Q. कौन व्यकित हाल ही में,
CBI के नये निदेशक नियुक्त
किये गये है?
(a) अरविन्द कुमार शाह
(b) वीरेंदर निगम
(c) राजेश पाटीदार
(d) ऋषि कुमार शुक्ला
👇👇👇👇
Answer : D
CBI के नये निदेशक नियुक्त
किये गये है?
(a) अरविन्द कुमार शाह
(b) वीरेंदर निगम
(c) राजेश पाटीदार
(d) ऋषि कुमार शुक्ला
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Answer : D
❄️❄️नीलांबर आचार्य भारत में नेपाल के नए राजदूत नियुक्त👇
नेपाल के पूर्व कानून मंत्री नीलांबर आचार्य को भारत में देश का नया राजदूत नियुक्त किया गया है।
दीप कुमार उपाध्याय के करीब एक साल पहले इस्तीफा देने के बाद से ही भारत में नेपाली राजदूत का पद खाली था। उपाध्याय ने राजनीति में शामिल होने के लिए इस्तीफा दिया था।
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❄️❄️वयोवृद्ध पत्रकार बनारसी सिंह का निधन👇
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक बनारसी सिंह का निधन हो गया। सिंह 85 वर्ष के थे।
सिंह के नाम पर दस पुस्तके दर्ज हैं। इनमें ‘सन सत्तावन के भूले शहीद’ और ‘लंदन में गोली’ उल्लेखनीय है।
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❄️❄️पी.वी.भारती बनीं कॉरपोरेशन बैंक की सीईओ👇
केनरा बैंक की कार्यकारी निदेशक पी.वी.भारती ने कॉरपोरेशन बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पदभार ग्रहण कर लिया है। वह बैंक में यह पद संभालने वाली पहली महिला है।
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❄️❄️शशिकांत पाटिल ने सीआईएमए पुरस्कार जीता👇
महाराष्ट्र के कलाकार शशिकांत पाटिल को सेंटर ऑफ इंटरनेशनल मॉर्डन आर्ट (सीआईएमए) पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है। महाराष्ट्र के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले पाटिल ने अपनी पेटिंग ‘ट्रांसफोरमेशन’ के लिए पुरस्कार जीता है।
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नेपाल के पूर्व कानून मंत्री नीलांबर आचार्य को भारत में देश का नया राजदूत नियुक्त किया गया है।
दीप कुमार उपाध्याय के करीब एक साल पहले इस्तीफा देने के बाद से ही भारत में नेपाली राजदूत का पद खाली था। उपाध्याय ने राजनीति में शामिल होने के लिए इस्तीफा दिया था।
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❄️❄️वयोवृद्ध पत्रकार बनारसी सिंह का निधन👇
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक बनारसी सिंह का निधन हो गया। सिंह 85 वर्ष के थे।
सिंह के नाम पर दस पुस्तके दर्ज हैं। इनमें ‘सन सत्तावन के भूले शहीद’ और ‘लंदन में गोली’ उल्लेखनीय है।
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❄️❄️पी.वी.भारती बनीं कॉरपोरेशन बैंक की सीईओ👇
केनरा बैंक की कार्यकारी निदेशक पी.वी.भारती ने कॉरपोरेशन बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पदभार ग्रहण कर लिया है। वह बैंक में यह पद संभालने वाली पहली महिला है।
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❄️❄️शशिकांत पाटिल ने सीआईएमए पुरस्कार जीता👇
महाराष्ट्र के कलाकार शशिकांत पाटिल को सेंटर ऑफ इंटरनेशनल मॉर्डन आर्ट (सीआईएमए) पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है। महाराष्ट्र के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले पाटिल ने अपनी पेटिंग ‘ट्रांसफोरमेशन’ के लिए पुरस्कार जीता है।
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श्रम मंत्रालय ने खदानों में महिलाओं को रोजगार की अनुमति देने हेतु नियम अधिसूचित किए
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 04 फरवरी 2019 को खदानों में महिलाओं की नियुक्ति करने की अधिसूचना जारी कर दी है जिसके बाद महिलाओं को भी खनन कार्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो गए हैं.
मंत्रालय ने बताया कि सरकार के इस कदम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलेगा और उनको खनन क्षेत्र में रोजगार के समान अवसर उपलब्ध होंगे. अधिसूचना के अनुसार, कंपनियां या नियोक्ता को खदानों में महिला कर्मचारियों की अनुमति दे दी गई है. महिलाओं की नियुक्ति खदान के भीतर तथा खदान के ऊपर की जा सकती है.
प्रावधान:
खान अधिनियम, 1952 की धारा 83 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकार का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार ने खान अधिनियम, 1952 की धारा 46 के प्रावधानों के तहत महिलाओं को जमीन के ऊपर या जमीन के नीचे स्थित खदान में रोजगार प्रदान करने की छूट दी है.
जमीन के ऊपर स्थित किसी खदान में महिलाओं को रोजगार देने के मामले में:
• खदान का मालिक महिलाओं को रात्रि 7 बजे से प्रात: 6 बजे तक की कार्य अवधि प्रदान कर सकता है.
• महिलाओं की नियुक्ति उनकी लिखित अनुमति के बाद ही की जाएगी.
• ऐसी नियुक्ति में महिलाओं को पर्याप्त सुविधाएं, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाएगी.
• मुख्य खान निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मानक संचालन प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी.
• कम से कम तीन महिलाओं को एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाएगी.
@currentaffairsstocks
जमीन के नीचे स्थित किसी खदान में महिलाओं को रोजगार देने के मामले में:
• खदान-मालिक महिलाओं को प्रात: 6 बजे से सायं 7 बजे तक तकनीकी, निरीक्षण और प्रबंधकीय कार्य सौंप सकता हैं जहां निरंतर उपस्थिति की आवश्यकता न हो.
• महिलाओं की नियुक्ति उनकी लिखित अनुमति के बाद ही की जाएगी.
• ऐसी नियुक्ति में महिलाओं को पर्याप्त सुविधाएं, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाएगी.
• मुख्य खान निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मानक संचालन प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी.
• कम से कम तीन महिलाओं को एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाएगी.
पृष्ठभूमि:
खान अधिनियम, 1952 में जमीन के ऊपर या नीचे स्थित खदानों में महिलाओं को सायं 7 बजे से प्रात: 6 बजे तक रोजगार देना प्रतिबंधित था. विभिन्न महिला कामगार समूह, उद्योग जगत और इंजीनियरिंग एवं डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने सरकार से समय-समय पर यह मांग की थी कि खदानों में कार्य करने के लिए महिलाओं को भी रोजगार के समान अवसर दिए जाने चाहिए.
यह अधिसूचना खनन अधिनियम 1952 में बदलाव के बाद जारी की गई है. अधिसूचना के अनुसार महिलाओं की तैनाती गैर जोखिम वाले कार्य तथा क्षेत्र में की जाएगी. खदान के भीतर महिलाओं की नियुक्ति अनियमित कार्य के लिए की जा सकती है.
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को महिलाओं को खदानों में तैनात करने के अनुरोध विभिन्न महिला कर्मचारी संगठनों, उद्योग तथा छात्रों से प्राप्त हुए थे. खनन मंत्रालय ने भी महिलाओं को खदान क्षेत्रों में तैनात करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था.
इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस अनुरोध पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया और इसकी सिफारिशों के आधार पर महिलाओं को भी खदानों में तैनात करने की अनुमति देने का फैसला किया. इसके लिए गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, खनन मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और प्राकृतिक गैस एवं तेल मंत्रालय से व्यापक स्तर पर विचार विमर्श किया.
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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 04 फरवरी 2019 को खदानों में महिलाओं की नियुक्ति करने की अधिसूचना जारी कर दी है जिसके बाद महिलाओं को भी खनन कार्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो गए हैं.
मंत्रालय ने बताया कि सरकार के इस कदम से महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलेगा और उनको खनन क्षेत्र में रोजगार के समान अवसर उपलब्ध होंगे. अधिसूचना के अनुसार, कंपनियां या नियोक्ता को खदानों में महिला कर्मचारियों की अनुमति दे दी गई है. महिलाओं की नियुक्ति खदान के भीतर तथा खदान के ऊपर की जा सकती है.
प्रावधान:
खान अधिनियम, 1952 की धारा 83 की उपधारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकार का उपयोग करते हुए केंद्र सरकार ने खान अधिनियम, 1952 की धारा 46 के प्रावधानों के तहत महिलाओं को जमीन के ऊपर या जमीन के नीचे स्थित खदान में रोजगार प्रदान करने की छूट दी है.
जमीन के ऊपर स्थित किसी खदान में महिलाओं को रोजगार देने के मामले में:
• खदान का मालिक महिलाओं को रात्रि 7 बजे से प्रात: 6 बजे तक की कार्य अवधि प्रदान कर सकता है.
• महिलाओं की नियुक्ति उनकी लिखित अनुमति के बाद ही की जाएगी.
• ऐसी नियुक्ति में महिलाओं को पर्याप्त सुविधाएं, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाएगी.
• मुख्य खान निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मानक संचालन प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी.
• कम से कम तीन महिलाओं को एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाएगी.
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जमीन के नीचे स्थित किसी खदान में महिलाओं को रोजगार देने के मामले में:
• खदान-मालिक महिलाओं को प्रात: 6 बजे से सायं 7 बजे तक तकनीकी, निरीक्षण और प्रबंधकीय कार्य सौंप सकता हैं जहां निरंतर उपस्थिति की आवश्यकता न हो.
• महिलाओं की नियुक्ति उनकी लिखित अनुमति के बाद ही की जाएगी.
• ऐसी नियुक्ति में महिलाओं को पर्याप्त सुविधाएं, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाएगी.
• मुख्य खान निरीक्षक द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मानक संचालन प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए महिलाओं की नियुक्ति की जाएगी.
• कम से कम तीन महिलाओं को एक शिफ्ट में ड्यूटी दी जाएगी.
पृष्ठभूमि:
खान अधिनियम, 1952 में जमीन के ऊपर या नीचे स्थित खदानों में महिलाओं को सायं 7 बजे से प्रात: 6 बजे तक रोजगार देना प्रतिबंधित था. विभिन्न महिला कामगार समूह, उद्योग जगत और इंजीनियरिंग एवं डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने सरकार से समय-समय पर यह मांग की थी कि खदानों में कार्य करने के लिए महिलाओं को भी रोजगार के समान अवसर दिए जाने चाहिए.
