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समावेशी विकास और चुनौतिया
Paper 5 भाग 1 @cgpscraceacademy

समावेशी विकास विकास की एक अवधारणा को संदर्भित करता है जो आर्थिक विकास, रोजगार के अवसर प्रदान करता है और गरीबी को कम करता है, वंचितों को बुनियादी स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने का प्रयास करता है

भारत में समावेशी विकास की प्रमुख चुनौतियों को संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है-

असमानता: अमीर और गरीब, शहरी और ग्रामीण, शिक्षित और अशिक्षित के बीच।

जनसांख्यिकी: आधा भारत युवा है जिसे पोषण, कौशल और नौकरी के अवसर प्रदान करके दुनिया के लिए कुशल कार्यबल में परिवर्तित किया जा सकता है।

भारत में, विकसित देशों की तुलना में श्रम शक्ति की रोजगार क्षमता बहुत कम है जो मानव शक्ति के उपयोग को प्रतिबंधित करती है।

ब्रिटेन में 70% और दक्षिण कोरिया में 96% की तुलना में भारत में केवल 2% श्रम शक्ति प्रमाणित कुशल है।
- यह भारत में बेकार जनशक्ति की उपस्थिति का एक मुख्य कारण है।

नीति निर्माण: कल्याणकारी नीतियों तक समावेशी पहुंच, लोगों की सुरक्षा, भ्रष्टाचार में कमी, स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना, बीमा प्रदान करना अभी भी एक दूर का सपना है।

आवश्यक उपाय:

•ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च में वृद्धि - आधारभूत संरचना, सड़कें, संपर्क, रोजगार सृजन,

•शिक्षा, स्वास्थ्य और एमएसएमई क्रेडिट पर खर्च में वृद्धि।

•व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास, ई-गवर्नेंस पहल, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के साथ-साथ जेंडर बजटिंग सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

मनरेगा, सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, जन धन योजना जैसी सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं को संबंधित क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ लागू करने की आवश्यकता है।

        
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✒️आज का अभ्यास प्रश्न✒️

इमाईल दुर्खिम के मतानुसार व्यक्ति एवं समाज में संबंध की क्या प्रकृति है? समाज में श्रम विभाजन के उनके विश्लेषण की मदद से इसे समझाइये।
@cgpscraceacademy

दुर्खीम ने अपनी पुस्तक Social Division of Labour में सामाजिक एकता एवं समाजिक श्रम विभाजन का विश्लेषण किया है।
सबसे प्राचीन समाजों में श्रम विभाजन स्त्री-पुरुष के भेद पर आधारित था। इस समाज में यांत्रिक एकता की विद्यमानता थी।
इसमें सदस्यों में मानसिक तथा नैतिक आधार पर अत्यधिक समानता थी। साथ ही, उन पर जनमत, परम्परा, धर्म आदि का दबाव रहता था। व्यक्ति के रूप में किसी का भी कोई महत्व नहीं था।
सब मिलकर सब काम कर लिया करते थे। चूँकि श्रम विभाजन नहीं था, इस कारण विशेषीकरण का भी कोई प्रश्न न था।
जैसे-जैसे सभ्यता का विकास हुआ वैसे- आर्थिक विकास, जनसंख्या के भौतिक घनत्व में वृद्धि हुई किसी निश्चित  क्षेत्र मे जनसंख्या में वृद्धि फलतः: आवश्यकता में वृद्धि व संसाधनों का कम पड़ जाना श्रम विभाजन के विकास का कारण बन जाता है।
प्रभाव
• प्राचीन समाज में पारस्परिक निर्भरता
• आधारित सामाजिक एकता  स्थापित
• सामान्य श्रम विभाजन
• सामाजिक एकता में वृद्धि
• असामान्य श्रम विभाजन
• सामाजिक एकता कमजोर 

