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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE)
Imp for mains Paper 7 part 3 as well as pre
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भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE)
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भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE)
यूं तो हर दिन गुज़र जाती है,
हर पल तुम्हारी कशिश सी आती है।
ए खुदा........
और कितने फासले लिखें हैं दरमियां!
जो हर बार सिलेबस मुकम्मल करते हैं
फ़िर भी कुछ न कुछ कमी रह जाती न।



😉😂😇🤣🙃


हंसते रहिए मुस्कुराते रहिए 😊

Sweet dreams friends
DHARAVI
🤩15❤9👍1
🔆 प्रश्न: कला और संस्कृति में राष्ट्रकूटों के योगदान पर चर्चा कीजिए।

📍 उत्तर:
राष्ट्रकूटों (8वीं-10वीं शताब्दी) ने धर्म, साहित्य और वास्तुकला में उल्लेखनीय योगदान दिया और प्रारंभिक मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध बनाया।

📍 धार्मिक संरक्षण
✅ शैव और वैष्णव धर्म को बढ़ावा दिया, शिव और विष्णु की पूजा को लोकप्रिय बनाया।
✅ धार्मिक सहिष्णुता का पालन किया, अरब मुस्लिम बसने वालों को स्वतंत्रता दी → मोपला समुदाय का विकास।

📍 साहित्यिक संरक्षण
✅ संस्कृत साहित्य: त्रिविक्रम (नलचम्पु), हलायुद्ध (कविरहस्य), शाकाटयान (अमोगावृत्ति)।
✅ जैन साहित्य: जिनसेन (पार्श्वभूदय), गुणभद्र (आदिपुराण), महावीर आचार्य (गणितसार-संग्रह) जैसे विद्वानों का समर्थन किया।
✅ कन्नड़ साहित्य:
• अमोघवर्ष का कविराजमार्ग → प्रथम कन्नड़ काव्य रचना।
• पंपा, पोन्ना, रन्न → प्रसिद्ध कन्नड़ कवि।

📍 कला एवं स्थापत्य कला
✅ एलोरा कैलाश मंदिर: शैलकृत, द्रविड़ शैली, हिंदू देवी-देवताओं की जटिल मूर्तियाँ।
✅ एलीफेंटा गुफाएँ: शिव के भव्य चित्रण।
✅ मंदिर: कृष्ण तृतीय ने रामेश्वरम में मंदिर बनवाए (कृष्णेश्वर, गढ़ मार्कंड, दित्य मंदिर)।

📍 निष्कर्ष
✅ राष्ट्रकूटों ने साहित्यिक उत्कृष्टता, स्थापत्य कला के चमत्कारों और धार्मिक संरक्षण से युक्त एक सांस्कृतिक स्वर्ण युग का पोषण किया, जिसने भारतीय कला एवं संस्कृति पर एक अमिट छाप छोड़ी।
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खुद में खुद को भूलकर
तिनका तिनका वार रहा
प्यास घड़े से कैसे बुझे
जो समंदर को निहार रहा
ख़लिश ..........
न समझे उस इंसान की कोई
जो कामयाबी की राह में
सालों से दिन गुज़ार रहा.......


Good morning 🌅
धारावी 😊
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https://www.youtube.com/live/kloc_70pIZk?si=8atnFZ9kPBqUtI7O

Dr Ajay Kumar, UPSC Chairman has conducted the town hall meeting and interacted with students.
This is a commendable step in bringing accountability.


UPSC के चेयरमैन इंटरव्यू

Cgpsc/ vyapam के Chairman / Head को भी aisi इंटरव्यू देना चाहिए

क्यों इतने प्रश्न विलोपित होते है क्या आयोग / व्यापम के पास एक्सपर्ट की कमी है? या प्रश्न बनाने के बाद उसे चेक नहीं करते
बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के स्वरूप हर साल दशहरा पर्व मनाया जाता है।

इस दिन रावण दहन के साथ बुराई को समाप्त करने का संकल्प लिया जाता है।

यह न केवल भगवान श्रीराम के द्वारा रावण के वध बल्कि धर्म की विजय का प्रतीक है। 
दशहरा की शुभकामनाएं दोस्तो 💥
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रावण बुराई का प्रतीक है और आज विजय दशमी है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों में कुछ ऐसी बुरी आदतें होती हैं जो उनकी असफलता का कारण बनती हैं। @cgpscraceacademy

​इन 10 बुरी आदतो से छात्रों को बचना चाहिए:

​टालमटोल करना (Procrastination): सबसे बड़ी और सबसे आम आदत है पढ़ाई को लगातार टालते रहना। यह सोचकर कि "कल कर लेंगे" या "अभी बहुत समय है," छात्र महत्वपूर्ण विषयों को अंत समय के लिए छोड़ देते हैं, जिससे तनाव बढ़ता है और रिविज़न ठीक से नहीं हो पाता।

