"जिंदगी में बुरा वक़्त कभी नहीं आता !
सिर्फ दो तरह का वक्त आता है, एक अनुकूल वक्त और दूसरा- प्रतिकूल वक्त!
अनुकूल वक्त को हम 'अच्छा समय' कहते हैं। प्रतिकूल वक्त को हम बुरा समय कहते हैं!
अनुकूल वक्त, वह वक्त होता है जिसमें अधिक कर्म नहीं करना पड़ता! जीवन को कहीं से
चुनौती नहीं मिलती!
जबकि प्रतिकूल वक्त, वह वक्त होता है जिसमें अधिक कर्म करना पड़ता है.. और जीवन में हर ओर से चुनोतियाँ मिलती हैं इस अधिक कर्म के समय को ही हम बुरा वक्त कहते हैं, यद्यपि यह बुरा नहीं होता! "
प्रतिकूल समय में सजगता और परिश्रम को बढ़ाकर सभी प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदला जा सकता है... यही पुरुषार्थी व्यक्ति करता भी है और यही कारण है कि एक जैसी ही कठिनाइयां अलग-अलग व्यक्तियों को अलग अलग प्रकार से प्रभावित करती हैं कुछ व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में और बेहतर बन जाते हैं और कुछ हार कर किस्मत दोष देना शुरू कर देते हैं यह निर्णय हमारे हाथ में होता है कि इन दोनों में से हमें किस श्रेणी का व्यक्ति बनना है।
#bramhachryamotivation
#spirituality
सिर्फ दो तरह का वक्त आता है, एक अनुकूल वक्त और दूसरा- प्रतिकूल वक्त!
अनुकूल वक्त को हम 'अच्छा समय' कहते हैं। प्रतिकूल वक्त को हम बुरा समय कहते हैं!
अनुकूल वक्त, वह वक्त होता है जिसमें अधिक कर्म नहीं करना पड़ता! जीवन को कहीं से
चुनौती नहीं मिलती!
जबकि प्रतिकूल वक्त, वह वक्त होता है जिसमें अधिक कर्म करना पड़ता है.. और जीवन में हर ओर से चुनोतियाँ मिलती हैं इस अधिक कर्म के समय को ही हम बुरा वक्त कहते हैं, यद्यपि यह बुरा नहीं होता! "
प्रतिकूल समय में सजगता और परिश्रम को बढ़ाकर सभी प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदला जा सकता है... यही पुरुषार्थी व्यक्ति करता भी है और यही कारण है कि एक जैसी ही कठिनाइयां अलग-अलग व्यक्तियों को अलग अलग प्रकार से प्रभावित करती हैं कुछ व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में और बेहतर बन जाते हैं और कुछ हार कर किस्मत दोष देना शुरू कर देते हैं यह निर्णय हमारे हाथ में होता है कि इन दोनों में से हमें किस श्रेणी का व्यक्ति बनना है।
#bramhachryamotivation
#spirituality
👍3❤1
Check out ब्रम्हचर्य (celibacy)™: https://t.me/bramhachrya_bot
Telegram
ब्रम्हचर्य (celibacy)™
ब्रम्हचर्य संबंधित पुस्तक,e-books, आपको यहा निशुल्क उपलब्ध होगी।
एक दुखद दास्तान 😭😭
कितना भी समझा दो आज कल के युवा पतन की और ही जाते है , ब्रह्मचर्य शब्द तो उन्हे समझ में ही नही आता ।
वो तो फैशन , सोशल मीडिया , चैटिंग , मूवीज ,वेब सीरीज के चंगुल में इस कदर फंसे है जो बात मत पूछो।
और कोई अच्छी चीज बताए तो उन्हे असहज महसूस होता है ।
जो कोई खुद खाई में गिरना चाहे तो भला कोन रोक सकता है उसे...
पर जो इस पोस्ट को पढ़ रहे है वो विकारों की गंदी खाई में मत गिरना , अरे उठ जाओ
हो गया सो हो गया ,बीत गई सो बात गई
गुलाम नही हो मालिक हो तुम ...
ऊपर से तुम इतनी बड़ी बाते करते हो और अंदर से झांको खुद में कितना कालापन है ??
उस कालेपन को साफ करने का टाइम है अब नही तो बहुत देर हो जायेगी .
कितना भी समझा दो आज कल के युवा पतन की और ही जाते है , ब्रह्मचर्य शब्द तो उन्हे समझ में ही नही आता ।
वो तो फैशन , सोशल मीडिया , चैटिंग , मूवीज ,वेब सीरीज के चंगुल में इस कदर फंसे है जो बात मत पूछो।
और कोई अच्छी चीज बताए तो उन्हे असहज महसूस होता है ।
जो कोई खुद खाई में गिरना चाहे तो भला कोन रोक सकता है उसे...
