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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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एक दिन, इतनी मेहनत के बाद, आप कभी हार न मानने के लिए खुद को धन्यवाद देंगे।

आप खुद को धन्यवाद देंगे
अपने थके हुए शरीर को उन दिनों में ऊपर लाने के लिए जब आप बस बिस्तर पर पड़े रहना चाहते थे,

और खुद को उस पल तक धकेलने के लिए जब आप आईने में देखते हैं, और कहते हैं “मैंने यह कर दिखाया, मुझे गर्व है।”

यह दिन आज नहीं हो सकता है, लेकिन यह जल्द ही आ जाएगा।

चलते रहे!✅️😊
One day, after all the hard work, you’ll thank yourself for never giving up.

You’ll thank yourself
For bringing your drained body up on days all you wanted to do was stay in bed,

And for pushing yourself to the moment that you look in the mirror, and say “I did it, I’m proud.”

This day may not be today, but it’ll be here soon.
Keep going!
👍13❤7
भारत सरकार ने एलान किया है कि अगली जनगणना में जातिवार आंकड़े भी जमा किए जाएंगे.100 साल बाद ऐसा होगा.इससे जाति आधारित भेदभाव पर कितना असर पड़ेगा?

करीब 100 बाद आखिरकार भारत में जाति जनगणना होगी.यानी असल में पता चल पाएगा कि किस जाति के कितने लोग रहते हैं.विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत सरकार का अगली जनगणना में जाति को शामिल करना बड़ा बदलाव लाने वाला हो सकता है.जातिगत जनगणना का समर्थन कर रहे कई विशेषज्ञ रेखांकित कर रहे थे कि भारत में सामाजिक ताने-बाने से लेकर राजनीति और नौकरियों तक, जातिगत पहचान की भूमिका बेहद अहम है.ऐसे में जातिवार आबादी का आंकड़ा ना होना अपने आप में एक विडंबना है.विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि इस आंकड़े से कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा अधिक सकारात्मक हो सकती है.जाति जनगणना करवाने का निर्णय केवल प्राशासनिक या सांख्यिकीय नहीं है, बल्कि इसके गहरे ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थ हैं.जाति जनगणना की एक लंबी पृष्ठभूमि रही है, जिसकी शुरुआत औपनिवेशिक काल यानी अंग्रेजों के राज में हुई थी.जाति का वर्गीकरणभारत में जाति गणना की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई.देश में आम जनगणना 1871 से नियमित रूप से शुरू हुई, लेकिन 1881 की जनगणना से जातियों की व्यवस्थित गणना शुरू की गई.हालांकि, कई आलोचक इसे भारत में जातीय पहचान को और ज्यादा पुख्ता करने की साजिश के तौर पर देखते हैं.इतिहासकार निकोलस डिर्क्स ने अपनी चर्चित किताब "कास्ट्स ऑफ माइंड" में लिखा, "औपनिवेशिक राज्य ने अपने जातीय सर्वेक्षणों और जनगणनाओं के माध्यम से भारत की लचीली और संदर्भ-आधारित सामाजिक पहचानों को स्थिर वर्गों में बदल दिया"यानी, जो जातियां पहले लचीली थीं, उन्हें ब्रिटिश शासन ने स्थायी, कठोर पहचान बना दिया गया. बहुत से विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी प्रक्रिया ने जाति को भारतीय समाज 9के में केंद्र में ला खड़ा किया.हालांकि, यह गणना कुछ ही दशक तक चली.1931 का सेंसस वह आखिरी जनगणना थी, जिसमें सभी जातियों के आंकड़े जमा किए गए.उसके बाद से केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का ही डेटा इकट्ठा किया जाता रहा है.दिलचस्प बात यह है कि मंडल आयोग (1980) ने ओबीसी की आबादी का अनुमान इन्हीं 1931 के आंकड़ों के आधार पर लगाया और सुझाव दिया कि ओबीसी की आबादी लगभग 52 फीसदी है.यही आंकड़ा 1990 में आरक्षण नीतियों का आधार बना.स्वतंत्र भारत और "जातिहीन" राष्ट्र की कल्पनाआजादी के बाद भारत में सरकार ने विस्तृत जाति जनगणना से दूरी बना ली.विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे वही डर काम कर रहा था कि जाति गणना सामाजिक विभाजन को और बढ़ा सकती है.