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📘 UP-TET/CTET बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र – 38 महत्वपूर्ण प्रश्न
Post 12 – विकासात्मक अवस्थाएँ, सिद्धांत एवं मनोवैज्ञानिक
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👶 पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाएँ
· मूर्त संक्रियात्मक अवस्था – बच्चा अमूर्त रूप से वस्तुओं व घटनाओं के विषय में चिंतन शुरू करता है।
· संवेदी पेशीय अवस्था – 0 से 2 वर्ष तक।
· पूर्व-बाल्यावस्था – "खिलौनों की आयु" कहलाती है।
· मूर्त संक्रियाएँ (7–12 वर्ष) – बच्चे की सोच मूर्त अनुभवों व प्रत्ययों से जुड़ी होती है।
· उत्तर बाल्यावस्था – बच्चा द्रव्यमान, संख्या व क्षेत्र के संरक्षण को समझने लगता है।
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🧒 विकास की अवस्थाएँ एवं विशेषताएँ
· किशोरावस्था – बच्चा अपने समवयस्क समूह का सक्रिय सदस्य बन जाता है।
(13 वर्षीय बालक बड़ों से झगड़ा करने लगता है)
· बाल्यावस्था – शर्म व गर्व जैसी भावनाओं का विकास होता है।
· दूसरे वर्ष के अंत तक – शिशु का शब्द भंडार लगभग 100 शब्द हो जाता है।
· शैशवावस्था की मुख्य विशेषता नहीं – चिंतन प्रक्रिया।
· विकास शुरू होता है – प्रसवपूर्व अवस्था से।
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🧠 बुद्धि, संज्ञान एवं अधिगम सिद्धांत
· पियाजे के अनुसार बौद्धिक विकास का निर्धारक तत्व नहीं – सामाजिक संचरण।
· संज्ञानात्मक विकास – विद्यालय एवं कक्षा में सबसे अच्छे तरीके से परिभाषित किया जा सकता है।
· ब्रूनर – संज्ञानवादी समप्रदाय के समर्थक।
· गेस्टाल्ट का अर्थ – सम्पूर्ण या समग्र।
· क्षेत्रीय सिद्धांत – जीव के हर क्षेत्र पर बल देता है।
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⚖️ नैतिक विकास एवं संवेग
· कोहलबर्ग के अनुसार – सही-गलत के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया नैतिक तर्कणा कहलाती है।
· मैक्डूगल के अनुसार – मूल प्रवृत्ति ‘जिज्ञासा’ का संबंध आश्चर्य संवेग से है।
· समाजीकरण – सामूहिक गतिविधियाँ सीखने को सुगम बनाने के साथ-साथ इसमें सहायक होती हैं।
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👨🏫 शिक्षण-अधिगम से संबंधित
· विद्यार्थी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता – आज्ञाकारिता।
· मानवीय मूल्यों का विकास – अभिव्यक्ति।
· भावात्मक क्षेत्र – जब विद्यार्थी समकक्ष समूह के प्रति आक्रामक व्यवहार करे और विद्यालय के मानदंडों को न माने, तो इस क्षेत्र में सहायता की आवश्यकता होती है।
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🔬 मनोवैज्ञानिक एवं उनके सिद्धांत
· प्रतिस्थापन का सिद्धांत – गुथरी द्वारा दिया गया।
· स्वसिद्धांत – कार्ल रोजर द्वारा प्रतिपादित।
· आवश्यकता का पदसोपान सिद्धांत – अब्राहम मास्लो द्वारा दिया गया।
· व्यवहारवादी मनोविज्ञान के जनक – वाटसन।
· मनोविज्ञान के जनक – सिगमंड फ्रायड (मनोविश्लेषणात्मक मनोविज्ञान के भी जनक)।
· अंधों की लिपि (ब्रेल) के जनक – लुई ब्रेल।
· LKG व UKG पद्धति के जनक – फ्रोबेल।
· नर्सरी पद्धति के जनक – मारिया मॉन्टेसरी।
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📝 अधिगम एवं संज्ञान: परिभाषाएँ
· अधिगम का अर्थ – सीखना।
· अधिगम – मानव व्यवहार में होने वाला स्थाई परिवर्तन।
· अधिगम पूर्ण होगा – जब व्यवहार में स्थाई परिवर्तन हो जाए।
· संज्ञान – किसी ज्ञान को ग्रहण करना।
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🎯 याद रखें:
UP-TET/CTET में बाल विकास के ये प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। प्रत्येक अवस्था, सिद्धांत व मनोवैज्ञानिक को उनकी प्रमुख अवधारणाओं के साथ याद करें।