यह अधिसूचना खनन अधिनियम 1952 में बदलाव के बाद जारी की गई है. अधिसूचना के अनुसार महिलाओं की तैनाती गैर जोखिम वाले कार्य तथा क्षेत्र में की जाएगी. खदान के भीतर महिलाओं की नियुक्ति अनियमित कार्य के लिए की जा सकती है.
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को महिलाओं को खदानों में तैनात करने के अनुरोध विभिन्न महिला कर्मचारी संगठनों, उद्योग तथा छात्रों से प्राप्त हुए थे. खनन मंत्रालय ने भी महिलाओं को खदान क्षेत्रों में तैनात करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था.
इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस अनुरोध पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया और इसकी सिफारिशों के आधार पर महिलाओं को भी खदानों में तैनात करने की अनुमति देने का फैसला किया. इसके लिए गृह मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, खनन मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और प्राकृतिक गैस एवं तेल मंत्रालय से व्यापक स्तर पर विचार विमर्श किया.
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प्रधानमंत्री किसान योजना: दूसरी किस्त पाने हेतु आधार अनिवार्य
केंद्र सरकार ने छोटे किसानों को नकद समर्थन उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री किसान योजना (PM Kisan scheme) के तहत पहली किस्त के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा. हालांकि, दूसरी किस्त पाने के लिए आधार को अनिवार्य किया गया है.
नोट
केंद्र सरकार ने 2019-20 के अंतरिम बजट में 75,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की है. इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक की जोत वाले छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की नकद मदद दी जाएगी. यह राशि तीन किस्तों में उनके बैंक खाते में डाली जायेगी. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया था. इस योजना का फायदा देश के 12 करोड़ किसानों को होगा.
सरकार ने बजट 2019 में किसानों की आय दुगनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की शुरुआत की है.
पहली किस्त हेतु आधार अनिवार्य नहीं:
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 2,000 रुपये की पहली किस्त के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन दूसरी किस्त पाने के लिए आधार नंबर को अनिवार्य किया गया है. किसानों को अपनी पहचान बताने के लिए आधार नंबर देना होगा.
केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का क्रियान्वयन इसी साल से होगा और किसानों को पहली किस्त मार्च तक हस्तांतरित की जाएगी.
कृषि मंत्रालय के निर्देश:
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को कहा है कि दिसंबर 2018 से मार्च 2019 की अवधि की किस्त पाने के लिये आधार नंबर जहां उपलब्ध होगा, वहीं लिया जाएगा. यदि आधार नंबर नहीं है तो अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, नरेगा रोजगार कार्ड या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी किसी अन्य पहचान पत्र के आधार पर पहली किस्त दी जा सकती है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि दूसरी और उसके बाद की किस्त पाने हेतु आधार नंबर अनिवार्य होगा.
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केंद्र सरकार ने छोटे किसानों को नकद समर्थन उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री किसान योजना (PM Kisan scheme) के तहत पहली किस्त के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं होगा. हालांकि, दूसरी किस्त पाने के लिए आधार को अनिवार्य किया गया है.
नोट
केंद्र सरकार ने 2019-20 के अंतरिम बजट में 75,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की घोषणा की है. इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक की जोत वाले छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की नकद मदद दी जाएगी. यह राशि तीन किस्तों में उनके बैंक खाते में डाली जायेगी. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने एक फरवरी को लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया था. इस योजना का फायदा देश के 12 करोड़ किसानों को होगा.
सरकार ने बजट 2019 में किसानों की आय दुगनी करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की शुरुआत की है.
पहली किस्त हेतु आधार अनिवार्य नहीं:
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार 2,000 रुपये की पहली किस्त के लिए आधार अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन दूसरी किस्त पाने के लिए आधार नंबर को अनिवार्य किया गया है. किसानों को अपनी पहचान बताने के लिए आधार नंबर देना होगा.
केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का क्रियान्वयन इसी साल से होगा और किसानों को पहली किस्त मार्च तक हस्तांतरित की जाएगी.
कृषि मंत्रालय के निर्देश:
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को कहा है कि दिसंबर 2018 से मार्च 2019 की अवधि की किस्त पाने के लिये आधार नंबर जहां उपलब्ध होगा, वहीं लिया जाएगा. यदि आधार नंबर नहीं है तो अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों जैसे- ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, नरेगा रोजगार कार्ड या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा जारी किसी अन्य पहचान पत्र के आधार पर पहली किस्त दी जा सकती है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि दूसरी और उसके बाद की किस्त पाने हेतु आधार नंबर अनिवार्य होगा.
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नासा की हबल दूरबीन ने बौनी आकाशगंगा की खोज की
नासा के अंतरिक्ष टेलिस्कोप हबल ने हाल ही में ब्रह्मांड में एक और आकाशगंगा का पता लगाया है लेकिन नासा का कहना है कि यह आकाशगंगा हमारी मौजूदा आकाशगंगा की तुलना में बौनी है. नासा के स्पेस टेलिस्कोप हबल से इस आकाशगंगा का अध्ययन किया गया जिसके बाद ही इसे बौना (Dwarf) कहा गया है.
नई आकाशगंगा को बेदिन-1 (Bedin-1) नाम दिया गया है. रॉयल एस्ट्रॉनोमिकल सोसायटी लेटर्स जर्नल के मासिक नोटिस में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक हबल के एडवांस कैमरे का उपयोग कर अध्ययन करने पर पता चला कि सितारों का एक छोटा संग्रह दिखाई दे रहा था. इन तारों की चमक और तापमान का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करने के बाद खगोलविदों ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये तारे आकाशगंगा के तारामंडल का हिस्सा नहीं हैं बल्कि उससे करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं.
खोज के मुख्य बिंदु
• नासा के स्पेस टेलीस्कोप ‘हबल’ ने तीन करोड़ प्रकाश वर्ष दूर, हमारे ब्रह्मांड में पीछे की ओर मौजूद एक बौनी (Dwarf) आकाशगंगा का पता लगाया है.
• शोधकर्त्ताओं ने तारों के गोल गुच्छे NGC 6752 के भीतर सफेद बौने तारों का अध्ययन करने के लिये स्पेस टेलीस्कोप ‘हबल’ का इस्तेमाल किया था.
• इस अध्ययन का उद्देश्य गोल तारामंडल की आयु का पता लगाने के लिये इन तारों का इस्तेमाल करना था, लेकिन इस प्रक्रिया में शोधकर्त्ताओं को बौनी आकाशगंगा मिली.
• गौरतलब है कि बौनी आकाशगंगा में दूसरी आकाशगंगाओं की तुलना में काफी कम तारे होते हैं.
बौनी (Dwarf) आकाशगंगा
बौनी आकाशगंगाओं को उनके छोटे आकार, धूमिल, धूल की कमी आदि द्वारा परिभाषित किया जाता है. इनमें पुराने तारे मौजूद होते हैं. इस प्रकार की 36 आकाशगंगाएँ पहले से ही ज्ञात हैं जो आकाशगंगा के स्थानीय समूह में मौजूद हैं, जिनमें से 22 अपनी मिल्की वे की उपग्रह आकाशगंगाएँ हैं. तारों की विशेषताओं का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने इस आकाशगंगा की उम्र पता की है उन्होंने बताया कि यह बौनी आकाशगंगा लगभग 1300 करोड़ वर्ष पुरानी है. अर्थात यह लगभग उतनी ही पुरानी है जितना ब्रह्मांड पुराना है. वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआत में ही यह अन्य आकाशगंगाओं से दूर हो गई होंगी और इसका विकास नहीं हुआ होगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पर जीवन की संभावना बेहद कम है.
हबल स्पेस टेलिस्कोप
• हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी (Hubble Space Telescope) वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है.
• इसे 25 अप्रैल सन् 1990 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था.
• हबल स्पेस टेलिस्कोप को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था.
• अमेरिकी खगोलविज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे 'हबल’ नाम दिया गया है. यह नासा की प्रमुख वेधशालाओं में से एक है.
• यह एकमात्र स्पेस टेलिस्कोप है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है.
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नासा के अंतरिक्ष टेलिस्कोप हबल ने हाल ही में ब्रह्मांड में एक और आकाशगंगा का पता लगाया है लेकिन नासा का कहना है कि यह आकाशगंगा हमारी मौजूदा आकाशगंगा की तुलना में बौनी है. नासा के स्पेस टेलिस्कोप हबल से इस आकाशगंगा का अध्ययन किया गया जिसके बाद ही इसे बौना (Dwarf) कहा गया है.
नई आकाशगंगा को बेदिन-1 (Bedin-1) नाम दिया गया है. रॉयल एस्ट्रॉनोमिकल सोसायटी लेटर्स जर्नल के मासिक नोटिस में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक हबल के एडवांस कैमरे का उपयोग कर अध्ययन करने पर पता चला कि सितारों का एक छोटा संग्रह दिखाई दे रहा था. इन तारों की चमक और तापमान का ध्यानपूर्वक विश्लेषण करने के बाद खगोलविदों ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये तारे आकाशगंगा के तारामंडल का हिस्सा नहीं हैं बल्कि उससे करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं.
खोज के मुख्य बिंदु
• नासा के स्पेस टेलीस्कोप ‘हबल’ ने तीन करोड़ प्रकाश वर्ष दूर, हमारे ब्रह्मांड में पीछे की ओर मौजूद एक बौनी (Dwarf) आकाशगंगा का पता लगाया है.
• शोधकर्त्ताओं ने तारों के गोल गुच्छे NGC 6752 के भीतर सफेद बौने तारों का अध्ययन करने के लिये स्पेस टेलीस्कोप ‘हबल’ का इस्तेमाल किया था.
• इस अध्ययन का उद्देश्य गोल तारामंडल की आयु का पता लगाने के लिये इन तारों का इस्तेमाल करना था, लेकिन इस प्रक्रिया में शोधकर्त्ताओं को बौनी आकाशगंगा मिली.
• गौरतलब है कि बौनी आकाशगंगा में दूसरी आकाशगंगाओं की तुलना में काफी कम तारे होते हैं.
