सावधान !!
खड़े पहाड़ की चढ़ाई है ब्रह्मचर्य
एक छोटी सी गलती सीधे जमीन पर ला देगी
जो जितना ऊपर है वो उतना ज्यादा सावधान रहे क्युकी जितने ऊपर से गिरोगे चोट उतनी ज्यादा लगेगी
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खड़े पहाड़ की चढ़ाई है ब्रह्मचर्य
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मनुष्य को मांस खाना चाहिए अथवा नहीं खाना चाहिए?
मनुष्य के पास न तो मासांहारी दाँत हैं और न ही आँत। कहने का तात्पर्य यह कि मनुष्य जाति प्राकृतिक रूप से शाकाहारी हैं किन्तु अपनी जीभ का स्वाद बदलने के लिए लोग मांसाहारी व्यंजन खाते हैं। वस्तुतः जो जीभ से चिपकाकर पानी पीने वाले जीव हैं, वास्तव में मांस का भोजन उनके लिए है। प्रकृति ने मांस नोचने के लिए उन्हें नुकीले दाँत और मांस को पचाने के लिए आंत प्रदान किये हैं। मनुष्य के शरीर में मांस को पचाने के लिए 30 दिन का समय लगता हैं। जैसे कुत्ता, बिल्ली, शेर, बाघ आदि और घूँट-घूँटकर पानी पीने वाले जीव शाकाहारी होते हैं। जैसे गाय, भैंस, बन्दर, मनुष्य आदि मांसाहारी से जीवहत्या को प्रोत्साहन मिलता हैं जो हमारी संस्कृति, सभ्यता एवम् धर्म के अनुकूल नहीं हैं।
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मनुष्य के पास न तो मासांहारी दाँत हैं और न ही आँत। कहने का तात्पर्य यह कि मनुष्य जाति प्राकृतिक रूप से शाकाहारी हैं किन्तु अपनी जीभ का स्वाद बदलने के लिए लोग मांसाहारी व्यंजन खाते हैं। वस्तुतः जो जीभ से चिपकाकर पानी पीने वाले जीव हैं, वास्तव में मांस का भोजन उनके लिए है। प्रकृति ने मांस नोचने के लिए उन्हें नुकीले दाँत और मांस को पचाने के लिए आंत प्रदान किये हैं। मनुष्य के शरीर में मांस को पचाने के लिए 30 दिन का समय लगता हैं। जैसे कुत्ता, बिल्ली, शेर, बाघ आदि और घूँट-घूँटकर पानी पीने वाले जीव शाकाहारी होते हैं। जैसे गाय, भैंस, बन्दर, मनुष्य आदि मांसाहारी से जीवहत्या को प्रोत्साहन मिलता हैं जो हमारी संस्कृति, सभ्यता एवम् धर्म के अनुकूल नहीं हैं।
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शरीर पर तेल की मालिश करने का क्या रहस्य हैं?
शरीर पर तेल मालिश करने से थकावट, कमजोरी और वात जनित रोगों से मुक्ति मिलती है। सिर में मालिश तथा पैरों की तली में तेल मालिश करना विशेष रूप से फायदेमंद हैं। शरीर में तेल मलने से त्वचा में कोमलता आती है। शुष्की नष्ट हो जाती हैं, दृष्टि तेज होती है।
तेल मर्दन का वैज्ञानिक आधार क्या हैं?
तेल मर्दन त्वचा के रोम छिद्रों को खोल देता है जो स्वास्थ्य के लिए अत्याधिक लाभप्रद है। सिर में नियमित तेल लगाने से बालों का गिरना, सिर दर्द, मस्तिष्क की दुर्बलता आदि स्वतः नष्ट हो जाती हैं।
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शरीर पर तेल मालिश करने से थकावट, कमजोरी और वात जनित रोगों से मुक्ति मिलती है। सिर में मालिश तथा पैरों की तली में तेल मालिश करना विशेष रूप से फायदेमंद हैं। शरीर में तेल मलने से त्वचा में कोमलता आती है। शुष्की नष्ट हो जाती हैं, दृष्टि तेज होती है।
तेल मर्दन का वैज्ञानिक आधार क्या हैं?
