ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
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ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
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आज कल के लोग ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल कुवारा रहने को समझते है ?

ब्रह्म+चर्य , यानी परम का मार्ग जिसपर पवित्रता हो

विवाह करना गुनाह नहीं हे जरूर करो लेकिन अपने वीर्य की बरबादी कभी मत करना , संतानोत्पत्ति के लिए शारीरिक संबंध रख सकते हे अपनी पत्नी से लेकिन अकारण उस उत्पादक शक्ति का नाश क्यो ?

ब्रम्हचर्य बहुत व्यापक हे मोक्ष का मार्ग हे

किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए ब्रह्मचर्य परम आवश्यक है

अपने मन ओर इन्द्रियों को नियंत्रण रखना ब्रह्मचर्य हे

धर्म को धारण करना ब्रह्मचर्य हे

अपने वीर्य की रक्षा करना ब्रह्मचर्य हे

स्वयं को अनुशासित रखना ब्रह्मचर्य हे

मन की गुलामी को छोड़ना ब्रह्मचर्य हे

वेदों को पढ़ना और उसको अमल करना ब्रह्मचर्य हे
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पीछे कितना वीर्यनाश हो चुका है, उसकी चिंता छोड़कर अब कैसे वीर्यरक्षण हो सके, उसके लिये उपाय करने हेतु कमर कस लो |

ध्यान रहे: वीर्यशक्ति का दमन नहीं करना है, उसे ऊर्ध्वगामी बनाना है । वीर्यशक्ति का उपयोग हम ठीक ढंग से नहीं कर पाते । इसलिये इस शक्ति के ऊर्ध्वगमन के कुछ प्रयोग हम समझ लें ।
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जिसने भी वीर्य को शरीर से लीक किया। उसने अपने ही हाथों से अपने
शरीर को वीक किया।
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समय का चक्र बहुत तेज चलता है
इसलिए ना तो अपने बल का अहंकार करें
और ना ही अपने
धन का
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90 दिनों तक ब्रह्मचर्य करने से व्यक्ति अपने आस पास दिव्यता का अनुभव करता है क्योंकि इन 90 दिनों में वो कोई भी कुकर्म नहीं करता ना ही गंदे विचार रखता है।
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वीरता शब्द ही वीर्य से आया है , इसलिए वीर बनना है तो वीर्य की रक्षा करो
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शरीर के अन्दर विद्यमान 'वीर्य' ही जीवन शक्ति का भण्डार है। शारीरिक एवं मानसिक दुराचर तथा प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक मैथुन से इसका क्षरण होता है। कामुक चिंतन से भी इसका नुकसान होता है। मैथून के द्वारा पूरे शरीर में मंथन चलता है और शरीर का सार तत्व कुछ ही समय में बाहर आ जाता है। रस निकाल लेने पर जैसे गन्ना छूट हो जाता है कुछ वैसे ही स्थित वीर्यहीन मनुष्य की हो जाती है। ऐसे मनुष्य की तुलना मणिहीन नाग से भी की जा सकती है। खोखला होता जाता है इन्सान।
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Use above☝ hastag to find out post related.
आप को जिस विषय पर पोस्ट पढ़नी वो # use करे.🙏

हमारे चैनल की ये विशेषता है की हम कोई भी पोस्ट दुबारा ( REPEAT) नहीं करते ,ताकि आपको हर पोस्ट मै कुछ नया और अलग जानकारी प्राप्त हो 🙏

आप चाहिए तो इस चैनल के सबसे पहले पोस्ट की लिंक से पहले पोस्ट से आज तक की सारी पोस्ट पढ़ लेवे ।

first post link :- https://t.me/bramachrya01/4


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आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हम हमारे सभी बहनो को हमारी टीम से एक छोटासा तोफा देना चाहते है. आशा करता हु आपको वो जरूर अच्छा लगेगा!

जब ब्रम्हचर्य का पालन करने वाला व्यक्ति किसी अपने देश की हि बहन को रास्ते मे अधर्मी लोगो से या लड़को से छेड़ते हुए देखता है तो वो जरूर उस बहन को बचा सकता है पर हर वक्त ऐसा हो ये तय नहीं इसलिए हमारे बहन को हि ऐसे लोगो पर माँ काली बनके गरजाना पड़ेगा और उन जैसे अधर्मी लोगोकी हड्डी तोड़नी पड़ेगी सोच और समझ से और साथ हि साथ आत्मरक्षा भी करनी होगी उसके लिए हि हम #selfdefense hastag चलाने जा रहे है जहा आपको आत्मरक्षा की जानकारी मिलेगी।

हमारे सभी भाई ये वीडियो अपने बहन,चाची,माँ,मामी और अपने मित्र से भी साझा करे ताकि वो आत्मरक्षा के लिए सज्ज हो।


~ @bramachrya01 Team 🙏

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मैथुन क्रिया से होने वाले नुकसान निम्रानुसार है।