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#UPTET #CTET #ChildDevelopment #TeachingPsychology #Piaget #Kohlberg #Bruner #LearningTheories #ExamPreparation #EducationalPsychology
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👶 पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाएँ
· मूर्त संक्रियात्मक अवस्था – बच्चा अमूर्त रूप से वस्तुओं व घटनाओं के विषय में चिंतन शुरू करता है।
· संवेदी पेशीय अवस्था – 0 से 2 वर्ष तक।
· पूर्व-बाल्यावस्था – "खिलौनों की आयु" कहलाती है।
· मूर्त संक्रियाएँ (7–12 वर्ष) – बच्चे की सोच मूर्त अनुभवों व प्रत्ययों से जुड़ी होती है।
· उत्तर बाल्यावस्था – बच्चा द्रव्यमान, संख्या व क्षेत्र के संरक्षण को समझने लगता है।
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🧒 विकास की अवस्थाएँ एवं विशेषताएँ
· किशोरावस्था – बच्चा अपने समवयस्क समूह का सक्रिय सदस्य बन जाता है।
(13 वर्षीय बालक बड़ों से झगड़ा करने लगता है)
· बाल्यावस्था – शर्म व गर्व जैसी भावनाओं का विकास होता है।
· दूसरे वर्ष के अंत तक – शिशु का शब्द भंडार लगभग 100 शब्द हो जाता है।
· शैशवावस्था की मुख्य विशेषता नहीं – चिंतन प्रक्रिया।
· विकास शुरू होता है – प्रसवपूर्व अवस्था से।
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🧠 बुद्धि, संज्ञान एवं अधिगम सिद्धांत
· पियाजे के अनुसार बौद्धिक विकास का निर्धारक तत्व नहीं – सामाजिक संचरण।
· संज्ञानात्मक विकास – विद्यालय एवं कक्षा में सबसे अच्छे तरीके से परिभाषित किया जा सकता है।
· ब्रूनर – संज्ञानवादी समप्रदाय के समर्थक।
· गेस्टाल्ट का अर्थ – सम्पूर्ण या समग्र।
· क्षेत्रीय सिद्धांत – जीव के हर क्षेत्र पर बल देता है।
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⚖️ नैतिक विकास एवं संवेग
· कोहलबर्ग के अनुसार – सही-गलत के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया नैतिक तर्कणा कहलाती है।
· मैक्डूगल के अनुसार – मूल प्रवृत्ति ‘जिज्ञासा’ का संबंध आश्चर्य संवेग से है।
· समाजीकरण – सामूहिक गतिविधियाँ सीखने को सुगम बनाने के साथ-साथ इसमें सहायक होती हैं।
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👨🏫 शिक्षण-अधिगम से संबंधित
· विद्यार्थी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता – आज्ञाकारिता।
· मानवीय मूल्यों का विकास – अभिव्यक्ति।
· भावात्मक क्षेत्र – जब विद्यार्थी समकक्ष समूह के प्रति आक्रामक व्यवहार करे और विद्यालय के मानदंडों को न माने, तो इस क्षेत्र में सहायता की आवश्यकता होती है।
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🔬 मनोवैज्ञानिक एवं उनके सिद्धांत
· प्रतिस्थापन का सिद्धांत – गुथरी द्वारा दिया गया।
· स्वसिद्धांत – कार्ल रोजर द्वारा प्रतिपादित।
· आवश्यकता का पदसोपान सिद्धांत – अब्राहम मास्लो द्वारा दिया गया।
· व्यवहारवादी मनोविज्ञान के जनक – वाटसन।
· मनोविज्ञान के जनक – सिगमंड फ्रायड (मनोविश्लेषणात्मक मनोविज्ञान के भी जनक)।
· अंधों की लिपि (ब्रेल) के जनक – लुई ब्रेल।
· LKG व UKG पद्धति के जनक – फ्रोबेल।
· नर्सरी पद्धति के जनक – मारिया मॉन्टेसरी।
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📝 अधिगम एवं संज्ञान: परिभाषाएँ
· अधिगम का अर्थ – सीखना।
· अधिगम – मानव व्यवहार में होने वाला स्थाई परिवर्तन।
· अधिगम पूर्ण होगा – जब व्यवहार में स्थाई परिवर्तन हो जाए।
· संज्ञान – किसी ज्ञान को ग्रहण करना।
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🎯 याद रखें:
UP-TET/CTET में बाल विकास के ये प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। प्रत्येक अवस्था, सिद्धांत व मनोवैज्ञानिक को उनकी प्रमुख अवधारणाओं के साथ याद करें।
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