तेल मर्दन त्वचा के रोम छिद्रों को खोल देता है जो स्वास्थ्य के लिए अत्याधिक लाभप्रद है। सिर में नियमित तेल लगाने से बालों का गिरना, सिर दर्द, मस्तिष्क की दुर्बलता आदि स्वतः नष्ट हो जाती हैं।
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Napoleon Bonaparte Short Story in Hindi| Sanyami Jeevan Ke Fayde:
⚜नेपोलियन के हाथ में सत्ता आने से पहले वहाँ लुई सोलहवें (louis XVI )तथा उसके बोरबोर वंश का राज्य था । उसमें भी वासना और विलासिता काफी बढ़ चुकी थी ।
⚜राजा के प्रमुख सरदारों और सामंतों में भी ‘काम’ रूपी भेड़िया अच्छी तरह से घुस चुका था । आखिर सन् 1789 में वहाँ राज्य-क्रांति हुई और लोगों ने विलासी राजा-रानी और उसके प्रमुख सहायकों को मार डाला ।
⚜इधर नेपोलियन के हाथ में राज्य की बागडोर आ रही थी । वह एक के बाद एक विजय प्राप्त करता जा रहा था । जब नेपोलियन 26 वर्ष का था तब वह एक 36 वर्षीया सुंदरी, जिसका नाम जोजेफीन था और जो चरित्रहीन एवं निर्दयी थी, उसके रूप-लावण्य में गिरफ्तार हो चुका था । उसने उससे विवाह भी कर लिया ।
⚜सन् 1804 में जब उसका राज्याभिषेक हुआ तो उसने जोजेफीन के सिर पर राजमुकुट भी पहनाया ।
⚜उसके कुछ समय बाद नेपोलियन ने उसे तलाक देकर ‘मेरी लूसी’ नामक युवती से विवाह किया । फिर भी वह जोजेफीन के आकर्षण-पाश से मुक्त नहीं हो सका । उसकी वासना की आग बढ़ती ही गयी ।
⚜इतिहास कहता है कि अंत में वाटरलू के युद्ध में जाने से पहले सायं को नेपोलियन स्वयं को पतित बना चुका था । उसका मन उन मलिन विचारों के कारण युद्ध की योजना तथा निर्देशन कार्य में सही रीति से नहीं जुट सका ।
⚜इसका परिणाम यह हुआ कि नेपोलियन के भाग्य का तारा टूट गया । वह बुरी तरह परास्त हुआ और संसार के इतने महान सेनापति का दयनीय अंत हुआ ।
⚜इस हार के जहाँ सैनिक तथा अन्य कारण थे, वहीं काम वासना भी एक कारण थी क्योंकि इससे उसकी मानसिक एकाग्रता में और शारीरिक क्षमता इत्यादि पर बुरा प्रभाव पड़ा था ।
⚜युवावस्था की उम्र तक वह बहुत संयमी रहा जिससे वह सफलता के शिखर पर पहुँचा, परंतु बाद में असंयमी जीवन जीने के कारण उसका पतन हो गया ।
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Napoleon Bonaparte Short Story in Hindi| Sanyami Jeevan Ke Fayde:
⚜नेपोलियन के हाथ में सत्ता आने से पहले वहाँ लुई सोलहवें (louis XVI )तथा उसके बोरबोर वंश का राज्य था । उसमें भी वासना और विलासिता काफी बढ़ चुकी थी ।
⚜राजा के प्रमुख सरदारों और सामंतों में भी ‘काम’ रूपी भेड़िया अच्छी तरह से घुस चुका था । आखिर सन् 1789 में वहाँ राज्य-क्रांति हुई और लोगों ने विलासी राजा-रानी और उसके प्रमुख सहायकों को मार डाला ।
⚜इधर नेपोलियन के हाथ में राज्य की बागडोर आ रही थी । वह एक के बाद एक विजय प्राप्त करता जा रहा था । जब नेपोलियन 26 वर्ष का था तब वह एक 36 वर्षीया सुंदरी, जिसका नाम जोजेफीन था और जो चरित्रहीन एवं निर्दयी थी, उसके रूप-लावण्य में गिरफ्तार हो चुका था । उसने उससे विवाह भी कर लिया ।
⚜सन् 1804 में जब उसका राज्याभिषेक हुआ तो उसने जोजेफीन के सिर पर राजमुकुट भी पहनाया ।
⚜उसके कुछ समय बाद नेपोलियन ने उसे तलाक देकर ‘मेरी लूसी’ नामक युवती से विवाह किया । फिर भी वह जोजेफीन के आकर्षण-पाश से मुक्त नहीं हो सका । उसकी वासना की आग बढ़ती ही गयी ।
⚜इतिहास कहता है कि अंत में वाटरलू के युद्ध में जाने से पहले सायं को नेपोलियन स्वयं को पतित बना चुका था । उसका मन उन मलिन विचारों के कारण युद्ध की योजना तथा निर्देशन कार्य में सही रीति से नहीं जुट सका ।
⚜इसका परिणाम यह हुआ कि नेपोलियन के भाग्य का तारा टूट गया । वह बुरी तरह परास्त हुआ और संसार के इतने महान सेनापति का दयनीय अंत हुआ ।
⚜इस हार के जहाँ सैनिक तथा अन्य कारण थे, वहीं काम वासना भी एक कारण थी क्योंकि इससे उसकी मानसिक एकाग्रता में और शारीरिक क्षमता इत्यादि पर बुरा प्रभाव पड़ा था ।
⚜युवावस्था की उम्र तक वह बहुत संयमी रहा जिससे वह सफलता के शिखर पर पहुँचा, परंतु बाद में असंयमी जीवन जीने के कारण उसका पतन हो गया ।
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तेल मर्दन ही क्यों, घी से मर्दन क्यों नही?