बौनी (Dwarf) आकाशगंगा
बौनी आकाशगंगाओं को उनके छोटे आकार, धूमिल, धूल की कमी आदि द्वारा परिभाषित किया जाता है. इनमें पुराने तारे मौजूद होते हैं. इस प्रकार की 36 आकाशगंगाएँ पहले से ही ज्ञात हैं जो आकाशगंगा के स्थानीय समूह में मौजूद हैं, जिनमें से 22 अपनी मिल्की वे की उपग्रह आकाशगंगाएँ हैं. तारों की विशेषताओं का अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने इस आकाशगंगा की उम्र पता की है उन्होंने बताया कि यह बौनी आकाशगंगा लगभग 1300 करोड़ वर्ष पुरानी है. अर्थात यह लगभग उतनी ही पुरानी है जितना ब्रह्मांड पुराना है. वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआत में ही यह अन्य आकाशगंगाओं से दूर हो गई होंगी और इसका विकास नहीं हुआ होगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पर जीवन की संभावना बेहद कम है.
हबल स्पेस टेलिस्कोप
• हबल अंतरिक्ष दूरदर्शी (Hubble Space Telescope) वास्तव में एक खगोलीय दूरदर्शी है जो अंतरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह के रूप में स्थित है.
• इसे 25 अप्रैल सन् 1990 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान डिस्कवरी की मदद से इसकी कक्षा में स्थापित किया गया था.
• हबल स्पेस टेलिस्कोप को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी के सहयोग से तैयार किया था.
• अमेरिकी खगोलविज्ञानी एडविन पोंवेल हबल के नाम पर इसे 'हबल’ नाम दिया गया है. यह नासा की प्रमुख वेधशालाओं में से एक है.
• यह एकमात्र स्पेस टेलिस्कोप है, जिसे अंतरिक्ष में ही सर्विसिंग के हिसाब से डिजाइन किया गया है.
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राष्ट्रपति ने 42 कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के जाने माने 42 कलाकारों को वर्ष 2017 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान करेंगे. यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किये जायेंगे.
राष्ट्रपति ने संगीत नाटक, नृत्य वादन एवं गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन कलाकारों को सम्मानित करेंगे. इन कलाकारों को पुरस्कार में एक लाख रुपये का चेक प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाएगा.
संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की स्वायत्र संस्था राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटय अकादमी ने 8 जून 2018 को इम्फाल (मणिपुर) में अपनी बैठक में संगीत, नृत्य, थिएटर, पारंपरिक / लोक / जनजातीय, संगीत / नृत्य / थिएटर / कठपुतली कला तथा कला के क्षेत्र में समग्र योगदान / छात्रवृत्ति के क्षेत्रों में 42 कलाकारों का चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए किया था.
पुरस्कार विजेता:
संगीत के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 11 जाने माने कलाकार- कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
ललित जे राव
हिन्दुस्तानी गायन
2.
उमाकांत गुन्देचा और रमाकांत गुन्देचा
हिन्दुस्तानी गायन
3.
योगेश समसी
हिन्दुस्तानी वाद्य – तबला
4.
राजेन्द्र प्रसन्ना
हिन्दुस्तानी वाद्य – शहनाई / बांसुरी
5.
एम.एस. शीला
कर्नाटक गायन
6.
सुमा सुधीन्द्र
कर्नाटक वाद्य – वीणा
7.
तिरूवरूर वैद्यनाथन
कर्नाटक वाद्य– मृदंगम
8.
शशांक सुब्रमणयम
कर्नाटक वाद्य – बांसुरी
9.
मधुरानी
सुगम संगीत
10.
हेमंती शुक्ला
सुगम संगीत
11.
गुरनाम सिंह
गुरबानी
नृत्य के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए निम्नलिखित 9 प्रमुख कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
रमा वैद्यनाथम
भरतनाट्यम
2.
शोभा कोसर
कथक
3.
मदंबी सुब्रमणयन
कथकली
4.
एल.एन. ओइनाम ओंगबी धोनी देवी
मणिपुरी
5.
दीपिका रेड्डी
कुचिपुड़ी
6.
सुजाता महापात्र
ओडिशी
7.
रामकृष्ण तालुकदार
सतरिया
8.
जनमेजय साईबाबू
छाउ
9.
आशित देसाई
नृत्य संगीत
थिएटर (नाट्य कला) के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 9 प्रमुख कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
अभिराम भदकमकर
नाट्य लेखन
2.
सुनील शानबाग
निर्देशन
3.
बापी बोस
निर्देशन
4.
हेमा सिंह
अभिनय
5.
दीपक तिवारी
अभिनय
6.
अनिल टिक्कू
अभिनय
7.
नुरूद्दीन अहमद
स्टेज क्राफ्ट
8.
अवतार साहनी
लाइटिंग
9.
शोउगरकपम हेमंत सिंह
सुमंग लीला, मणिपुर
पारंपरिक / लोक / जनजातीय संगीत / नृत्य थिएटर तथा कठपुतली कला के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 10 कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
अनवर खान मंगनियार
लोकसंगीत राजस्थान
2.
प्रकाश खंडगे
लोक कला महाराष्ट्र
3.
जगन्नाथ बयान
पारंपरिक संगीत खोल असम
4.
रामचन्द्र मांझी
लोक संगीत बिहार
5.
राकेश तिवारी
लोक नाट्य छत्तीसगढ
6.
पार्वती बाउल
बाउल संगीत पश्चिम बंगाल
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7.
सर्बजीत कौर
लोक संगीत पंजाब
8.
केसी रुनरेमसंगी
लोक संगीत मिजोरम
9.
मुकुन्द नायक
लोक संगीत झारखंड
10.
सुदीप गुप्ता
कठपुतली कला पश्चिम बंगाल
समग्र योगदान/ छात्रवृत्ति के क्षेत्र में:
विजय वर्मा तथा संध्यापुरेचा कला के क्षेत्र में समग्र योगदान/ छात्रवृत्ति के क्षेत्र में अकादमी परस्कार 2017 के लिए चुने गये हैं.
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के बारे में:
• संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों को सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है, जो प्रदर्शन कलाकारों एवं शिक्षकों तथा प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र से जुड़े विद्वानों को प्रदान किया जाता है.
• अकादमी पुरस्कार वर्ष 1952 से दिये जा रहे हैं.
• यह सम्मान न केवल उत्कृष्टता और उपलब्धि के उच्च मानकों के संकेतक हैं बल्कि व्यक्तिगत कार्य / योगदान को मान्यता देते हैं.
• अकादमी पुरस्कार में तामपत्र तथा अंगवस्त्रम के अतिरिक्त एक लाख रूपये दिये जाते हैं.
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के जाने माने 42 कलाकारों को वर्ष 2017 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान करेंगे. यह पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किये जायेंगे.
राष्ट्रपति ने संगीत नाटक, नृत्य वादन एवं गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इन कलाकारों को सम्मानित करेंगे. इन कलाकारों को पुरस्कार में एक लाख रुपये का चेक प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान किया जाएगा.
संगीत नाटक अकादमी की सामान्य परिषद, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की स्वायत्र संस्था राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटय अकादमी ने 8 जून 2018 को इम्फाल (मणिपुर) में अपनी बैठक में संगीत, नृत्य, थिएटर, पारंपरिक / लोक / जनजातीय, संगीत / नृत्य / थिएटर / कठपुतली कला तथा कला के क्षेत्र में समग्र योगदान / छात्रवृत्ति के क्षेत्रों में 42 कलाकारों का चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए किया था.
पुरस्कार विजेता:
संगीत के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 11 जाने माने कलाकार- कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
ललित जे राव
हिन्दुस्तानी गायन
2.
उमाकांत गुन्देचा और रमाकांत गुन्देचा
हिन्दुस्तानी गायन
3.
योगेश समसी
हिन्दुस्तानी वाद्य – तबला
4.
राजेन्द्र प्रसन्ना
हिन्दुस्तानी वाद्य – शहनाई / बांसुरी
5.
एम.एस. शीला
कर्नाटक गायन
6.
सुमा सुधीन्द्र
कर्नाटक वाद्य – वीणा
7.
तिरूवरूर वैद्यनाथन
कर्नाटक वाद्य– मृदंगम
8.
शशांक सुब्रमणयम
कर्नाटक वाद्य – बांसुरी
9.
मधुरानी
सुगम संगीत
10.
हेमंती शुक्ला
सुगम संगीत
11.
गुरनाम सिंह
गुरबानी
नृत्य के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए निम्नलिखित 9 प्रमुख कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
रमा वैद्यनाथम
भरतनाट्यम
2.
शोभा कोसर
कथक
3.
मदंबी सुब्रमणयन
कथकली
4.
एल.एन. ओइनाम ओंगबी धोनी देवी
मणिपुरी
5.
दीपिका रेड्डी
कुचिपुड़ी
6.
सुजाता महापात्र
ओडिशी
7.
रामकृष्ण तालुकदार
सतरिया
8.
जनमेजय साईबाबू
छाउ
9.
आशित देसाई
नृत्य संगीत
थिएटर (नाट्य कला) के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 9 प्रमुख कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
अभिराम भदकमकर
नाट्य लेखन
2.
सुनील शानबाग
निर्देशन
3.
बापी बोस
निर्देशन
4.
हेमा सिंह
अभिनय
5.
दीपक तिवारी
अभिनय
6.
अनिल टिक्कू
अभिनय
7.
नुरूद्दीन अहमद
स्टेज क्राफ्ट
8.
अवतार साहनी
लाइटिंग
9.
शोउगरकपम हेमंत सिंह
सुमंग लीला, मणिपुर
पारंपरिक / लोक / जनजातीय संगीत / नृत्य थिएटर तथा कठपुतली कला के क्षेत्र में अकादमी पुरस्कार 2017 के लिए 10 कलाकार चुने गये हैं.
क्रम संख्या
विजेता
श्रेणी
1.
अनवर खान मंगनियार
लोकसंगीत राजस्थान
2.
प्रकाश खंडगे
लोक कला महाराष्ट्र
3.
जगन्नाथ बयान
पारंपरिक संगीत खोल असम
4.
रामचन्द्र मांझी
लोक संगीत बिहार
5.
राकेश तिवारी
लोक नाट्य छत्तीसगढ
6.
पार्वती बाउल
बाउल संगीत पश्चिम बंगाल
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7.