इस बारे में टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान में शोधकर्ता डॉ.आरबी भगत अपने शोध "सेंसर एंड कास्ट इन्युमरेशन" में लिखते हैं, "स्वतंत्रता के बाद भारत में नवगठित सरकार जातिगत जनगणना को फिर से शुरू करने से डर रही थी.इससे सांप्रदायिक सौहार्द, शांति और भारतीय राष्ट्र की एकता टूट सकती थी"तब सरकार एक जातिहीन देश का सपना देख रही थी.भारत की लोकतांत्रिक परियोजना एक "जातिहीन" समाज की ओर बढ़ना चाहती थी, लेकिन जाति भारत के रोम-रोम में ऐसी बसी हुई है कि यह सपना केवल कागजों पर संभव हुआ.2011 में केंद्र सरकार ने पहली बार 1931 के बाद सभी जातियों की गिनती करने की कोशिश की.यह प्रयास सोशियो-इकोनॉमिक एंड कास्ट सेंसस (एसईसीसी) के जरिए से हुआ. तब देश में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी, जिसने 2011 की जनगणना में जाति आधारित आंकड़े जमा करने का निर्देश दिया.यह काम 1948 के "सेंसस ऑफ इंडिया ऐक्ट" के जरिए नहीं हुआ, बल्कि रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर ऑफ इंडिया ने इसे अलग से किया.इसके नतीजे आने तक मनमोहन सिंह की सरकार जा चुकी थी और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए थे.जुलाई 2014 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने इस सर्वे के आंकड़े जारी किए.इसके मुताबिक, देश में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या 21.53 फीसदी थी.इसके अलावा जाति आधारित कोई आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया.तब कई राज्यों की सरकारों ने आरोप लगाया कि जान-बूझकर सरकार ने जाति के आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं किया.आलोचकों का कहना था कि आंकड़े छिपाने से जाति नहीं छिपती.फिर धीरे-धीरे देश में जाति आधारित जनगणना की मांग तेज होती गई.जाति जनगणना की नई मांग और राजनीतिबिहार जैसे राज्यों ने हाल ही में जाति सर्वेक्षण किए हैं.2023 में बिहार सरकार के सर्वे में पता चला कि ओबीसी और ईबीसी ही राज्य की कुल आबादी का 63 फीसदी से ज्यादा हैं.इससे अन्य राज्यों में भी जाति सर्वेक्षण की मांग बढ़ी है.कर्नाटक, ओडिशा और महाराष्ट्र में भी जाति आधारित डेटा पर राजनीतिक बहसें तेज हुई हैं.
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हमारे एक मेंबर ने मोटिवेशन की मांग की है कि बहुत दिन से कोई पोस्ट नही लिखे ... ओके मैं लिख रहा हु
अभी अपने दिल पर हाथ रखो क्या तुम्हें धड़कन महसूस होती है यह धड़कन सिर्फ खून पंप नहीं कर रही यह तुम्हें याद दिला रही है कि तुम जिंदा हो और इसका मतलब यह है कि तुम्हारे अंदर ताकत है तुम अपना सपना पूरा कर सकते हो इस ताकत से .....कभी-कभी यह धड़कन मुझे एक आग💥 की तरह लगती है दिल में एक चिंगारी है an intense burning desire कुछ पाना है कुछ बनना है अपना सपने सच करना है
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ये दिल की आग 🔥कुछ ऐसी है कि
जब दुनिया सो जाती हैं तो भी तुम्हें जगाती है
जब आँखे 🌚थक चुकी है सोने का मन कर रहा है
फिर भी तुमसे पढ़वाती है
सारे भटकावों से Break up करवा के ☺️
रिश्ता 💝लक्ष्य से तय करवाती है🤗
और सफलता से शादी करवाती है 😂
ये अगाध जुनून है पागलपन है ये आग है
                        - देवेंद्र
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14 अप्रैल 2025 को ये poll create किया था 549 में से 458 (83 %) लोगो ने ये माना कि वे मन से पहले हार जाते है और ये बात सच भी है कई बार हम सिर्फ इसी की वजह से परीक्षा की तैयारी अच्छे से नही कर पाते आत्मविश्वास नही आ पाता इसी की वजह से हमारे efforts डगमगाने लगते हैं हम खुद पर ही संदेह करने लगते है अरे कितना बड़ा लक्षय चुन लिया क्या मेरे से ये हो पायेगा

दोस्तो हमारी कोशिश है कि इस चैनल के माध्यम से आपको मानसिक रूप से मज़बूत बनाने की । आप जरूर एग्जाम में अच्छा करेंगे pls comment👇