Durkhim के अनुसार आदिम समय की एकता में श्रम विभाजन व विशेषीकरण का अभाव होता है, समाज से पृथक व्यक्ति को महत्व नहीं दिया जाता है। वैयक्तिक चेतना व सामूहिक चेतना (समाज) में विलीन हो जाती है व्यक्ति व समाज के घनिष्ठ संबंधों के कारण, समाज के नियमों का यंत्रित पालन करता है।
श्रम विभाजन के बढ़ने से प्राचीन समाज में पायी जाने वाली यांत्रिक एकता का कम होने लगा और यौगिक एकता  स्वायत्त एकता मे बदलने लगती है।
आधुनिक समाज मे प्रचलित एकता का वह रूप जहाँ अत्यधिक विभाजन व विशेषीकरण होता है, जहाँ समाज से एक व्यक्ति के व्यक्तित्व की महत्व दिया जाने लगा जिससे पारस्परिक निर्भरता में वृद्धि  होती है  दमनकारी कानून की बजाय प्रतिकारी कानून को बढ़ावा मिला।
अत: स्पष्ट है कि आधुनिक समाज मे श्रम विभाजन व विशेषीकरण होते हुए भी व्यक्तियों के अंत: संबंध, अंत: निर्भरता  को भ्रम-विभाजन को एक दूसरे से संबंधित कर दिया जाता है।
Durkhim के अनुसार जिन प्रकार मानव शरीर में पायी जाने वाली एकता जैसे आँख हाथ, पैर, पेट का एक दूसरे से कोई संबंध नहीं है वास्तव में ये सभी भाग एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से संबंधित और एक दूसरे पर निर्भर है।
आधुनिक औद्योगिक संगठनों में प्रचलित श्रम विभाजन जहाँ एक काम को कई टुकड़ों में बाँटकर अलग-2 व्यक्तियों या  समूह द्वारा करवाया जाता है
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का महत्व बढ़ने पर अपराध को समस्त समाज के विरुद्ध न समझकर व्यक्ति के विरुद्ध समझा जाने लगा अर्थात् दमनकारी कानून कि जगह प्रतिकारी कानून का जन्म हुआ।
व्यक्ति व समाज के मध्य संबंध की प्रकृति के बारे मे  Durkhim द्वारा प्रस्तुत धारणा पर अनेक सामाजिक विचारक(प्लेटों, अरस्तु, फर्ग्यूसन, एडम स्मिथ, सेंट, सारमन, फॉन्ट, स्पेंसर) आदि  उल्लेखनीय है। 
फिर भी Durkhim ने अपने सिद्धांत ने मदद की -
• सामाजिक भूमिका को उजागर करने में
• सामाजिक एकता की समस्या का समाधान प्रस्तुत करने में
• समाज मे विद्यमान श्रम विभाजन के नकारात्मक व्याधियां पक्ष को प्रकट
• लाभकारी पक्षों को प्रस्तुत करने में
अतः व्यक्ति सामाजिक संबंध  की  प्रकृति Durkhim ने स्वायत्त एकता के महत्व वाले समाज मे  व्यक्तित्व को विकसित करके सामाजिक कल्याण कार्यों में अधिकाधिक हाथ बँटा सकें।

