ये मंजिल का रास्ता है.....
थक जाओ सो जाना लेकिन ज़ब उठना
तो फिर से उस रास्ते पर निकल जाना 🔥
ये रास्ता मंज़िल की ओर जाता है
अगर भटकेगा
तो रास्ता लम्बा हो जाएगा 🎯
जो एग्जाम 1 साल की तैयारी मे पास हो सकता था उसमे 5 साल लग जायेगा 👎
और फिर भी नहीं सुधरा तो इससे ज्यादा साल भी लग जाएगा 👎
वक़्त अभी भी हैं सम्हल जा
मंजिल की ओर देख 🥳
और उसी ओर निकल जा 🤗
वही पुस्तके हैं वही बेसिक चीजे हैं तैयारी का तरीका भी वही हैं चाहे दुनिया कितनी भी आधुनिक और तकनीक से लैस हो जाए
वही लिख के नोट्स बनाना हैं
वही बोल बोल के याद करना हैं
हां प्रतिस्पर्धा बढ़ी हैं कंटेंट किताबें ज्यादा हैं लेकिन मानव बुद्धि को आज तक कौन Replace कर पाया हैं ??
सीखने का तरीका आज भी वही हैं इंसान की बुद्धि आज भी वैसे ही काम करती हैं
हां लेकिन आज का इंसान भटका हुआ ज्यादा हैं बस अंतर इतना है 😊
- देवेंद्र 🙏
@cgpscraceacademy
थक जाओ सो जाना लेकिन ज़ब उठना
तो फिर से उस रास्ते पर निकल जाना 🔥
ये रास्ता मंज़िल की ओर जाता है
अगर भटकेगा
तो रास्ता लम्बा हो जाएगा 🎯
जो एग्जाम 1 साल की तैयारी मे पास हो सकता था उसमे 5 साल लग जायेगा 👎
और फिर भी नहीं सुधरा तो इससे ज्यादा साल भी लग जाएगा 👎
वक़्त अभी भी हैं सम्हल जा
मंजिल की ओर देख 🥳
और उसी ओर निकल जा 🤗
वही पुस्तके हैं वही बेसिक चीजे हैं तैयारी का तरीका भी वही हैं चाहे दुनिया कितनी भी आधुनिक और तकनीक से लैस हो जाए
वही लिख के नोट्स बनाना हैं
वही बोल बोल के याद करना हैं
हां प्रतिस्पर्धा बढ़ी हैं कंटेंट किताबें ज्यादा हैं लेकिन मानव बुद्धि को आज तक कौन Replace कर पाया हैं ??
सीखने का तरीका आज भी वही हैं इंसान की बुद्धि आज भी वैसे ही काम करती हैं
हां लेकिन आज का इंसान भटका हुआ ज्यादा हैं बस अंतर इतना है 😊
- देवेंद्र 🙏
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❤18👍2😁1🤩1
आप इस साल 2025 के बारे से क्या सोचते है क्या आप इस साल अपनी ज़िंदगी बदल लेंगे ? क्या इस साल तैयारी के कुचक्र से आजाद हो सकेंगे
Anonymous Poll
75%
हा इसके लिए मैं समर्पित हो लगा हुआ हूं कि इस साल मुझे जॉब लेना है
21%
करना तो चाहता हु लेकिन उतना कुछ खास तैयारी नही
4%
क्या पता , इतना आत्म विश्वास नही कि मैं कुछ ऐसा सोच पाऊ
👍4
प्राचीन भारत में आए चीनी पर्यटकों (यात्रियों) ने भारतीय इतिहास, संस्कृति, धर्म और शिक्षा प्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। इन यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत आज भी ऐतिहासिक स्रोत के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। प्रमुख चीनी यात्रियों में फाह्यान, ह्वेनसांग और इत्सिंग का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। नीचे इन यात्रियों के भारत आगमन, उद्देश्य, यात्राओं और उनके योगदान का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है:
1. फाह्यान (Fa-Hien या Faxian) – 5वीं शताब्दी ईस्वी