क्योंकि तेल मर्दन से शरीर को शक्ति प्राप्त होती हैं। तेल का भक्षण करने से शक्ति नहीं मिलती जबकि घी को भोजन रूप में प्रयोग करने पर शक्ति प्राप्त होती है, मर्दन से नहीं।
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क्योंकि तेल मर्दन से शरीर को शक्ति प्राप्त होती हैं। तेल का भक्षण करने से शक्ति नहीं मिलती जबकि घी को भोजन रूप में प्रयोग करने पर शक्ति प्राप्त होती है, मर्दन से नहीं।
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⛔ डिप्रेशन (अवसाद) का कारण ⛔
________________
डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता,
जब तक अपने आप को बहुत मजबूर अनुभव न करो और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अन्धी कामनाएँ बनाती हैं।
कामनाओं में भी कोई दिक्कत नहीं हैं अगर वो अन्धी न हों।
कुछ ऐसा माँग रहे हो, जो मिल सकता ही नहीं। फिर जब पाओ कि वो मिल नहीं रहा तो डिप्रेस्ड हो जाओ, ये कहाँ की समझदारी हैं बताओ!
तुम आधी रात में सूरज की माँग कर रहे होते हो। तुम शराब पीकर होश चाह रहे होते हो। वो हो नहीं सकता।
फिर वो जब होता नहीं है, तो बुरा लगता है, बार-बार बुरा लगता है, उस स्थिति को तुम नाम दे देते हो अवसाद का।
कुछ अगर सही है, तो उस पर डटे रहो। कुछ अगर झूठा और भ्रामक है, तो छोड़ कर आगे बढ़ो। ये अवसाद बीच में कहाँ से आ गया!
तुम्हारी कामना, तुम्हारा लक्ष्य, अगर वो असली है, सुन्दर है और तुम्हें सच्चाई और मुक्ति की ओर ले जाता है तो बढ़ा चल नौजवान!
और जिन चीज़ों से अटके हुए हो, अगर वो मूर्खतापूर्ण हैं, तो तुम्हारे हित में यही है कि स्वीकार लो कि वो मूर्खतापूर्ण हैं, कम से कम कामना करना तो छोड़ दो।
या तो इतना दम दिखाओ कि बेवकूफ़ी की चीज़ों से अटका हूँ तो आगे बढ़ जाऊँगा। आगे नहीं बढ़ सकते, मान लो अटक ही गये हो, तो अटके ही रहो पर ये उम्मीद तो छोड़ दो कि यहाँ तुम्हें कुछ बहुत ऊँचा मिल जाना है।
जहाँ पर कामना नहीं हैं वहाँ विषाद नहीं हो सकता। डिज़ायर के बिना फ्रस्ट्रेशन कैसा?