पर जो इस पोस्ट को पढ़ रहे है वो विकारों की गंदी खाई में मत गिरना , अरे उठ जाओ
हो गया सो हो गया ,बीत गई सो बात गई
गुलाम नही हो मालिक हो तुम ...
ऊपर से तुम इतनी बड़ी बाते करते हो और अंदर से झांको खुद में कितना कालापन है ??
उस कालेपन को साफ करने का टाइम है अब नही तो बहुत देर हो जायेगी .
❤14👍1
"हमारी आदतों में घमण्ड है तो हमें बर्बाद करने के लिए दुश्मन नहीं हम खुद ही काफ़ी हैं।"
दवाइयाँ मात्र सहारा देंगी । यदि वीर्यनाश से हुए दुष्परिणामों को मिटाना चाहते हो तो वीर्यरक्षा ही एकमात्र स्थायी उपचार है ।
कब्ज का इलाज करने के घरेलू उपाय
क़ब्ज़ होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। पानी की कमी होने पर आँतो में मल सूखने लगता है और मल त्याग करने में काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ता है।
1. रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए और खाना खाते समय पानी नही पीना चाहिए।
2. फलो में पपीता और अमरूद ज़रूर खाना चाहिए।
3. पेट में जमे हुए मल को बाहर निकालने के लिए 1 कप गुनगुने पानी में 1 नींबू निचोड़ कर पिए।
4. 1 ग्लास गरम दूध रात को सोने से पहले पिए।
5. अगर मल आँतो में चिपक रहा हो तो दूध में 1 से 2 चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिए।
6. इसबगोल की भूसी क़ब्ज़ के इलाज में रामबाण का काम करती है। 125 ग्राम दही मे 10 ग्राम इसबगोल की भूसी घोल कर सुबह शाम खाने से आराम मिलता है।
7. एक चौथाई कप गरम पानी में 1 चम्मच मीठा सोडा मिला कर पिए
8. दही खाने से शरीर में अच्छे बॅक्टीरिया की मात्रा बढ़ेगी।
9. दिन में २ से ३ कप दही का सेवन ज़रूर करे।
10. एक ग्लास गरम दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच घी मिला कर घोल ले और रात को सोने से पहले पिए।एक ग्लास दूध में थोड़ी अंजीर उबाल ले और सोने से पहले पीने से क़ब्ज़ दूर होती है।
क़ब्ज़ होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। पानी की कमी होने पर आँतो में मल सूखने लगता है और मल त्याग करने में काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ता है।
1. रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए और खाना खाते समय पानी नही पीना चाहिए।
2. फलो में पपीता और अमरूद ज़रूर खाना चाहिए।
3. पेट में जमे हुए मल को बाहर निकालने के लिए 1 कप गुनगुने पानी में 1 नींबू निचोड़ कर पिए।
4. 1 ग्लास गरम दूध रात को सोने से पहले पिए।
5. अगर मल आँतो में चिपक रहा हो तो दूध में 1 से 2 चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिए।
6. इसबगोल की भूसी क़ब्ज़ के इलाज में रामबाण का काम करती है। 125 ग्राम दही मे 10 ग्राम इसबगोल की भूसी घोल कर सुबह शाम खाने से आराम मिलता है।
7. एक चौथाई कप गरम पानी में 1 चम्मच मीठा सोडा मिला कर पिए
8. दही खाने से शरीर में अच्छे बॅक्टीरिया की मात्रा बढ़ेगी।
9. दिन में २ से ३ कप दही का सेवन ज़रूर करे।
10. एक ग्लास गरम दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच घी मिला कर घोल ले और रात को सोने से पहले पिए।एक ग्लास दूध में थोड़ी अंजीर उबाल ले और सोने से पहले पीने से क़ब्ज़ दूर होती है।
👍5❤2
वीर्य के संयम से शरीर में एक अदभुत आकर्षक शक्ति उत्पन्न होती है जिसे प्राचीन वैद्य धन्वंतरि ने 'ओज' नाम दिया है | यही ओज मनुष्य को अपने परम-लाभ ‘आत्मदर्शन' कराने में सहायक बनता है | आप जहाँ-जहाँ भी किसी व्यक्ति के जीवन में कुछ विशेषता, चेहरे पर तेज, वाणी में बल, कार्य में उत्साह पायेंगे, वहाँ समझो इस वीर्य रक्षण का ही चमत्कार है |
