भी ला सकते है। और उसके बाद आप मिश्री भी पीस ले और अब इन दोनों को मिला ले। ध्यान रहे ये दोनों ही बारीक पिसे हुए हो। अब इस चूर्ण को आप प्रतिदिन रात में पानी के साथ 1 चम्मच ले।
ये उपचार केवल स्वप्नदोष ही समाप्त नहीं करता। इसके अलावा ये वीर्य वर्धक, वीर्य गाढा करने वाला और पाचन तंत्र सही करके कब्ज जैसी बीमारियों को भी पूर्ण रूप से सही करता है।
अगर आप किशोर या युवा है और आपको डर है कि घर मे क्या बोलेंगे की क्यों ये चूर्ण बना रहे हो तो आप ये कह सकते है कि आप पाचन तंत्र ठीक करने के लिए ये बना रहे है। इस चूर्ण को किसी भी आयु का कोई भी मनुष्य ले सकता है फिर चाहे वो स्वस्थ हो या अस्वस्थ। इसके कोई नुकसान नहीं है। परन्तु इसे ज्यादा समय तक भी नहीं लेना क्योंकि हो सकता है ये आपके शरीर मे बहुत गर्मी करें और आपको फोड़े फुंसी हो जाये। इसलिए सलाह ये है कि जैसे ही आपकी समस्या समाप्त हो इसे बंद कर दे या अधिकतम 3 महीने से ज्यादा एक बार मे उपयोग ना करें।
वैसे तो आपको 1 सप्ताह के अंदर ही समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। परन्तु फिर भी ना मिले तो मैंने ऊपर समय बता ही दिया है। 3 महीने बाद आप चाहे तो इसे दोबारा शुरू कर सकते है। परंतु आपको इसे वापस शुरू करने के लिए 1 महीना रुकना होगा और फिर उसके अगले महीने से इसे शुरू किया जा सकता है।
वैसे तो मैंने इसके कोई साइड इफेक्ट्स ना तो देखे है और ना ही महसूस किए है। परंतु अति नहीं करनी है। क्योंकि अति सर्वत्र वर्जयेत।
Source : Quora
आपको इसमें ज्यादा कुछ नहीं करना है। बस इसमे सूखे आँवले का चूर्ण और पिसी हुई मिश्री की जरूरत पड़ेगी।
मात्रा :- सूखे आँवले का चूर्ण पाव भर और पिसी हुई मिश्री आधा किलो।
अथवा आप चाहे तो अपनी इच्छानुसार भी ये मिश्रण बना सकते है।
ध्यान देने योग्य बात :- आप जितना आँवले का चूर्ण ले रहे है उससे दुगुनी मात्रा में पिसी हुई मिश्री लेनी है।
आँवले को पानी में भिगोकर निकाल ले और उसे धूप में सुखा दे। सूखने के पश्चात इसे बारीक पीस ले या चाहे तो बाजार से भी सूखे आँवले को घर लाकर पीस सकते है या चाहे तो आप सूखे आँवले का चूर्ण भी बाज़ार से भी ला सकते है। और उसके बाद आप मिश्री भी पीस ले और अब इन दोनों को मिला ले। ध्यान रहे ये दोनों ही बारीक पिसे हुए हो। अब इस चूर्ण को आप प्रतिदिन रात में पानी के साथ 1 चम्मच ले।
ये उपचार केवल स्वप्नदोष ही समाप्त नहीं करता। इसके अलावा ये वीर्य वर्धक, वीर्य गाढा करने वाला और पाचन तंत्र सही करके कब्ज जैसी बीमारियों को भी पूर्ण रूप से सही करता है।
अगर आप किशोर या युवा है और आपको डर है कि घर मे क्या बोलेंगे की क्यों ये चूर्ण बना रहे हो तो आप ये कह सकते है कि आप पाचन तंत्र ठीक करने के लिए ये बना रहे है। इस चूर्ण को किसी भी आयु का कोई भी मनुष्य ले सकता है फिर चाहे वो स्वस्थ हो या अस्वस्थ। इसके कोई नुकसान नहीं है। परन्तु इसे ज्यादा समय तक भी नहीं लेना क्योंकि हो सकता है ये आपके शरीर मे बहुत गर्मी करें और आपको फोड़े फुंसी हो जाये। इसलिए सलाह ये है कि जैसे ही आपकी समस्या समाप्त हो इसे बंद कर दे या अधिकतम 3 महीने से ज्यादा एक बार मे उपयोग ना करें।
वैसे तो आपको 1 सप्ताह के अंदर ही समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। परन्तु फिर भी ना मिले तो मैंने ऊपर समय बता ही दिया है। 3 महीने बाद आप चाहे तो इसे दोबारा शुरू कर सकते है। परंतु आपको इसे वापस शुरू करने के लिए 1 महीना रुकना होगा और फिर उसके अगले महीने से इसे शुरू किया जा सकता है।
वैसे तो मैंने इसके कोई साइड इफेक्ट्स ना तो देखे है और ना ही महसूस किए है। परंतु अति नहीं करनी है। क्योंकि अति सर्वत्र वर्जयेत।
Source : Quora
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ किन-किन को व्यायाम न करना चाहिए ?