सर्बजीत कौर
लोक संगीत पंजाब
8.
केसी रुनरेमसंगी
लोक संगीत मिजोरम
9.
मुकुन्द नायक
लोक संगीत झारखंड
10.
सुदीप गुप्ता
कठपुतली कला पश्चिम बंगाल
समग्र योगदान/ छात्रवृत्ति के क्षेत्र में:
विजय वर्मा तथा संध्यापुरेचा कला के क्षेत्र में समग्र योगदान/ छात्रवृत्ति के क्षेत्र में अकादमी परस्कार 2017 के लिए चुने गये हैं.
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के बारे में:
• संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कारों को सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है, जो प्रदर्शन कलाकारों एवं शिक्षकों तथा प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र से जुड़े विद्वानों को प्रदान किया जाता है.
• अकादमी पुरस्कार वर्ष 1952 से दिये जा रहे हैं.
• यह सम्मान न केवल उत्कृष्टता और उपलब्धि के उच्च मानकों के संकेतक हैं बल्कि व्यक्तिगत कार्य / योगदान को मान्यता देते हैं.
• अकादमी पुरस्कार में तामपत्र तथा अंगवस्त्रम के अतिरिक्त एक लाख रूपये दिये जाते हैं.
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Revise:
• राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 06 फरवरी 2019 को देश के जाने माने जितने कलाकारों को वर्ष 2017 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान करेंगे-42
• सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 की अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान देश का राजकोषीय घाटा जितने लाख करोड़ रुपये रहा जो बजट में निर्धारित लक्ष्य का 112.4% है-7.01 लाख करोड़ रुपये
• केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव कर महिलाओं को खदानों में ज़मीन के नीचे सुबह 6 बजे से शाम जितने बजे तक नौकरी करने की अनुमति दी है-7 बजे तक
• मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के अनुसार, 'वचन-पत्र' के वादों पर अमल करते हुए उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पोषित उद्योगों में जितने प्रतिशत रोज़गार स्थानीय लोगों को देना अनिवार्य कर दिया है-70%
• कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने राजनीतिक, आर्थिक व मानवीय संकट से ग्रस्त वेनेज़ुएला को जितने करोड़ रुपये की मदद का घोषणा किया है-286 करोड़ रुपये
• अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए यूरोपियन देशों ने ईरान के साथ व्यापार हेतु जिस नाम से पेमेंट चैनल का गठन किया है - INSTEX
• नासा की हबल दूरबीन द्वारा खोजी गई बौनी (Dwarf) आकाशगंगा का नाम है – बेदिन-1
• अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी की वह हिन्दू महिला उम्मीदवार जिसने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की है – तुलसी गेबार्ड
• केरल में किस कीटनाशक के खिलाफ चलाये जा रहे आंदोलन को हाल ही में समाप्त करने की घोषणा कर दी गई है – एंडोसल्फान
• पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस जिस दिन मनाया जाता है – 02 फरवरी
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• राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 06 फरवरी 2019 को देश के जाने माने जितने कलाकारों को वर्ष 2017 के संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान करेंगे-42
• सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 की अप्रैल-दिसंबर अवधि के दौरान देश का राजकोषीय घाटा जितने लाख करोड़ रुपये रहा जो बजट में निर्धारित लक्ष्य का 112.4% है-7.01 लाख करोड़ रुपये
• केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव कर महिलाओं को खदानों में ज़मीन के नीचे सुबह 6 बजे से शाम जितने बजे तक नौकरी करने की अनुमति दी है-7 बजे तक
• मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के अनुसार, 'वचन-पत्र' के वादों पर अमल करते हुए उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पोषित उद्योगों में जितने प्रतिशत रोज़गार स्थानीय लोगों को देना अनिवार्य कर दिया है-70%
• कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने राजनीतिक, आर्थिक व मानवीय संकट से ग्रस्त वेनेज़ुएला को जितने करोड़ रुपये की मदद का घोषणा किया है-286 करोड़ रुपये
• अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए यूरोपियन देशों ने ईरान के साथ व्यापार हेतु जिस नाम से पेमेंट चैनल का गठन किया है - INSTEX
• नासा की हबल दूरबीन द्वारा खोजी गई बौनी (Dwarf) आकाशगंगा का नाम है – बेदिन-1
• अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी की वह हिन्दू महिला उम्मीदवार जिसने वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की है – तुलसी गेबार्ड
• केरल में किस कीटनाशक के खिलाफ चलाये जा रहे आंदोलन को हाल ही में समाप्त करने की घोषणा कर दी गई है – एंडोसल्फान
• पूरी दुनिया में विश्व आर्द्रभूमि दिवस जिस दिन मनाया जाता है – 02 फरवरी
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भारतीय स्क्वाश खिलाड़ी रमित टंडन ने पीएसए चैलेंजर स्क्वाश टूर पर मिस्र के मोहम्मद अल शरबिनी को फाइनल्स में हराकर सीटल ओपन खिताब अपने नाम कर लिया।
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक बनारसी सिंह का निधन हो गया। सिंह 85 साल के थे।
ईरान ने एक नई क्रूज मिसाइल "होवेइझा" का अनावरण
इंडिया इंटरनेशनल लेदर फेयर का 34 वां संस्करण चेन्नई में शुरू हुआ है।
संगीत और नृत्य महोत्सव 'सोपान 2019' नई दिल्ली में शुरू हुआ है।
भारत पर्व का चौथा संस्करण नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूर्व चिकित्सक रोनी जैक्सन को अपना सहायक और मुख्य चिकित्सक सलाहकार नियुक्त किया है।
चीन पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा देने के लिए 2.5 बिलियन डॉलर ऋण प्रदान करेगा।
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वरिष्ठ पत्रकार और लेखक बनारसी सिंह का निधन हो गया। सिंह 85 साल के थे।
ईरान ने एक नई क्रूज मिसाइल "होवेइझा" का अनावरण
इंडिया इंटरनेशनल लेदर फेयर का 34 वां संस्करण चेन्नई में शुरू हुआ है।
संगीत और नृत्य महोत्सव 'सोपान 2019' नई दिल्ली में शुरू हुआ है।
भारत पर्व का चौथा संस्करण नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूर्व चिकित्सक रोनी जैक्सन को अपना सहायक और मुख्य चिकित्सक सलाहकार नियुक्त किया है।
चीन पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ावा देने के लिए 2.5 बिलियन डॉलर ऋण प्रदान करेगा।
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TOPIC : BHARAT RANG MAHOTSAV (BRM)
#important4exams
संदर्भ
नई दिल्ली में भारत रंग महोत्सव का 20वाँ आयोजन चल रहा है. इसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) संचालित कर रहा है.
यह महोत्सव क्या है?
भारत रंग महोत्सव राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित होने वाला भारत का एक वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच है.
इस रंगमंच की स्थापना दो दशकों पूर्व भारत-भर में रंचमंच के विकास को उत्प्रेरित करने के लिए हुई थी.
आरम्भ में इस महोत्सव में मात्र भारतीय नाट्यकर्मियों के सर्वोत्कृष्ट काम को प्रदर्शित किया जाता था. परन्तु शनैः शनै: इसका कार्यक्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय हो गया और इसमें संसार के अन्य भागों से भी रंगकर्मी अपनी-अपनी रचनाएँ ले कर आने लगे.
आज यह महोत्सव एशिया का सबसे बड़ा नाट्य उत्सव है.
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संदर्भ
नई दिल्ली में भारत रंग महोत्सव का 20वाँ आयोजन चल रहा है. इसे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) संचालित कर रहा है.
यह महोत्सव क्या है?
भारत रंग महोत्सव राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित होने वाला भारत का एक वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच है.
इस रंगमंच की स्थापना दो दशकों पूर्व भारत-भर में रंचमंच के विकास को उत्प्रेरित करने के लिए हुई थी.
आरम्भ में इस महोत्सव में मात्र भारतीय नाट्यकर्मियों के सर्वोत्कृष्ट काम को प्रदर्शित किया जाता था. परन्तु शनैः शनै: इसका कार्यक्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय हो गया और इसमें संसार के अन्य भागों से भी रंगकर्मी अपनी-अपनी रचनाएँ ले कर आने लगे.
आज यह महोत्सव एशिया का सबसे बड़ा नाट्य उत्सव है.
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Daily Top 08 Headlines in Hindi & English : 06 Feb 2019
Daily Top 08 Headlines in Hindi & English : 06 Feb 20191. Young Maharashtra-based artist Shashikant Patil has been declared as the winner of
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भारत का 40वां संचार उपग्रह जीसैट-31 सफलतापूर्वक प्रक्षेपित
#important4exams
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने फ्रेंच गुएना के अंतरिक्ष केंद्र से अपने 40वें संचार उपग्रह जीसैट-31 का 05 फरवरी 2019 को सफल प्रक्षेपण किया. इसरो द्वारा जारी जानकारी के अनुसार उपग्रह की आयु 15 वर्ष है.
यह कक्षा के अंदर मौजूद कुछ उपग्रहों पर संचालन संबंधी सेवाओं को जारी रखने में मदद मुहैया करेगा और जियोस्टेशनरी कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोंडर की क्षमता बढ़ायेगा. यह उपग्रह 2,535 किलोग्राम वजनी है जिसे फ्रेंच गुएना के कुरू से रॉकेट एरिएन-5 (वीए247) के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया है.
जीसैट-31 संचार उपग्रह के लाभ
• अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के मुताबिक, उपग्रह जीसैट-31' को इसरो के परिष्कृत आइ-2के बेस पर स्थापित किया गया है.
• यह इसरो के पूर्ववर्ती इनसैट/जीसैट उपग्रह श्रेणी के उपग्रहों का उन्नत रूप है.
• यह उपग्रह भारतीय भू-भाग और द्वीप को कवरेज प्रदान करेगा.
• इसरो ने यह भी कहा है कि जीसैट-31 का इस्तेमाल सहायक वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक्स, डिजिटल उपग्रह समाचार जुटाने, डीटीएच टेलीविजन सेवाओं, सेलुलर बैक हॉल संपर्क और इस तरह के कई कार्यो में किया जायेगा.
• यह उपग्रह अपने व्यापक बैंड ट्रांसपोंडर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के विशाल समुद्री क्षेत्र के ऊपर संचार की सुविधा के लिये विस्तृत बीम कवरेज प्रदान करेगा.