काल: 399 ईस्वी से 414 ईस्वी तक भारत यात्रा की
राजा का काल: गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) का शासनकाल
उद्देश्य: बौद्ध धर्मग्रंथों को इकट्ठा करना और बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: गांधार, मथुरा, कन्नौज, कपिलवस्तु, कुशीनगर, पाटलिपुत्र, वाराणसी, नालंदा, गया आदि
मुख्य विशेषताएँ:
फाह्यान ने पाटलिपुत्र में एक सुव्यवस्थित शासन व्यवस्था देखी।
उन्होंने लिखा कि भारत में लोग अहिंसक और धार्मिक थे, और चोरी तथा हत्या जैसे अपराध बहुत कम होते थे।
उन्होंने वर्ण व्यवस्था का भी उल्लेख किया है और ‘चांडालों’ की स्थिति को अत्यंत दयनीय बताया।
उन्होंने बौद्ध धर्म के दो प्रमुख संप्रदायों – हीनयान और महायान – का उल्लेख किया।
ग्रंथ: 'फो-गुओ-जी' (Fo-Kuo-Ki) यानी 'बौद्ध देशों की यात्रा'।
2. ह्वेनसांग (Xuanzang) – 7वीं शताब्दी ईस्वी
काल: 630 ईस्वी से 645 ईस्वी तक भारत यात्रा
राजा का काल: सम्राट हर्षवर्धन (हर्ष)
उद्देश्य: बौद्ध धर्म का अध्ययन और तक्षशिला, नालंदा आदि विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: लाहौर, मथुरा, कन्नौज, प्रयाग, नालंदा, वाराणसी, कुशीनगर, बोधगया, श्रावस्ती आदि
मुख्य विशेषताएँ:
ह्वेनसांग ने भारत की शिक्षा प्रणाली, नालंदा विश्वविद्यालय और विभिन्न बौद्ध मठों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने हर्षवर्धन के शासन की प्रशंसा की – शांति, न्याय, धर्म और प्रशासनिक कुशलता को सराहा।
ह्वेनसांग ने हिन्दू और बौद्ध धर्म के सहअस्तित्व का वर्णन किया।
उन्होंने भारत में समाजिक व्यवस्था, भोजन, रहन-सहन, धार्मिक रीतियों का उल्लेख किया।
ग्रंथ: 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) यानी 'पश्चिमी देशों की यात्रा'।
3. इत्सिंग (I-tsing या Yijing) – 7वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में
काल: 671 ईस्वी से 695 ईस्वी तक भारत में प्रवास
उद्देश्य: बौद्ध धर्म का अध्ययन और ग्रंथों का अनुवाद करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: समुद्री मार्ग से वह श्रीविजय (सुमात्रा) होते हुए नालंदा पहुँचे
मुख्य विशेषताएँ:
इत्सिंग ने बौद्ध भिक्षुओं की दिनचर्या, शिक्षा पद्धति और धार्मिक परंपराओं को विस्तार से लिखा।
उन्होंने यह भी लिखा कि नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा अत्यंत संगठित थी और वहाँ छात्र अनुशासन का पालन करते थे।
👉निष्कर्ष:
प्राचीन भारत में आए इन चीनी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत से हमें उस समय के:
धार्मिक परिवेश,
शिक्षा संस्थान (विशेष रूप से नालंदा),
समाज व्यवस्था,
प्रशासनिक प्रणाली,
सांस्कृतिक जीवन और
भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इन यात्राओं ने भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूत किया।
काल: 399 ईस्वी से 414 ईस्वी तक भारत यात्रा की
