Five New Medical Colleges Approved with 50 MBBS Seats Each
The newly approved government medical colleges will come up in the following locations:
Geedam (Dantewada)
Kunkuri (Jashpur)
Manendragarh
Janjgir-Champa
Kabirdham
Each medical college will have 50 MBBS seats, adding a total of 250 new MBBS seats in the state.
प्रत्येक में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई
नव स्वीकृत सरकारी मेडिकल कॉलेज निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:
गीदम (दंतेवाड़ा)
कुंकुरी (जशपुर)
मनेन्द्रगढ़
जांजगीर-चंपा
कबीरधाम
प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटें होंगी, जिससे राज्य में कुल 250 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ जाएंगी।
The newly approved government medical colleges will come up in the following locations:
Geedam (Dantewada)
Kunkuri (Jashpur)
Manendragarh
Janjgir-Champa
Kabirdham
Each medical college will have 50 MBBS seats, adding a total of 250 new MBBS seats in the state.
प्रत्येक में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई
नव स्वीकृत सरकारी मेडिकल कॉलेज निम्नलिखित स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे:
गीदम (दंतेवाड़ा)
कुंकुरी (जशपुर)
मनेन्द्रगढ़
जांजगीर-चंपा
कबीरधाम
प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटें होंगी, जिससे राज्य में कुल 250 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ जाएंगी।
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India bans paraquat, weeds out biggest poison from its agricultural fields
Paraquat, the herbicide with no known antidote, survived years of scrutiny in India even as much of the world banned it over its toxicity. A draft notification by the Ministry of Agriculture on Tuesday imposed a nationwide prohibition on the chemical banned in over 70 countries.
भारत ने पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाया, कृषि क्षेत्रों से सबसे बड़े विष को जड़ से उखाड़ फेंका
पैराक्वाट, एक ऐसा खरपतवारनाशक जिसका कोई ज्ञात प्रतिकार नहीं है, भारत में वर्षों की गहन जांच के बाद भी बचा रहा, जबकि दुनिया के कई देशों ने इसकी विषाक्तता के कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कृषि मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक मसौदा अधिसूचना में 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित इस रसायन पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
Paraquat, the herbicide with no known antidote, survived years of scrutiny in India even as much of the world banned it over its toxicity. A draft notification by the Ministry of Agriculture on Tuesday imposed a nationwide prohibition on the chemical banned in over 70 countries.
भारत ने पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाया, कृषि क्षेत्रों से सबसे बड़े विष को जड़ से उखाड़ फेंका
पैराक्वाट, एक ऐसा खरपतवारनाशक जिसका कोई ज्ञात प्रतिकार नहीं है, भारत में वर्षों की गहन जांच के बाद भी बचा रहा, जबकि दुनिया के कई देशों ने इसकी विषाक्तता के कारण इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कृषि मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी एक मसौदा अधिसूचना में 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित इस रसायन पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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यूपीआई से ऑफलाइन लेनदेन (NFC आधारित UPI)
NPCI एनएफसी (Near Field Communication) तकनीक आधारित ऑफलाइन UPI भुगतान प्रणाली विकसित कर रहा है।
इससे इंटरनेट न होने पर भी UPI से भुगतान किया जा सकेगा।
ग्राहक POS मशीन पर मोबाइल टैप करके भुगतान कर सकेंगे।
ऑफलाइन लेनदेन की सीमा ₹2,000 तक होगी।
यह सुविधा कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों, हवाई जहाज, मेट्रो आदि में भी उपयोगी होगी।
POS मशीनों में NFC सुविधा जोड़ने और उन्हें प्रमाणित करने पर काम चल रहा है।
पहले UPI Lite X (2023) के जरिए दो NFC-सक्षम मोबाइलों के बीच ऑफलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी; अब इसे व्यापारी भुगतान (Merchant Payments) तक बढ़ाया जा रहा है।
नेटवर्क उपलब्ध होने पर लेनदेन का सत्यापन (Verification/Synchronization) किया जाएगा।
इस सुविधा से डिजिटल भुगतान अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा तथा ऑफलाइन भुगतान का दायरा बढ़ेगा।
NPCI एनएफसी (Near Field Communication) तकनीक आधारित ऑफलाइन UPI भुगतान प्रणाली विकसित कर रहा है।
इससे इंटरनेट न होने पर भी UPI से भुगतान किया जा सकेगा।
ग्राहक POS मशीन पर मोबाइल टैप करके भुगतान कर सकेंगे।
ऑफलाइन लेनदेन की सीमा ₹2,000 तक होगी।
यह सुविधा कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों, हवाई जहाज, मेट्रो आदि में भी उपयोगी होगी।
POS मशीनों में NFC सुविधा जोड़ने और उन्हें प्रमाणित करने पर काम चल रहा है।
पहले UPI Lite X (2023) के जरिए दो NFC-सक्षम मोबाइलों के बीच ऑफलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की गई थी; अब इसे व्यापारी भुगतान (Merchant Payments) तक बढ़ाया जा रहा है।
नेटवर्क उपलब्ध होने पर लेनदेन का सत्यापन (Verification/Synchronization) किया जाएगा।
इस सुविधा से डिजिटल भुगतान अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा तथा ऑफलाइन भुगतान का दायरा बढ़ेगा।
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सुधार में देर का मतलब है सुधार से इनकार" (आर. जगन्नाथ)
भारत ने आर्थिक सुधारों के कई अवसर गंवाए हैं; अब सुधारों को टालने के बजाय निरंतर लागू करना आवश्यक है।
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, भूमि और कृषि जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं हुए।
केवल बड़े निवेश से पर्याप्त रोजगार नहीं मिलेगा; श्रम-प्रधान विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देना होगा।
प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही भविष्य के कौशल और उत्पादकता की नींव है।
उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, टेलीमेडिसिन और प्रशिक्षित नर्सों/स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए।
कृषि में MSP आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर राज्यों को अधिक लचीलापन और स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
सुधारों का विरोध अक्सर निहित स्वार्थों के कारण होता है, जिससे आवश्यक परिवर्तन रुक जाते हैं।
सुधारों को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय तथा जनता से निरंतर संवाद आवश्यक है।
भारत ने आर्थिक सुधारों के कई अवसर गंवाए हैं; अब सुधारों को टालने के बजाय निरंतर लागू करना आवश्यक है।
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, भूमि और कृषि जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार नहीं हुए।
केवल बड़े निवेश से पर्याप्त रोजगार नहीं मिलेगा; श्रम-प्रधान विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देना होगा।
प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही भविष्य के कौशल और उत्पादकता की नींव है।
उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, टेलीमेडिसिन और प्रशिक्षित नर्सों/स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए।
कृषि में MSP आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर राज्यों को अधिक लचीलापन और स्थानीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
सुधारों का विरोध अक्सर निहित स्वार्थों के कारण होता है, जिससे आवश्यक परिवर्तन रुक जाते हैं।
सुधारों को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय तथा जनता से निरंतर संवाद आवश्यक है।
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निजी भागीदारी (ISRO–IN-SPACe–Skyroot)
स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 रॉकेट विकसित किया है, जो भारत का पहला निजी रूप से डिज़ाइन और निर्मित ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है।
रॉकेट के प्रथम चरण का सफल स्थैतिक (Static) परीक्षण किया गया, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता सिद्ध हुई।
विक्रम-1 लगभग 450 किलोग्राम तक का पेलोड निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने में सक्षम होगा।
यह परियोजना ISRO, IN-SPACe और निजी क्षेत्र के सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण से नवाचार, निवेश, प्रतिस्पर्धा और रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
2020 के अंतरिक्ष सुधारों के बाद निजी कंपनियों को रॉकेट निर्माण, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष सेवाओं में भागीदारी की अनुमति मिली।
सरकार की भूमिका अब नियामक और प्रोत्साहक (Facilitator) की है, जबकि निजी कंपनियाँ निर्माण और व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
इससे भारत का स्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है.