शरीर की जीवनी शक्ति घट जाती है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। * आँखो की रोशनी कम हो जाती है। * शारीरिक एवं मानसिक बल कमजोर हो जाता है। * जिस तरह जीने के लिये ऑक्सीजन चाहिए वैसे ही 'निरोग' रहने के लिये 'वीर्य'। * ऑक्सीजन प्राणवायु है तो वीर्य जीवनी शक्ति है। * अधिक मैथुन से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाता है। * चिंतन विकृत हो जाता है।
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इससे आपको उस समय का ब्रम्हचर्य का महत्व कितना था इसका अंदाजा आता होगा ।

ब्रम्हचर्य से बोहोत बड़े बड़े कार्य सफल हो सकते है जो व्यक्ति सिर्फ स्वार्थ हेतु ब्रम्हचर्य का पालन करते है किसीको आकर्षित करने हेतु हम उनसे गुजारिश करते है की ब्रम्हचर्य को पहले जानो । ब्रम्हचर्य का पालन अपने एवं समाज तथा देश के उन्नति के लिए करो।

जय आर्यावर्त 🚩
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वीर्यक्षय से विशेषकर तरूणावस्था में अनेक रोग उत्पन्न होते हैं -


चेहरे पर मुँहासे , नेत्रों के चतुर्दिक नीली रेखाएँ, दाढ़ी का अभाव, धंसे हुए नेत्र, रक्तक्षीणता से पीला चेहरा, स्मृतिनाश, दृष्टि की क्षीणता, मूत्र के साथ वीर्यस्खलन, दुर्बलता, आलस्य, उदासी, हृदय-कम्प, शिरोवेदना, संधि-पीड़ा, दुर्बल वृक्क, निद्रा में मूत्र निकल जाना, मानसिक अस्थिरता, विचारशक्ति का अभाव, दुःस्वप्न, स्वप्नदोष व मानसिक अशांति।
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संसार में ऐसी कोई वस्तु या स्थिति नहीं है जो संकल्पबल और पुरुषार्थ के द्वारा प्राप्त न हो सके। पूर्ण उत्साह और लगन से किया गया पुरुषार्थ कभी व्यर्थ नहीं जाता।
अपनी उन्नति में बाधक दुर्बलता के विचारों को जड़ से उखाड़ फेंको। उनके मूल पर ही कुठाराघात करो।
पाणिनि नाम का बालक पहली कक्षा में वर्षों तक अभ्यास करने के बाद भी लगातार अनुत्तीर्ण ही होता रहा, पर बाद में वही बालक अपने दृढ़ संकल्प, पुरुषार्थ, उपासना और योग के अभ्यास से संस्कृत व्याकरण का विश्वविख्यात रचयिता बना । आज भी पाणिनि का संस्कृत व्याकरण 'अष्टाध्यायी' अद्वितीय माना जाता है।
अपनी मानसिक व शारीरिक शक्तियों को नष्ट करनेवाली बुरी आदतों में पड़ना यह अपना पतन आप आमंत्रित करना है। तुम्हें महान, तेजस्वी व श्रेष्ठ इन्सान बनना हो तो अभी से दृढ़ संकल्प करके त्याज्य चीजों को छोड़ो और जीवन-विकास में उपयोगी मूल्यों को अपनाओ। तुम्हारा भविष्य तुम्हारे ही हाथों में है। हजार बार फिसल जाने पर भी फिर से हिम्मत करो... विजय तुम्हारी ही होगी।
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वीर्य रक्षण से लाभ -
शरीर में वीर्य संरक्षित होने पर आँखों में तेज, वाणी में प्रभाव, कार्य में उत्साह एवं प्राण ऊर्जा में अभिवृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को जल्दी से कोई रोग नहीं होता है उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता आ जाती है ।
पहले के जमाने में हमारे गुरुकुल शिक्षा पद्धति में ब्रह्मचर्य अनिवार्य हुआ करता था। और उस वक्त में यहाँ वीर योद्धा, ज्ञानी, तपस्वी व ऋषि स्तर के लोग हुए।
ऋषि दयानंद ने कहा ब्रह्मचर्य ब्रत का पालन करने बाले ब्यक्ति का अपरिमित शक्ति, प्राप्त होता है एक ब्रह्मचारी संसार का जितना उपकार कर सकता है दूसरा कोई नही कर सकता.
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"एक मनुष्य चारों वेदों को जाननेवाला हो
और दूसरा पूर्ण ब्रह्मचारी हो तो इन दोनों में ब्रह्मचारी ही श्रेष्ठ है ।"
- भीष्म पितामह
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जब जल गंदा हो तो उसे हिलाते नहीं
बल्की शांत छोड़ देते है, जिससे गंदगी अपने आप नीचे बैठ जाती है, इसी प्रकार जीवन में परेशानी आने पर
बेचैन होने के बजाय शांत रहकर विचार करे हल जरुर निकलेगा।
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