राजा का काल: गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) का शासनकाल
उद्देश्य: बौद्ध धर्मग्रंथों को इकट्ठा करना और बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: गांधार, मथुरा, कन्नौज, कपिलवस्तु, कुशीनगर, पाटलिपुत्र, वाराणसी, नालंदा, गया आदि
मुख्य विशेषताएँ:
फाह्यान ने पाटलिपुत्र में एक सुव्यवस्थित शासन व्यवस्था देखी।
उन्होंने लिखा कि भारत में लोग अहिंसक और धार्मिक थे, और चोरी तथा हत्या जैसे अपराध बहुत कम होते थे।
उन्होंने वर्ण व्यवस्था का भी उल्लेख किया है और ‘चांडालों’ की स्थिति को अत्यंत दयनीय बताया।
उन्होंने बौद्ध धर्म के दो प्रमुख संप्रदायों – हीनयान और महायान – का उल्लेख किया।
ग्रंथ: 'फो-गुओ-जी' (Fo-Kuo-Ki) यानी 'बौद्ध देशों की यात्रा'।
2. ह्वेनसांग (Xuanzang) – 7वीं शताब्दी ईस्वी
काल: 630 ईस्वी से 645 ईस्वी तक भारत यात्रा
राजा का काल: सम्राट हर्षवर्धन (हर्ष)
उद्देश्य: बौद्ध धर्म का अध्ययन और तक्षशिला, नालंदा आदि विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: लाहौर, मथुरा, कन्नौज, प्रयाग, नालंदा, वाराणसी, कुशीनगर, बोधगया, श्रावस्ती आदि
मुख्य विशेषताएँ:
ह्वेनसांग ने भारत की शिक्षा प्रणाली, नालंदा विश्वविद्यालय और विभिन्न बौद्ध मठों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने हर्षवर्धन के शासन की प्रशंसा की – शांति, न्याय, धर्म और प्रशासनिक कुशलता को सराहा।
ह्वेनसांग ने हिन्दू और बौद्ध धर्म के सहअस्तित्व का वर्णन किया।
उन्होंने भारत में समाजिक व्यवस्था, भोजन, रहन-सहन, धार्मिक रीतियों का उल्लेख किया।
ग्रंथ: 'सी-यू-की' (Si-Yu-Ki) यानी 'पश्चिमी देशों की यात्रा'।
3. इत्सिंग (I-tsing या Yijing) – 7वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में
काल: 671 ईस्वी से 695 ईस्वी तक भारत में प्रवास
उद्देश्य: बौद्ध धर्म का अध्ययन और ग्रंथों का अनुवाद करना
भारत यात्रा का क्षेत्र: समुद्री मार्ग से वह श्रीविजय (सुमात्रा) होते हुए नालंदा पहुँचे
मुख्य विशेषताएँ:
इत्सिंग ने बौद्ध भिक्षुओं की दिनचर्या, शिक्षा पद्धति और धार्मिक परंपराओं को विस्तार से लिखा।
उन्होंने यह भी लिखा कि नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा अत्यंत संगठित थी और वहाँ छात्र अनुशासन का पालन करते थे।
👉निष्कर्ष:
प्राचीन भारत में आए इन चीनी यात्रियों के यात्रा-वृत्तांत से हमें उस समय के:
धार्मिक परिवेश,
शिक्षा संस्थान (विशेष रूप से नालंदा),
समाज व्यवस्था,
प्रशासनिक प्रणाली,
सांस्कृतिक जीवन और
भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इन यात्राओं ने भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूत किया।
👍9❤1
🔴 A new life is waiting for you
इस साल को अपनी ज़िंदगी बदलने में लगाइये😊 @cgpscraceacademy
=======================
जीवन मे आगे बढ़ने के लिए क्या चाहिए ??