♦ व्यायाम समय के वस्त्र
♦ व्यायाम का स्थान
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ किन-किन को व्यायाम न करना चाहिए ?
♦ व्यायाम समय के वस्त्र
♦ व्यायाम का स्थान
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12 वी सदी में एक विचारक की कही गई एक बड़ी हकीकत
"युवा पीढ़ी को अश्लीलता व गंदी फिल्मों में डूबो देना काफी है एक देश के विनाश के लिए , बिना हथियार तबाह हो जाएगी कई पीढ़ियां" 🤯
आज युवा पीढ़ी को कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है माता पिता ऐसे विषयों पर संकोच करते है अपने बच्चो से बात करने में।
युवा गलत संग में पड़कर गलत राह पर चल पड़ता है जब पता लगता है तो काफी देर हो चुकी होती है ।
अब सबको सही राह पर लाना है भारत को विश्व गुरु बनाना है।
संयम व सात्विकता की एक नई सरिता बहानी है।
खुद को बदलने का आज संकल्प लेवे। ना ऐसी चीजे पढेगे , ना देखेगे ना सुनेगे और ना ही फॉरवर्ड करेगे जिसमे गंदगी हो ,Lust हो (Low vibration ) हो ,
जिसको पढ़कर सुनकर देखकर हमारे मन में गलत विचार आते है उसको छोड़ देगे। खुद के मालिक बनेगे , इन कर्म इन्द्रियों के गुलाम नहीं।
आप में शक्ति है ,पहचानो अपनी शक्ति को
तभी सुंदर सुखमय समाज का निर्माण हो पाएगा ।
उम्मीद है आप समाज को बदलने में अपना सहयोग जरूर देगे और सभी को जागरूक करेगे
"युवा पीढ़ी को अश्लीलता व गंदी फिल्मों में डूबो देना काफी है एक देश के विनाश के लिए , बिना हथियार तबाह हो जाएगी कई पीढ़ियां" 🤯
आज युवा पीढ़ी को कोई सही रास्ता दिखाने वाला नहीं है माता पिता ऐसे विषयों पर संकोच करते है अपने बच्चो से बात करने में।
युवा गलत संग में पड़कर गलत राह पर चल पड़ता है जब पता लगता है तो काफी देर हो चुकी होती है ।
अब सबको सही राह पर लाना है भारत को विश्व गुरु बनाना है।
संयम व सात्विकता की एक नई सरिता बहानी है।
खुद को बदलने का आज संकल्प लेवे। ना ऐसी चीजे पढेगे , ना देखेगे ना सुनेगे और ना ही फॉरवर्ड करेगे जिसमे गंदगी हो ,Lust हो (Low vibration ) हो ,
जिसको पढ़कर सुनकर देखकर हमारे मन में गलत विचार आते है उसको छोड़ देगे। खुद के मालिक बनेगे , इन कर्म इन्द्रियों के गुलाम नहीं।
आप में शक्ति है ,पहचानो अपनी शक्ति को
तभी सुंदर सुखमय समाज का निर्माण हो पाएगा ।
उम्मीद है आप समाज को बदलने में अपना सहयोग जरूर देगे और सभी को जागरूक करेगे
आज छोटा सा मजा 🤯🤯, बाद में बहुत बड़ी सजा 😱😱
संभल जाओ नही तो सिर्फ पश्चाताप ही करना पड़ेगा ।।
संभल जाओ नही तो सिर्फ पश्चाताप ही करना पड़ेगा ।।
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पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम के प्रकार वा भेद
♦ कौनसा व्यायाम करे ?