I will win ...❤️
I will achieve success
I will prove myself
Success is my responsibility
❤17👍4
सपना पूरा करने का एक और दिन
सुबह हो चुकी है
आज का आपका टारगेट क्या हैं दोस्तों मैं आपको एक छोटा सा चैलेंज देता हूं आज आप एक कोई भी टारगेट सेट करें चाहे जिस भी एग्जाम की तैयारी कर रहे हो Adeo, SI, Cgpsc......
कोई सब्जेक्ट या टॉपिक उठाएं और आज उसे दिन भर में कम्पलीट करने की कोशिश करें
Comment 👇 आज आपका क्या टारगेट हैं
पेपर 7 पार्ट 2
🔰 ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 🏆

🛟 19 फरवरी – 9 मार्च 2025

🛟 होस्ट देश : पाकिस्तान

🛟 विजेता : भारत 🇮🇳 (फाइनल - 4 विकेट से जीत)

🛟 उपविजेता : न्यूजीलैंड

🛟 प्लेयर ऑफ द सीरीज : रचिन रवींद्र (न्यूजीलैंड)

🛟 सबसे ज्यादा रन : रचिन रवींद्र (263 रन)

🛟 सबसे ज्यादा विकेट : मैट हेनरी (10 विकेट)

🛟 विजेता पुरस्कार : $2.365 मिलियन USD

🛟 मैच वेन्यू : कराची, लाहौर, रावलपिंडी

🛟 भारत के मैच : दुबई में खेले गए

🛟 फाइनल वेन्यू : दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम

🛟 फाइनल - प्लेयर ऑफ द मैच: रोहित शर्मा (76 रन)

🛟 रोचक तथ्य : 2024 T20 वर्ल्ड कप फाइनल में विराट कोहली ने 76 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता था, और 2025 ICC चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में रोहित शर्मा ने 76 रन बनाकर यह सम्मान प्राप्त किया! 🏏
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पेपर 5 पार्ट 2
🔰 भारत की कुछ प्रमुख झीलें 🔰

🛟 सांभर झील:-
भारत की सबसे ज़्यादा खारे पानी वाली झील, राजस्थान में स्थित है.

🛟 पुलिकट झील:-
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित, भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून है.

🛟 डल झील:-
जम्मू और कश्मीर में स्थित है.

🛟 हफलोंग झील:-
असम में स्थित है.

🛟 कंवर झील:-
बिहार में स्थित है.

🛟 चिल्का झील:-
भारत की सबसे बड़ी तटीय झील, ओडिशा में स्थित है.

🛟 वुलर झील:-
एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की झील, जम्मू और कश्मीर के बांदीपोरा ज़िले में स्थित है.

🛟 गुरुडोंगमार झील:-
भारत की सबसे ऊंची झील, सिक्किम में स्थित है.

🛟 वेम्बनाड झील:-
भारत की सबसे लंबी झील, केरल में स्थित है.

🛟 गोविंद बल्लभ पंत सागर:-
भारत की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में स्थित है.
FACT for cgpsc Prelims

आओ संवारे कल अपना
चेतना अभियान
रजनेश सिंह IPS द्वारा संचालित चेतना अभियान के दौरान, ‘‘आओ संवारे कल अपना‘‘ समर कैंप थीम पर बिलासपुर पुलिस द्वारा किया गया विविध कार्यक्रम।
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बताइए मैं कौन सा रियासत हूं?
मेरा संस्थापक राजा मदन सिंह को माना जाता है मैं अंग्रेजों के प्रति निष्ठा और स्वामी भक्ति रखता था बरगढ़ का विद्रोह में मैं अंग्रेजों को सहयोग किया प्रथम विश्व युद्ध के समय भी मैंने ब्रिटिश सरकार का सहयोग किया था
Anonymous Quiz
14%
कोरिया
40%
चांगभखार
41%
रायगढ़
5%
कांकेर
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Mains Paper 1 part 1 हिन्दी to english translation

1. ये कब और कैसे हुआ ?
When and how did it happen.

2. बड़बड़ करना बंद करो।
Stop babbling/murmuring.

3. बैठकर पानी पियो
Drink water while sitting.

4. चोट कैसे लगी?
How did it hurt?

5. कहाँ चोट लगी ?
Where did it hurt?

6. उलटे जवाब मत दो
Don't talk back.