👍5
🙏🙏🙏🙏
सफलता कड़ी मेहनत मांगती है | ज़ोरदार परिश्रम वो ही कर पाता है, जिसके शरीर में पर्याप्त जोश एवं उत्साह हो
इसलिए अपनी ऊर्जा की रक्षा करे, ब्रह्मचर्य का पालन करें 💪
सफलता कड़ी मेहनत मांगती है | ज़ोरदार परिश्रम वो ही कर पाता है, जिसके शरीर में पर्याप्त जोश एवं उत्साह हो
👍9
9.4.2022
"बचपन से ही लोग विद्या पढ़ने के लिए स्कूल में जाते हैं। फिर बड़े हो कर कॉलेज में भी जाते हैं। कुछ बच्चे गुरुकुल में भी जाते हैं। कुछ लोग दोनों प्रकार की पढ़ाई करते हैं, पहले स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं, फिर बाद में गुरुकुल में भी पढ़ते हैं।"
चाहे कहीं भी पढ़ें। विचारणीय विषय तो यह है, कि पढ़ने लिखने का उद्देश्य क्या है? "मनुष्य बनना। मनुष्यता सीखना। मनुष्यता के अनुसार जीवन जीना। स्वयं भी सुखी रहना और दूसरों को भी सुख देना।" यह पढ़ाई-लिखाई अथवा विद्या/ शिक्षा प्राप्ति का उद्देश्य है।
यदि कोई व्यक्ति स्कूल कॉलेज में पढ़ कर या गुरुकुल में पढ़कर, या दोनों जगह पढ़कर भी शाब्दिक रूप से विद्या तो प्राप्त कर लेता है, परन्तु अपना आचरण ठीक नहीं करता। "जैसे कि रावण भी बहुत पढ़ा लिखा था। अनेक शास्त्रों का विद्वान था। बलशाली था। राजा भी था। फिर भी उसने कुछ दोष ऐसे कर दिए, जिनके कारण आज तक लोग उसकी बदनामी करते हैं। प्रतिवर्ष उस के पुतले जलाए जाते हैं।"
इस सारे इतिहास को जानने पर यह पता चलता है, कि "विद्या पढ़ना तो अच्छी बात है। परंतु वह सार्थक तभी है, जब व्यक्ति उस पढ़ी हुई विद्या के अनुसार उत्तम आचरण भी करे। मनुष्यता भी इसी का नाम है।" "यदि मनुष्य विद्या पढ़कर भी रावण जैसा ही आचरण करे, तो उसका विद्या पढ़ना बेकार ही नहीं, बल्कि हानिकारक है। क्योंकि 'विद्या पढ़कर भी विपरीत आचरण करने वाले को तो दंड भी बहुत अधिक मिलता है,' ऐसा वेदो में बताया गया है। अतः विद्या पढ़कर अपने आचरण को सुधारना अत्यंत आवश्यक है।"
"जो लोग विद्या पढ़कर श्रीराम चन्द्र जी की तरह आचरण करते हैं, उनका अनुकरण करते हैं। और इसी प्रकार से अन्य विद्वानों ऋषि-मुनियों का अनुकरण करते हैं, उन लोगों का विद्या पढ़ना सार्थक और सफल है। ऐसे लोग स्वयं भी सुखी रहते हैं, और संसार के लोगों को भी सुख देते हैं। परंतु जो रावण का अनुकरण करते हैं, वे अच्छे लोग नहीं हैं।"
कहने को तो रावण बहुत पहले मर चुका। परंतु रावण की जो प्रवृत्ति थी, जो उसकी नीयत थी, वह आज भी जीवित है। उसकी नीयत नहीं मरी। वह परंपरागत दूसरे मनुष्य में आज भी पाई जाती है।
"इसलिए यदि आप विद्या पढ़ते हैं, तो आप भी श्रीराम चन्द्र जी का अनुकरण करें। अपने बच्चों को भी वैसा ही प्रशिक्षण देवें। और जो समाज में रावण के अनुयाई आज भी आपके आसपास बिखरे हुए हैं, उनसे भी अवश्य ही सावधान रहें। उनमें से जो कोई रावण प्रशासन की पकड़ में आ जाता है, उसे तो प्रशासन की ओर से दंड मिल जाता है, जेल भी हो जाती है। परंतु सब तो पकड़ में नहीं आते। जो रावण प्रशासन की पकड़ में नहीं आए, और आपके आसपास विचरण करते हैं, उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो, कि वे आपकी या आपके परिवार की किसी प्रकार की कोई हानि कर दें।"
KEEP CALM AND
BE THE
BRAMHACHARI 💪
Share✅
Join✅
Support Us✅
https://t.me/bramachrya01