संचार उपग्रह
दूरसंचार के प्रयोजनों के लिए संचार उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात एक कृत्रिम उपग्रह है. आधुनिक संचार उपग्रह भू-स्थिर कक्ष, दीर्घवृत्ताकार कक्ष और पृथ्वी के निचले (ध्रुवीय और ग़ैर-ध्रुवीय) कक्ष सहित विभिन्न प्रकार के परिक्रमा-पथों का उपयोग करते हैं. निश्चित सेवाओं के लिए, संचार उपग्रह माइक्रोवेव रेडियो प्रसारण तकनीक उपलब्ध कराते हैं. उनका इस्तेमाल मोबाइल अनुप्रयोगों, जैसे जहाज, वाहनों, विमानों और हस्तचालित टर्मिनलों तथा टी.वी. और रेडियो प्रसारण के लिए होता है, जहां केबल जैसे अन्य प्रौद्योगिकियों का अनुप्रयोग अव्यावहारिक या असंभव है.
भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली, भूस्थिर कक्षा में स्थापित नौ प्रचलनात्मक संचार उपग्रहों सहित एशिया-पेसिफिक क्षेत्र में सबसे बडे घरेलू संचार उपग्रहों में से एक है. इन्सैट-1बी से शुरूआत करते हुए इसकी स्थापना 1983 में की गई. इसने भारत के संचार क्षेत्र में एक महत्वतपूर्ण क्रांति की शुरूआत की तथा बाद में भी इसे बरकरार रखा. वर्तमान में प्रचलनात्मक संचार उपग्रह है - इन्सैट-3ए, इन्सैट-3सी, इन्सैट-3ई, इन्सैट-4ए, इन्सैट-4सी.आर., जीसैट-8, जीसैट-10 तथा जीसैट-12 आदि.
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#important4exams
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने फ्रेंच गुएना के अंतरिक्ष केंद्र से अपने 40वें संचार उपग्रह जीसैट-31 का 05 फरवरी 2019 को सफल प्रक्षेपण किया. इसरो द्वारा जारी जानकारी के अनुसार उपग्रह की आयु 15 वर्ष है.
यह कक्षा के अंदर मौजूद कुछ उपग्रहों पर संचालन संबंधी सेवाओं को जारी रखने में मदद मुहैया करेगा और जियोस्टेशनरी कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोंडर की क्षमता बढ़ायेगा. यह उपग्रह 2,535 किलोग्राम वजनी है जिसे फ्रेंच गुएना के कुरू से रॉकेट एरिएन-5 (वीए247) के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया है.
जीसैट-31 संचार उपग्रह के लाभ
• अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के मुताबिक, उपग्रह जीसैट-31' को इसरो के परिष्कृत आइ-2के बेस पर स्थापित किया गया है.
• यह इसरो के पूर्ववर्ती इनसैट/जीसैट उपग्रह श्रेणी के उपग्रहों का उन्नत रूप है.
• यह उपग्रह भारतीय भू-भाग और द्वीप को कवरेज प्रदान करेगा.
• इसरो ने यह भी कहा है कि जीसैट-31 का इस्तेमाल सहायक वीसैट नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक्स, डिजिटल उपग्रह समाचार जुटाने, डीटीएच टेलीविजन सेवाओं, सेलुलर बैक हॉल संपर्क और इस तरह के कई कार्यो में किया जायेगा.
• यह उपग्रह अपने व्यापक बैंड ट्रांसपोंडर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के विशाल समुद्री क्षेत्र के ऊपर संचार की सुविधा के लिये विस्तृत बीम कवरेज प्रदान करेगा.
संचार उपग्रह
दूरसंचार के प्रयोजनों के लिए संचार उपग्रह अंतरिक्ष में तैनात एक कृत्रिम उपग्रह है. आधुनिक संचार उपग्रह भू-स्थिर कक्ष, दीर्घवृत्ताकार कक्ष और पृथ्वी के निचले (ध्रुवीय और ग़ैर-ध्रुवीय) कक्ष सहित विभिन्न प्रकार के परिक्रमा-पथों का उपयोग करते हैं. निश्चित सेवाओं के लिए, संचार उपग्रह माइक्रोवेव रेडियो प्रसारण तकनीक उपलब्ध कराते हैं. उनका इस्तेमाल मोबाइल अनुप्रयोगों, जैसे जहाज, वाहनों, विमानों और हस्तचालित टर्मिनलों तथा टी.वी. और रेडियो प्रसारण के लिए होता है, जहां केबल जैसे अन्य प्रौद्योगिकियों का अनुप्रयोग अव्यावहारिक या असंभव है.
भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (इन्सैट) प्रणाली, भूस्थिर कक्षा में स्थापित नौ प्रचलनात्मक संचार उपग्रहों सहित एशिया-पेसिफिक क्षेत्र में सबसे बडे घरेलू संचार उपग्रहों में से एक है. इन्सैट-1बी से शुरूआत करते हुए इसकी स्थापना 1983 में की गई. इसने भारत के संचार क्षेत्र में एक महत्वतपूर्ण क्रांति की शुरूआत की तथा बाद में भी इसे बरकरार रखा. वर्तमान में प्रचलनात्मक संचार उपग्रह है - इन्सैट-3ए, इन्सैट-3सी, इन्सैट-3ई, इन्सैट-4ए, इन्सैट-4सी.आर., जीसैट-8, जीसैट-10 तथा जीसैट-12 आदि.
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भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश
पेट्रोलियम सचिव एम.एम. कुट्टी के अनुसार 2.25 करोड़ टन खपत के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है. एशिया एलपीजी सम्मेलन को संबोधित करते हुए एम.एम. कुट्टी ने कहा कि एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत वृद्धि हुई है.
सरकार की प्रत्येक परिवार को स्वच्छ रसोई गैस ईंधन उपलब्ध कराने की पहल से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है. पेट्रोलियम सचिव ने 05 फरवरी 2019 को कहा कि देश में एलपीजी की मांग 2025 तक 34 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. एलपीजी की मांग बढ़ने से चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा उपभोक्ता बन गया है.
मुख्य तथ्य:
• वर्ष 2014-15 में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 14.8 करोड़ थी जो 2017-18 में बढ़कर 22.4 करोड़ हो गई. जनसंख्या में तेज वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी पहुंच बढ़ने से एलपीजी उपभोग में औसतन 8.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है. इससे 2.25 करोड़ टन के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है.
• पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक एलपीजी उपभोग बढ़कर 3.03 करोड़ टन पर पहुंच जाएगा. वर्ष 2040 तक यह आंकड़ा 4.06 करोड़ टन होगा.
• केंद्र सरकार ने देशभर में एलपीजी के उपभोग को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं. विशेषरूप से ग्रामीण परिवारों में एलपीजी उपभोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. ग्रामीण परिवार परंपरागत ईंधन पर निर्भर रहते हैं जो उनकी सेहत को तो नुकसान पहुंचाता ही है साथ ही इससे प्रदूषण भी बढ़ता है.
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना:
• प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत 6.31 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं. इस योजना के तहत तीन साल मे पांच करोड़ गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना के तहत वर्ष 2020 तक आठ करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है.
• प्रधानमंत्री उज्जवला योजना भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं के चेहरों पर खुशी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई एक योजना है. इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलेंगे.
• प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत आरम्भ में वित्त वर्ष 2016-17 से शुरू 3 वर्षों की अवधि के दौरान 8,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 5 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था.
• यह सभी तक ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी सरकार के समग्र फोकस का एक हिस्सा है. उन गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही है जो अब तक इस सुविधा से वंचित हैं.
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पेट्रोलियम सचिव एम.एम. कुट्टी के अनुसार 2.25 करोड़ टन खपत के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है. एशिया एलपीजी सम्मेलन को संबोधित करते हुए एम.एम. कुट्टी ने कहा कि एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत वृद्धि हुई है.
सरकार की प्रत्येक परिवार को स्वच्छ रसोई गैस ईंधन उपलब्ध कराने की पहल से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है. पेट्रोलियम सचिव ने 05 फरवरी 2019 को कहा कि देश में एलपीजी की मांग 2025 तक 34 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है. एलपीजी की मांग बढ़ने से चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा उपभोक्ता बन गया है.
मुख्य तथ्य:
• वर्ष 2014-15 में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 14.8 करोड़ थी जो 2017-18 में बढ़कर 22.4 करोड़ हो गई. जनसंख्या में तेज वृद्धि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी पहुंच बढ़ने से एलपीजी उपभोग में औसतन 8.4 प्रतिशत वृद्धि हुई है. इससे 2.25 करोड़ टन के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है.
• पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुमान के अनुसार वर्ष 2025 तक एलपीजी उपभोग बढ़कर 3.03 करोड़ टन पर पहुंच जाएगा. वर्ष 2040 तक यह आंकड़ा 4.06 करोड़ टन होगा.
• केंद्र सरकार ने देशभर में एलपीजी के उपभोग को प्रोत्साहन देने के लिए कई कदम उठाए हैं. विशेषरूप से ग्रामीण परिवारों में एलपीजी उपभोग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. ग्रामीण परिवार परंपरागत ईंधन पर निर्भर रहते हैं जो उनकी सेहत को तो नुकसान पहुंचाता ही है साथ ही इससे प्रदूषण भी बढ़ता है.
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना:
• प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत 6.31 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं. इस योजना के तहत तीन साल मे पांच करोड़ गरीब महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना के तहत वर्ष 2020 तक आठ करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है.
• प्रधानमंत्री उज्जवला योजना भारत के गरीब परिवारों की महिलाओं के चेहरों पर खुशी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई एक योजना है. इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओं को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन मिलेंगे.
• प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत आरम्भ में वित्त वर्ष 2016-17 से शुरू 3 वर्षों की अवधि के दौरान 8,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 5 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था.
• यह सभी तक ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने संबंधी सरकार के समग्र फोकस का एक हिस्सा है. उन गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही है जो अब तक इस सुविधा से वंचित हैं.
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55 किमी हर साल खिसक रहा है चुंबकीय उत्तरी ध्रुव, बदलेगी उत्तर दिशा: वैज्ञानिक शोध
#important4exams #environment
वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अपनी जगह से खिसक रहा है. चुंबकीय उत्तरी ध्रुव हर साल लगभग 55 किलोमीटर खिसक रहा है. वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्ष 2017 में इंटरनैशनल डेट लाइन (आईडीएल) को पार कर लिया था.
इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव की सहायता से कंपास पर दिशा देखी जाती है लेकिन चुंबकीय ध्रुव के खिसकने के कारण अब समुद्री यात्रा के दौरान एवं हवाई यात्रा के दौरान दिशा का पता लगाना मुश्किल हो रहा है. पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव पिछले कुछ दशकों में इतनी तेजी से खिसक रहा है कि वैज्ञानिकों के पूर्व में लगाए गए अनुमान अब जलमार्ग के लिए सही नहीं बैठ रहे. वैज्ञानिकों ने 04 फरवरी 2019 को एक अपडेट जारी किया जिसमें बताया गया है कि सटीक चुंबकीय उत्तरी ध्रुव असल में कहां है.
क्यों हो रहा है परिवर्तन?
मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद डेनियल लेथ्रोप द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इसका कारण पृथ्वी के बाहरी कोर में हलचल है. ग्रह के कोर में लोहे और निकल का गर्म तरल महासागर है जहां हलचल से विद्युतीय क्षेत्र पैदा होता है.
चुंबकीय ध्रुव के इतने तेज़ी से खिसकने का सटीक कारण फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही है लेकिन उनका अनुमान पृथ्वी की सतह के नीचे होने वाले परिवर्तन इसका कारण हैं.
वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल (WMM) को हर पांच साल में अपडेट किया जाता है, जो आखिरी बार यह 2015 में अपडेट हुआ था. लेकिन 2016 में पता चला कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अनुमान से ज्यादा तेजी से जगह बदल रहा है. 2018 में यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन और ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जल्द ही इसे अपडेट करने की जरूरत है क्योंकि डब्ल्यूएमएम की बढ़ चुकी मौजूदा त्रुटियों के चलते नेविगेशन में आने वाली गलतियां अस्वीकार्य हैं.
ध्रुवों के घूमने पर उनके नाम भी बदल जाते हैं. उदाहरण के तौर पर फेयरबैंक्स एवं अलास्का एयरपोर्ट का नाम 2009 में क्रमश: 1एल-19आर और 2एल20आर था.
चुंबकीय उत्तरी ध्रुव से हो रहे दिशा परिवर्तन को ऐसे समझा जा सकता है.
चुंबकीय उत्तरी ध्रुव में परिवर्तन और इसके प्रभाव
• चुंबकीय उत्तरी ध्रुव प्रत्येक वर्ष लगभग 55 किलोमीटर खिसक रहा है.
• वैज्ञानिकों ने कहा कि भौगोलिक उत्तरी ध्रुव की तुलना में चुंबकीय नॉर्थ पोल 4 डिग्री दक्षिण की ओर खिसक गया है.
• इसने 2017 में इंटरनैशनल डेट लाइन (आईडीएल) को पार कर लिया था और यह साइबेरिया की तरफ बढ़ते हुए फिलहाल कनाडाई आर्कटिक से आगे बढ़ रहा है.
• कॉलाराडो यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद और नए वर्ल्ड मैगनेटिक मॉडल के प्रमुख शोधकर्ता अर्नोड चुलियट ने बताया कि लगातार बदल रहे इसके स्थान की वजह से स्मार्टफोन और उपभोक्ता के इस्तेमाल वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स के कंपासेज में समस्या आ रही है.
• विमान एवं नौकाएं भी चुंबकीय उत्तरी धुव्र पर निर्भर रहती हैं खासकर शिपिंग में अतिरिक्त मदद के लिए वह इस पर निर्भर रहती हैं.
• सेना नौवहन और पैराशूट उतारने के लिए इस बात पर निर्भर रहती है कि चुंबकीय उत्तर ध्रुव कहां है जबकि नासा, संघीय विमानन प्रशासन एवं अमेरिकी वन सेवा भी इसका इस्तेमाल करती है.
• हवाईअड्डे के रनवे के नाम भी चुंबकीय उत्तरी धुव्र की तरफ उनकी दिशा पर आधारित होते हैं और ध्रुवों के घूमने पर उनके नाम भी बदल जाते हैं.
• इसके विपरीत चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव उत्तर के मुकाबले बहुत धीमी गति से खिसक रहा है.
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वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अपनी जगह से खिसक रहा है. चुंबकीय उत्तरी ध्रुव हर साल लगभग 55 किलोमीटर खिसक रहा है. वैज्ञानिकों ने बताया कि वर्ष 2017 में इंटरनैशनल डेट लाइन (आईडीएल) को पार कर लिया था.
इसका महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव की सहायता से कंपास पर दिशा देखी जाती है लेकिन चुंबकीय ध्रुव के खिसकने के कारण अब समुद्री यात्रा के दौरान एवं हवाई यात्रा के दौरान दिशा का पता लगाना मुश्किल हो रहा है. पृथ्वी का चुंबकीय उत्तरी ध्रुव पिछले कुछ दशकों में इतनी तेजी से खिसक रहा है कि वैज्ञानिकों के पूर्व में लगाए गए अनुमान अब जलमार्ग के लिए सही नहीं बैठ रहे. वैज्ञानिकों ने 04 फरवरी 2019 को एक अपडेट जारी किया जिसमें बताया गया है कि सटीक चुंबकीय उत्तरी ध्रुव असल में कहां है.
क्यों हो रहा है परिवर्तन?
मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद डेनियल लेथ्रोप द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इसका कारण पृथ्वी के बाहरी कोर में हलचल है. ग्रह के कोर में लोहे और निकल का गर्म तरल महासागर है जहां हलचल से विद्युतीय क्षेत्र पैदा होता है.
चुंबकीय ध्रुव के इतने तेज़ी से खिसकने का सटीक कारण फिलहाल वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही है लेकिन उनका अनुमान पृथ्वी की सतह के नीचे होने वाले परिवर्तन इसका कारण हैं.
वर्ल्ड मैग्नेटिक मॉडल (WMM) को हर पांच साल में अपडेट किया जाता है, जो आखिरी बार यह 2015 में अपडेट हुआ था. लेकिन 2016 में पता चला कि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव अनुमान से ज्यादा तेजी से जगह बदल रहा है. 2018 में यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन और ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों ने दावा किया कि जल्द ही इसे अपडेट करने की जरूरत है क्योंकि डब्ल्यूएमएम की बढ़ चुकी मौजूदा त्रुटियों के चलते नेविगेशन में आने वाली गलतियां अस्वीकार्य हैं.
ध्रुवों के घूमने पर उनके नाम भी बदल जाते हैं. उदाहरण के तौर पर फेयरबैंक्स एवं अलास्का एयरपोर्ट का नाम 2009 में क्रमश: 1एल-19आर और 2एल20आर था.
चुंबकीय उत्तरी ध्रुव से हो रहे दिशा परिवर्तन को ऐसे समझा जा सकता है.
चुंबकीय उत्तरी ध्रुव में परिवर्तन और इसके प्रभाव
• चुंबकीय उत्तरी ध्रुव प्रत्येक वर्ष लगभग 55 किलोमीटर खिसक रहा है.
• वैज्ञानिकों ने कहा कि भौगोलिक उत्तरी ध्रुव की तुलना में चुंबकीय नॉर्थ पोल 4 डिग्री दक्षिण की ओर खिसक गया है.
• इसने 2017 में इंटरनैशनल डेट लाइन (आईडीएल) को पार कर लिया था और यह साइबेरिया की तरफ बढ़ते हुए फिलहाल कनाडाई आर्कटिक से आगे बढ़ रहा है.
• कॉलाराडो यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद और नए वर्ल्ड मैगनेटिक मॉडल के प्रमुख शोधकर्ता अर्नोड चुलियट ने बताया कि लगातार बदल रहे इसके स्थान की वजह से स्मार्टफोन और उपभोक्ता के इस्तेमाल वाले कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स के कंपासेज में समस्या आ रही है.
• विमान एवं नौकाएं भी चुंबकीय उत्तरी धुव्र पर निर्भर रहती हैं खासकर शिपिंग में अतिरिक्त मदद के लिए वह इस पर निर्भर रहती हैं.
• सेना नौवहन और पैराशूट उतारने के लिए इस बात पर निर्भर रहती है कि चुंबकीय उत्तर ध्रुव कहां है जबकि नासा, संघीय विमानन प्रशासन एवं अमेरिकी वन सेवा भी इसका इस्तेमाल करती है.
• हवाईअड्डे के रनवे के नाम भी चुंबकीय उत्तरी धुव्र की तरफ उनकी दिशा पर आधारित होते हैं और ध्रुवों के घूमने पर उनके नाम भी बदल जाते हैं.
• इसके विपरीत चुंबकीय दक्षिणी ध्रुव उत्तर के मुकाबले बहुत धीमी गति से खिसक रहा है.
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जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकती है भयंकर तूफान आने की दर: NASA
#environment #important4exams
जलवायु परिवर्तन के कारण उष्णकटिबंधीय महासागरों का तापमान बढ़ने से सदी के अंत में बारिश के साथ भयंकर बारिश और तूफान आने की दर बढ़ सकती है. यह बात नासा के एक अध्ययन में सामने आई है.
अमेरिका में नासा के ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी’ (जेपीएल) के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया. जेपीएल के हार्टमुट औमन ने कहा की गर्म वातावरण में गंभीर तूफान बढ़ जाते हैं. भारी बारिश के साथ तूफान आमतौर पर साल के सबसे गर्म मौसम में ही आते हैं.
अध्ययन से संबंधित मुख्य तथ्य:
• इसमें औसत समुद्री सतह के तापमान और गंभीर तूफानों की शुरुआत के बीच संबंधों को निर्धारित करने के लिए उष्णकटिबंधीय महासागरों के ऊपर अंतरिक्ष एजेंसी के वायुमंडलीय इन्फ्रारेड साउंडर (एआईआरएस) के उपकरण द्वारा अधिग्रहित 15 वर्षों के आकंड़ों का अध्ययन किया गया.
• अध्ययन में पाया गया कि समुद्र की सतह का तापमान लगभग 28 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर गंभीर तूफान आते हैं.