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#celibacybookssummary
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( चतुर्थ भाग)
व्यायाम संदेश
♦ व्यायाम के प्रकार वा भेद
♦ कौनसा व्यायाम करे ?
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🙏
*"मन को एकाग्र करके यदि आप अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें। और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करें। तो आपको बहुत कुछ मिल जाएगा।"*
किसी को धन चाहिए, किसी को पुत्र चाहिए, किसी को नौकरी चाहिए, किसी को कुछ चाहिए। *"इन सब चीजों की प्राप्ति के लिए लोग दूर-दूर प्रचलित तीर्थ स्थानों की, मंदिरों की यात्राएं कर रहे हैं। इतनी दूर भटकने की कोई आवश्यकता नहीं है।"* क्योंकि जो इन सब वस्तुओं का देने वाला है, वह ईश्वर है। वह आपके अंदर ही बैठा है। *"जब वह आपके इतना निकट है, तो फिर दूर दूर जाने की क्या आवश्यकता है?"*
दूसरी बात - *"लोग इन सब चीजों को मुफ्त में प्राप्त करना चाहते हैं, जबकि ये सब वस्तुएं मुफ्त में मिलती नहीं हैं।"* इनकी प्राप्ति के लिए बहुत पुरुषार्थ करना पड़ता है। वह पुरुषार्थ करना भी आपके आधीन है।
*"अब यदि आप अपने अंदर विद्यमान सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करेंगे, और व्यवहार में पूरा पुरुषार्थ करेंगे, तो उसके अनुसार आप जिस जिस वस्तु धन बल विद्या पुत्र नौकरी आदि प्राप्त करने के अधिकारी बन पाएंगे, जितनी वस्तुएं प्राप्त करने के पात्र बन पाएंगे, वे सब वस्तुएं उतनी मात्रा में आपको ईश्वर दे देगा। आप के पुरुषार्थ को देखकर आप के माता-पिता और समाज के लोग भी आपका सहयोग करेंगे।"*
*"परंतु ये सब वस्तुएं उतनी मात्रा में नहीं मिलेंगी, जितनी मात्रा में आप चाहते हैं। ये सब वस्तुएं आपको उतने अनुपात में मिलेंगी, जितना आप पुरुषार्थ करेंगे।"* इसलिए आप ईश्वर पर यह आरोप नहीं लगा सकते, कि *"मैंने इतना पुरुषार्थ किया, फिर भी मुझे ईश्वर ने बहुत कम दिया। या देकर भी वापस छीन लिया। अब यदि आपको वे वस्तुएं नहीं मिल पाती अथवा कम मात्रा में मिलती हैं, तो इसका दोषी ईश्वर नहीं है।"* ईश्वर पर कभी भूल कर भी ऐसा दोष न लगाएं। क्योंकि वह ऐसा काम कभी नहीं करता। ऐसे कामों में मनुष्य का ही हाथ देखा जाता है। या कभी-कभी प्राकृतिक परिस्थितियां भी ऐसी बन जाती हैं, कि जैसा आपने पुरुषार्थ किया था, उस के अनुकूल फल वर्तमान में नहीं मिल पाया। *"तो ऐसी स्थिति में यदि किसी मनुष्य ने अन्याय करके आप का अधिकार संपत्ति आदि छीन ली हो, तो उसका दोषी मनुष्य है। और यदि कोई प्राकृतिक दुर्घटना से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से आपको कोई संपत्ति आदि की हानियां हो गई हों, तो उसका दोषी भी ईश्वर नहीं है।" "ईश्वर ने कोई योजनाबद्ध आप की हानि नहीं की है। यह आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से जो दुख मिलते हैं, यह कोई आपका किसी कर्म का फल नहीं है। यह तो प्राकृतिक दुर्घटना मात्र है।"