CGPSC RACE
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CG psc / Vyapam की तैयारी के लिए तैयारी
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Forwarded from CGPSC RACE (Shivani saxsena)
एक सुनहरा भविष्य तेरा इंतजार कर रहा है
फिर क्यों तू उदास बैठा है
अपना वजूद बना
मेहनत कर आगे बढ़ ...👍😁
एक नई जिंदगी शुरू कर 😄
बुला रही तुझे मुमकिनात की दुनिया


              - देवेंद्र 🙏
@cgpscraceacademy
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CGPSC SI PRE 2026 .pdf
13.4 MB
👆CG SI PRE 2026
👇 direct Q from economic survey
कन्नड़ विद्वानों का मत और 'हल्बारू' (Halbaru):अंग्रेज़ विद्वान और मानवशास्त्री जी.के. गिल्डर (G.K. Gilder) के अनुसार, 'हल्बा' शब्द की उत्पत्ति कन्नड़ भाषा के शब्द 'हल्बारू' (Halbaru) से हुई है。 कन्नड़ में 'हल्बारू' का शाब्दिक अर्थ 'प्राचीन' या 'पुराने लोग' होता है。 इस मत के आधार पर हल्बा जनजाति को इस क्षेत्र (मध्य भारत और छत्तीसगढ़) के सबसे प्राचीन बाशिंदों में से एक माना जाता ह
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Five New Medical Colleges Approved with 50 MBBS Seats Each
The newly approved government medical colleges will come up in the following locations:

Geedam (Dantewada)
Kunkuri (Jashpur)
Manendragarh
Janjgir-Champa
Kabirdham
Each medical college will have 50 MBBS seats, adding a total of 250 new MBBS seats in the state.

प्रत्येक में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई
नव स्वीकृत सरकारी मेडिकल कॉलेज निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:

गीदम (दंतेवाड़ा)
कुंकुरी (जशपुर)
मनेन्द्रगढ़
जांजगीर-चंपा
कबीरधाम
प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटें होंगी, जिससे राज्य में कुल 250 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ जाएंगी।
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Motivation का इंतज़ार मत कीजिए। कई बार काम शुरू करने  से motivation आती है
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India bans paraquat, weeds out biggest poison from its agricultural fields
Paraquat, the herbicide with no known antidote, survived years of scrutiny in India even as much of the world banned it over its toxicity. A draft notification by the Ministry of Agriculture on Tuesday imposed a nationwide prohibition on the chemical banned in over 70 countries.

भारत ने पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाया, कृषि क्षेत्रों से सबसे बड़े विष को जड़ से उखाड़ फेंका
पैराक्वाट, एक ऐसा खरपतवारनाशक जिसका कोई ज्ञात प्रतिकार नहीं है, भारत में वर्षों की गहन जांच के बाद भी बचा रहा, जबकि दुनिया के कई देशों ने इसकी विषाक्तता के कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कृषि मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक मसौदा अधिसूचना में 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित इस रसायन पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद जंक्शन से शुरू की गई है। 'नमो ग्रीन रेल' नाम से संचालित यह ट्रेन जींद और सोनीपत (89 किमी मार्ग) के बीच चलेगी

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है जो पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना केवल जल वाष्प उत्सर्जित करती है
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यूपीआई से ऑफलाइन लेनदेन (NFC आधारित UPI)
NPCI एनएफसी (Near Field Communication) तकनीक आधारित ऑफलाइन UPI भुगतान प्रणाली विकसित कर रहा है।
इससे इंटरनेट न होने पर भी UPI से भुगतान किया जा सकेगा।
ग्राहक POS मशीन पर मोबाइल टैप करके भुगतान कर सकेंगे।
ऑफलाइन लेनदेन की सीमा ₹2,000 तक होगी।
यह सुविधा कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों, हवाई जहाज, मेट्रो आदि में भी उपयोगी होगी।
POS मशीनों में NFC सुविधा जोड़ने और उन्हें प्रमाणित करने पर काम चल रहा है।
पहले UPI Lite X (2023) के जरिए दो NFC-सक्षम मोबाइलों के बीच ऑफलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी; अब इसे व्यापारी भुगतान (Merchant Payments) तक बढ़ाया जा रहा है।
नेटवर्क उपलब्ध होने पर लेनदेन का सत्यापन (Verification/Synchronization) किया जाएगा।
इस सुविधा से डिजिटल भुगतान अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा तथा ऑफलाइन भुगतान का दायरा बढ़ेगा।
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सुधार में देर का मतलब है सुधार से इनकार" (आर. जगन्नाथ)

भारत ने आर्थिक सुधारों के कई अवसर गंवाए हैं; अब सुधारों को टालने के बजाय निरंतर लागू करना आवश्यक है।

1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, भूमि और कृषि जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं हुए।

केवल बड़े निवेश से पर्याप्त रोजगार नहीं मिलेगा; श्रम-प्रधान विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देना होगा।

प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही भविष्य के कौशल और उत्पादकता की नींव है।

उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, टेलीमेडिसिन और प्रशिक्षित नर्सों/स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए।

कृषि में MSP आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर राज्यों को अधिक लचीलापन और स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

सुधारों का विरोध अक्सर निहित स्वार्थों के कारण होता है, जिससे आवश्यक परिवर्तन रुक जाते हैं।