✨️✨️✨️✨️✨️@cgpscraceacademy ✍✨️✨️✨️✨️✨️
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विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में बिलासपुर के विद्यार्थियों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय के छात्र आदर्श रंजन, शिवांश गोहिल, सरजन पटेल और सीएच कार्तिक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इनमें आदर्श रंजन के प्रोजेक्ट का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष अनुसंधान प्रवेश कार्यक्रम के लिए हुआ है. वहीं, शिवांश, सरजन और कार्तिक के प्रोजेक्ट राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025-26 के लिए चुने गए हैं.
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😔 अगर आपको लगता है आपके जीवन में सब ku6 खत्म हो चूका है तो इसे पढ़िए
विनोद खन्ना द्वारा लिखी गई आत्मकथा  की कुछ  पंक्तियां …………..
@cgpscraceacademy
“जब मुझे पर्याप्त आत्मविश्वास मिला…. तो मंच खत्म हो चुका था…. जब मुझे हार का यकीन हो गया तब मैं जीता…… जब मुझे लोगों की जरूरत थी… उन्होंने मुझे छोड़ दिया…. जब रोते हुये मेरे आँसू सूख गए…. तो मुझे सहारे के लिए कंधा मिल गया…. जब मैंने नफरत की दुनिया में जीना सीख लिया… किसी ने मुझे दिल की गहराई से प्यार करना शुरु कर दिया…. जब सुबह का इंतजार करते करते मे सोने लगा… सूर्य निकल आया….. यही जिंदगी है… कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या योजना बना रहे हैं आप कभी भी नहीं जान पाते हैं कि जीवन आपके लिए क्या योजना बना रहा है… सफलता आपका दुनिया से परिचय कराती है और असफलता आप को दुनिया का….! इसलिए हमेशा खुश रहो!!
अक्सर जब हम आशा खो देते हैं और लगता है कि यह अंत है भगवान ऊपर से मुस्कराते हैं और कहते हैं कि…शांत रहो वत्स…यह सिर्फ एक मोड़ है अंत नहीं…!!!!!”
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BJ Fogg’s Motivation Graph
आसान भाषा मे
जो काम आपको आसान लगता है उसको करने के लिए आपको कम मोटिवेशन चाहिए
जो काम आपको कठिन लगता है उसको करने के लिए आपको ज्यादा मोटिवेशन चाहिए 
Paper 3 part 2 pubad में motivation एक टॉपिक है 😊
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आंय कहत बांय होना –
सगा होना –
पेट मा आगी बरना –
अटर्रा होना –
कोचई-कांदा होना –
अंजोरी पाख आना –
हॉंत मारना –
चंदर लगना –
👇👇 उत्तर कमेंट करा संगवारी हो चलव देखबो कोन केतना उत्तर सही बताथे 😊
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आंय कहत बांय होना – सगा होना – पेट मा आगी बरना – अटर्रा होना – कोचई-कांदा होना – अंजोरी पाख आना – हॉंत मारना – चंदर लगना – 👇👇 उत्तर कमेंट करा संगवारी हो चलव देखबो कोन केतना उत्तर सही बताथे 😊
Ans
आंय कहत बांय होना – संतुलन खो देना
सगा होना – अपना होना
पेट मा आगी बरना – बहुत भूख लगना
अटर्रा होना – तिरस्कृत होना
कोचई-कांदा होना – विचार सीमित होना
हॉंत मारना – लाभ होना
चंदर लगना – मरते समय मनुष्य की आंखों का खुला रह जाना
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बोनस नम्बर देने का मतलब मैं बस इतना ही समझता हू आप 100 मीटर की एक race मे भाग ले रहे हैं और उस प्रतिस्पर्धा मे कोई (बोनस प्राप्तकर्ता ) 15 मीटर आगे से दौड़ रहा हैं
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👆Mains Paper 5 part 2 Indian Geography
भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताए एवं समस्याएं
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पेपर 7 पार्ट 2
🔆खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)

✅संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी जो भूकमरी को कम करने और पोषण एवं खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करती है।

✅स्थापना: 1945 में क्यूबेक सिटी, कनाडा (मुख्यालय - रोम, इटली) में

✅भारत - 1945 में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल हुआ

✅वैश्विक कवरेज: 195 सदस्यों - 194 देशों और यूरोपीय संघ के साथ, एफएओ दुनिया भर में 130 से अधिक देशों में काम करता है।

वैश्विक रिपोर्ट और प्रकाशन

✅ विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति (SOFI)

✅ कृषि और खाद्य सुरक्षा पर आपदाओं का प्रभाव
✅ खाद्य संकटों पर वैश्विक रिपोर्ट
@cgpscraceacademy
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विशेष्य - विशेषण
Cgpsc mains Hindi
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तद्भव - तत्सम
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इस चैनल को तैयारी के लिए एक अच्छा मंच बनाने के लिए सुझाव दीजिए 👇👇
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Essay
वैश्वीकरण
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बंदूक का जवाब बंदूक से
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बस्तर के विकास