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#QuickRevisionSeries
🔳प्राचीन भारत के वंश और उनके शासक :-
◼️ नन्द वंश
▪️संस्थापक➖महापद्‌म या उग्रसेन
▪️अंतिम शासक➖धनानंद

◼️ मौर्य वंश
▪️संस्थापक➖चंद्रगुप्त मौर्य
▪️अंतिम शासक➖बृहद्रथ

◼️ गुप्त वंश
▪️संस्थापक➖चंद्रगुप्त प्रथम
▪️अंतिम शासक➖स्कंदगुप्त

◼️ शुंग वंश 
▪️संस्थापक➖पुष्यमित्र शुंग
▪️अंतिम शासक➖देवभूमी

◼️ सातवाहन वंश
▪️संस्थापक➖सिमुक  
▪️अंतिम शासक➖यज्ञ शातकर्णी

◼️(वतापी के) चालुक्य वंश
▪️संस्थापक➖पुलकेशिन् प्रथम
▪️अंतिम शासक➖कीर्तीवर्मन चालुक्य


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#QuickRevisionSeries
🔳भारत के आगामी लक्ष्य वर्ष-

◼️विकसित भारत का लक्ष्य-2047

◼️हाइड्रो फ्लोरो कार्बन (HFC) के उपयोग को 80% तक कम करने का लक्ष्य-2047

◼️ भारत को ऊर्जा स्वतंत्र/आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य-2047

◼️ भारत कि परमाणु ऊर्जा क्षमता को 1 लाख मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य-2047

◼️पोत निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य-2047

◼️मुंबई शहर में शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य-2050

◼️भारत द्वारा नेट जीरो का लक्ष्य-2070


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#QuickRevisionSeries
🔳भारत में मुद्रा आपूर्ति के चार मानदंड M1, M2, M3,M4 -
🔳1. M1 (संकुचित मुद्रा/नैरो मनी):
▪️ इसमें सबसे तरल संपत्तियां होती हैं, जिन्हें तुरंत नकद में बदला जा सकता है।
▪️ इसमें शामिल होते है:
    ▪️ चलन में मौजूद नकदी (जैसे नोट और सिक्के)
    ▪️मांग जमाएं (बैंक के चालू खाते और बचत खाते)
    ▪️अन्य निकासी योग्य जमा (जैसे बैंक ट्रांसफर या डिमांड ड्राफ्ट)
    ▪️M1 सीधे इस्तेमाल की जा सकने वाली मुद्रा है, जो सबसे अधिक तरल होती है।


🔳2. M2 (M1 + डाकघर बचत खाता):
   ▪️ इसमें M1 के सभी घटक शामिल होते हैं।
   ▪️साथ ही, इसमें डाकघर के बचत खाते (पोस्ट ऑफिस सेविंग्स) भी जोड़े जाते हैं।
   ▪️यह थोड़ा कम तरल होता है, लेकिन फिर भी आसानी से नकदी में बदला जा सकता है।


🔳3.M3 (M1 + दीर्घकालिक जमा):

▪️ M3 को "व्यापक मुद्रा" (ब्रॉड मनी) कहा जाता है।
▪️ इसमें M1 के सभी घटक होते हैं, और इसके साथ बैंक की दीर्घकालिक जमाएं (फिक्स्ड डिपॉजिट, जो एक निश्चित अवधि के बाद ही निकाली जा सकती हैं) भी शामिल की जाती हैं।


🔳4. M4 (M3 + डाकघर की अन्य जमा):
   ▪️ M4 सबसे व्यापक मुद्रा आपूर्ति माप है।
   ▪️ इसमें M3 के सभी घटक शामिल होते हैं।
   ▪️ इसके साथ ही, डाकघर की अन्य जमाएं (जैसे समय जमा) भी जोड़ी जाती हैं।
   ▪️ यह बहुत कम तरल होता है क्योंकि इसमें ऐसी जमाएं शामिल होती हैं जो तुरंत नकदी में नहीं बदली जा सकतीं।


