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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि आवास, आजीविका, पहचान और मानव अस्तित्व का संकट बन चुका है। इसके कारण लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं

मुख्य बिंदु
जलवायु परिवर्तन से बाढ़, सूखा, चक्रवात, समुद्री कटाव, भूस्खलन जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
इससे होने वाले पलायन को जलवायु विस्थापन (Climate Displacement) कहा जाता है।
'जलवायु शरणार्थी' शब्द प्रचलित है, लेकिन इसे अभी अंतरराष्ट्रीय कानून में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है।
भारत सबसे अधिक प्रभावित देशों में है।
2015–2024 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से 3.23 करोड़+ आंतरिक विस्थापन।
2024 में लगभग 54 लाख लोग मौसम संबंधी आपदाओं से विस्थापित हुए।

सबसे प्रभावित क्षेत्र:
सुंदरबन – समुद्र-स्तर वृद्धि एवं तटीय कटाव।
असम (ब्रह्मपुत्र के चार द्वीप) – वार्षिक बाढ़।
उत्तराखंड – भूस्खलन, बादल फटना।
बिहार, झारखंड, बुंदेलखंड – सूखा एवं आजीविका संकट।
विस्थापन केवल घर नहीं छीनता, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित करता है।
जलवायु नीति का उद्देश्य केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि लोगों का सुरक्षित पुनर्वास, सामाजिक सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल आजीविका सुनिश्चित करना होना चाहिए।

निष्कर्ष

"जलवायु परिवर्तन अब पर्यावरण का नहीं, बल्कि मानव सुरक्षा, विकास और सामाजिक न्याय का प्रश्न बन चुका है। इसलिए भारत की जलवायु नीति में 'Climate Resilience + Climate Justice + Planned Rehabilitation' को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
मै कैलेंडर generally नहीं देखता आज देखा तो pta चला 9 जुलाई तक का इस वर्ष का समय बीत गया है
आजकल दिन का pta ही नहीं चलता
नहीं तो मेरे जीवन मे एक समय aisa भी था ज़ब एक एक मिनट एक एक सेकण्ड बहुत मुश्किल से गुजरता था

Keep hoping
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भारत–यूरोप साझेदारी को सोचने की ज़रूरत

बदलते वैश्विक परिदृश्य (अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा, आपूर्ति श्रृंखला संकट, भू-राजनीतिक तनाव) में भारत–EU सहयोग की आवश्यकता बढ़ी है

केवल व्यापार नहीं, बल्कि तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र, रक्षा, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला में भी साझेदारी मजबूत करनी होगी

भारत को वार्ता में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए FTA को शीघ्र अंतिम रूप देने का प्रयास करना चाहिए

मुख्य चुनौतियाँ:

EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM)।

पर्यावरण एवं श्रम मानकों से जुड़े कठोर नियम।

सत्यापन (MRV), अनुपालन लागत और MSMEs पर संभावित बोझ

भारत को अपने उद्योगों, विशेषकर MSMEs, को नए मानकों के अनुरूप तैयार करना होगा।

भारत–EU व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) जैसे मंचों का प्रभावी उपयोग कर तकनीकी सहयोग बढ़ाना चाहिए

भारत को केवल EU पर निर्भर न रहकर फ्रांस, जर्मनी जैसे प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध भी गहरे करने चाहिए

निष्कर्ष: विश्वसनीय, दीर्घकालिक और संतुलित भारत–यूरोप साझेदारी भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश, तकनीकी उन्नति और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी
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ऑस्ट्रेलिया संग परमाणु ऊर्जा करार –

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की मेलबर्न बैठक में 18 समझौतों/परिणामों की घोषणा हुई

असैन्य परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम आपूर्ति के समझौते को लागू करने पर सहमति

साइबर सुरक्षा, डिजिटल लचीलापन, रक्षा अनुसंधान पर सहमति

ऊर्जा सुरक्षा के तहत कोयला, LNG और अन्य ऊर्जा संसाधनों की स्थिर एवं विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करने का संकल्प

रक्षा सहयोग बढ़ाने हेतु India–Australia Defence Innovation Corridor

ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने पर सहमति (जैसे विक्टोरिया यूनिवर्सिटी, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी आदि)

खनन, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), प्रौद्योगिकी और कौशल विकास में सहयोग

आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में तटरक्षक बलों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति

ECTA (Economic Cooperation and Trade Agreement) से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई; अब CECA को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर
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भारत का कम हो रहा ऊर्जा उपयोग अनुपात

इसका अर्थ है कि भारत पहले की तुलना में कम ऊर्जा से अधिक उत्पादन (GDP) कर रहा है, यानी अर्थव्यवस्था अधिक ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient) बनी है।

2000 के बाद लगातार 22 वर्षों तक ऊर्जा उपयोग अनुपात में गिरावट दर्ज की गई।

ऊर्जा दक्षता बढ़ने के प्रमुख कारण:

ऊर्जा-कुशल तकनीकों का उपयोग
नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का विस्तार

उद्योगों का आधुनिकीकरण
सेवा क्षेत्र (Service Sector) का बढ़ता योगदान

ऊर्जा उपयोग अनुपात कम होना आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे कम लागत, कम कार्बन उत्सर्जन और अधिक उत्पादकता प्राप्त होती है।

