पेपर 7 पार्ट 2
16 नवम्बर 1945 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनैस्को का गठन हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद मानवता को यह अहसास हुआ कि सच्ची शांति केवल राजनीतिक और आर्थिक समझौतों से नहीं, बल्कि लोगों के विचारों में समझदारी और आपसी समझ से स्थापित की जा सकती है।
इसी विचार से यूनैस्को की स्थापना हुई। यूनैस्को का मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में स्थित है। यह संगठन शिक्षा के प्रसार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अधिकारों व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में कार्य करता है।
यह संगठन लोगों को उदारवादी मूल्यों, परस्पर सहयोग और मानवता के साझा मूल्यों को समझने-समझाने का काम करता है। यह संस्था दुनिया को शिक्षित, मानवीय और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
16 नवम्बर 1945 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनैस्को का गठन हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद मानवता को यह अहसास हुआ कि सच्ची शांति केवल राजनीतिक और आर्थिक समझौतों से नहीं, बल्कि लोगों के विचारों में समझदारी और आपसी समझ से स्थापित की जा सकती है।
इसी विचार से यूनैस्को की स्थापना हुई। यूनैस्को का मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में स्थित है। यह संगठन शिक्षा के प्रसार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अधिकारों व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में कार्य करता है।
यह संगठन लोगों को उदारवादी मूल्यों, परस्पर सहयोग और मानवता के साझा मूल्यों को समझने-समझाने का काम करता है। यह संस्था दुनिया को शिक्षित, मानवीय और बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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बुक्कर पुरस्कार पुस्तक ‘फ्लेश’
वह क्या है, जो जिंदगी को जीने लायक बनाता है
बुक्कर पुरस्कार से सम्मानित पुस्तक ‘फ्लेश’ एक ऐसी जीवन की दास्तान है, जिसमें पात्र के पास लगभग सब कुछ है, लेकिन धीरे-धीरे वह उन सबसे विमुख होकर सोचने लगता है कि आखिर वह क्या चीज़ है, जो जिंदगी को जीने लायक बनाती है?
प्रतिष्ठित बुक्कर पुरस्कार से सम्मानित डेविड स्ज़ले वर्तमान समय के प्रमुख कथाकारों में से एक हैं। उनकी कृति फ्लेश एक महत्वपूर्ण твор (कृति) है, जिसमें वे जीवन के उतार-चढ़ाव, व्यक्तिगत संबंधों की जटिलताओं और सामाजिक अपेक्षाओं के बोझ को गहराई से समझते हैं।
कहानी के केंद्र में हैं 15 वर्षीय ‘जॉन’ जो परिवार, दोस्तों और समाज से मिलने वाली अपेक्षाओं के बीच रास्ता खोजने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे वह उन चीज़ों से विमुख होने लगता है, जिन्हें वह पहले बहुत महत्व देता था। वह सोचने लगता है—आखिर क्या चीज़ है जो ज़िंदगी को जीने लायक बनाती है?
जब हम अपने डर, अकेलेपन और असफलताओं से ऊपर उठकर खुद को स्वीकार करते हैं। जीवन में अर्थ उन रिश्तों, अनुभवों और संघर्षों से आता है, जो हमें आकार देते हैं, सिखाते हैं और भीतर एक रोशनी जगाते हैं।
वह क्या है, जो जिंदगी को जीने लायक बनाता है
बुक्कर पुरस्कार से सम्मानित पुस्तक ‘फ्लेश’ एक ऐसी जीवन की दास्तान है, जिसमें पात्र के पास लगभग सब कुछ है, लेकिन धीरे-धीरे वह उन सबसे विमुख होकर सोचने लगता है कि आखिर वह क्या चीज़ है, जो जिंदगी को जीने लायक बनाती है?