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🔳प्रमुख किसान आंदोलन:

◼️1. बार्दोली सत्याग्रह (1928) 

   -
नेतृत्व: सरदार वल्लभभाई पटेल 
   - स्थान: गुजरात के बर्दोली क्षेत्र 
   - कारण: अंग्रेजों द्वारा किसानों पर 22% लगान (लैंड टैक्स) बढ़ा दिया गया था, जो किसानों के लिए असहनीय था।
   - परिणाम: सरदार पटेल के नेतृत्व में किसानों ने संगठित होकर कर का भुगतान करने से इनकार कर दिया। आंदोलन सफल रहा, और सरकार को कर वृद्धि वापस लेनी पड़ी। इस आंदोलन के बाद सरदार पटेल को "सरदार" की उपाधि दी गई।

◼️ 2. चंपारण सत्याग्रह (1917) 
   - नेतृत्व: महात्मा गांधी 
   - स्थान: बिहार के चंपारण जिले 
   - कारण: अंग्रेजों द्वारा 'तिनकठिया' व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी भूमि के एक हिस्से पर नील की खेती करने के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे थे।
   - परिणाम: गांधीजी ने सत्याग्रह के माध्यम से किसानों की मांगों को प्रमुखता से उठाया, और अंततः ब्रिटिश सरकार को 'तिनकठिया' प्रथा को समाप्त करना पड़ा।
यह महात्मा गांधी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था।


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🔳महत्वपूर्ण किसान आंदोलन:-

◼️ 3. खेड़ा सत्याग्रह (1918):- 

   - नेतृत्व: महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल 
   - स्थान: गुजरात के खेड़ा जिले 
   - कारण: भीषण अकाल के बाद भी अंग्रेज सरकार ने किसानों पर लगान की मांग की। किसान इस भारी कर का भुगतान करने में असमर्थ थे।
   - परिणाम: सत्याग्रह के परिणामस्वरूप सरकार को कर वसूली स्थगित करनी पड़ी और किसानों को राहत मिली।

◼️ 4. तेभागा आंदोलन (1946-47) 

   - स्थान: बंगाल 
   - कारण: किसान (किरायेदार) जमींदारों को फसल का आधा हिस्सा देने के बजाय सिर्फ एक-तिहाई देने की मांग कर रहे थे। 
   - परिणाम: यह आंदोलन व्यापक रूप से सफल रहा और बंगाल में भू-स्वामी कानून में सुधार हुए। इससे किरायेदार किसानों की स्थिति में सुधार हुआ
।

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🔳 मोपला विद्रोह (1921) 
   - स्थान: मालाबार, केरल 
   - कारण: यह आंदोलन मुस्लिम मोपला किसानों द्वारा जमींदारों और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ किया गया था, जो उन्हें भूमि और कर व्यवस्था में भारी शोषण का सामना करना पड़ रहा था।
   - परिणाम: यह आंदोलन धार्मिक और सामाजिक संघर्ष में बदल गया, जिसमें कई जानें गईं। आंदोलन सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने किसान आंदोलन के इतिहास में अपनी जगह बनाई।


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🔳प्रमुख जनजातीय विद्रोह

◼️ कोल विद्रोह (1831-1832)

▪️स्थान: छोटा नागपुर, झारखंड
▪️कारण: कोल जनजाति के लोग ब्रिटिशों द्वारा उनकी भूमि छीनने और बाहरी जमींदारों के अत्याचारों से पीड़ित थे। बाहरी लोगों के भूमि अधिग्रहण और ब्रिटिश कर व्यवस्था ने कोल लोगों को विद्रोह के लिए प्रेरित किया।
▪️नेतृत्व: इस आंदोलन का नेतृत्व बुधु भगत और उनके साथियों ने किया।
▪️परिणाम: विद्रोह को दबा दिया गया, लेकिन यह ब्रिटिश प्रशासन को यह समझाने में सफल रहा कि जनजातीय क्षेत्रों में बाहरी हस्तक्षेप से असंतोष बढ़ सकता है।

