CGPSC RACE
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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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34 days left 💥
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6 jun 😊 aisa hi rhega...
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PVTG p6p3
❤3👍1
वन अधिकार अधिनियम 2006
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पांचवी और छठवीं अनुसूची में अंतर
❤3👍2
NEP 2020 p7p3
❤4👍2
उम्र गुजर रही है, पर जीना बाकी है। जमीन पर गिरने वालों को उठकर जवाब देना बाकी है। 🚀

मैं मंजिल के सफर पर हूँ, उसे पाना बाकी है। लोगों को मेरी हार पर चर्चा करने दो, कामयाबी का शोर मचाना बाकी है। 🏆

वक्त को अपनी मनमानी करने दो, मेरा वक्त आना बाकी है। जो मुझे लॉसर समझ रहे हैं, उनको जवाब देना बाकी है। ⏳

मैं अपने किरदार को निभा रहा हूँ, पर्दा गिरते ही तालियाँ बजना बाकी है। कुछ हाथ से नहीं गया, बहुत कुछ पाना बाकी है... ✨
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रुक क्यों गया? बढ़ता चल,
डर से अपने लड़ता चल।
ये लोग तो बातें बनाते रहेंगे,
तू खुद पर भरोसा रख और चलता चल
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Hello Frds

Kaise ho sab?

लंबे समय के बाद इस चैनल में activities फिर से शुरू हुई ह
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मत पूछ कितनी दूर शिखर है, मत सोच कितनी राह बची,
चलते रहना धर्म साधक का, चाहे साँस रहे या न रहे।
हर असफलता की चिंगारी, भविष्य का सूर्य बनाती है,
जो रुक जाए वह साधारण है, जो बढ़ता जाए व असाधारण है।
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Comment ans 👇
❤5
वंदे मातरम्" का अंग्रेजी में अनुवाद किसने किया था?
Anonymous Quiz
2%
A. महात्मा गांधी
34%
B. बी. सी. चटर्जी
54%
C. श्री अरविंदो घोष
10%
D. एस. सी. बोस
❤2👍2
❤2
हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था 🪑
व्यक्ति को मैं नहीं जानता था

हताशा को जानता था 😔

इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया
मैंने हाथ बढ़ाया ✋
मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ

मुझे वह नहीं जानता था
मेरे हाथ बढ़ाने को जानता था

हम दोनों साथ चले 🚶‍♂️🚶‍♀️
दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे

साथ चलने को जानते थे।

~विनोद कुमार शुक्ल ✍️


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रायपुर के तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल की 10वीं की छात्रा महिमा राजपूत का चयन अंतरराष्ट्रीय स्पेस मिशन 'ShaktiSAT' के लिए हुआ है। वह देश भर से आए आवेदनों के बीच कई चरणों की ऑनलाइन चयन प्रक्रिया को पार कर नेशनल फाइनलिस्ट बनी हैं।
@cgpscraceacademy
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छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पद्मश्री सम्मानित सोशल वर्कर फूलबासन बाई यादव के सघर्ष की कहानी

एक दौर ऐसा भी था जब पहनने की साड़ियों में 50 से ज्यादा छेद हुआ करते थे।

गरीबी और तंगहाली से इस कदर परेशान हो चुकी थीं कि एक दिन अपने बच्चों के साथ सुसाइड करने के इरादे से रेलवे ट्रैक तक पहुंच गईं, लेकिन वहां उनकी छोटी-छोटी बेटियों की मासूमियत ने उन्हें रोक लिया। बेटियों से मिली उसी प्रेरणा के बाद उन्होंने जिंदगी से हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा
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सवाल: क्या कोई ऐसा सपना है, जो पद्मश्री मिलने के बाद भी अधूरा है?

जवाब: महिलाओं को जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। 11 महिलाओं से शुरू हुआ मेरा काम आज करीब 2 लाख महिलाओं तक पहुंच गया है। बचत, स्वरोजगार, जैविक खेती, जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े काम हैं, जिस पर लगातार काम कर रही हूं। समाज में महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने लगातार काम करती रहूंगी।
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वीबी-जी राम जी के तहत मजदूरी 10% बढ़ी
ईवी नीति 2.0: चार्जिंग
इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो