इस मान्यता से छत्तीसगढ़ के संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। राज्य के उदंती-सीतानदी बाघ अभ्यारण्य में विकसित और तैनात यह प्रणाली थर्मल ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तत्काल मोबाइल अलर्ट को जोड़ती है ताकि हाथियों के मानव बस्तियों की ओर बढ़ने पर वन कर्मचारियों और ग्रामीणों को चेतावनी दी जा सके। भारत में मानव-हाथी संघर्ष के सबसे गंभीर मामलों में से एक इस राज्य के लिए, यह सुविधा केवल अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने से कहीं अधिक है। यह एक ऐसे विचार की मान्यता है जो एक स्थानीय समस्या से उपजा था - अंधेरे में घने जंगलों में हाथियों के झुंड को कैसे देखा जाए और त्रासदी होने से पहले लोगों को कैसे चेतावनी दी जाए। यह प्रणाली इन्फ्रारेड से लैस ड्रोन के माध्यम से हाथियों की गतिविधि का पता लगाती है और 5-10 किलोमीटर के दायरे में स्थित गांवों को एसएमएस, वॉइस कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से अलर्ट भेजती है।
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चाहे कोई कितना भी सिलेबस बदल दे
कोर सब्जेक्ट कभी नहीं बदलेंगे
इकोनॉमिक्स
जियोग्राफी
इतिहास
राज्य व्यवस्था / संविधान
विज्ञान + पर्यावरण
छतीसगढ़ portion भी वही रहेंगें ye आधारभूत विषय है
कोर सब्जेक्ट कभी नहीं बदलेंगे
इकोनॉमिक्स
जियोग्राफी
इतिहास
राज्य व्यवस्था / संविधान
विज्ञान + पर्यावरण
छतीसगढ़ portion भी वही रहेंगें ye आधारभूत विषय है
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IR
"तीन पड़ाव, एक संदेश"
पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति बहुआयामी (Multi-alignment) हुई है, जो अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
भारत हिंद-प्रशांत, यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
इंडोनेशिया के साथ सहयोग का मुख्य आधार समुद्री सुरक्षा, मलक्का जलडमरूमध्य, व्यापार और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, स्वच्छ ऊर्जा तथा मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत पर सहयोग बढ़ रहा है।
न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर है।
इन यात्राओं का संदेश है कि भारत विश्वसनीय, संतुलनकारी और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की यह कूटनीति उसकी रणनीतिक स्थिति, आर्थिक हितों और वैश्विक प्रभाव को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
एक पंक्ति में:
भारत की विदेश नीति का नया मंत्र है—"बहुआयामी कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और विश्वसनीय वैश्विक नेतृत्व।"
"तीन पड़ाव, एक संदेश"
पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति बहुआयामी (Multi-alignment) हुई है, जो अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
भारत हिंद-प्रशांत, यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है।
इंडोनेशिया के साथ सहयोग का मुख्य आधार समुद्री सुरक्षा, मलक्का जलडमरूमध्य, व्यापार और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संतुलन है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, स्वच्छ ऊर्जा तथा मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत पर सहयोग बढ़ रहा है।
न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार, आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर है।
इन यात्राओं का संदेश है कि भारत विश्वसनीय, संतुलनकारी और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की यह कूटनीति उसकी रणनीतिक स्थिति, आर्थिक हितों और वैश्विक प्रभाव को और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है
एक पंक्ति में:
भारत की विदेश नीति का नया मंत्र है—"बहुआयामी कूटनीति, रणनीतिक साझेदारी और विश्वसनीय वैश्विक नेतृत्व।"
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CGPSC RACE
भारत मे FDI 2025 में 39 अरब डॉलर
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (अंकटाड) की ओर से जारी वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 के अनुसार भारत 2025 में दो पायदान चढ़कर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने वाला दुनिया का 11वां सबसे बड़ा देश बन गया है।
सेवाओं, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के लिए निरंतर निवेश के कारण भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
2025 में भारत में एफडीआई की आवक लगभग 44 प्रतिशत बढ़कर 38.89 अरब डॉलर हो गई।
सेवाओं, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के लिए निरंतर निवेश के कारण भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
2025 में भारत में एफडीआई की आवक लगभग 44 प्रतिशत बढ़कर 38.89 अरब डॉलर हो गई।
IMP for mains economy
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) :
यह घरेलू बाजार या निर्यात के लिए बेची गई वस्तुओं एवं सेवाओं के बदले उत्पादकों को प्राप्त होने वाली कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।
WPI के स्थान पर PPI प्रणाली क्यों लागू की जा रही है?