◼️ सन्थाल विद्रोह (1855-1856)
▪️स्थान: बिहार और पश्चिम बंगाल के संथाल परगना क्षेत्र
▪️कारण: संथाल जनजाति ने अंग्रेजों की अत्यधिक कर नीतियों, जमींदारों के शोषण और साहूकारों की अत्याचारपूर्ण हरकतों के खिलाफ विद्रोह किया।
▪️नेतृत्व: सिदो और कान्हू मुर्मू ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया।
▪️परिणाम: संथालों ने अंग्रेजों के खिलाफ हिंसक प्रतिरोध किया, लेकिन अंततः उन्हें दबा दिया गया। इस विद्रोह के बाद संथाल परगना के गठन के रूप में कुछ प्रशासनिक सुधार किए गए।


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🔳नीति निर्देशक तत्त्व पर विभिन्न विद्वानों के विचार

◼️के०टी० शाह

राज्य का नीति निर्देशक तत्व एक ऐसा चेक है जो बैंक की सुविधानुसार अदा की जाएगी'

◼️टी०टी० कृष्णामचारी
'भावनाओं का स्थाई कूड़ाघर'

◼️के०सी० व्हेयर
लक्ष्य एवं आकांक्षाओं का घोषणपत्र

◼️सर आइवर जेनिंग्स
इन तत्वों का कोई नियमित प्रतिमान दर्शन नहीं है',
'ये तत्व समाजवाद के बिना फेबियन समाजवाद हैं

◼️ग्रेनविल ऑस्टिन
निदेशक तत्व और अधिकार संविधान की मूल आत्मा हैं

◼️डॉ० अंबेडकर
निदेशक तत्व विधायिका और कार्यपालिका के लिए अनुदेश हैं।'

◼️बी०एन० राव
निदेशक तत्व राज्य प्राधिकारियों के लिए नैतिक आवश्यकता और शैक्षिक मूल्य हैं

◼️के. संथानम
इन तत्त्वों से केंद्र और राज्य के मध्य संवैधानिक टकराव होगा।


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🔳भारत में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल:-
◼️भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (1885 ई
◼️भारतीय जनता पार्टी (1980)
◼️बहुजन समाज पार्टी (1984 ई.)
◼️भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) 1964
◼️नेशनल पीपुल्स पार्टी (2013 ई)
◼️आम आदमी पार्टी (2012 ई)

🔳वर्तमान में भारत में कुल 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं



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🔳केंद्र-राज्य वित्तीय सम्बन्ध (भाग - XII):-
◼️अनुच्छेद 265-विधि के प्राधिकार के बिना करों का आरोपण नहीं
◼️अनुच्छेद 266- भारत और राज्यों की संचित निधियाँ और लोकलेखा

◼️अनुच्छेद 267-आकस्मिकता निधि
◼️अनुच्छेद 268- केन्द्र द्वारा लगाए गए, परंतु राज्यों द्वारा एकत्रित एवं विनियोजित कर ।

◼️अनुच्छेद 270- संघ द्वारा लगाए गए और संग्रहीत किन्तु संघ राज्य के बीच वितरित किए जाने वाले कर
◼️अनुच्छेद 274-राज्यों के हितों से सम्बंधित कराधान वाले विधेयकों के संदर्भ में राष्ट्रपति की पूर्वानुमति आवश्यक

◼️अनुच्छेद 275-कुछ राज्यों को संघ से अनुदान
◼️अनुच्छेद 280-राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक पाँचवें वर्ष की समाप्ति पर वित्त आयोग का गठन

◼️अनुच्छेद 281-वित्त आयोग की सिफारिशों को संसद के समक्ष रखा जाना


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🔳गुप्त काल के महत्त्वपूर्ण कार्यालय:-