प्रतिष्ठित बुक्कर पुरस्कार से सम्मानित डेविड स्ज़ले वर्तमान समय के प्रमुख कथाकारों में से एक हैं। उनकी कृति फ्लेश एक महत्वपूर्ण твор (कृति) है, जिसमें वे जीवन के उतार-चढ़ाव, व्यक्तिगत संबंधों की जटिलताओं और सामाजिक अपेक्षाओं के बोझ को गहराई से समझते हैं।
कहानी के केंद्र में हैं 15 वर्षीय ‘जॉन’ जो परिवार, दोस्तों और समाज से मिलने वाली अपेक्षाओं के बीच रास्ता खोजने की कोशिश करता है। धीरे-धीरे वह उन चीज़ों से विमुख होने लगता है, जिन्हें वह पहले बहुत महत्व देता था। वह सोचने लगता है—आखिर क्या चीज़ है जो ज़िंदगी को जीने लायक बनाती है?
जब हम अपने डर, अकेलेपन और असफलताओं से ऊपर उठकर खुद को स्वीकार करते हैं। जीवन में अर्थ उन रिश्तों, अनुभवों और संघर्षों से आता है, जो हमें आकार देते हैं, सिखाते हैं और भीतर एक रोशनी जगाते हैं।
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भारत रत्न एम.एस. स्वामीनाथन का यह जन्मशती वर्ष है। उन्हें भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है। उन्होंने बिहार अकाल के दौरान अन्न संकट से घिरे देश को चार साल में ही मांग से ज़्यादा उत्पादन वाले देश में बदल दिया था।
हरित क्रांति के जनक प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ। उन्होंने कम उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। उनके पिता, जो डॉक्टर थे, किसानों की गहरी समस्याओं से परिचित थे। इसी कारण वे कृषि के प्रति आकर्षित हुए।
उन्होंने जूलोजी में बी.एससी., एग्रीकल्चर में एम.एससी. किया और आगे वानस्पतिक आनुवंशिकी को अपना विषय बनाया। 1947 में बंगाल के भीषण अकाल में उन्होंने खाद्यान्न की कमी को नज़दीक से देखा, जिसने उनके जीवन का लक्ष्य बदल दिया — भारत में खाद्यान्न संकट समाप्त करना।
1950 में उन्होंने कृषि अनुसंधान में कदम रखा। हॉर्टिकल्चरिस्ट बाबू राजेंद्र प्रसाद (बिहार कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, सबौर) और साइमन (एग्रीकल्चर कॉलेज, पंतनगर) के मार्गदर्शन में इन्होंने प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। 1952 से 1954 तक वे पीएचडी हेतु नीदरलैंड और फिर अमेरिका गए।
1954 में भारत लौटने के बाद उनका लक्ष्य था —
“किसान मित्र तकनीक और उच्च उत्पादक किस्मों द्वारा भारत को अन्न संकट से मुक्त करना।”
1966 में बिहार में भयंकर सूखा पड़ा। 1970 में पुनः अकाल की स्थिति बनी। इस समय स्वामीनाथन ने निर्णय लिया कि देश को उच्च उत्पादक गेहूं की ज़रूरत है। उन्होंने नॉर्मन बॉरलॉग के नए गेहूं बीजों (ड्वार्फ व्हीट) को भारत में लाने का साहसिक निर्णय लिया।
उनके नेतृत्व में 1967 से 1970 के बीच भारत में गेहूं उत्पादन 480 लाख टन से बढ़कर 950 लाख टन तक पहुँच गया।
इसी कारण उन्हें “हरित क्रांति का जनक” कहा गया।
1991 में उनके कृषि सुधारों के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
वे कहते थे —
“किसान सिर्फ़ अन्नदाता नहीं, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का मार्गदर्शक है।”
उनकी सोच वैज्ञानिक थी लेकिन लक्ष्य गरीब किसान का कल्याण था। इसी भावना से वे जीवन भर कृषि और समाज की सेवा करते रहे।
हरित क्रांति के जनक प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन का जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ। उन्होंने कम उम्र में ही स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। उनके पिता, जो डॉक्टर थे, किसानों की गहरी समस्याओं से परिचित थे। इसी कारण वे कृषि के प्रति आकर्षित हुए।
उन्होंने जूलोजी में बी.एससी., एग्रीकल्चर में एम.एससी. किया और आगे वानस्पतिक आनुवंशिकी को अपना विषय बनाया। 1947 में बंगाल के भीषण अकाल में उन्होंने खाद्यान्न की कमी को नज़दीक से देखा, जिसने उनके जीवन का लक्ष्य बदल दिया — भारत में खाद्यान्न संकट समाप्त करना।