मेरे ख्याल से इंसान को अपनी नजरों में ऊपर उठना चाहिए और जो भी सपने देखे हैं संजोए हैं उसे पूरा करना मैं सब कुछ झोंक देना चाहिए😊
वही है जिन्दा, जिसकी आश जिन्दा है,
वही है जिन्दा, जिसकी प्यास जिन्दा है,
सांस लेने का नाम ही जिंदगी नहीं,
जिन्दा वही है, जिसका खुद पे " विश्वास जिन्दा है
खुद की काबिलियत पर विश्वास कीजिये कि आप कर सकते है 😊स्वयम को exam के लिए ready करिये एग्जाम पास करिये सेलेक्शन लीजिये और एक अच्छी नई ज़िन्दगी की शुरुआत कीजिए
कब तक आप तैयारी करते रहेंगे ?? अपनी journey ,अपने संघर्ष को और लम्बा मत कीजिए
जुनून जब हावी होता है तो शरीर और दिमाग अपनी limits को बढ़ा ही लेता है।😀
👉याद रखिए अभी आप जो ज़िन्दगी जी रहे हैं ये आपकी ज़िंदगी नही है आपका कल इससे कहि बेहतर और अच्छा होगा और आपको अपना कल बदलने से कोई नही रोक सकता सिवाय आपके🔥🔥
Believe in yourself
Trust in yourself
- देवेंद्र
इस साल को अपनी ज़िंदगी बदलने में लगाइये😊 @cgpscraceacademy
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जीवन मे आगे बढ़ने के लिए क्या चाहिए ??
मेरे ख्याल से इंसान को अपनी नजरों में ऊपर उठना चाहिए और जो भी सपने देखे हैं संजोए हैं उसे पूरा करना मैं सब कुछ झोंक देना चाहिए😊
वही है जिन्दा, जिसकी आश जिन्दा है,
वही है जिन्दा, जिसकी प्यास जिन्दा है,
सांस लेने का नाम ही जिंदगी नहीं,
जिन्दा वही है, जिसका खुद पे " विश्वास जिन्दा है
खुद की काबिलियत पर विश्वास कीजिये कि आप कर सकते है 😊स्वयम को exam के लिए ready करिये एग्जाम पास करिये सेलेक्शन लीजिये और एक अच्छी नई ज़िन्दगी की शुरुआत कीजिए
कब तक आप तैयारी करते रहेंगे ?? अपनी journey ,अपने संघर्ष को और लम्बा मत कीजिए
जुनून जब हावी होता है तो शरीर और दिमाग अपनी limits को बढ़ा ही लेता है।😀
👉याद रखिए अभी आप जो ज़िन्दगी जी रहे हैं ये आपकी ज़िंदगी नही है आपका कल इससे कहि बेहतर और अच्छा होगा और आपको अपना कल बदलने से कोई नही रोक सकता सिवाय आपके🔥🔥
Believe in yourself
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- देवेंद्र
❤20👍4
भारतीय कृषि की समस्याएं (Problems of Indian Agriculture)
(Cgpsc mains पेपर 5 पार्ट 2 )
@cgpscraceacademy
1. जीवन-निर्वाहक कृषि
2. भारतीय कृषि पर जनसंख्या का भारी दबाव
3. कृषि जोतों (खेतों) का छोटा आकार
4. भूमि का असंतुलित वितरण
5. मिट्टी की उपजाऊ शक्ति का कम होना
6. मृदा अपरदन
7. सिंचाई की सुविधाओं का अभाव
8. निम्नस्तरीय प्रौद्योगिकी का प्रयोग
9. श्रम प्रधान कृषि
10. किसानों का रूढ़िवादी एवं भाग्यवादी होना
11. प्रति हेक्टेयर उपज कम होना
12. फसलों की बीमारियां तथा कीड़े
13. फलीदार तथा चारे की फसलों को कम क्षेत्र
14. सरकारी नीतियाँ
15. फसलों के विक्रय एवं भंडारण संबंधी समस्याएं
16. प्रशिक्षण का अभाव
17. किसानों की गरीबी और कर्जा
18. अतार्किक भूधारण (Land Tenancy)
19. उपयुक्त कृषि भू-उपयोग नीति का अभाव (Lack of Proper Agricultural Land Use Policy)
20. समाज में कृषि कार्य की निम्न प्रतिष्ठा (Low Status of Agriculture in the Society)
@cgpscraceacademy