◾️महादंडनायक-न्याय का प्रमुख
◾️अश्वपति-सिर वाले घोड़े
◾️महाप्रतिहार-रक्षकों का प्रमुख
◾️नगर श्रेष्ठि-नगर प्रशासन की देखरेख करने वाले अधिकारी
◾️ग्रामाध्यक्ष/ग्रामिका- ग्राम प्रधान
◾️नरपति-प्रधान पैदल सैनिक
◾️दूताकास- उपहार और अनुदान से संबद्ध
◾️रणभंडाग्रिका - भंडार प्रभारी
◾️संधि-विग्रहिका- शांति एवं युद्ध मंत्री
◾️अक्षपातलाधिकृत - अभिलेख एवं लेखा अधीक्षक।
◾️पिलुपति-सिर वाले हाथी


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🔳1857 की क्रांति से संबंधित पुस्तक:-
◾️वी.डी. सावरकर:-दि इंडियन वार ऑफ इंडिपेंडेंस, 1857

◾️आर.सी. मजूमदार:- दि सिपॉय म्यूटिनी एंड द रिवोल्ट ऑफ 1857

◾️एस.बी. चौधरी :-सिविल रिबेलियन इन दि इंडियन म्यूटिनीज (1857-1859)

◾️अशोक मेहता :-1857, दि ग्रेट रिबेलियन


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🔳औरंगजेब कालीन इमारतें -
◼️रबिया-उद्-दुर्रानी का मकबरा-यह मकबरा औरंगाबाद में औरंगजेब ने बनवाया था।

◼️बादशाही मस्जिद (बीबी का मकबरा)- यह मस्जिद लाहौर में स्थित है।

◼️मोती मस्जिद (लाल किले के भीतर) - यह दिल्ली में स्थित है।


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🔳भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र
▪️पश्चिम बंगाल-रानीगंज (भारत का सबसे पुराना कोयला क्षेत्र)
▪️झारखंड-झरिया (सबसे बड़ा), बोकारो,धनबाद गिरिडीह, करणपुरा, रामगढ़, डाल्टनगंज
▪️ओडिशा-तालचेर, हिमगिरि, रामपुर
▪️आंध्र प्रदेश-कांतापल्ली
▪️तेलंगाना-सिंगरेनी
▪️छत्तीसगढ़-कोरबा, बिश्रामपुर, सोनहत, झिलमिल


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🔳पर्यावरण शब्दावली से संबंधित वैज्ञानिक
▪️जैव विविधता- डब्लू. जी. रोसेन
▪️इकोसिस्टम- ए.जी. टैंसले
▪️इकोलॉजी- अर्नेस्ट हैकल
▪️मोनो क्लाइमैक्स थ्योरी- एफ. ई. फैक्लमेंट्स
▪️हॉटस्पॉट- नॉर्मन मार्यस


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🔳 पंचवर्षीय योजनाओं मॆ प्राथमिकता के प्रमुख क्षेत्र

◼️ पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56)
( हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित)कृषि की प्राथमिकता।

◼️ दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61)
( महालनोबिस मॉडल )उद्योग क्षेत्र की प्राथमिकता।(भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट स्थापना)

◼️ तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66)
( गाडगिल मॉडल ) कृषि और उद्योग (1964 में पूर्व सोवियत संघ के सहयोग से बोकारो आयरन स्टील इंडस्ट्री की स्थापना)

◼️ चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74)
स्थिरता के साथ विकास ,आय में असमानताओं को समाप्त करना।

◼️ पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79)
गरीबी उन्मूलन और जनसंख्या नियंत्रण

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🔳 अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण वक्र (Important Curves in Economics)

➤ 🔹 Lorenz Curve –
➭ धन व आय की विषमता को ग्राफ के रूप में दर्शाता है।

➤ 🔹 Gini Coefficient –
➭ Lorenz Curve से निकला एक मूल्य सूचकांक, जो विषमता की मात्रात्मक माप देता है।

➤ 🔹 Kuznets Curve –
➭ आर्थिक विकास के साथ शुरुआत में असमानता बढ़ती है, फिर एक बिंदु के बाद घटती है।
➭ आकार: उल्टा U (∩)

