किस संगठन ने “ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक 2026” जारी किया?
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14%
[A] विश्व बैंक
28%
[B] विश्व व्यापार संगठन
40%
[C] अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
17%
[D] यूएनडीपी
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस कब मनाया जाता है?
Anonymous Quiz
16%
A. 21 जून
34%
B. 22 जून
38%
C. 23 जून
12%
D. 24 जून
इस मान्यता से छत्तीसगढ़ के संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। राज्य के उदंती-सीतानदी बाघ अभ्यारण्य में विकसित और तैनात यह प्रणाली थर्मल ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तत्काल मोबाइल अलर्ट को जोड़ती है ताकि हाथियों के मानव बस्तियों की ओर बढ़ने पर वन कर्मचारियों और ग्रामीणों को चेतावनी दी जा सके। भारत में मानव-हाथी संघर्ष के सबसे गंभीर मामलों में से एक इस राज्य के लिए, यह सुविधा केवल अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने से कहीं अधिक है। यह एक ऐसे विचार की मान्यता है जो एक स्थानीय समस्या से उपजा था - अंधेरे में घने जंगलों में हाथियों के झुंड को कैसे देखा जाए और त्रासदी होने से पहले लोगों को कैसे चेतावनी दी जाए। यह प्रणाली इन्फ्रारेड से लैस ड्रोन के माध्यम से हाथियों की गतिविधि का पता लगाती है और 5-10 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों को एसएमएस, वॉइस कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से अलर्ट भेजती है।
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चाहे कोई कितना भी सिलेबस बदल दे
कोर सब्जेक्ट कभी नहीं बदलेंगे
इकोनॉमिक्स
जियोग्राफी
इतिहास
राज्य व्यवस्था / संविधान
विज्ञान + पर्यावरण
छतीसगढ़ portion भी वही रहेंगें ye आधारभूत विषय है
कोर सब्जेक्ट कभी नहीं बदलेंगे
इकोनॉमिक्स
जियोग्राफी
इतिहास
राज्य व्यवस्था / संविधान
विज्ञान + पर्यावरण
छतीसगढ़ portion भी वही रहेंगें ye आधारभूत विषय है
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IR
"तीन पड़ाव, एक संदेश"
पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति बहुआयामी (Multi-alignment) हुई है, जो अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
भारत हिंद-प्रशांत, यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
इंडोनेशिया के साथ सहयोग का मुख्य आधार समुद्री सुरक्षा, मलक्का जलडमरूमध्य, व्यापार और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, स्वच्छ ऊर्जा तथा मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत पर सहयोग बढ़ रहा है।
न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर है।
इन यात्राओं का संदेश है कि भारत विश्वसनीय, संतुलनकारी और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की यह कूटनीति उसकी रणनीतिक स्थिति, आर्थिक हितों और वैश्विक प्रभाव को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
एक पंक्ति में:
भारत की विदेश नीति का नया मंत्र है—"बहुआयामी कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और विश्वसनीय वैश्विक नेतृत्व।"
"तीन पड़ाव, एक संदेश"
पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति बहुआयामी (Multi-alignment) हुई है, जो अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
भारत हिंद-प्रशांत, यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
इंडोनेशिया के साथ सहयोग का मुख्य आधार समुद्री सुरक्षा, मलक्का जलडमरूमध्य, व्यापार और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, स्वच्छ ऊर्जा तथा मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत पर सहयोग बढ़ रहा है।
न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर है।
इन यात्राओं का संदेश है कि भारत विश्वसनीय, संतुलनकारी और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की यह कूटनीति उसकी रणनीतिक स्थिति, आर्थिक हितों और वैश्विक प्रभाव को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
एक पंक्ति में:
भारत की विदेश नीति का नया मंत्र है—"बहुआयामी कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और विश्वसनीय वैश्विक नेतृत्व।"
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CGPSC RACE
भारत मे FDI 2025 में 39 अरब डॉलर
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) की ओर से जारी वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत 2025 में दो पायदान चढ़कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने वाला दुनिया का 11वां सबसे बड़ा देश बन गया है।
सेवाओं, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के लिए निरंतर निवेश के कारण भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
2025 में भारत में एफडीआई की आवक लगभग 44 प्रतिशत बढ़कर 38.89 अरब डॉलर हो गई।
सेवाओं, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के लिए निरंतर निवेश के कारण भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
2025 में भारत में एफडीआई की आवक लगभग 44 प्रतिशत बढ़कर 38.89 अरब डॉलर हो गई।
IMP for mains economy
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) :
यह घरेलू बाजार या निर्यात के लिए बेची गई वस्तुओं एवं सेवाओं के बदले उत्पादकों को प्राप्त होने वाली कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।
WPI के स्थान पर PPI प्रणाली क्यों लागू की जा रही है?