संपूर्ण कामनाओं का त्याग मुक्ति हे
केवल ईश्वर को पाने की कामना रहे शेष
दूसरो की सेवा के लिए किया गया कर्म बन्धन नहीं है वह कामना अच्छी हे ।
_____________
धन्यवाद 🙏
________________
डिप्रेशन तब तक नहीं हो सकता,
जब तक अपने आप को बहुत मजबूर अनुभव न करो और मजबूर हम नहीं होते, मजबूर हमें हमारी अन्धी कामनाएँ बनाती हैं।
कामनाओं में भी कोई दिक्कत नहीं हैं अगर वो अन्धी न हों।
कुछ ऐसा माँग रहे हो, जो मिल सकता ही नहीं। फिर जब पाओ कि वो मिल नहीं रहा तो डिप्रेस्ड हो जाओ, ये कहाँ की समझदारी हैं बताओ!
तुम आधी रात में सूरज की माँग कर रहे होते हो। तुम शराब पीकर होश चाह रहे होते हो। वो हो नहीं सकता।
फिर वो जब होता नहीं है, तो बुरा लगता है, बार-बार बुरा लगता है, उस स्थिति को तुम नाम दे देते हो अवसाद का।
कुछ अगर सही है, तो उस पर डटे रहो। कुछ अगर झूठा और भ्रामक है, तो छोड़ कर आगे बढ़ो। ये अवसाद बीच में कहाँ से आ गया!
तुम्हारी कामना, तुम्हारा लक्ष्य, अगर वो असली है, सुन्दर है और तुम्हें सच्चाई और मुक्ति की ओर ले जाता है तो बढ़ा चल नौजवान!
और जिन चीज़ों से अटके हुए हो, अगर वो मूर्खतापूर्ण हैं, तो तुम्हारे हित में यही है कि स्वीकार लो कि वो मूर्खतापूर्ण हैं, कम से कम कामना करना तो छोड़ दो।
या तो इतना दम दिखाओ कि बेवकूफ़ी की चीज़ों से अटका हूँ तो आगे बढ़ जाऊँगा। आगे नहीं बढ़ सकते, मान लो अटक ही गये हो, तो अटके ही रहो पर ये उम्मीद तो छोड़ दो कि यहाँ तुम्हें कुछ बहुत ऊँचा मिल जाना है।
जहाँ पर कामना नहीं हैं वहाँ विषाद नहीं हो सकता। डिज़ायर के बिना फ्रस्ट्रेशन कैसा?
संपूर्ण कामनाओं का त्याग मुक्ति हे
केवल ईश्वर को पाने की कामना रहे शेष
दूसरो की सेवा के लिए किया गया कर्म बन्धन नहीं है वह कामना अच्छी हे ।
_____________
धन्यवाद 🙏
यदि तुम ये सोचते हो कि पोर्नोग्राफी मुफ्त है ।
तो एक बात हमेशा याद रखना
😱😱😱😱😰😰😰😰😱😱😥😥😓
इसकी सबसे बड़ी कीमत तुम्हारा वीर्य है
दूसरी बड़ी कीमत तुम्हारा समय है
तीसरी बड़ी कीमत तुम्हारी अच्छाई है ।
📛📛📛📛📛
जनहित में जारी
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Note:-ब्रह्मचर्य क्या है??क्यों जरूरी है?
सामान्य अर्थ में तो सर्वोत्तम आचरण,और दिव्य दिनचर्या का व्यवहार ही ब्रह्मचर्य है।
लेकिन शास्त्रानुसार मन, वचन और कर्म यानी व्यवहार से पूरी तरह वासना और अश्लीलता के चिंतन का त्याग ही ब्रह्मचर्य है।
क्योंकि तभी आपकी जीवनी शक्ति , जो सन्तान के निर्माण में उपयोगी होती है।
वह व्यर्थ होने से बचकर,आपको बोहत सूंदर, पवित्र और बलशाली बनाती है
जिस सन्तान को हम ईश्वर का उपहार कहते है। भला उसे खेल खेल में नष्ट करना कितना उचित है???🤔
जिस कार्य को करने के बाद मुर्दा लाश जैसे पड़े -पडे़ ,सिर्फ पश्चाताप करे??🤔
क्या वह कभी आपका भला कर सकता है??खुद विचार कीजिये।🤔
दुर्भाग्य है देश का। जिसमें 40 करोड़ युवा तो है। लेकिन बोहत बड़ी संख्या में अश्लील फिल्मों में डूबकर अपनी शक्ति को जाने अनजाने नाली में बहा रहे है।😌
खुद में थोड़ा अब झांकिए
महापुरुष कह गए है,
कि अनुभवों से प्राप्त ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है👍
सम्भव है आपके एक share से किसी को इन बुरी आदतों से बाहर निकलने के लिये सही ज्ञान मिल जाय
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लेकिन शास्त्रानुसार मन, वचन और कर्म यानी व्यवहार से पूरी तरह वासना और अश्लीलता के चिंतन का त्याग ही ब्रह्मचर्य है।
क्योंकि तभी आपकी जीवनी शक्ति , जो सन्तान के निर्माण में उपयोगी होती है।
वह व्यर्थ होने से बचकर,आपको बोहत सूंदर, पवित्र और बलशाली बनाती है
जिस सन्तान को हम ईश्वर का उपहार कहते है। भला उसे खेल खेल में नष्ट करना कितना उचित है???🤔
जिस कार्य को करने के बाद मुर्दा लाश जैसे पड़े -पडे़ ,सिर्फ पश्चाताप करे??🤔
क्या वह कभी आपका भला कर सकता है??खुद विचार कीजिये।🤔
दुर्भाग्य है देश का। जिसमें 40 करोड़ युवा तो है। लेकिन बोहत बड़ी संख्या में अश्लील फिल्मों में डूबकर अपनी शक्ति को जाने अनजाने नाली में बहा रहे है।😌
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क्रोध क्या है? क्रोध क्यों आता हैं?