➤ 🔹 Environmental Kuznets Curve –
➭ GDP बढ़ने पर पहले पर्यावरणीय क्षति बढ़ती है, फिर एक बिंदु के बाद घटती है।
➭ आकार: उल्टा U (∩)

➤ 🔹 Phillips Curve (Thomson) –
➭ मुद्रास्फीति बढ़ने पर बेरोजगारी घटती है।
➭ मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बीच व्युत्क्रम संबंध।

➤ 🔹 Laffer Curve –
➭ कर दर बढ़ाने पर एक हद तक राजस्व बढ़ता है, फिर घटने लगता है।
➭ आकार: उल्टा U (∩)

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🔳 बेरोजगारी के प्रमुख प्रकार (Types of Unemployment)

➤ 🔹 चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical) –
➭ मंदी के समय मांग की कमी से उत्पन्न।
➭ मांग बढ़ने पर स्वतः समाप्त हो जाती है।
➭ मुख्यतः विकसित देशों में देखी जाती है।

➤ 🔹 घर्षण जनित बेरोजगारी (Frictional) –
➭ एक नौकरी छोड़कर दूसरी खोजने की प्रक्रिया के दौरान की बेरोजगारी।
➭ यह अस्थायी होती है।

➤ 🔹 संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural) –
➭ कौशल या योग्यता में कमी के कारण व्यक्ति को काम नहीं मिलना।
➭ प्रौद्योगिकी परिवर्तन व शैक्षिक अंतर इसका कारण।

➤ 🔹 मौसमी बेरोजगारी (Seasonal) –
➭ मौसम आधारित कार्यों में देखी जाती है।
➭ जैसे – कृषि क्षेत्र में बुवाई/कटाई के बाद खाली समय।

➤ 🔹 प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised) –
➭ एक कार्य में जरूरत से ज्यादा लोग लगे होते हैं।
➭ कुछ को हटाने पर भी उत्पादन में कोई फर्क नहीं पड़ता।
➭ अदृश्य बेरोजगारी भी कहा जाता है।

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🔳 गरीबी मापन की प्रमुख समितियाँ (Poverty Estimation Committees)

➤ 🔹 अलघ समिति (1979) –
➭ Nutrition-Based Poverty Line
➭ ग्रामीण: 2400 कैलोरी, शहरी: 2100 कैलोरी प्रतिदिन की आवश्यकता मानी गई।

➤ 🔹 लकड़ावाला समिति (1993) –
➭ State-Specific Poverty Lines बनाने की सिफारिश।
➭ CPI-IW (शहरी) व CPI-AL (ग्रामीण) आधारित अद्यतन का सुझाव।

➤ 🔹 तेंदुलकर समिति (2009) –
➭ गरीबी रेखा:
  ग्रामीण: ₹816/माह
  शहरी: ₹1000/माह
➭ खपत व्यय और स्वास्थ्य-शिक्षा को भी ध्यान में लिया गया।

➤ 🔹 रंगराजन समिति (2014) –
➭ गरीबी रेखा:
  ग्रामीण: ₹972/माह (₹32/दिन)
  शहरी: ₹1407/माह (₹47/दिन)
➭ वृहद उपभोग टोकरी पर आधारित नया मापदंड।

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🧪 प्रदूषक और प्रभावित अंग 🧍‍♂️

➤ 🏭 एस्बेस्टस धूल ➭ फेफड़ा प्रभावित करता है 🫁

➤ 🔫 सीसा (Lead) ➭ CNS यानी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है 🧠

➤ 🚗 कार्बन मोनोऑक्साइड ➭ रक्त धाराओं को प्रभावित करता है 🩸

➤ ☠️ पारा (Mercury) ➭ उदर यानी पेट पर असर डालता है 🍽️

➤ 😬 फ्लोराइड ➭ दांतों को नुकसान पहुंचाता है 🦷

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