• 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित अध्ययन में यह भी पाया गया कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण हर एक डिग्री सेल्सियस पर 21 प्रतिशत अधिक तूफान आते हैं.
नासा के बारे में:
• नासा (National Aeronautics and Space Administration) संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है. फरवरी 2006 से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है.
• नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (एनसीए) के स्थान पर किया गया था. इस संस्था ने 01 अक्टूबर 1948 से कार्य करना शुरू किया. तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है.
• वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
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#environment #important4exams
जलवायु परिवर्तन के कारण उष्णकटिबंधीय महासागरों का तापमान बढ़ने से सदी के अंत में बारिश के साथ भयंकर बारिश और तूफान आने की दर बढ़ सकती है. यह बात नासा के एक अध्ययन में सामने आई है.
अमेरिका में नासा के ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी’ (जेपीएल) के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया. जेपीएल के हार्टमुट औमन ने कहा की गर्म वातावरण में गंभीर तूफान बढ़ जाते हैं. भारी बारिश के साथ तूफान आमतौर पर साल के सबसे गर्म मौसम में ही आते हैं.
अध्ययन से संबंधित मुख्य तथ्य:
• इसमें औसत समुद्री सतह के तापमान और गंभीर तूफानों की शुरुआत के बीच संबंधों को निर्धारित करने के लिए उष्णकटिबंधीय महासागरों के ऊपर अंतरिक्ष एजेंसी के वायुमंडलीय इन्फ्रारेड साउंडर (एआईआरएस) के उपकरण द्वारा अधिग्रहित 15 वर्षों के आकंड़ों का अध्ययन किया गया.
• अध्ययन में पाया गया कि समुद्र की सतह का तापमान लगभग 28 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर गंभीर तूफान आते हैं.
• 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' में प्रकाशित अध्ययन में यह भी पाया गया कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण हर एक डिग्री सेल्सियस पर 21 प्रतिशत अधिक तूफान आते हैं.
नासा के बारे में:
• नासा (National Aeronautics and Space Administration) संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार की शाखा है जो देश के सार्वजनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों व एरोनॉटिक्स व एरोस्पेस संशोधन के लिए जिम्मेदार है. फरवरी 2006 से नासा का लक्ष्य वाक्य "भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण, वैज्ञानिक खोज और एरोनॉटिक्स संशोधन को बढ़ाना" है.
• नासा का गठन नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस अधिनियम के अंतर्गत 19 जुलाई 1948 में इसके पूर्वाधिकारी संस्था नैशनल एडवाइज़री कमिटी फॉर एरोनॉटिक्स (एनसीए) के स्थान पर किया गया था. इस संस्था ने 01 अक्टूबर 1948 से कार्य करना शुरू किया. तब से आज तक अमेरिकी अंतरिक्ष अन्वेषण के सारे कार्यक्रम नासा द्वारा संचालित किए गए हैं जिनमे अपोलो चन्द्रमा अभियान, स्कायलैब अंतरिक्ष स्टेशन और बाद में अंतरिक्ष शटल शामिल है.
• वर्तमान में नासा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन को समर्थन दे रही है और ओरायन बहु-उपयोगी कर्मीदल वाहन व व्यापारिक कर्मीदल वाहन के निर्माण व विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
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#important4exams #dailyCurrentAffairs
• वह राज्य सरकार जिसने वर्ष 1984 में कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है- उत्तर प्रदेश सरकार
• रूस के अनुसार वर्ष 2021 तक सतह से लक्ष्य भेदने में सक्षम जितने नए मिसाइल सिस्टम लॉन्च करने की योजना है- दो
• हाल ही में जिस राज्य सरकार ने 'एस्मा' कानून लागू करते हुए अपने कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर 6 महीने तक रोक लगा दी है- उत्तर प्रदेश सरकार
• नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कुल जितने सीवरेज आधारभूत ढांचे संबंधी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है-136
• पेट्रोलियम सचिव एम.एम. कुट्टी के अनुसार 2.25 करोड़ टन खपत के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है- भारत
• इसरो द्वारा हाल ही में लॉन्च किये गये 40वें संचार उपग्रह का नाम है - जीसैट-31
• वह राज्य जिसने डॉल्फिन की एक प्रजाति को राज्य का राजकीय जलीय जीव घोषित किया है – पंजाब
• वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार चुंबकीय उत्तरी ध्रुव कनाडा से इस देश की ओर खिसक रहा है – रूस
• वह सरकारी मिशन जिसका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचाने के लिए ‘शहरी समृद्धि उत्सव’ का शुभारंभ किया गया है - दीनदयाल अंत्योदय मिशन
• राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जयपुर, कोटा तथा अलवर में 11-12 फरवरी के दौरान इस नाम से आपदा राहत अभ्यास का प्रदर्शन किया जायेगा – राहत
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• वह राज्य सरकार जिसने वर्ष 1984 में कानपुर में हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है- उत्तर प्रदेश सरकार
• रूस के अनुसार वर्ष 2021 तक सतह से लक्ष्य भेदने में सक्षम जितने नए मिसाइल सिस्टम लॉन्च करने की योजना है- दो
• हाल ही में जिस राज्य सरकार ने 'एस्मा' कानून लागू करते हुए अपने कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर 6 महीने तक रोक लगा दी है- उत्तर प्रदेश सरकार
• नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत कुल जितने सीवरेज आधारभूत ढांचे संबंधी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है-136
• पेट्रोलियम सचिव एम.एम. कुट्टी के अनुसार 2.25 करोड़ टन खपत के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता देश बन गया है- भारत
• इसरो द्वारा हाल ही में लॉन्च किये गये 40वें संचार उपग्रह का नाम है - जीसैट-31
• वह राज्य जिसने डॉल्फिन की एक प्रजाति को राज्य का राजकीय जलीय जीव घोषित किया है – पंजाब
• वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार चुंबकीय उत्तरी ध्रुव कनाडा से इस देश की ओर खिसक रहा है – रूस
• वह सरकारी मिशन जिसका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचाने के लिए ‘शहरी समृद्धि उत्सव’ का शुभारंभ किया गया है - दीनदयाल अंत्योदय मिशन
• राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जयपुर, कोटा तथा अलवर में 11-12 फरवरी के दौरान इस नाम से आपदा राहत अभ्यास का प्रदर्शन किया जायेगा – राहत
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TOPIC : TARGET OLYMPIC PODIUM SCHEME (TOPS)
संदर्भ
भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय “राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष” के दायरे के अंदर TOPS नामक कार्यक्रम चला रहा है. इस कार्यक्रम का पूरा नाम “टारगेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम” है. इसके अंतर्गत TOPS के लिए चुने गये एथलीटों को देश में और विदेश में स्थित विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों/अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण पाने के लिए धनराशि मुहैया कराई जाती है.
राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष क्या है?
इस कोष की स्थापना 12 नवम्बर, 1998 को धर्मार्थ दान अधिनियम, 1890 (Charitable Endowments Act) के तहत भारत सरकार के द्वारा की गई थी.
कोष का प्रबंधन
इस कोष का प्रबंधन भारत सरकार द्वारा गठित एक परिषद् करती है.
इस परिषद् के अध्यक्ष भारत सरकार के युवा मामले एवं खेलकूद मंत्री होते हैं.
इस परिषद् के कई सदस्य खेलकूद विभाग तथा भारतीय खेलकूद प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं.
इस परिषद् में देश के सर्वोच्च औद्योगिक संगठनों, यथा – FICCI, CII और ASSOCHAM के प्रतिनिधि सदस्य होते हैं.
इस परिषद् में लब्धप्रतिष्ठ संगठनों के खेलकूद प्रोत्साहन बोर्डों के प्रतिनिधि भी सदस्य होते हैं.
परिषद् के पदेन सदस्य सचिव युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय के संयुक्त सचिव होते हैं.
TOPS योजना क्या है?
इस योजना को राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष (NSDF) के दायरे में खेलकूद मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था.
यह कार्यक्रम आगामी ओलिंपिक खेलों में भारतीय प्रतिभागियों द्वारा पदक पाने की क्षमता में वृद्धि के लिए चलाया जा रहा है.
TOPS scheme के अंतर्गत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार क्षमता में संवर्धन करने के लिए हर प्रकार की सहायता मुहैया कराई जायेगी जिससे कि वे पदक पाने में सफल हो सकें.
इस योजना के अंतर्गत भारतीय खेलकूद प्राधिकारण (SAI) के द्वारा क्षमतावान खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जायेगी.
2020 और 2024 में होने वाले ओलिंपिक में कौन-कौन खेलों में और कौन-कौन खिलाड़ियों को पदक मिल सकते हैं, इसका आकलन करने के लिए अभिनव बिंद्रा समिति का गठन किया गया है.
@currentaffairsstocks
संदर्भ
भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय “राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष” के दायरे के अंदर TOPS नामक कार्यक्रम चला रहा है. इस कार्यक्रम का पूरा नाम “टारगेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम” है. इसके अंतर्गत TOPS के लिए चुने गये एथलीटों को देश में और विदेश में स्थित विश्व-स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों/अकादमियों में विशेष प्रशिक्षण पाने के लिए धनराशि मुहैया कराई जाती है.
राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष क्या है?
इस कोष की स्थापना 12 नवम्बर, 1998 को धर्मार्थ दान अधिनियम, 1890 (Charitable Endowments Act) के तहत भारत सरकार के द्वारा की गई थी.
कोष का प्रबंधन
इस कोष का प्रबंधन भारत सरकार द्वारा गठित एक परिषद् करती है.
इस परिषद् के अध्यक्ष भारत सरकार के युवा मामले एवं खेलकूद मंत्री होते हैं.
इस परिषद् के कई सदस्य खेलकूद विभाग तथा भारतीय खेलकूद प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं.
इस परिषद् में देश के सर्वोच्च औद्योगिक संगठनों, यथा – FICCI, CII और ASSOCHAM के प्रतिनिधि सदस्य होते हैं.
इस परिषद् में लब्धप्रतिष्ठ संगठनों के खेलकूद प्रोत्साहन बोर्डों के प्रतिनिधि भी सदस्य होते हैं.
परिषद् के पदेन सदस्य सचिव युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय के संयुक्त सचिव होते हैं.
TOPS योजना क्या है?
इस योजना को राष्ट्रीय खेलकूद विकास कोष (NSDF) के दायरे में खेलकूद मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था.