1950 में उन्होंने कृषि अनुसंधान में कदम रखा। हॉर्टिकल्चरिस्ट बाबू राजेंद्र प्रसाद (बिहार कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, सबौर) और साइमन (एग्रीकल्चर कॉलेज, पंतनगर) के मार्गदर्शन में इन्होंने प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। 1952 से 1954 तक वे पीएचडी हेतु नीदरलैंड और फिर अमेरिका गए।
1954 में भारत लौटने के बाद उनका लक्ष्य था —
“किसान मित्र तकनीक और उच्च उत्पादक किस्मों द्वारा भारत को अन्न संकट से मुक्त करना।”
1966 में बिहार में भयंकर सूखा पड़ा। 1970 में पुनः अकाल की स्थिति बनी। इस समय स्वामीनाथन ने निर्णय लिया कि देश को उच्च उत्पादक गेहूं की ज़रूरत है। उन्होंने नॉर्मन बॉरलॉग के नए गेहूं बीजों (ड्वार्फ व्हीट) को भारत में लाने का साहसिक निर्णय लिया।
उनके नेतृत्व में 1967 से 1970 के बीच भारत में गेहूं उत्पादन 480 लाख टन से बढ़कर 950 लाख टन तक पहुँच गया।
इसी कारण उन्हें “हरित क्रांति का जनक” कहा गया।
1991 में उनके कृषि सुधारों के लिए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
वे कहते थे —
“किसान सिर्फ़ अन्नदाता नहीं, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का मार्गदर्शक है।”
उनकी सोच वैज्ञानिक थी लेकिन लक्ष्य गरीब किसान का कल्याण था। इसी भावना से वे जीवन भर कृषि और समाज की सेवा करते रहे।
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ध्वनि की स्पीड सबसे ज्यादा निम्न में से किसमें होती है
Anonymous Quiz
18%
वायु
8%
जल
38%
निर्वात
36%
स्टील
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🔒 डीपीडीपी नियम 2025 - आपका डेटा, आपका नियंत्रण
• नए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) नियम 2025 अब पूरे भारत में लागू हो गए हैं।
• ये स्पष्ट सहमति, मज़बूत गोपनीयता अधिकार और डेटा के दुरुपयोग के लिए कठोर दंड को अनिवार्य करते हैं।
• उपयोगकर्ताओं के लिए, इसका अर्थ है ऐप्स, वेबसाइटों और कंपनियों की ओर से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही।
• नए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) नियम 2025 अब पूरे भारत में लागू हो गए हैं।
• ये स्पष्ट सहमति, मज़बूत गोपनीयता अधिकार और डेटा के दुरुपयोग के लिए कठोर दंड को अनिवार्य करते हैं।
• उपयोगकर्ताओं के लिए, इसका अर्थ है ऐप्स, वेबसाइटों और कंपनियों की ओर से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही।
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upsc notification free coaching .pdf
1.6 MB
💥दिल्ली में रहकर upsc की तैयारी का सुनहरा अवसर
पूरा खर्चा सरकार द्वारा
राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग
हेतु कुल 185 सीट (ST–50%, SC–30%, OBC–20%) (प्रत्येक वर्ग में 33% महिलाओं के लिए आरक्षित)
ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ – 20/11/2025
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि – 10/12/2025
परीक्षा आयोजित करने की तिथि – 28/12/2025
ऑनलाइन आवेदन जमा करने हेतु वेबसाइट
www.tribal.cg.gov.in
पूरा खर्चा सरकार द्वारा
राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग
हेतु कुल 185 सीट (ST–50%, SC–30%, OBC–20%) (प्रत्येक वर्ग में 33% महिलाओं के लिए आरक्षित)
ऑनलाइन आवेदन प्रारम्भ – 20/11/2025
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि – 10/12/2025
परीक्षा आयोजित करने की तिथि – 28/12/2025
ऑनलाइन आवेदन जमा करने हेतु वेबसाइट
www.tribal.cg.gov.in