वैश्विक सर्वोत्तम प्रणाली: भारत में मुद्रास्फीति मापने की प्रणाली को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और IMF की सिफारिशों के अनुरूप बना देगी।
व्यापक कवरेज: यह प्रणाली इनपुट (उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बदलाव), आउटपुट (उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में बदलाव) और सेवा मूल्यों (विभिन्न सेवाओं की कीमतों में बदलाव) को शामिल करती है। इस तरह यह सूचकांक WPI की तुलना में मुद्रास्फीति की अधिक व्यापक तस्वीर प्रदान करेगा।
लागत का बेहतर पद्धति से विश्लेषण: यह प्रणाली इनपुट लागत के दबाव और आउटपुट कीमतों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में सक्षम बनाती है।
उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) :
यह घरेलू बाजार या निर्यात के लिए बेची गई वस्तुओं एवं सेवाओं के बदले उत्पादकों को प्राप्त होने वाली कीमतों में समय के साथ होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।
WPI के स्थान पर PPI प्रणाली क्यों लागू की जा रही है?
वैश्विक सर्वोत्तम प्रणाली: भारत में मुद्रास्फीति मापने की प्रणाली को विकसित अर्थव्यवस्थाओं और IMF की सिफारिशों के अनुरूप बना देगी।
व्यापक कवरेज: यह प्रणाली इनपुट (उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतों में बदलाव), आउटपुट (उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में बदलाव) और सेवा मूल्यों (विभिन्न सेवाओं की कीमतों में बदलाव) को शामिल करती है। इस तरह यह सूचकांक WPI की तुलना में मुद्रास्फीति की अधिक व्यापक तस्वीर प्रदान करेगा।
लागत का बेहतर पद्धति से विश्लेषण: यह प्रणाली इनपुट लागत के दबाव और आउटपुट कीमतों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में सक्षम बनाती है।
जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि आवास, आजीविका, पहचान और मानव अस्तित्व का संकट बन चुका है। इसके कारण लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं
मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्री कटाव, भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इससे होने वाले पलायन को जलवायु विस्थापन (Climate Displacement) कहा जाता है।
'जलवायु शरणार्थी' शब्द प्रचलित है, लेकिन इसे अभी अंतरराष्ट्रीय कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में है।
2015–2024 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से 3.23 करोड़+ आंतरिक विस्थापन।
2024 में लगभग 54 लाख लोग मौसम संबंधी आपदाओं से विस्थापित हुए।
सबसे प्रभावित क्षेत्र:
सुंदरबन – समुद्र-स्तर वृद्धि एवं तटीय कटाव।
असम (ब्रह्मपुत्र के चार द्वीप) – वार्षिक बाढ़।
उत्तराखंड – भूस्खलन, बादल फटना।
बिहार, झारखंड, बुंदेलखंड – सूखा एवं आजीविका संकट।
विस्थापन केवल घर नहीं छीनता, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित करता है।
जलवायु नीति का उद्देश्य केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि लोगों का सुरक्षित पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल आजीविका सुनिश्चित करना होना चाहिए।
निष्कर्ष
"जलवायु परिवर्तन अब पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। इसलिए भारत की जलवायु नीति में 'Climate Resilience + Climate Justice + Planned Rehabilitation' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्री कटाव, भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इससे होने वाले पलायन को जलवायु विस्थापन (Climate Displacement) कहा जाता है।
'जलवायु शरणार्थी' शब्द प्रचलित है, लेकिन इसे अभी अंतरराष्ट्रीय कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में है।
2015–2024 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से 3.23 करोड़+ आंतरिक विस्थापन।
2024 में लगभग 54 लाख लोग मौसम संबंधी आपदाओं से विस्थापित हुए।
सबसे प्रभावित क्षेत्र:
सुंदरबन – समुद्र-स्तर वृद्धि एवं तटीय कटाव।
असम (ब्रह्मपुत्र के चार द्वीप) – वार्षिक बाढ़।
उत्तराखंड – भूस्खलन, बादल फटना।
बिहार, झारखंड, बुंदेलखंड – सूखा एवं आजीविका संकट।
विस्थापन केवल घर नहीं छीनता, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित करता है।