ऐतिहासिक संकटों के दौरान गिरावट (2022 के अनुसार)
1973 – अरब तेल संकट → −11.2%
1979 – ईरान क्रांति → −23.1%
1991 – भुगतान संतुलन (BoP) संकट → −30.1%
2008 – वैश्विक वित्तीय संकट → −19.9%
2013 – टेपर टैंट्रम → −13.9%

परीक्षा हेतु Keywords
Energy Intensity (ऊर्जा उपयोग अनुपात)
Energy Efficiency (ऊर्जा दक्षता)
GDP प्रति इकाई ऊर्जा
Renewable Energy
Sustainable Growth (सतत विकास)
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छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जो 'व्यापार करने में आसानी (विनियमन, छूट और सुविधा)' से संबंधित एक समर्पित कानून लागू करेगा। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक विधेयक को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य नियामक बाधाओं को कम करना और औद्योगिक स्वीकृतियों में तेजी लाना है।

Chhattisgarh is set to become the first state in the country to enact a dedicated 'Ease of Doing Business (Regulation, Exemption and Facilitation)' law, with the state cabinet on Wednesday approving a Bill aimed at cutting regulatory hurdles and speeding up industrial approvals
उद्देश्य

व्यापारिक स्वीकृतियों को समयबद्ध और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाना है, जिसमें स्वतः मान्यता, स्व-प्रमाणीकरण, तृतीय-पक्ष सत्यापन, जोखिम-आधारित निरीक्षण और लाइसेंस की दोहरी आवश्यकताओं को समाप्त करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

सरकार ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य प्रक्रियात्मक विलंब को कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देते हुए राज्य को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है। विधेयक का मसौदा विधानसभा में पेश किया जाएगा।
The govt said the Bill is intended to reduce procedural delays, improve transparency and make the state more attractive for investors while accelerating industrial growth and employment generation. The draft legislation will be introduced in the Vidhan Sabha.
रूफटॉप सोलर के लिए विश्व बैंक जुटाएगा धन

विश्व बैंक भारत में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए 4.2 अरब डॉलर की निजी वित्तीय व्यवस्था (Private Financing) जुटाएगा।

यह वित्तपोषण पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को गति देने के लिए स्वीकृत किया गया है।

योजना का लक्ष्य 40 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करना है।
इससे नवीकरणीय ऊर्जा, घरेलू स्वच्छ बिजली और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम से विनिर्माण, स्थापना और सेवा क्षेत्र में लगभग 17 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।

वित्तपोषण पैकेज
IBRD (International Bank for Reconstruction and Development): 82 करोड़ डॉलर का ऋण।

Clean Technology Fund (CTF): 6 करोड़ डॉलर का रियायती ऋण।

Livable Planet Fund: 1 करोड़ डॉलर का अनुदान।

प्रमुख उद्देश्य
रूफटॉप सोलर के लिए वित्तीय बाधाओं को कम करना।
बैंकों, वितरण कंपनियों (DISCOMs) और विक्रेताओं की क्षमता बढ़ाना।
आवासीय सौर बाज़ार का विस्तार करना।
In a significant step towards wetland conservation, biodiversity enhancement and climate resilience, the Chhattisgarh State Wetland Authority, in collaboration with the Bilaspur Forest Division, launched a large-scale “Green Drive” at the Kopra Reservoir, one of the state’s designated Ramsar Sites. The initiative has been undertaken under the guidance of Forest and Climate Change Minister Kedar Kashyap with the objective of expanding green cover around the internationally recognised wetland while strengthening its ecological balance.
Bodhghat police station in Jagdalpur has been ranked the best police station in Chhattisgarh for 2025 by the Union home ministry, marking the first time a police station from Bastar has topped the state's annual national assessment.
जगदलपुर के बोधघाट पुलिस स्टेशन को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 2025 के लिए छत्तीसगढ़ का सर्वश्रेष्ठ पुलिस स्टेशन घोषित किया गया है, जो इस बात का प्रतीक है कि बस्तर के किसी पुलिस स्टेशन ने पहली बार राज्य के वार्षिक राष्ट्रीय मूल्यांकन में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
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सभी को कल के exam के लिए all the best... अच्छे से देना
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Forwarded from CGPSC RACE (Shivani saxsena)
एक सुनहरा भविष्य तेरा इंतजार कर रहा है
फिर क्यों तू उदास बैठा है
अपना वजूद बना
मेहनत कर आगे बढ़ ...👍😁
एक नई जिंदगी शुरू कर 😄
बुला रही तुझे मुमकिनात की दुनिया


              - देवेंद्र 🙏
@cgpscraceacademy
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CGPSC SI PRE 2026 .pdf
13.4 MB
👆CG SI PRE 2026
👇 direct Q from economic survey
कन्नड़ विद्वानों का मत और 'हल्बारू' (Halbaru):अंग्रेज़ विद्वान और मानवशास्त्री जी.के. गिल्डर (G.K. Gilder) के अनुसार, 'हल्बा' शब्द की उत्पत्ति कन्नड़ भाषा के शब्द 'हल्बारू' (Halbaru) से हुई है。 कन्नड़ में 'हल्बारू' का शाब्दिक अर्थ 'प्राचीन' या 'पुराने लोग' होता है。 इस मत के आधार पर हल्बा जनजाति को इस क्षेत्र (मध्य भारत और छत्तीसगढ़) के सबसे प्राचीन बाशिंदों में से एक माना जाता ह
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