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ऐतिहासिक दिन cgpsc वालो के लिए
आज मैंने इंटरव्यू में शामिल हुए स्वजनों के लिए ईश्वर से प्रार्थना की
Becoz every prayer counts He knows everything about you and your life and he will give result
All the best
आज मैंने इंटरव्यू में शामिल हुए स्वजनों के लिए ईश्वर से प्रार्थना की
Becoz every prayer counts He knows everything about you and your life and he will give result
All the best
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ADV_SSE2025_26112025 (1)_251126_115749.pdf
3.8 MB
Cgpsc – 2025
आवेदन 01 दिसंबर - 30 दिसंबर 2025
➤ प्रारंभिक परीक्षा तिथि:
📅 22 फरवरी 2026
Gs1 10:00 बजे – 12:00 बजे
Csat 03:00 बजे – 05:00 बजे
➤ मुख्य परीक्षा (संभावित):
📅 16, 17, 18 एवं 19 मई 2026
आवेदन 01 दिसंबर - 30 दिसंबर 2025
➤ प्रारंभिक परीक्षा तिथि:
📅 22 फरवरी 2026
Gs1 10:00 बजे – 12:00 बजे
Csat 03:00 बजे – 05:00 बजे
➤ मुख्य परीक्षा (संभावित):
📅 16, 17, 18 एवं 19 मई 2026
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“Focus on What Matters” For CGPSC aspirants
@cgpscraceacademy
1. असली प्राथमिकता पहचाने
I think CGPSC में सबसे बड़ी चुनौती है सीमित समय और बड़ा सिलेबस।
आपको यह तय करना होगा कि कौन-सा टॉपिक, कौन-सी बुक और कौन-सी एक्टिविटी आपके चयन (selection) के लिए जरूरी है।
ज़रूरी नहीं कि आप सब कुछ पढ़ें, बल्कि वही पढ़ें जो बार-बार पूछी जाती हैं और जो Core Area है।
2. व्यस्तता ≠ तैयारी (busyness ≠ Preparation )
दिनभर किताबों में डूबे रहना, नोट्स बनाना या यूट्यूब वीडियो देखना “प्रोडक्टिविटी” नहीं कहलाती।
तैयारी का असली मतलब है – परीक्षा के Demand को समझना और उसी हिसाब से काम करना।
हमेशा पूछें: “क्या मैं अभी वो कर रहा हूँ जिससे मेरा Score बढ़ेगा?”
3. ध्यान भटकाने वालों से दूरी
सोशल मीडिया, दोस्तों की बातें, तुलना (comparison) – ये सब फोकस में व्यवधान डालते हैं।
4. “ना कहना सीखे”।
जब तक सेलेक्शन नहीं होता, दुनिया के शोर को काटकर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस रखे
5. लक्ष्य याद रखे
जब कठिनाई आए तो खुद से पूछो: “मैंने यह सफ़र क्यों शुरू किया था?”
यही सोच आपको लंबे समय तक टिकाए रखेगी।
6. गहराई से पढ़ना, सतही नहीं
बार-बार टॉपिक बदलने या सिर्फ नई-नई बुक्स लेने से फायदा नहीं।
बेहतर है कि आप सीमित सामग्री को गहराई से पढ़ें और कई बार दोहराएँ।
गहराई से समझा हुआ ज्ञान ही उत्तर लिखने में काम आता है।
7. सरल और संतुलित जीवन
स्वास्थ्य, नींद, भोजन और पढ़ाई – सबका संतुलन जरूरी है।
अगर शरीर और मन थक गया तो तैयारी टिकेगी नहीं।
8. लंबे समय की सोच
CGPSC एक marathon है, लगभग 1 साल का (नोटिफिकेशन आने से लेकर फाइनल रिजल्ट आने तक) exam process है
आज किया गया छोटा-सा सही प्रयास (MCQ प्रैक्टिस, रिवीजन, उत्तर लेखन) भविष्य में सफलता देगा।
तुरंत रिज़ल्ट न दिखे तो भी धैर्य रखे।
@cgpscraceacademy
1. असली प्राथमिकता पहचाने
I think CGPSC में सबसे बड़ी चुनौती है सीमित समय और बड़ा सिलेबस।
आपको यह तय करना होगा कि कौन-सा टॉपिक, कौन-सी बुक और कौन-सी एक्टिविटी आपके चयन (selection) के लिए जरूरी है।
ज़रूरी नहीं कि आप सब कुछ पढ़ें, बल्कि वही पढ़ें जो बार-बार पूछी जाती हैं और जो Core Area है।
2. व्यस्तता ≠ तैयारी (busyness ≠ Preparation )
दिनभर किताबों में डूबे रहना, नोट्स बनाना या यूट्यूब वीडियो देखना “प्रोडक्टिविटी” नहीं कहलाती।
तैयारी का असली मतलब है – परीक्षा के Demand को समझना और उसी हिसाब से काम करना।
हमेशा पूछें: “क्या मैं अभी वो कर रहा हूँ जिससे मेरा Score बढ़ेगा?”