जलवायु नीति का उद्देश्य केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि लोगों का सुरक्षित पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल आजीविका सुनिश्चित करना होना चाहिए।
निष्कर्ष
"जलवायु परिवर्तन अब पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। इसलिए भारत की जलवायु नीति में 'Climate Resilience + Climate Justice + Planned Rehabilitation' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
भारत–यूरोप साझेदारी को सोचने की ज़रूरत
बदलते वैश्विक परिदृश्य (अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला संकट, भू-राजनीतिक तनाव) में भारत–EU सहयोग की आवश्यकता बढ़ी है
केवल व्यापार नहीं, बल्कि तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र, रक्षा, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला में भी साझेदारी मजबूत करनी होगी
भारत को वार्ता में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए FTA को शीघ्र अंतिम रूप देने का प्रयास करना चाहिए
मुख्य चुनौतियाँ:
EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM)।
पर्यावरण एवं श्रम मानकों से जुड़े कठोर नियम।
सत्यापन (MRV), अनुपालन लागत और MSMEs पर संभावित बोझ
भारत को अपने उद्योगों, विशेषकर MSMEs, को नए मानकों के अनुरूप तैयार करना होगा।
भारत–EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) जैसे मंचों का प्रभावी उपयोग कर तकनीकी सहयोग बढ़ाना चाहिए
भारत को केवल EU पर निर्भर न रहकर फ्रांस, जर्मनी जैसे प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध भी गहरे करने चाहिए
निष्कर्ष: विश्वसनीय, दीर्घकालिक और संतुलित भारत–यूरोप साझेदारी भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश, तकनीकी उन्नति और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी।
बदलते वैश्विक परिदृश्य (अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला संकट, भू-राजनीतिक तनाव) में भारत–EU सहयोग की आवश्यकता बढ़ी है
केवल व्यापार नहीं, बल्कि तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र, रक्षा, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला में भी साझेदारी मजबूत करनी होगी
भारत को वार्ता में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए FTA को शीघ्र अंतिम रूप देने का प्रयास करना चाहिए
मुख्य चुनौतियाँ:
EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM)।
पर्यावरण एवं श्रम मानकों से जुड़े कठोर नियम।
सत्यापन (MRV), अनुपालन लागत और MSMEs पर संभावित बोझ
भारत को अपने उद्योगों, विशेषकर MSMEs, को नए मानकों के अनुरूप तैयार करना होगा।
भारत–EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) जैसे मंचों का प्रभावी उपयोग कर तकनीकी सहयोग बढ़ाना चाहिए
भारत को केवल EU पर निर्भर न रहकर फ्रांस, जर्मनी जैसे प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध भी गहरे करने चाहिए
निष्कर्ष: विश्वसनीय, दीर्घकालिक और संतुलित भारत–यूरोप साझेदारी भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश, तकनीकी उन्नति और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी।
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ऑस्ट्रेलिया संग परमाणु ऊर्जा करार –
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की मेलबर्न बैठक में 18 समझौतों/परिणामों की घोषणा हुई
असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति के समझौते को लागू करने पर सहमति
साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन, रक्षा अनुसंधान पर सहमति
ऊर्जा सुरक्षा के तहत कोयला, LNG और अन्य ऊर्जा संसाधनों की स्थिर एवं विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प
रक्षा सहयोग बढ़ाने हेतु India–Australia Defence Innovation Corridor
ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने पर सहमति (जैसे विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी आदि)
खनन, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), प्रौद्योगिकी और कौशल विकास में सहयोग
आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति
ECTA (Economic Cooperation and Trade Agreement) से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई; अब CECA को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की मेलबर्न बैठक में 18 समझौतों/परिणामों की घोषणा हुई
असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति के समझौते को लागू करने पर सहमति
साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन, रक्षा अनुसंधान पर सहमति
ऊर्जा सुरक्षा के तहत कोयला, LNG और अन्य ऊर्जा संसाधनों की स्थिर एवं विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प
रक्षा सहयोग बढ़ाने हेतु India–Australia Defence Innovation Corridor
ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने पर सहमति (जैसे विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी आदि)
खनन, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), प्रौद्योगिकी और कौशल विकास में सहयोग
आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति
ECTA (Economic Cooperation and Trade Agreement) से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई; अब CECA को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर
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भारत का कम हो रहा ऊर्जा उपयोग अनुपात
इसका अर्थ है कि भारत पहले की तुलना में कम ऊर्जा से अधिक उत्पादन (GDP) कर रहा है, यानी अर्थव्यवस्था अधिक ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient) बनी है।
2000 के बाद लगातार 22 वर्षों तक ऊर्जा उपयोग अनुपात में गिरावट दर्ज की गई।
ऊर्जा दक्षता बढ़ने के प्रमुख कारण:
ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार
उद्योगों का आधुनिकीकरण
सेवा क्षेत्र (Service Sector) का बढ़ता योगदान
ऊर्जा उपयोग अनुपात कम होना आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे कम लागत, कम कार्बन उत्सर्जन और अधिक उत्पादकता प्राप्त होती है।
ऐतिहासिक संकटों के दौरान गिरावट (2022 के अनुसार)
1973 – अरब तेल संकट → −11.2%
1979 – ईरान क्रांति → −23.1%
1991 – भुगतान संतुलन (BoP) संकट → −30.1%
2008 – वैश्विक वित्तीय संकट → −19.9%
2013 – टेपर टैंट्रम → −13.9%
परीक्षा हेतु Keywords
Energy Intensity (ऊर्जा उपयोग अनुपात)
Energy Efficiency (ऊर्जा दक्षता)
GDP प्रति इकाई ऊर्जा
Renewable Energy
Sustainable Growth (सतत विकास)
इसका अर्थ है कि भारत पहले की तुलना में कम ऊर्जा से अधिक उत्पादन (GDP) कर रहा है, यानी अर्थव्यवस्था अधिक ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient) बनी है।
2000 के बाद लगातार 22 वर्षों तक ऊर्जा उपयोग अनुपात में गिरावट दर्ज की गई।
ऊर्जा दक्षता बढ़ने के प्रमुख कारण:
ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार
उद्योगों का आधुनिकीकरण
सेवा क्षेत्र (Service Sector) का बढ़ता योगदान
ऊर्जा उपयोग अनुपात कम होना आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे कम लागत, कम कार्बन उत्सर्जन और अधिक उत्पादकता प्राप्त होती है।
ऐतिहासिक संकटों के दौरान गिरावट (2022 के अनुसार)
1973 – अरब तेल संकट → −11.2%
1979 – ईरान क्रांति → −23.1%
1991 – भुगतान संतुलन (BoP) संकट → −30.1%
2008 – वैश्विक वित्तीय संकट → −19.9%
2013 – टेपर टैंट्रम → −13.9%
परीक्षा हेतु Keywords
Energy Intensity (ऊर्जा उपयोग अनुपात)
Energy Efficiency (ऊर्जा दक्षता)
GDP प्रति इकाई ऊर्जा
Renewable Energy
Sustainable Growth (सतत विकास)
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छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जो 'व्यापार करने में आसानी (विनियमन, छूट और सुविधा)' से संबंधित एक समर्पित कानून लागू करेगा। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक विधेयक को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य नियामक बाधाओं को कम करना और औद्योगिक स्वीकृतियों में तेजी लाना है।
Chhattisgarh is set to become the first state in the country to enact a dedicated 'Ease of Doing Business (Regulation, Exemption and Facilitation)' law, with the state cabinet on Wednesday approving a Bill aimed at cutting regulatory hurdles and speeding up industrial approvals
Chhattisgarh is set to become the first state in the country to enact a dedicated 'Ease of Doing Business (Regulation, Exemption and Facilitation)' law, with the state cabinet on Wednesday approving a Bill aimed at cutting regulatory hurdles and speeding up industrial approvals