मित्रों आप सभी ने क्रोध की अग्नि के विषय में सुना होगा। क्रोध की अग्नि सब कुछ नष्ट कर देती है यहां तक कि संबंधों को भी भस्म कर देती है। मित्रों क्रोध को अग्नि की संज्ञा दी गई है। अग्नि को पवित्र है पावक है देवताओं के समान पूजनीय है और यदि अग्नि पूजनीय व पोषक है तो क्रोधाग्नि केवल घातक और विनाशकारी कैसे सिद्ध हुई?
अग्नि वन में प्रवेश कर जाए तो सारे वन का सर्वनाश कर देती है और वही अग्नि चूल्हे में प्रवेश कर जाती है तो अन्न पकाने में सहायक सिद्ध होकर सभी प्राणिमात्र का उदर भरण करने वाले देवता सदृश सिद्ध होती है. ..स्पष्ट है मित्रो, अग्नि ऊर्जा है और ऊर्जा का आप जैसे प्रयोग करेंगे वैसा ही फलदायक सिद्ध होगी चाहे सकारात्मक हो चाहे नकारात्मक उसी प्रकार क्रोध की अग्नि को भी यदि आप उचित स्थान पर प्रयोग करेंगे तो सर्वहितकारी सिद्ध होगी। उदाहरण के रूप में लीजिए यदि क्षत्रिय को क्रोध नहीं आएगा तो वह रणक्षेत्र में विजय प्राप्त करना दूर की बात है आत्मरक्षण भी नहीं कर पाएगा।
श्री कृष्ण को क्रोध आया तभी उन्होंने कालिया, कंस, शिशुपाल आदि का वध किया और समाज का कल्याण किया, शिवजी को क्रोध आया तभी उन्होंने तारकासुर, और अन्य राक्षसों का वध किया। जगतजननी माँ जगदम्बा को क्रोध आया तभी उन्होंने महिषासुर, मधु-कैटब, शुम्भ निशुम्भ आदि भयंकर राक्षसों का वध कर सुर और मानव समाज की रक्षा करी
अर्थ स्पष्ट है मित्रो, जिस प्रकार सर्पदंश के तोड़ के स्वरूप में सर्प का ही विष औषधि का कार्य कर मरणासन्न पीड़ित को पीड़ा से मुक्ति दिलाकर जीवनदान प्रदान करता है उसी प्रकार तामस क्रोध पर सात्विक क्रोध विजय प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होता है। असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय का साम्राज्य स्थापित करने में सहयोग करता है।
क्रोध यदि संतुलित हो और उचित स्थान पर हो तो औषधि है जैसे बालको को पर माता पिता और कनिष्ठों पर वरिष्ठ क्रोध ना करे गुर शिष्य पर क्रोध न करे तो समाज में अनुशासनहीनता का साम्रज्य स्थापित हो जाएगा। इसीलिए क्रोध को अग्नि की संज्ञा दी गई है जिस स्थिति में जिस प्रकार और जिस संदर्भ में आप उसे उपयोग में लाएंगे वैसा ही फल प्राप्त करेंगे.