* संसार में प्राकृतिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं, आगे भी होती रहेंगी। *"जैसे सड़क पर मानवकृत दुर्घटनाओं से बचना आपकी जिम्मेदारी है। इसी प्रकार से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि प्राकृतिक घटनाओं से बचना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। इसमें ईश्वर दोषी नहीं है। इसलिए ईश्वर पर कभी भी ऐसा दोष न लगाएं।"* बल्कि उसका सदा हर परिस्थिति में धन्यवाद ही करें, कि *"हे ईश्वर! हम जितना भी संसार में सुख प्राप्त कर पा रहे हैं, यह सब आपकी कृपा का और न्याय दया आदि गुणों का ही फल है। आपकी कृपा ऐसे ही सदा बनी रहे। आप हमें इतनी विद्या बुद्धि बल शक्ति सामर्थ्य दीजिए, जिससे कि हम संसार की दुर्घटनाओं से बचते हुए अपने जीवन को सुरक्षित एवं सुखमय बना सकें।"*
हां, इन दुर्घटनाओं में जो आप की हानि हो जाती है। *"यदि आप पूरी सावधानी से जीवन जिएंगे, दुर्घटनाओं से बचने का पूरा प्रयत्न करेंगे, तो मानवकृत दुर्घटनाओं से अथवा प्राकृतिक दुर्घटनाओं से, जो भी आप की हानि होती है, समय आने पर ईश्वर उसकी पूर्ति आपको अवश्य कर देगा।" "शर्तें लागू।"* शर्त यह है कि *"आपको अपनी संपत्ति जीवन आदि की सुरक्षा का पूरा प्रयत्न स्वयं करना पड़ेगा. उसके बाद भी यदि कोई हानि होती है, तो फिर ईश्वर आपकी क्षतिपूर्ति करेगा। यदि आप अपनी संपत्तियों की सुरक्षा ठीक प्रकार से नहीं करते, आलस्य प्रमाद करते हैं, तो आप की हानि की पूर्ति ईश्वर नहीं करेगा।"*👍
आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं,
उसका मूल स्रोत ईश्वर है ।
और वह आपके अन्दर ही बैठा है ।
फिर कही दूर जाने की क्या आवश्यकता है ?आंख बंद करके अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें ।और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करे ।आपको यह सब मिल जाएगा ,जिसके आप पात्र हैं। 👍
*"मन को एकाग्र करके यदि आप अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें। और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करें। तो आपको बहुत कुछ मिल जाएगा।"*
किसी को धन चाहिए, किसी को पुत्र चाहिए, किसी को नौकरी चाहिए, किसी को कुछ चाहिए। *"इन सब चीजों की प्राप्ति के लिए लोग दूर-दूर प्रचलित तीर्थ स्थानों की, मंदिरों की यात्राएं कर रहे हैं। इतनी दूर भटकने की कोई आवश्यकता नहीं है।"* क्योंकि जो इन सब वस्तुओं का देने वाला है, वह ईश्वर है। वह आपके अंदर ही बैठा है। *"जब वह आपके इतना निकट है, तो फिर दूर दूर जाने की क्या आवश्यकता है?"*
दूसरी बात - *"लोग इन सब चीजों को मुफ्त में प्राप्त करना चाहते हैं, जबकि ये सब वस्तुएं मुफ्त में मिलती नहीं हैं।"* इनकी प्राप्ति के लिए बहुत पुरुषार्थ करना पड़ता है। वह पुरुषार्थ करना भी आपके आधीन है।
*"अब यदि आप अपने अंदर विद्यमान सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायकारी ईश्वर की स्तुति प्रार्थना उपासना करेंगे, और व्यवहार में पूरा पुरुषार्थ करेंगे, तो उसके अनुसार आप जिस जिस वस्तु धन बल विद्या पुत्र नौकरी आदि प्राप्त करने के अधिकारी बन पाएंगे, जितनी वस्तुएं प्राप्त करने के पात्र बन पाएंगे, वे सब वस्तुएं उतनी मात्रा में आपको ईश्वर दे देगा। आप के पुरुषार्थ को देखकर आप के माता-पिता और समाज के लोग भी आपका सहयोग करेंगे।"*