वैश्विक सर्वोत्तम प्रणाली: भारत में मुद्रास्फीति मापने की प्रणाली को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और IMF की सिफारिशों के अनुरूप बना देगी।
व्यापक कवरेज: यह प्रणाली इनपुट (उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बदलाव), आउटपुट (उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में बदलाव) और सेवा मूल्यों (विभिन्न सेवाओं की कीमतों में बदलाव) को शामिल करती है। इस तरह यह सूचकांक WPI की तुलना में मुद्रास्फीति की अधिक व्यापक तस्वीर प्रदान करेगा।
लागत का बेहतर पद्धति से विश्लेषण: यह प्रणाली इनपुट लागत के दबाव और आउटपुट कीमतों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में सक्षम बनाती है।
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) :
यह घरेलू बाजार या निर्यात के लिए बेची गई वस्तुओं एवं सेवाओं के बदले उत्पादकों को प्राप्त होने वाली कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।
WPI के स्थान पर PPI प्रणाली क्यों लागू की जा रही है?
वैश्विक सर्वोत्तम प्रणाली: भारत में मुद्रास्फीति मापने की प्रणाली को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और IMF की सिफारिशों के अनुरूप बना देगी।
व्यापक कवरेज: यह प्रणाली इनपुट (उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बदलाव), आउटपुट (उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में बदलाव) और सेवा मूल्यों (विभिन्न सेवाओं की कीमतों में बदलाव) को शामिल करती है। इस तरह यह सूचकांक WPI की तुलना में मुद्रास्फीति की अधिक व्यापक तस्वीर प्रदान करेगा।
लागत का बेहतर पद्धति से विश्लेषण: यह प्रणाली इनपुट लागत के दबाव और आउटपुट कीमतों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में सक्षम बनाती है।
जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि आवास, आजीविका, पहचान और मानव अस्तित्व का संकट बन चुका है। इसके कारण लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं
मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्री कटाव, भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इससे होने वाले पलायन को जलवायु विस्थापन (Climate Displacement) कहा जाता है।
'जलवायु शरणार्थी' शब्द प्रचलित है, लेकिन इसे अभी अंतरराष्ट्रीय कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में है।
2015–2024 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से 3.23 करोड़+ आंतरिक विस्थापन।
2024 में लगभग 54 लाख लोग मौसम संबंधी आपदाओं से विस्थापित हुए।
सबसे प्रभावित क्षेत्र:
सुंदरबन – समुद्र-स्तर वृद्धि एवं तटीय कटाव।
असम (ब्रह्मपुत्र के चार द्वीप) – वार्षिक बाढ़।
उत्तराखंड – भूस्खलन, बादल फटना।
बिहार, झारखंड, बुंदेलखंड – सूखा एवं आजीविका संकट।
विस्थापन केवल घर नहीं छीनता, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित करता है।
जलवायु नीति का उद्देश्य केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि लोगों का सुरक्षित पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल आजीविका सुनिश्चित करना होना चाहिए।
निष्कर्ष
"जलवायु परिवर्तन अब पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। इसलिए भारत की जलवायु नीति में 'Climate Resilience + Climate Justice + Planned Rehabilitation' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्री कटाव, भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इससे होने वाले पलायन को जलवायु विस्थापन (Climate Displacement) कहा जाता है।
'जलवायु शरणार्थी' शब्द प्रचलित है, लेकिन इसे अभी अंतरराष्ट्रीय कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में है।
2015–2024 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से 3.23 करोड़+ आंतरिक विस्थापन।
2024 में लगभग 54 लाख लोग मौसम संबंधी आपदाओं से विस्थापित हुए।
सबसे प्रभावित क्षेत्र:
सुंदरबन – समुद्र-स्तर वृद्धि एवं तटीय कटाव।
असम (ब्रह्मपुत्र के चार द्वीप) – वार्षिक बाढ़।
उत्तराखंड – भूस्खलन, बादल फटना।
बिहार, झारखंड, बुंदेलखंड – सूखा एवं आजीविका संकट।
विस्थापन केवल घर नहीं छीनता, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित करता है।
जलवायु नीति का उद्देश्य केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि लोगों का सुरक्षित पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल आजीविका सुनिश्चित करना होना चाहिए।
निष्कर्ष
"जलवायु परिवर्तन अब पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। इसलिए भारत की जलवायु नीति में 'Climate Resilience + Climate Justice + Planned Rehabilitation' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"