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मित्रों आप सभी ने क्रोध की अग्नि के विषय में सुना होगा। क्रोध की अग्नि सब कुछ नष्ट कर देती है यहां तक कि संबंधों को भी भस्म कर देती है। मित्रों क्रोध को अग्नि की संज्ञा दी गई है। अग्नि को पवित्र है पावक है देवताओं के समान पूजनीय है और यदि अग्नि पूजनीय व पोषक है तो क्रोधाग्नि केवल घातक और विनाशकारी कैसे सिद्ध हुई?
अग्नि वन में प्रवेश कर जाए तो सारे वन का सर्वनाश कर देती है और वही अग्नि चूल्हे में प्रवेश कर जाती है तो अन्न पकाने में सहायक सिद्ध होकर सभी प्राणिमात्र का उदर भरण करने वाले देवता सदृश सिद्ध होती है. ..स्पष्ट है मित्रो, अग्नि ऊर्जा है और ऊर्जा का आप जैसे प्रयोग करेंगे वैसा ही फलदायक सिद्ध होगी चाहे सकारात्मक हो चाहे नकारात्मक उसी प्रकार क्रोध की अग्नि को भी यदि आप उचित स्थान पर प्रयोग करेंगे तो सर्वहितकारी सिद्ध होगी। उदाहरण के रूप में लीजिए यदि क्षत्रिय को क्रोध नहीं आएगा तो वह रणक्षेत्र में विजय प्राप्त करना दूर की बात है आत्मरक्षण भी नहीं कर पाएगा।
श्री कृष्ण को क्रोध आया तभी उन्होंने कालिया, कंस, शिशुपाल आदि का वध किया और समाज का कल्याण किया, शिवजी को क्रोध आया तभी उन्होंने तारकासुर, और अन्य राक्षसों का वध किया। जगतजननी माँ जगदम्बा को क्रोध आया तभी उन्होंने महिषासुर, मधु-कैटब, शुम्भ निशुम्भ आदि भयंकर राक्षसों का वध कर सुर और मानव समाज की रक्षा करी
अर्थ स्पष्ट है मित्रो, जिस प्रकार सर्पदंश के तोड़ के स्वरूप में सर्प का ही विष औषधि का कार्य कर मरणासन्न पीड़ित को पीड़ा से मुक्ति दिलाकर जीवनदान प्रदान करता है उसी प्रकार तामस क्रोध पर सात्विक क्रोध विजय प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होता है। असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय का साम्राज्य स्थापित करने में सहयोग करता है।
क्रोध यदि संतुलित हो और उचित स्थान पर हो तो औषधि है जैसे बालको को पर माता पिता और कनिष्ठों पर वरिष्ठ क्रोध ना करे गुर शिष्य पर क्रोध न करे तो समाज में अनुशासनहीनता का साम्रज्य स्थापित हो जाएगा। इसीलिए क्रोध को अग्नि की संज्ञा दी गई है जिस स्थिति में जिस प्रकार और जिस संदर्भ में आप उसे उपयोग में लाएंगे वैसा ही फल प्राप्त करेंगे.
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⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠
संसार से बलात्कार जैसी अमानवीय कृत्य को हटाना है तो ब्रह्मचर्य का प्रचार करो यही उपाय है एकमात्र ।
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⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠⚠
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New #celibacybookssummary coming soon...🤩💪
नयी "ब्रम्हचर्य पुस्तक सारांश" जल्दी ही आ रहा है चैनल पर 🤩💪
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✨सफल होने के लिए सुबह उठते ही ये करे 👇
🔰 सुबह उठते🛌ही यह कार्य करें l जैसे:-
1. अपना बिस्तर बनाना l
2. सुबह-सुबह अपने फोन📱की जांच ना करें l
3. थोड़ा पानी🚰पिए & उषा पान करें l
4. अपने शरीर🏃♂️को स्ट्रेच🧘♂️करें l
5. अपना चेहरा🧖♂️धोएं l
6. अपनी दैनिक टू-डू लिस्ट📑लिखें या समीक्षा करें l(प्लानिंग )
7 कम से कम 15 मिनट मेडिटेशन (ध्यान) 🧘♂ जरूर करे।
8 टहलने चले जाए।
✨सबसे महत्वपूर्ण 💫बात:-
"अपनी उर्जा⚡और समय⏳🌞🌜⭐को सही जगह केंद्रित करने का प्रयास करें l"
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