​अव्यवस्थित या अनियोजित तैयारी (Disorganized or Unplanned Preparation): एक उचित अध्ययन योजना (Study Plan) या समय सारणी (Time-Table) का पालन न करना। बिना लक्ष्य और योजना के पढ़ने से पता नहीं चलता कि क्या और कितना कवर किया गया है, और तैयारी दिशाहीन हो जाती है।

​असमान रूप से पढ़ना (Uneven Study Focus): केवल पसंदीदा या आसान विषयों पर अधिक ध्यान देना और कठिन या कम रुचिकर विषयों को नज़रअंदाज़ कर देना। परीक्षा में सभी विषयों के अंक मायने रखते हैं, और किसी भी सेक्शन को छोड़ना जोखिम भरा होता है।

​लगातार सोशल मीडिया और गैजेट्स का उपयोग (Excessive Use of Social Media and Gadgets): पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, या मनोरंजन पर अत्यधिक समय बिताना। इससे एकाग्रता भंग होती है और पढ़ाई का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है।

​पर्याप्त नींद न लेना (Lack of Adequate Sleep): परीक्षा के तनाव में अक्सर छात्र नींद से समझौता करते हैं। पर्याप्त नींद न लेने से याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और समझने की शक्ति (Cognitive Functions) कम हो जाती है।

​सिर्फ पढ़ना, अभ्यास न करना (Only Reading, No Practice): केवल किताबों से पढ़ना या नोट्स बनाना, लेकिन मॉक टेस्ट या पिछले वर्ष के प्रश्न पत्रों का अभ्यास न करना। इससे टाइम मैनेजमेंट और परीक्षा पैटर्न की समझ विकसित नहीं हो पाती।

​अत्यधिक अध्ययन सामग्री का संग्रह (Hoarding Excessive Study Material): बहुत सारी किताबें, नोट्स, या कोचिंग सामग्री जमा कर लेना। अनेक स्रोतों से पढ़ने की कोशिश में भ्रम पैदा होता है, और किसी भी विषय पर पूर्ण महारत हासिल नहीं हो पाती।

​स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ करना (Ignoring Health): पौष्टिक भोजन न करना, व्यायाम न करना और तनाव को सही तरीके से मैनेज न करना। खराब शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता और परीक्षा के प्रदर्शन पर पड़ता है।

​नकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की कमी (Negative Thinking and Lack of Confidence): खुद की क्षमताओं पर संदेह करना, दूसरों से अपनी तुलना करना, और सकारात्मक दृष्टिकोण न रखना। यह मानसिकता तैयारी की प्रेरणा को कम करती है।

​गलतियों से न सीखना (Not Learning from Mistakes): मॉक टेस्ट या अभ्यास के दौरान की गई गलतियों का विश्लेषण न करना और उन्हें दोहराते रहना। गलतियों को पहचानना और सुधारना ही सफलता की कुंजी है
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दोस्तो 👆👆 इन 10 बुराइयों को आज जब आप रावण मारने जाएंगे
तो इन बुराइयों को दमन करने का संकल्प लेना
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देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला है
Anonymous Quiz
14%
धमतरी
11%
रायपुर
11%
बिलासपुर
64%
बालोद
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छ.ग. स्टेट क्रिकेट संघ के वर्तमान अध्यक्ष है
Anonymous Quiz
17%
आर. हरीश
52%
वी. मोहनदास
18%
शिवनारायण दास
13%
अनंत नाग
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छत्तीसगढ़ के नव नियुक्त मुख्य सचिव विकास शील कौन से क्रम के है
Anonymous Quiz
9%
12 वे
61%
13 वें
29%
14 वें
2%
11 वें
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यदि भारत के उपराष्ट्पति अपने कार्यकाल के दूसरे वर्ष त्यागपत्र दे दे तो नए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होगा?
Anonymous Quiz
32%
3 वर्ष
44%
5 वर्ष
9%
अनिश्चित काल
14%
2 वर्ष 6 माह
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You can’t force a walnut to ripen and you can’t rush your becoming either.

In CGPSC prep, some breakthroughs don’t come after more hours,
they come after more trust in your rhythm, your effort, your pace.

🌿 While others post ranks and reels, just keep watering your mind.
You’re not behind, you’re ripening. Quietly. Strongly. Surely.