उद्देश्य
व्यापारिक स्वीकृतियों को समयबद्ध और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाना है, जिसमें स्वतः मान्यता, स्व-प्रमाणीकरण, तृतीय-पक्ष सत्यापन, जोखिम-आधारित निरीक्षण और लाइसेंस की दोहरी आवश्यकताओं को समाप्त करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य प्रक्रियात्मक विलंब को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देते हुए राज्य को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है। विधेयक का मसौदा विधानसभा में पेश किया जाएगा।
व्यापारिक स्वीकृतियों को समयबद्ध और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाना है, जिसमें स्वतः मान्यता, स्व-प्रमाणीकरण, तृतीय-पक्ष सत्यापन, जोखिम-आधारित निरीक्षण और लाइसेंस की दोहरी आवश्यकताओं को समाप्त करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य प्रक्रियात्मक विलंब को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देते हुए राज्य को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है। विधेयक का मसौदा विधानसभा में पेश किया जाएगा।
The govt said the Bill is intended to reduce procedural delays, improve transparency and make the state more attractive for investors while accelerating industrial growth and employment generation. The draft legislation will be introduced in the Vidhan Sabha.
रूफटॉप सोलर के लिए विश्व बैंक जुटाएगा धन
विश्व बैंक भारत में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय व्यवस्था (Private Financing) जुटाएगा।
यह वित्तपोषण पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को गति देने के लिए स्वीकृत किया गया है।
योजना का लक्ष्य 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है।
इससे नवीकरणीय ऊर्जा, घरेलू स्वच्छ बिजली और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम से विनिर्माण, स्थापना और सेवा क्षेत्र में लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।
वित्तपोषण पैकेज
IBRD (International Bank for Reconstruction and Development): 82 करोड़ डॉलर का ऋण।
Clean Technology Fund (CTF): 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण।
Livable Planet Fund: 1 करोड़ डॉलर का अनुदान।
प्रमुख उद्देश्य
रूफटॉप सोलर के लिए वित्तीय बाधाओं को कम करना।
बैंकों, वितरण कंपनियों (DISCOMs) और विक्रेताओं की क्षमता बढ़ाना।
आवासीय सौर बाज़ार का विस्तार करना।
विश्व बैंक भारत में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय व्यवस्था (Private Financing) जुटाएगा।
यह वित्तपोषण पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को गति देने के लिए स्वीकृत किया गया है।
योजना का लक्ष्य 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है।
इससे नवीकरणीय ऊर्जा, घरेलू स्वच्छ बिजली और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम से विनिर्माण, स्थापना और सेवा क्षेत्र में लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।
वित्तपोषण पैकेज
IBRD (International Bank for Reconstruction and Development): 82 करोड़ डॉलर का ऋण।
Clean Technology Fund (CTF): 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण।
Livable Planet Fund: 1 करोड़ डॉलर का अनुदान।
प्रमुख उद्देश्य
रूफटॉप सोलर के लिए वित्तीय बाधाओं को कम करना।
बैंकों, वितरण कंपनियों (DISCOMs) और विक्रेताओं की क्षमता बढ़ाना।
आवासीय सौर बाज़ार का विस्तार करना।
In a significant step towards wetland conservation, biodiversity enhancement and climate resilience, the Chhattisgarh State Wetland Authority, in collaboration with the Bilaspur Forest Division, launched a large-scale “Green Drive” at the Kopra Reservoir, one of the state’s designated Ramsar Sites. The initiative has been undertaken under the guidance of Forest and Climate Change Minister Kedar Kashyap with the objective of expanding green cover around the internationally recognised wetland while strengthening its ecological balance.