यह कार्यक्रम आगामी ओलिंपिक खेलों में भारतीय प्रतिभागियों द्वारा पदक पाने की क्षमता में वृद्धि के लिए चलाया जा रहा है.
TOPS scheme के अंतर्गत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार क्षमता में संवर्धन करने के लिए हर प्रकार की सहायता मुहैया कराई जायेगी जिससे कि वे पदक पाने में सफल हो सकें.
इस योजना के अंतर्गत भारतीय खेलकूद प्राधिकारण (SAI) के द्वारा क्षमतावान खिलाड़ियों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जायेगी.
2020 और 2024 में होने वाले ओलिंपिक में कौन-कौन खेलों में और कौन-कौन खिलाड़ियों को पदक मिल सकते हैं, इसका आकलन करने के लिए अभिनव बिंद्रा समिति का गठन किया गया है.
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TOPIC : NATIONAL SERVICE SCHEME
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) क्या है?
राष्ट्रीय सेवा योजना भारत सरकार द्वारा संपोषित एक सार्वजनिक सेवा कार्यक्रम है जिसका संचालन भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय करता है.
यह योजना 1969 में महात्मा गांधी के जन्म के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में अनावृत की गई थी. इसके लिए डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा अनुशंसा की गई थी.
लक्ष्य
यह योजना शैक्षणिक संस्थानों में स्वेच्छा के आधार पर संचालित होती है. इसका लक्ष्य एक ओर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच सम्पर्क को विकसित करना है तो दूसरी ओर शिक्षा-परिसर और समुदाय के बीच एक रचनात्मक सम्बन्ध स्थापित करना है.
उद्देश्य
छात्रों को उस समुदाय से अवगत कराना जिसमें वे काम करते हैं.
समुदाय के संदर्भ में अपने आप की समझ को पैदा करना.
समुदाय की आवश्यकताओं और समस्याओं को जानना और अपने आप को इनके समाधान की प्रक्रिया से जोड़ना.
अपने अंदर सामाजिक और नागरिक उत्तरदायित्व का विकास करना.
व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तक पहुँचने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करना.
सामूहिक जीवन और उत्तरदायित्व-वहन के लिए अपेक्षित क्षमता विकसित करना.
सामुदायिक प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कौशल सीखना.
नेतृत्व के गुण और प्रजातांत्रिक दृष्टिकोण अपनाना.
आपातकालों और प्राकृतिक विपदाओं से लड़ने की क्षमता विकसित करना.
राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता का अभ्यास करना.
@currentaffairsstocks
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) क्या है?
राष्ट्रीय सेवा योजना भारत सरकार द्वारा संपोषित एक सार्वजनिक सेवा कार्यक्रम है जिसका संचालन भारत सरकार का युवा मामले एवं खेलकूद मंत्रालय करता है.
यह योजना 1969 में महात्मा गांधी के जन्म के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में अनावृत की गई थी. इसके लिए डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के द्वारा अनुशंसा की गई थी.
लक्ष्य
यह योजना शैक्षणिक संस्थानों में स्वेच्छा के आधार पर संचालित होती है. इसका लक्ष्य एक ओर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच सम्पर्क को विकसित करना है तो दूसरी ओर शिक्षा-परिसर और समुदाय के बीच एक रचनात्मक सम्बन्ध स्थापित करना है.
उद्देश्य
छात्रों को उस समुदाय से अवगत कराना जिसमें वे काम करते हैं.
समुदाय के संदर्भ में अपने आप की समझ को पैदा करना.
समुदाय की आवश्यकताओं और समस्याओं को जानना और अपने आप को इनके समाधान की प्रक्रिया से जोड़ना.
अपने अंदर सामाजिक और नागरिक उत्तरदायित्व का विकास करना.
व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याओं के व्यावहारिक समाधान तक पहुँचने के लिए अपने ज्ञान का उपयोग करना.
सामूहिक जीवन और उत्तरदायित्व-वहन के लिए अपेक्षित क्षमता विकसित करना.
सामुदायिक प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कौशल सीखना.
नेतृत्व के गुण और प्रजातांत्रिक दृष्टिकोण अपनाना.
आपातकालों और प्राकृतिक विपदाओं से लड़ने की क्षमता विकसित करना.
राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक समरसता का अभ्यास करना.
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TOPIC : DRAFT NATIONAL RIVER GANGA BILL, 2018
#important4exams
राष्ट्रीय गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण एवं प्रबन्धन) विधेयक, 2018 के मुख्य तथ्य
विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि गंगा नदी में जेटी, बंदरगाह अथवा स्थायी हाइड्रोलिक निर्माण तब तक नहीं किये जाएँगे इसके लिए राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण अनुमति न दे.
विधेयक में यह प्रावधान है कि एक प्रबंधन संरचना तैयार की जायेगी जिसका काम 2,500 किमी. लम्बी गंगा नदी के स्वास्थ्य पर नजर रखना होगा.
विधेयक में गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी के रूप में परिभाषित किया गया है.
गंगा नदी के अविरल और पर्यावरणानुकूल प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए विधयेक में ढेर सारे प्रतिबंध लगाये गये हैं. विदित हो कि वर्तमान में गंगा नदी के ऊपरी भागों में अनेक बाँध हैं जिसके चलते गंगा नदी का प्रवाह बाधित होता है.
प्रस्तावित विधेयक में पानी को अभियंत्रण द्वारा नई दिशा में ले जाने अथवा उसको रोक देने जैसे कार्यों के कारण जल-प्रवाह में बाधा पहुँचाने वाली अनधिकृत गतिविधियों का वर्णन किया गया है.
इन अनधिकृत गतिविधियों के लिए तीन वर्ष के कारावास अथवा 50 करोड़ तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
इसमें गंगा सुरक्षा दल (Ganga Protection Corps) बनाने का प्रस्ताव है जिसके सदस्यों को अधिकार होगा कि वे नदी को गंदा करने वालों को गिरफ्तार कर सकते हैं.
गंगा सुरक्षा दल के कर्मचारी गृह मंत्रालय द्वारा भेजे जायेंगे और उन्हें राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण (National Ganga Rejuvenation Authority) के द्वारा तैनात किया जाएगा.
विधेयक में इन कामों को प्रदूषण करने वाला काम माना जाएगा – नदी की धारा को अवरुद्ध करने वाला निर्माण कार्य, औद्योगिक अथवा व्यावसायिक खपत के लिए गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों से सटी भूमि से भूजल निकालना, इन नदियों में व्यवसाय के लिए मछली मारना, नाली के पानी को नदी में बहाना.
गंगा नदी में गंदा पानी डालने के लिए पाँच वर्ष तक के कारागार अथवा प्रतिदिन 50,000 रु. के जुर्माने अथवा दोनों का दंड दिया जा सकता है.
विधयेक में वर्णित संज्ञेय अपराधों की सूची
नदी के प्रवाह को रोकने वाले निर्माण कार्य.
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के पास की भूमि से औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक खपत के लिए जल निकालना.
गंगा एवं इसकी सहायक नदियों में व्यापार के लिए मछली मारना अथवा एक्वा कल्चर करना.
नदी में अशुद्धीकृत अथवा शुद्धीकृत नाला जल छोड़ना.
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राष्ट्रीय गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण एवं प्रबन्धन) विधेयक, 2018 के मुख्य तथ्य
विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि गंगा नदी में जेटी, बंदरगाह अथवा स्थायी हाइड्रोलिक निर्माण तब तक नहीं किये जाएँगे इसके लिए राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण अनुमति न दे.
विधेयक में यह प्रावधान है कि एक प्रबंधन संरचना तैयार की जायेगी जिसका काम 2,500 किमी. लम्बी गंगा नदी के स्वास्थ्य पर नजर रखना होगा.
विधेयक में गंगा को भारत की राष्ट्रीय नदी के रूप में परिभाषित किया गया है.
गंगा नदी के अविरल और पर्यावरणानुकूल प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए विधयेक में ढेर सारे प्रतिबंध लगाये गये हैं. विदित हो कि वर्तमान में गंगा नदी के ऊपरी भागों में अनेक बाँध हैं जिसके चलते गंगा नदी का प्रवाह बाधित होता है.
प्रस्तावित विधेयक में पानी को अभियंत्रण द्वारा नई दिशा में ले जाने अथवा उसको रोक देने जैसे कार्यों के कारण जल-प्रवाह में बाधा पहुँचाने वाली अनधिकृत गतिविधियों का वर्णन किया गया है.
इन अनधिकृत गतिविधियों के लिए तीन वर्ष के कारावास अथवा 50 करोड़ तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान किया गया है.
इसमें गंगा सुरक्षा दल (Ganga Protection Corps) बनाने का प्रस्ताव है जिसके सदस्यों को अधिकार होगा कि वे नदी को गंदा करने वालों को गिरफ्तार कर सकते हैं.
गंगा सुरक्षा दल के कर्मचारी गृह मंत्रालय द्वारा भेजे जायेंगे और उन्हें राष्ट्रीय गंगा कायाकल्प प्राधिकरण (National Ganga Rejuvenation Authority) के द्वारा तैनात किया जाएगा.
विधेयक में इन कामों को प्रदूषण करने वाला काम माना जाएगा – नदी की धारा को अवरुद्ध करने वाला निर्माण कार्य, औद्योगिक अथवा व्यावसायिक खपत के लिए गंगा नदी और इसकी सहायक नदियों से सटी भूमि से भूजल निकालना, इन नदियों में व्यवसाय के लिए मछली मारना, नाली के पानी को नदी में बहाना.
गंगा नदी में गंदा पानी डालने के लिए पाँच वर्ष तक के कारागार अथवा प्रतिदिन 50,000 रु. के जुर्माने अथवा दोनों का दंड दिया जा सकता है.
विधयेक में वर्णित संज्ञेय अपराधों की सूची
नदी के प्रवाह को रोकने वाले निर्माण कार्य.
गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के पास की भूमि से औद्योगिक अथवा वाणिज्यिक खपत के लिए जल निकालना.
गंगा एवं इसकी सहायक नदियों में व्यापार के लिए मछली मारना अथवा एक्वा कल्चर करना.
नदी में अशुद्धीकृत अथवा शुद्धीकृत नाला जल छोड़ना.
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