7. वो कभी उलटे जवाब नहीं देता
He never talks back

8. इसमें कोई शक नहीं है।
There is no doubt in this.

9. रास्ता पार करने से पहले दोनों तरफ देखो।
Look both the ways before crossing the road.

10. चलो कार में बैठो।
Come on, get into the car.
👍8
❤1
आलेख - राम हृदय तिवारी (लोकरंग के लेख संग्रह से)

युग आते हैं और चले जाते हैं, पर मनुष्‍य जीवन की कुछ ऐसी सच्‍चाईयां हैं, जो कथा की शक्‍ल में शेष रह जाती हैं । पंडवानी महाभारत की ऐसी ही कथा का छत्‍तीसगढी रूपान्‍तरण हैं । छत्‍तीसगढ के आम लोगों की सहज सरल जीवन शैली से, उनके भोले हृदय की धडकनों से संगीत का अविराम स्‍त्रोत बहता है । ग्रामीण जीवन की हर सांस, गीत और नृत्‍य की लयकारी में बंधी होती है । नाचा, करमा, ददरिया, सुआ, बांस गीत, चंदैनी, पंथी, गौरा जंवारा जैसी अनेक लोक विधाएं छत्‍तीसगढ की सांस्‍कृतिक बगिया के महकते हुए फूल हैं – उनमें सर्वोपरि सुगंधित सुमन का नाम है – पंडवानी । पंडवानी छत्‍तीसगढ अंचल के मनोरंजन का पारंपरिक साधन ही नहीं, श्रद्धा, भ‍क्ति, शौर्य और पराक्रम के प्रति ललक की मोहक अभिव्‍यक्ति है । यह एक मौलिक गायन, वादन एवं आंगिक अभिव्‍यक्ति की बहुचर्चित लोक-तात्विक विधा है । देश में ही नहीं विदेशों में भी विख्‍यात पंडवानी ऐसी विशुद्ध एवं अनूठी लोक वाचिक परंपरा है जो मूलत: छत्‍तीसगढ की देन है । छत्‍तीसगढ में सर्वाधिक प्रचलित, परिचित और चर्चित हैं ।
मनुष्‍य का केवल कर्म ही, धर्म-अधर्म का निर्णायक है और सत्‍य-असत्‍य के निर्णायक युद्ध में विजय अंतत: सत्‍य की ही होती है । इस शाश्‍वत निष्‍कर्ष के साथ साथ राग और विराग, प्रेम और घृणा, मानवीय विसंगतियों और विरोधाभाषों से भरे हुए महाभारतीय पात्रों का लोकनिरूपण अद्भुत ढंग से हुआ है पंडवानी में । छत्‍तीसगढी बोली में कितना माधुर्य और विस्‍तार है, जीवन के सूक्ष्‍म और गूढतम भावों को अभिव्‍यक्‍त करने की कितनी अपार क्षमता है – यह पंडवानी की मूल शक्ति है तथा उसकी मोहकता और पहचान की आधारशिला भी । पंडवानी वस्‍तुत: महाभारत की शश्‍वत कथा का छत्‍तीसगढी संस्‍करण है
👍1
छत्‍तीसगढ में गोडों की एक उपजाति परधान के नाम से जानी जाती है और दूसरी घुमन्‍तु जाति होती है – देवार । शोधकर्ता कहते हैं कि पंडवानी मूलत: इन्‍हीं दोनों जातियों की वंशानुगत गायन परंपरा है जो पंडवानी नाम धरकर समयानुसार विकसित होते होते वर्तमान स्‍वरूप तक पहुंची है । परधानों और देवारों की बोली, शैली और वाद्यों में अंतर होता है । परधान के हाथ में होता है किंकणी या बाना नामक सारंगीनुमा वाद्य और रूंझू देवारों का जातिगत वाद्या है । इन दोनों कथा गायन का केन्‍द्रीय चरित्र भीम है । पूरी कथा मुख्‍यत: भीम के ही इर्द गिर्द घूमती है और उसके साथ ही आगे बढती है । इसके गायन में भीम अतुल बल, पौरूष, पराक्रम और साहस का पर्याय होने के साथ साथ गुस्‍सैल और अन्‍याय पर टूट पडने वाला अद्भुत पात्र है, जिसके चित्रण का अनोखा अंदाज श्रोताओं को अवाक् और चमत्‍कृत कर देता है ।
👍5
Use of Could be
👍7❤2🤩1
Use of Would be
👍10🤩2
Use of will be
👍7🤩1