सुधारों को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय तथा जनता से निरंतर संवाद आवश्यक है।
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निजी भागीदारी (ISRO–IN-SPACe–Skyroot)

स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 रॉकेट विकसित किया है, जो भारत का पहला निजी रूप से डिज़ाइन और निर्मित ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है।
रॉकेट के प्रथम चरण का सफल स्थैतिक (Static) परीक्षण किया गया, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता सिद्ध हुई।

विक्रम-1 लगभग 450 किलोग्राम तक का पेलोड निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने में सक्षम होगा।

यह परियोजना ISRO, IN-SPACe और निजी क्षेत्र के सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।

भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण से नवाचार, निवेश, प्रतिस्पर्धा और रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।

2020 के अंतरिक्ष सुधारों के बाद निजी कंपनियों को रॉकेट निर्माण, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष सेवाओं में भागीदारी की अनुमति मिली।

सरकार की भूमिका अब नियामक और प्रोत्साहक (Facilitator) की है, जबकि निजी कंपनियाँ निर्माण और व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।

इससे भारत का स्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है.
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2030 तक 570 जिलों को नए निर्यात हब बनाने की तैयारी

केंद्र सरकार 2030 तक 570 जिलों को निर्यात हब (Export Hubs) के रूप में विकसित करेगी।

उद्देश्य: भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुँच बढ़ाना, निर्यात में वृद्धि करना तथा नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाना।

यह पहल 'एक जिला–एक उत्पाद (ODOP)' योजना को जिला-आधारित निर्यात रणनीति से जोड़ती है।

स्थानीय उत्पादों (कृषि, हस्तशिल्प, GI टैग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, MSME उत्पाद) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।

निर्यातकों को गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, परीक्षण (Testing), लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और वैश्विक विपणन का प्रशिक्षण व सहायता मिलेगी।

ई-कॉमर्स निर्यात प्लेटफॉर्म से जोड़कर छोटे उद्यमों और नए निर्यातकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

MSME की भागीदारी बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जिलों की निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
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लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार
प्रदाता संस्था: लोकमान्य तिलक मेमोरियल ट्रस्ट, पुणे
2026 सम्मानित व्यक्ति: अजीत डोभाल ( भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA))
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बड़े शहरों के भीतर गहरी होती असमानताएँ

भारत के बड़े शहर आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र हैं, लेकिन शहरों के भीतर आय और रोजगार की असमानता तेजी से बढ़ रही है।

केवल बेरोजगारी दर से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती; वेतन, कार्य-घंटे और रोजगार की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हैं।

समान आकार के शहरों में भी औसत वेतन और आय में बड़ा अंतर देखा गया है

महिलाओं की श्रम भागीदारी अभी भी कम है और उन्हें समान कार्य के लिए पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है
महिलाओं के रोजगार में सबसे बड़ी बाधाएँ बच्चों की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियाँ और पर्याप्त अवसरों का अभाव है

शहरों के बीच उद्योगों की संरचना, कौशल स्तर और रोजगार के अवसर अलग-अलग होने से आय में व्यापक अंतर पैदा होता ह
केवल कुछ उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों के कारण शहर की औसत आय अधिक दिख सकती है, जबकि अधिकांश श्रमिक कम वेतन पर काम करते हैं

नीति-निर्माण में अब रोजगार की गुणवत्ता, वेतन समानता, महिला भागीदारी और कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है

PLFS (Periodic Labour Force Survey) और अन्य श्रम आँकड़ों के आधार पर शहर-विशिष्ट नीतियाँ बनाकर असमानता कम की जा सकती है
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संसद, सड़क और समाधान

संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है, जबकि सड़क जनता की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का स्वाभाविक मंच है
लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार है, लेकिन यह संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए

संसद और सड़क एक-दूसरे के पूरक हैं, विकल्प नहीं

संसद के भीतर संवाद, बहस और रचनात्मक विपक्ष लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं; लगातार गतिरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है

सरकार की जिम्मेदारी है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दे, जबकि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह रचनात्मक आलोचना करे

संसद परिसर या संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसक या अव्यवस्थित प्रदर्शन सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं

किसी भी विवाद का समाधान संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए, केवल टकराव से नहीं

लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में निहित है।
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कोच्चि बना 25 देशों का नौसैनिक प्रशिक्षण केंद्र
भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) में 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' नामक बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण अभ्यास शुरू किया।
इस अभ्यास में Combined Maritime Forces (CMF) से जुड़े 25 देशों के नौसैनिक एवं सैन्य प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं

भारत अब केवल प्रशिक्षण लेने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नौसैनिक प्रशिक्षण प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में उभर रहा है

प्रशिक्षण में समुद्री सुरक्षा, समुद्री कानून (Maritime Law), Maritime Domain Awareness (MDA), सूचना साझा करना और संयुक्त संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा

कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान के आधुनिक प्रशिक्षण संस्थान, सिमुलेटर और विश्वस्तरीय अवसंरचना इसे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाते हैं।
यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और भारत की सामरिक भूमिका को मजबूत करेगी

भारत की 'SAGAR (Security and Growth for All in the Region)' तथा 'MAHASAGAR' जैसी समुद्री दृष्टि को भी यह पहल आगे बढ़ाती है