ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
1.87K subscribers
1.47K photos
62 videos
13 files
271 links
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
Download Telegram
भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्तास्तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः। कालो न यातो वयमेव याता: तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णाः।। (वैराग्यशतक- १२)
भोग को हम नहीं भोगते, भोग ही हमें भोग लेते हैं। (जैसे- मोटापा, मधुमेह, कोलेस्ट्रोल व उच्चरक्तचाप आदि होने पर भोजन को हम नहीं खाते अपितु असंयत भोजन हमें खाने लगता है।) तप नहीं तपा जाता, हम स्वयं तप जाते हैं। काल का अन्त नहीं होता, हम ही काल में समा जाते हैं। तृष्णाएँ जीर्ण नहीं होती, हम स्वयं जीर्ण हो जाते हैं। भोग भोगने से तृप्ति कदापि नहीं होती, अपितु इच्छाएँ बलवती होती चली जाती। हैं।

महर्षि मनु कहते हैंन जातु काम: कामानामुपभोगेन शाम्यति। हविषा कृष्णवर्मेव भूय एवाभिवर्द्धते।।
(मनुस्मृति- २.९४)
काम, काम के उपभोग से शान्त नहीं होता, अपितु अग्नि में जैसे घृत डालने से अग्नि तीव्र होती है, वैसे ही भोगों को भोगने से वासनाएँ और अधिक बढ़ जाती हैं। महर्षि कपिल भी सांख्यदर्शन में कहते हैं।
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( षष्ठ भाग)
प्राणायाम
🔴 सूर्यभेद प्राणायाम
🔴 सुखद प्राणायाम
🔴 भ्रामरी प्राणायाम
🔴 समवृति प्राणायाम
🔴 अग्नि प्रदिग्प्त प्राणायाम
🔴 क्षुधातृषानिवारक प्राणायाम
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
आहारनिद्राभयमैथुनं च सामान्यमेतत्पशुभिर्नराणाम् |

भोजन करना, भयभीत होना, मैथुन करना और सो जाना यह तो पशु भी करते हैं | पशु शरीर में रहकर हम यह सब करते आए हैं | अब यह मनुष्य शरीर मिला है । अब भी यदि बुद्धि और विवेकपूर्ण अपने जीवन को नहीं चलाया और क्षणिक सुखों के पीछे ही दौड़ते रहे तो कैसे अपने मूल लक्ष्य पर पहुँच पायेंगे ?
❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇

#hastag
#celibacybookssummary
#Chanakyaniti
#bramhachryamotivation
#meditation
#memesonnofap
#Celibacy
#celibacyquestionanswer


Use above☝ hastag to find out post related.
आप को जिस विषय पर पोस्ट पढ़नी वो # use करे.🙏

हमारे चैनल की ये विशेषता है की हम कोई भी पोस्ट दुबारा ( REPEAT) नहीं करते ,ताकि आपको हर पोस्ट मै कुछ नया और अलग जानकारी प्राप्त हो 🙏

आप चाहिए तो इस चैनल के सबसे पहले पोस्ट की लिंक से पहले पोस्ट से आज तक की सारी पोस्ट पढ़ लेवे ।

first post link :- https://t.me/bramachrya01/4


❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇🔹❇
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( षष्ठ भाग)
प्राणायाम
🔴 प्राणायाम के बल पर चमत्कारिक प्रदर्शन
❇ छाती पर भारी पत्थर तोड़ने की विधि
❇ लोहे की जंजीर तोड़ने की प्रणाली
❇ मोटर रोकने का सरल साधन
❇ ग्रीवा से मोटे मोटे सारियों को मोड़ना
❇ नाड़ी अवरोधक प्राणायाम
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
वीर्य शरीर की बहुत मूल्यवान् धातु है । भोजन से वीर्य बनने की प्रक्रिया बड़ी लम्बी है। श्री सुश्रुताचार्य ने लिखा है :

रसाद्रक्तं ततो मांसं मांसान्मेदः प्रजायते | मेदस्यास्थिः ततो मज्जा मज्जायाः शुक्रसंभवः ||

जो भोजन पचता है, उसका पहले रस बनता है | पाँच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है | पाँच दिन बाद रक्त में से मांस, उसमें से 5-5 दिन के अंतर से मेद, मेद से हड्डी, हड्डी से मज्जा और मज्जा से अंत में वीर्य बनता है | स्त्री में जो यह धातु बनती है उसे 'रज' कहते हैं |

वीर्य किस प्रकार छः-सात मंजिलों से गुजरकर अपना यह अंतिम रूप धारण करता है, यह सुश्रुत के इस कथन से ज्ञात हो जाता है | कहते हैं कि इस प्रकार वीर्य बनने में करीब 30 दिन व 4 घण्टे लग जाते हैं |
👍3
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
पुस्तक :- ब्रम्हचर्य के साधन
( षष्ठ भाग)
प्राणायाम
🔴 प्राणायाम से रोग निवारण
❇ सर्वव्याधीनिवारक प्राणायाम
❇ बुद्धिवर्धक प्राणायाम
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
#celibacybookssummary
Media is too big
VIEW IN TELEGRAM
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌺छत्रपती शिवाजी महाराज जी को उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन 🌺
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
❤1👍1
औरंगजेब जैसे निर्दयी के राज्य काल मे उत्पन्न होकर आर्य जाति के गौरव को जीवित कर देने वाले शिवाजी महाराज को शत् शत् नमन ॥

गौ - ब्राह्मणों के लिए देवता स्वरूप ; शत्रु की स्त्रीयों से भी शुद्ध ह्रदय से पेश आने वाले ; गरीबों और निर्बल के रक्षक ; प्रजा को परिवार मानकर निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले वीर छत्रपति महाराज के जीवन से हम शिक्षा लेकर आर्य जाति की रक्षार्थ सदैव प्रयत्न करें॥
👍1
वीर्य इस शरीररूपी नगर का एक तरह से राजा ही है | यह वीर्यरूपी राजा यदि पुष्ट है, बलवान् है तो रोगरूपी शत्रु कभी शरीररूपी नगर पर आक्रमण नही करते | जिसका वीर्यरूपी राजा निर्बल है, उस शरीररूपी नगर को कई रोगरूपी शत्रु आकर घेर लेते हैं | इसीलिए कहा गया है :

मरणं बिन्दोपातेन जीवनं बिन्दुधारणात् |

'बिन्दुनाश (वीर्यनाश) ही मृत्यु है और बिन्दूरक्षण ही जीवन है ।'

जैन ग्रंथों में अब्रह्मचर्य को पाप बताया गया है :

अबंभचरियं घोरं पमायं दुरहिठ्ठियम् |

'अब्रह्मचर्य घोर प्रमादरूप पाप है |' (दश वैकालिक सूत्र: 6.17)