स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 रॉकेट विकसित किया है, जो भारत का पहला निजी रूप से डिज़ाइन और निर्मित ऑर्बिटल लॉन्च वाहन है।
रॉकेट के प्रथम चरण का सफल स्थैतिक (Static) परीक्षण किया गया, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता सिद्ध हुई।
विक्रम-1 लगभग 450 किलोग्राम तक का पेलोड निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करने में सक्षम होगा।
यह परियोजना ISRO, IN-SPACe और निजी क्षेत्र के सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण से नवाचार, निवेश, प्रतिस्पर्धा और रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
2020 के अंतरिक्ष सुधारों के बाद निजी कंपनियों को रॉकेट निर्माण, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष सेवाओं में भागीदारी की अनुमति मिली।
सरकार की भूमिका अब नियामक और प्रोत्साहक (Facilitator) की है, जबकि निजी कंपनियाँ निर्माण और व्यावसायिक सेवाएँ प्रदान कर रही हैं।
इससे भारत का स्पेस इकोसिस्टम मजबूत होगा और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है.
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2030 तक 570 जिलों को नए निर्यात हब बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार 2030 तक 570 जिलों को निर्यात हब (Export Hubs) के रूप में विकसित करेगी।
उद्देश्य: भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुँच बढ़ाना, निर्यात में वृद्धि करना तथा नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाना।
यह पहल 'एक जिला–एक उत्पाद (ODOP)' योजना को जिला-आधारित निर्यात रणनीति से जोड़ती है।
स्थानीय उत्पादों (कृषि, हस्तशिल्प, GI टैग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, MSME उत्पाद) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।
निर्यातकों को गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, परीक्षण (Testing), लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और वैश्विक विपणन का प्रशिक्षण व सहायता मिलेगी।
ई-कॉमर्स निर्यात प्लेटफॉर्म से जोड़कर छोटे उद्यमों और नए निर्यातकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
MSME की भागीदारी बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जिलों की निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
केंद्र सरकार 2030 तक 570 जिलों को निर्यात हब (Export Hubs) के रूप में विकसित करेगी।
उद्देश्य: भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुँच बढ़ाना, निर्यात में वृद्धि करना तथा नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाना।
यह पहल 'एक जिला–एक उत्पाद (ODOP)' योजना को जिला-आधारित निर्यात रणनीति से जोड़ती है।
स्थानीय उत्पादों (कृषि, हस्तशिल्प, GI टैग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, MSME उत्पाद) को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।
निर्यातकों को गुणवत्ता सुधार, पैकेजिंग, परीक्षण (Testing), लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और वैश्विक विपणन का प्रशिक्षण व सहायता मिलेगी।
ई-कॉमर्स निर्यात प्लेटफॉर्म से जोड़कर छोटे उद्यमों और नए निर्यातकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
MSME की भागीदारी बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जिलों की निर्यात क्षमता मजबूत होगी।
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बड़े शहरों के भीतर गहरी होती असमानताएँ
भारत के बड़े शहर आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र हैं, लेकिन शहरों के भीतर आय और रोजगार की असमानता तेजी से बढ़ रही है।
केवल बेरोजगारी दर से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती; वेतन, कार्य-घंटे और रोजगार की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हैं।
समान आकार के शहरों में भी औसत वेतन और आय में बड़ा अंतर देखा गया है
महिलाओं की श्रम भागीदारी अभी भी कम है और उन्हें समान कार्य के लिए पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है
महिलाओं के रोजगार में सबसे बड़ी बाधाएँ बच्चों की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियाँ और पर्याप्त अवसरों का अभाव है
शहरों के बीच उद्योगों की संरचना, कौशल स्तर और रोजगार के अवसर अलग-अलग होने से आय में व्यापक अंतर पैदा होता ह
केवल कुछ उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों के कारण शहर की औसत आय अधिक दिख सकती है, जबकि अधिकांश श्रमिक कम वेतन पर काम करते हैं
नीति-निर्माण में अब रोजगार की गुणवत्ता, वेतन समानता, महिला भागीदारी और कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है
PLFS (Periodic Labour Force Survey) और अन्य श्रम आँकड़ों के आधार पर शहर-विशिष्ट नीतियाँ बनाकर असमानता कम की जा सकती है
भारत के बड़े शहर आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र हैं, लेकिन शहरों के भीतर आय और रोजगार की असमानता तेजी से बढ़ रही है।
केवल बेरोजगारी दर से वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती; वेतन, कार्य-घंटे और रोजगार की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हैं।
समान आकार के शहरों में भी औसत वेतन और आय में बड़ा अंतर देखा गया है
महिलाओं की श्रम भागीदारी अभी भी कम है और उन्हें समान कार्य के लिए पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है
महिलाओं के रोजगार में सबसे बड़ी बाधाएँ बच्चों की देखभाल, घरेलू जिम्मेदारियाँ और पर्याप्त अवसरों का अभाव है
शहरों के बीच उद्योगों की संरचना, कौशल स्तर और रोजगार के अवसर अलग-अलग होने से आय में व्यापक अंतर पैदा होता ह
केवल कुछ उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों के कारण शहर की औसत आय अधिक दिख सकती है, जबकि अधिकांश श्रमिक कम वेतन पर काम करते हैं
नीति-निर्माण में अब रोजगार की गुणवत्ता, वेतन समानता, महिला भागीदारी और कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है
PLFS (Periodic Labour Force Survey) और अन्य श्रम आँकड़ों के आधार पर शहर-विशिष्ट नीतियाँ बनाकर असमानता कम की जा सकती है
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संसद, सड़क और समाधान
संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है, जबकि सड़क जनता की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का स्वाभाविक मंच है
लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार है, लेकिन यह संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए
संसद और सड़क एक-दूसरे के पूरक हैं, विकल्प नहीं
संसद के भीतर संवाद, बहस और रचनात्मक विपक्ष लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं; लगातार गतिरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है
सरकार की जिम्मेदारी है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दे, जबकि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह रचनात्मक आलोचना करे
संसद परिसर या संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसक या अव्यवस्थित प्रदर्शन सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं
किसी भी विवाद का समाधान संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए, केवल टकराव से नहीं
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में निहित है।
संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है, जबकि सड़क जनता की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का स्वाभाविक मंच है
लोकतंत्र में विरोध और असहमति का अधिकार है, लेकिन यह संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए
संसद और सड़क एक-दूसरे के पूरक हैं, विकल्प नहीं
संसद के भीतर संवाद, बहस और रचनात्मक विपक्ष लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक हैं; लगातार गतिरोध लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है
सरकार की जिम्मेदारी है कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दे, जबकि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह रचनात्मक आलोचना करे
संसद परिसर या संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसक या अव्यवस्थित प्रदर्शन सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं
किसी भी विवाद का समाधान संवाद, संवैधानिक प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से होना चाहिए, केवल टकराव से नहीं
लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने में निहित है।
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कोच्चि बना 25 देशों का नौसैनिक प्रशिक्षण केंद्र
भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) में 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' नामक बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण अभ्यास शुरू किया।
इस अभ्यास में Combined Maritime Forces (CMF) से जुड़े 25 देशों के नौसैनिक एवं सैन्य प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं
भारत अब केवल प्रशिक्षण लेने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नौसैनिक प्रशिक्षण प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में उभर रहा है
प्रशिक्षण में समुद्री सुरक्षा, समुद्री कानून (Maritime Law), Maritime Domain Awareness (MDA), सूचना साझा करना और संयुक्त संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा
कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान के आधुनिक प्रशिक्षण संस्थान, सिमुलेटर और विश्वस्तरीय अवसंरचना इसे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाते हैं।
यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और भारत की सामरिक भूमिका को मजबूत करेगी
भारत की 'SAGAR (Security and Growth for All in the Region)' तथा 'MAHASAGAR' जैसी समुद्री दृष्टि को भी यह पहल आगे बढ़ाती है
भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) में 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' नामक बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण अभ्यास शुरू किया।
इस अभ्यास में Combined Maritime Forces (CMF) से जुड़े 25 देशों के नौसैनिक एवं सैन्य प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं
भारत अब केवल प्रशिक्षण लेने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नौसैनिक प्रशिक्षण प्रदाता (Net Security Provider) के रूप में उभर रहा है
प्रशिक्षण में समुद्री सुरक्षा, समुद्री कानून (Maritime Law), Maritime Domain Awareness (MDA), सूचना साझा करना और संयुक्त संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा
कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान के आधुनिक प्रशिक्षण संस्थान, सिमुलेटर और विश्वस्तरीय अवसंरचना इसे अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाते हैं।
यह पहल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और भारत की सामरिक भूमिका को मजबूत करेगी
भारत की 'SAGAR (Security and Growth for All in the Region)' तथा 'MAHASAGAR' जैसी समुद्री दृष्टि को भी यह पहल आगे बढ़ाती है
भारत की पहली डेंगू वैक्सीन 'Qdenga (क्यूडेंगा)' को मंजूरी
भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने Takeda Biopharmaceuticals की डेंगू वैक्सीन Qdenga (TAK-003) को मंजूरी दी
यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है
वैक्सीन 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत है
टीका लगाने से पहले यह जांच आवश्यक नहीं कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं
Qdenga को पहले डेंगू संक्रमण वाले और बिना संक्रमण वाले, दोनों प्रकार के लोगों को लगाया जा सकता है
इस मंजूरी से भारत की डेंगू रोकथाम रणनीति को मजबूती मिलेगी, क्योंकि भारत डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल है
भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने Takeda Biopharmaceuticals की डेंगू वैक्सीन Qdenga (TAK-003) को मंजूरी दी
यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है
वैक्सीन 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वीकृत है
टीका लगाने से पहले यह जांच आवश्यक नहीं कि व्यक्ति को पहले डेंगू हुआ है या नहीं
Qdenga को पहले डेंगू संक्रमण वाले और बिना संक्रमण वाले, दोनों प्रकार के लोगों को लगाया जा सकता है
इस मंजूरी से भारत की डेंगू रोकथाम रणनीति को मजबूती मिलेगी, क्योंकि भारत डेंगू से सर्वाधिक प्रभावित देशों में शामिल है
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Crux: छत्तीसगढ़ में बांधों पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट
छत्तीसगढ़ सरकार 32 बड़े बांधों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है।
इन परियोजनाओं से लगभग 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
परियोजना के लिए चयनित बांधों का व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराया जा रहा है।
भिलाई के मरोदा-1 जलाशय में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले से संचालित है।
पानी की सतह पर विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे और उत्पादित बिजली सीधे ग्रिड में भेजी जाएगी
यह पहल राज्य के 2030 तक ऊर्जा खपत में 30% नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य में सहायक होगी
फ्लोटिंग सोलर प्लांट के प्रमुख लाभ
कृषि भूमि का उपयोग नहीं होता, इसलिए भूमि की बचत होती है
पानी की ठंडक से सोलर पैनलों की दक्षता बढ़ती है
जलाशयों से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे पानी का संरक्षण होता है।
जलविद्युत और सौर ऊर्जा का संयुक्त उपयोग बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाता है।
बैटरी स्टोरेज के साथ रात में भी बिजली आपूर्ति संभव हो सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार 32 बड़े बांधों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है।
इन परियोजनाओं से लगभग 2,000 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
परियोजना के लिए चयनित बांधों का व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) कराया जा रहा है।
भिलाई के मरोदा-1 जलाशय में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट पहले से संचालित है।
पानी की सतह पर विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे और उत्पादित बिजली सीधे ग्रिड में भेजी जाएगी
यह पहल राज्य के 2030 तक ऊर्जा खपत में 30% नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य में सहायक होगी
फ्लोटिंग सोलर प्लांट के प्रमुख लाभ
कृषि भूमि का उपयोग नहीं होता, इसलिए भूमि की बचत होती है
पानी की ठंडक से सोलर पैनलों की दक्षता बढ़ती है
जलाशयों से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे पानी का संरक्षण होता है।
जलविद्युत और सौर ऊर्जा का संयुक्त उपयोग बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाता है।
बैटरी स्टोरेज के साथ रात में भी बिजली आपूर्ति संभव हो सकती है।
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राज्य: छत्तीसगढ़
परियोजना: फ्लोटिंग सोलर प्लांट
लक्ष्य क्षमता: 2,000 मेगावाट
चयनित बांध: 32
पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट: मरोदा-1 जलाशय, भिलाई
लक्ष्य वर्ष: 2030 (30% नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सेदारी)
परियोजना: फ्लोटिंग सोलर प्लांट
लक्ष्य क्षमता: 2,000 मेगावाट
चयनित बांध: 32
पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट: मरोदा-1 जलाशय, भिलाई
लक्ष्य वर्ष: 2030 (30% नवीकरणीय ऊर्जा हिस्सेदारी)
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सबको पता होता है कि पढ़ने से ही सिलेक्शन होगा, फिर भी हम टाल देते हैं। ऐसा क्यों??
*1. दिमाग तुरंत वाला इनाम चाहता है*
पढ़ाई का रिजल्ट महीनों बाद मिलता है, पर फोन, यूट्यूब, नींद का मज़ा अभी मिल जाता है। दिमाग हमेशा "अभी" को चुनता है।
*2. डर और ओवरथिंकिंग*
"सिलेबस बहुत बड़ा है", "मुझसे नहीं होगा", "अभी शुरू किया तो देर हो गई" — ये सोचते-सोचते शुरू ही नहीं कर पाते।
*3. क्लियर प्लान नहीं होना*
"पढ़ना है" बहुत बड़ा टास्क लगता है। जब तक ये साफ न हो कि "आज ये 2 टॉपिक 1 घंटे में करने हैं", तब तक टालमटोल होती है।
*4. थकान और एनर्जी की कमी*
लगातार पढ़ने का प्रेशर, नींद पूरी न होना, या घर के काम — इनसे भी मन नहीं करता।
*तो करें क्या?*
- *2 मिनट रूल*: बस 2 मिनट के लिए किताब खोल लो। शुरू हो गए तो दिमाग खुद आगे चलने लगता है।
-
- *छोटे टारगेट*: "आज 10 घंटे पढ़ूंगा" मत सोचो। सोचो "अभी 25 मिनट ये वाला पेज"। Pomodoro ट्राई करो।
-
- *डिस्ट्रैक्शन हटाओ*: पढ़ते समय फोन दूसरे कमरे में रख दो।
-
- *खुद को याद दिलाओ*: ये बोरिंग 1 घंटा, बाकी ज़िंदगी आसान कर देगा।
हम जानते हैं क्या करना है, बस करना मुश्किल लगता है। शुरू करने का सबसे आसान तरीका है — छोटे से शुरू करना
*1. दिमाग तुरंत वाला इनाम चाहता है*
पढ़ाई का रिजल्ट महीनों बाद मिलता है, पर फोन, यूट्यूब, नींद का मज़ा अभी मिल जाता है। दिमाग हमेशा "अभी" को चुनता है।
*2. डर और ओवरथिंकिंग*
"सिलेबस बहुत बड़ा है", "मुझसे नहीं होगा", "अभी शुरू किया तो देर हो गई" — ये सोचते-सोचते शुरू ही नहीं कर पाते।
*3. क्लियर प्लान नहीं होना*
"पढ़ना है" बहुत बड़ा टास्क लगता है। जब तक ये साफ न हो कि "आज ये 2 टॉपिक 1 घंटे में करने हैं", तब तक टालमटोल होती है।
*4. थकान और एनर्जी की कमी*
लगातार पढ़ने का प्रेशर, नींद पूरी न होना, या घर के काम — इनसे भी मन नहीं करता।
*तो करें क्या?*
- *2 मिनट रूल*: बस 2 मिनट के लिए किताब खोल लो। शुरू हो गए तो दिमाग खुद आगे चलने लगता है।
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- *छोटे टारगेट*: "आज 10 घंटे पढ़ूंगा" मत सोचो। सोचो "अभी 25 मिनट ये वाला पेज"। Pomodoro ट्राई करो।
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- *डिस्ट्रैक्शन हटाओ*: पढ़ते समय फोन दूसरे कमरे में रख दो।
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- *खुद को याद दिलाओ*: ये बोरिंग 1 घंटा, बाकी ज़िंदगी आसान कर देगा।
हम जानते हैं क्या करना है, बस करना मुश्किल लगता है। शुरू करने का सबसे आसान तरीका है — छोटे से शुरू करना
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