*"परंतु ये सब वस्तुएं उतनी मात्रा में नहीं मिलेंगी, जितनी मात्रा में आप चाहते हैं। ये सब वस्तुएं आपको उतने अनुपात में मिलेंगी, जितना आप पुरुषार्थ करेंगे।"* इसलिए आप ईश्वर पर यह आरोप नहीं लगा सकते, कि *"मैंने इतना पुरुषार्थ किया, फिर भी मुझे ईश्वर ने बहुत कम दिया। या देकर भी वापस छीन लिया। अब यदि आपको वे वस्तुएं नहीं मिल पाती अथवा कम मात्रा में मिलती हैं, तो इसका दोषी ईश्वर नहीं है।"* ईश्वर पर कभी भूल कर भी ऐसा दोष न लगाएं। क्योंकि वह ऐसा काम कभी नहीं करता। ऐसे कामों में मनुष्य का ही हाथ देखा जाता है। या कभी-कभी प्राकृतिक परिस्थितियां भी ऐसी बन जाती हैं, कि जैसा आपने पुरुषार्थ किया था, उस के अनुकूल फल वर्तमान में नहीं मिल पाया। *"तो ऐसी स्थिति में यदि किसी मनुष्य ने अन्याय करके आप का अधिकार संपत्ति आदि छीन ली हो, तो उसका दोषी मनुष्य है। और यदि कोई प्राकृतिक दुर्घटना से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से आपको कोई संपत्ति आदि की हानियां हो गई हों, तो उसका दोषी भी ईश्वर नहीं है।" "ईश्वर ने कोई योजनाबद्ध आप की हानि नहीं की है। यह आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि से जो दुख मिलते हैं, यह कोई आपका किसी कर्म का फल नहीं है। यह तो प्राकृतिक दुर्घटना मात्र है।"* संसार में प्राकृतिक दुर्घटनाएं होती रहती हैं, आगे भी होती रहेंगी। *"जैसे सड़क पर मानवकृत दुर्घटनाओं से बचना आपकी जिम्मेदारी है। इसी प्रकार से आंधी तूफान बाढ़ भूकंप आदि प्राकृतिक घटनाओं से बचना भी आपकी ही जिम्मेदारी है। इसमें ईश्वर दोषी नहीं है। इसलिए ईश्वर पर कभी भी ऐसा दोष न लगाएं।"* बल्कि उसका सदा हर परिस्थिति में धन्यवाद ही करें, कि *"हे ईश्वर! हम जितना भी संसार में सुख प्राप्त कर पा रहे हैं, यह सब आपकी कृपा का और न्याय दया आदि गुणों का ही फल है। आपकी कृपा ऐसे ही सदा बनी रहे। आप हमें इतनी विद्या बुद्धि बल शक्ति सामर्थ्य दीजिए, जिससे कि हम संसार की दुर्घटनाओं से बचते हुए अपने जीवन को सुरक्षित एवं सुखमय बना सकें।"*
हां, इन दुर्घटनाओं में जो आप की हानि हो जाती है। *"यदि आप पूरी सावधानी से जीवन जिएंगे, दुर्घटनाओं से बचने का पूरा प्रयत्न करेंगे, तो मानवकृत दुर्घटनाओं से अथवा प्राकृतिक दुर्घटनाओं से, जो भी आप की हानि होती है, समय आने पर ईश्वर उसकी पूर्ति आपको अवश्य कर देगा।" "शर्तें लागू।"* शर्त यह है कि *"आपको अपनी संपत्ति जीवन आदि की सुरक्षा का पूरा प्रयत्न स्वयं करना पड़ेगा. उसके बाद भी यदि कोई हानि होती है, तो फिर ईश्वर आपकी क्षतिपूर्ति करेगा। यदि आप अपनी संपत्तियों की सुरक्षा ठीक प्रकार से नहीं करते, आलस्य प्रमाद करते हैं, तो आप की हानि की पूर्ति ईश्वर नहीं करेगा।"*👍
आप जो भी प्राप्त करना चाहते हैं,
उसका मूल स्रोत ईश्वर है ।
और वह आपके अन्दर ही बैठा है ।
फिर कही दूर जाने की क्या आवश्यकता है ?आंख बंद करके अपने अंदर ही ईश्वर से प्रार्थना करें ।और व्यवहार में उस प्रार्थना के अनुकूल पूरा पुरुषार्थ करे ।आपको यह सब मिल जाएगा ,जिसके आप पात्र हैं। 👍