And when it’s time, your shell will crack — and the world will call it sudden.
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आप अखरोट को पकने के लिए मजबूर नहीं कर सकते और न ही आप अपनी सफलता की ओर तेज़ी से बढ़ सकते हैं।

सीजीपीएससी की तैयारी में, कुछ सफलताएँ ज़्यादा घंटों के बाद नहीं मिलतीं,
वे आपकी लय, आपके प्रयास और आपकी गति पर ज़्यादा भरोसा करने के बाद मिलती हैं।

🌿 जब दूसरे लोग रैंक और रील पोस्ट करते हैं, तो बस अपने मन को सींचते रहें।
आप पीछे नहीं हैं, आप पक रहे हैं। चुपचाप। मज़बूती से। ज़रूर।

और जब समय आएगा, तो आपका खोल टूट जाएगा — और दुनिया इसे अचानक कहेगी।
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🔆 भारत की व्यापार नीति: संरक्षणवाद से उदारीकरण तक

📍 परिचय
✅ भारत की विदेशी व्यापार नीति ने अंतर्मुखी संरक्षणवाद से बहिर्मुखी उदारीकरण की ओर विकास किया है, जो आर्थिक विकास और निर्यात संवर्धन का मार्गदर्शन करती है।

📍 भारत की व्यापार नीति का विकास
✅ प्रारंभिक वर्ष (1947–1960 के दशक): घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए आयात प्रतिस्थापन, टैरिफ, कोटा।
✅ 1960–1980 के दशक: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विकास, संरक्षणवाद जारी (FERA 1974, MRTP अधिनियम 1969)।
✅ 1991 आर्थिक सुधार: संकट-प्रेरित उदारीकरण, टैरिफ में कटौती, निर्यात उन्मुखीकरण।
✅ 2000 से वर्तमान: डिजिटल अर्थव्यवस्था, मुक्त व्यापार समझौते, द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर ध्यान।

📍 विकास को प्रेरित करने वाले प्रमुख क्षेत्र
✅ आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाएं – प्रमुख बीपीओ और आईटी निर्यातक।
✅ फार्मास्यूटिकल्स – आवश्यक दवाओं और टीकों का निर्यात।
✅ ऑटोमोबाइल और घटक – यात्री कारें, दोपहिया वाहन, ऑटो पार्ट्स।
✅ वस्त्र और परिधान – परिधान, यार्न, कपड़े।
✅ रसायन और पेट्रोकेमिकल्स – फार्मा, उर्वरक, पेट्रोलियम।
✅ कृषि उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण – चावल, मसाले, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ।

📍 व्यापार विस्तार में चुनौतियां
✅ भू-राजनीतिक तनाव: जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट।
✅ नीति और नियामक मुद्दे: WTO अनुपालन, नौकरशाही में देरी।
✅ व्यापार असंतुलन: कई देशों के साथ लगातार घाटा।
✅ प्रतिस्पर्धात्मकता के मुद्दे: सस्ते वैश्विक विकल्पों की तुलना में उच्च लागत।
✅ गुणवत्ता मानक: MSMEs को वैश्विक अनुपालन में कठिनाई।

📍 आगे का रास्ता
✅ इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स – बंदरगाह, गोदाम, आपूर्ति श्रृंखलाएं।
✅ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौते – गहरे FTAs।
✅ अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिकी अपनाना – IoT, स्वचालन, डिजिटल प्लेटफॉर्म।
✅ ब्रांड इंडिया का प्रचार – सरकार + उद्योग पहल।
✅ आकार की अर्थव्यवस्थाएं – कम लागत, उच्च प्रतिस्पर्धात्मकता।

📍 निष्कर्ष
✅ विदेशी व्यापार नीति 2023 के साथ, भारत 2030 तक $2 ट्रिलियन निर्यात प्राप्त करने का लक्ष्य रखता है, जिसमें UPI, ब्रांड इंडिया, FTAs, और डिजिटल ट्रेड प्लेटफॉर्म जैसे सुधार मददगार हैं।
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ऊर्जा की नई दिशाएं....
एक निष्क्रिय मन संदेह पैदा करता है, लेकिन एकाग्र मन शक्ति पैदा करता है अपने लक्ष्य में व्यस्त रहो, और नकारात्मकता तुम्हें छूने की हिम्मत नहीं करेगी

ज़्यादातर समय, हम हतोत्साहित या उदास महसूस करते हैं, इसलिए नहीं कि ज़िंदगी हमारे खिलाफ है, बल्कि इसलिए कि हम अपने लक्ष्य में पूरी तरह से व्यस्त नहीं हैं। जब हम अपने असली उद्देश्य की उपेक्षा करते हैं, तो मन बेचैन हो जाता है, और वह बेचैनी नकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है जो हमें नीचे खींचती है

इसका समाधान सरल है खुद को अपने काम में पूरी तरह से शामिल रखें जब भी आपका मन भटके, उसे सही रास्ते पर लाएँ और फिर से काम में लगा दें। जब आप लगातार अपने लक्ष्य में व्यस्त रहते हैं, तो नकारात्मकता के लिए कोई जगह नहीं बचती। इसके बजाय, आपका मन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है, आपका आत्मविश्वास अटूट हो जाता है, और आप खुद पर पहले से कहीं ज़्यादा विश्वास करने लगते हैं।
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