3. ध्यान भटकाने वालों से दूरी
सोशल मीडिया, दोस्तों की बातें, तुलना (comparison) – ये सब फोकस में व्यवधान डालते हैं।
4. “ना कहना सीखे”।
जब तक सेलेक्शन नहीं होता, दुनिया के शोर को काटकर सिर्फ पढ़ाई पर फोकस रखे
5. लक्ष्य याद रखे
जब कठिनाई आए तो खुद से पूछो: “मैंने यह सफ़र क्यों शुरू किया था?”
यही सोच आपको लंबे समय तक टिकाए रखेगी।
6. गहराई से पढ़ना, सतही नहीं
बार-बार टॉपिक बदलने या सिर्फ नई-नई बुक्स लेने से फायदा नहीं।
बेहतर है कि आप सीमित सामग्री को गहराई से पढ़ें और कई बार दोहराएँ।
गहराई से समझा हुआ ज्ञान ही उत्तर लिखने में काम आता है।
7. सरल और संतुलित जीवन
स्वास्थ्य, नींद, भोजन और पढ़ाई – सबका संतुलन जरूरी है।
अगर शरीर और मन थक गया तो तैयारी टिकेगी नहीं।
8. लंबे समय की सोच
CGPSC एक marathon है, लगभग 1 साल का (नोटिफिकेशन आने से लेकर फाइनल रिजल्ट आने तक) exam process है
आज किया गया छोटा-सा सही प्रयास (MCQ प्रैक्टिस, रिवीजन, उत्तर लेखन) भविष्य में सफलता देगा।
तुरंत रिज़ल्ट न दिखे तो भी धैर्य रखे।
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CGPSC के लिए मुख्य मंत्र
कम पढ़ो, लेकिन वही पढ़ो जो जरूरी है।
लोग क्या कर रहे हैं मत देखो, अपना रास्ता चुनो।
हर दिन का लक्ष्य – एक छोटा सही कदम।
ध्यान सिर्फ चयन (selection) पर, न कि दिखावे पर।
कम पढ़ो, लेकिन वही पढ़ो जो जरूरी है।
लोग क्या कर रहे हैं मत देखो, अपना रास्ता चुनो।
हर दिन का लक्ष्य – एक छोटा सही कदम।
ध्यान सिर्फ चयन (selection) पर, न कि दिखावे पर।
❤41🤩3
World Squash Cup 2025: चेन्नई, तमिलनाडू: वर्ल्ड स्क्वॉश फेडरेशन के तत्वाधान में स्क्वॉश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 09 से 14 दिसंबर 2025 तक चेन्नई के SDAT स्क्वॉश वर्ल्ड कप 2025 का आयोजन किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य के डॉ. विष्णु कुमार श्रीवास्तव🔥 को इस वर्ल्ड कप में जूरी सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
वे छत्तीसगढ़ राज्य से प्रथम जूरी सदस्य के रूप में इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग लेंगे।
छत्तीसगढ़ राज्य के डॉ. विष्णु कुमार श्रीवास्तव🔥 को इस वर्ल्ड कप में जूरी सदस्य के रूप में नामित किया गया है।
वे छत्तीसगढ़ राज्य से प्रथम जूरी सदस्य के रूप में इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग लेंगे।
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