(Cgpsc mains पेपर 5 पार्ट 2 )
@cgpscraceacademy
1. जीवन-निर्वाहक कृषि
2. भारतीय कृषि पर जनसंख्या का भारी दबाव
3. कृषि जोतों (खेतों) का छोटा आकार
4. भूमि का असंतुलित वितरण
5. मिट्टी की उपजाऊ शक्ति का कम होना
6. मृदा अपरदन
7. सिंचाई की सुविधाओं का अभाव
8. निम्नस्तरीय प्रौद्योगिकी का प्रयोग
9. श्रम प्रधान कृषि
10. किसानों का रूढ़िवादी एवं भाग्यवादी होना
11. प्रति हेक्टेयर उपज कम होना
12. फसलों की बीमारियां तथा कीड़े
13. फलीदार तथा चारे की फसलों को कम क्षेत्र
14. सरकारी नीतियाँ
15. फसलों के विक्रय एवं भंडारण संबंधी समस्याएं
16. प्रशिक्षण का अभाव
17. किसानों की गरीबी और कर्जा
18. अतार्किक भूधारण (Land Tenancy)
19. उपयुक्त कृषि भू-उपयोग नीति का अभाव (Lack of Proper Agricultural Land Use Policy)
20. समाज में कृषि कार्य की निम्न प्रतिष्ठा (Low Status of Agriculture in the Society)
@cgpscraceacademy
👍15❤2
🧐Things you think are holding you back:
(वे चीजें जो आपको लगती है जिसकी वजह से आप पीछे हो रहे हैं )
Other people दूसरे लोग
Obligations जिम्मेदारी
Money पैसा
Time समय
Job जॉब
🚶♂Things that are actually holding you back:😳
(लेकिन वे चीजें जो आपको वास्तव में पीछे कर रही हैं वो है )
Fear तुम्हारा डर
Doubt तुम्हारा संशय
Comfort तुम्हारा कम्फर्ट जोन में रहने की आदत
Complacency चीजो को पेचीदा और जटिल करना
तो फिर आगे क्या करना है ???💪💪
किसी चीज के बारे में ज्यादा मत सोचो एक goal लक्ष्य decide करो
फिर उसे पूरे जुनून और सत्यनिष्ठा से हकीकत करने में लग जाओ ।अपने अंदर के डर संशय और लक्षय के प्रति डगमगाहट को अपने आत्मविश्वास और साहस से कुचल दो। एकाग्र और स्थिर बनो। कोचिंग बाजर की हवाओ से विचलित मत हो । सफल होने का रहस्य जिसे आप यूट्यूब , टेलीग्राम , आदि जगहों में इधर उधर ढूंढ रहे है वो रहस्य का ज्ञान आपको बाहर नही बल्कि आत्म विश्लेषण से मिलेगा हर दिन पढ़ाई का एक टारगेट बनाओ और उसे Achieve करो
सफलता सुनिश्चित है
देवेंद्र 🙏🙏
(वे चीजें जो आपको लगती है जिसकी वजह से आप पीछे हो रहे हैं )
Other people दूसरे लोग
Obligations जिम्मेदारी
Money पैसा
Time समय
Job जॉब
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(लेकिन वे चीजें जो आपको वास्तव में पीछे कर रही हैं वो है )
Fear तुम्हारा डर
Doubt तुम्हारा संशय
Comfort तुम्हारा कम्फर्ट जोन में रहने की आदत
Complacency चीजो को पेचीदा और जटिल करना
तो फिर आगे क्या करना है ???💪💪
किसी चीज के बारे में ज्यादा मत सोचो एक goal लक्ष्य decide करो
फिर उसे पूरे जुनून और सत्यनिष्ठा से हकीकत करने में लग जाओ ।अपने अंदर के डर संशय और लक्षय के प्रति डगमगाहट को अपने आत्मविश्वास और साहस से कुचल दो। एकाग्र और स्थिर बनो। कोचिंग बाजर की हवाओ से विचलित मत हो । सफल होने का रहस्य जिसे आप यूट्यूब , टेलीग्राम , आदि जगहों में इधर उधर ढूंढ रहे है वो रहस्य का ज्ञान आपको बाहर नही बल्कि आत्म विश्लेषण से मिलेगा हर दिन पढ़ाई का एक टारगेट बनाओ और उसे Achieve करो
सफलता सुनिश्चित है
देवेंद्र 🙏🙏
❤22👍8