"बचपन से ही लोग विद्या पढ़ने के लिए स्कूल में जाते हैं। फिर बड़े हो कर कॉलेज में भी जाते हैं। कुछ बच्चे गुरुकुल में भी जाते हैं। कुछ लोग दोनों प्रकार की पढ़ाई करते हैं, पहले स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं, फिर बाद में गुरुकुल में भी पढ़ते हैं।"
चाहे कहीं भी पढ़ें। विचारणीय विषय तो यह है, कि पढ़ने लिखने का उद्देश्य क्या है? "मनुष्य बनना। मनुष्यता सीखना। मनुष्यता के अनुसार जीवन जीना। स्वयं भी सुखी रहना और दूसरों को भी सुख देना।" यह पढ़ाई-लिखाई अथवा विद्या/ शिक्षा प्राप्ति का उद्देश्य है।
यदि कोई व्यक्ति स्कूल कॉलेज में पढ़ कर या गुरुकुल में पढ़कर, या दोनों जगह पढ़कर भी शाब्दिक रूप से विद्या तो प्राप्त कर लेता है, परन्तु अपना आचरण ठीक नहीं करता। "जैसे कि रावण भी बहुत पढ़ा लिखा था। अनेक शास्त्रों का विद्वान था। बलशाली था। राजा भी था। फिर भी उसने कुछ दोष ऐसे कर दिए, जिनके कारण आज तक लोग उसकी बदनामी करते हैं। प्रतिवर्ष उस के पुतले जलाए जाते हैं।"
इस सारे इतिहास को जानने पर यह पता चलता है, कि "विद्या पढ़ना तो अच्छी बात है। परंतु वह सार्थक तभी है, जब व्यक्ति उस पढ़ी हुई विद्या के अनुसार उत्तम आचरण भी करे। मनुष्यता भी इसी का नाम है।" "यदि मनुष्य विद्या पढ़कर भी रावण जैसा ही आचरण करे, तो उसका विद्या पढ़ना बेकार ही नहीं, बल्कि हानिकारक है। क्योंकि 'विद्या पढ़कर भी विपरीत आचरण करने वाले को तो दंड भी बहुत अधिक मिलता है,' ऐसा वेदो में बताया गया है। अतः विद्या पढ़कर अपने आचरण को सुधारना अत्यंत आवश्यक है।"
"जो लोग विद्या पढ़कर श्रीराम चन्द्र जी की तरह आचरण करते हैं, उनका अनुकरण करते हैं। और इसी प्रकार से अन्य विद्वानों ऋषि-मुनियों का अनुकरण करते हैं, उन लोगों का विद्या पढ़ना सार्थक और सफल है। ऐसे लोग स्वयं भी सुखी रहते हैं, और संसार के लोगों को भी सुख देते हैं। परंतु जो रावण का अनुकरण करते हैं, वे अच्छे लोग नहीं हैं।"
कहने को तो रावण बहुत पहले मर चुका। परंतु रावण की जो प्रवृत्ति थी, जो उसकी नीयत थी, वह आज भी जीवित है। उसकी नीयत नहीं मरी। वह परंपरागत दूसरे मनुष्य में आज भी पाई जाती है।
"इसलिए यदि आप विद्या पढ़ते हैं, तो आप भी श्रीराम चन्द्र जी का अनुकरण करें। अपने बच्चों को भी वैसा ही प्रशिक्षण देवें। और जो समाज में रावण के अनुयाई आज भी आपके आसपास बिखरे हुए हैं, उनसे भी अवश्य ही सावधान रहें। उनमें से जो कोई रावण प्रशासन की पकड़ में आ जाता है, उसे तो प्रशासन की ओर से दंड मिल जाता है, जेल भी हो जाती है। परंतु सब तो पकड़ में नहीं आते। जो रावण प्रशासन की पकड़ में नहीं आए, और आपके आसपास विचरण करते हैं, उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा न हो, कि वे आपकी या आपके परिवार की किसी प्रकार की कोई हानि कर दें।"
KEEP CALM AND
BE THE
BRAMHACHARI 💪
Share✅
Join✅
Support Us✅
https://t.me/bramachrya01
Telegram
ब्रह्मचर्य ही जीवन (हरीॐ)
ब्रम्हचर्य पालन करने वालो के लिये विश्व का सर्वोत्तम टेलिग्राम चॅनल,
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
यहा पर आपको ब्रम्हचर्य के बारे मैं सटीक और सही जानकारी मिलेगी लेख, pdf और पुस्तके |
इस भारतवर्ष मैं फिर से ब्रम्हचर्य की महिमा का परिचय सबको कराये यही हमारा उद्देश है|
#hastag
👍1👏1
पवित्रता अपने आप पर निर्भर करती है। कोई भी दूसरा आपको पवित्र नहीं कर सकता हैं । -
गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध
👍9👎1