✅ वनस्पति विज्ञान की शाखाएं
6) पारिस्थितिकी (Ecology) - जीवों का वातावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन।
7) टेरिडोलोजी (Pteridology) - टेरिडोफाइड का अध्ययन।
8) आवृतबीजीकी (Angiosperms) - पुष्पीय पादपों का अध्ययन।
9) आन्तरिकी या शारीर (Anatomy) - जीवों की आन्तरिक संरचना का अध्ययन।
10) कोशिश का विज्ञान (Cytology) - कोशिकाओं का अध्ययन
@Gk_trick
#Sci
6) पारिस्थितिकी (Ecology) - जीवों का वातावरण के साथ सम्बन्धों का अध्ययन।
7) टेरिडोलोजी (Pteridology) - टेरिडोफाइड का अध्ययन।
8) आवृतबीजीकी (Angiosperms) - पुष्पीय पादपों का अध्ययन।
9) आन्तरिकी या शारीर (Anatomy) - जीवों की आन्तरिक संरचना का अध्ययन।
10) कोशिश का विज्ञान (Cytology) - कोशिकाओं का अध्ययन
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उत्तर: A. प्रोटोप्लाज्म
कोशिका के कोशिका झिल्ली के अंदर सम्पूर्ण पदार्थों को जीव द्रव्य कहते हैं.यह सभी कोशिकाओं में पाया जाता है.यह रवेदार, जेलीनुमा, अर्धतरल पदार्थ है.यह पारदर्शी एवं चिपचिपा होता है.इसकी रचना जल एवं कार्बनिक तथा अकार्बनिक ठोस पदार्थों से हुई है.इसमें अनेक रचनाएँ होती हैं.प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में सभी कोशिकांगों को स्पष्ट नहीं देखा जा सकता है.इन रचनाओं को स्पष्ट देखने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का आवश्यकता पड़ती है.
#Sci
@Gk_trick
कोशिका के कोशिका झिल्ली के अंदर सम्पूर्ण पदार्थों को जीव द्रव्य कहते हैं.यह सभी कोशिकाओं में पाया जाता है.यह रवेदार, जेलीनुमा, अर्धतरल पदार्थ है.यह पारदर्शी एवं चिपचिपा होता है.इसकी रचना जल एवं कार्बनिक तथा अकार्बनिक ठोस पदार्थों से हुई है.इसमें अनेक रचनाएँ होती हैं.प्रकाश सूक्ष्मदर्शी में सभी कोशिकांगों को स्पष्ट नहीं देखा जा सकता है.इन रचनाओं को स्पष्ट देखने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का आवश्यकता पड़ती है.
#Sci
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सामान्य विज्ञान से संबधित कुछ प्रश्न
किस रेडियोधर्मी तत्व का भारत में विशाल भंडार पाया जाता है – थोरियम
किसी मानव आंख की रेटिना पर बना प्रतिबिंब है – वास्तविक एवं उल्टा
फोटोग्राफी में उपयोग किया जाने वाला प्रकाश संवेदी योगिक कौन सा है – सिल्वर ब्रोमाइड
1 ग्राम वाले पदार्थ का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को क्या कहते हैं – विशिष्ट ऊष्मा
पीतल किसका मिश्रण है – तांबा और जस्ता ( Trick – ताजा पीतल )
उपकरण जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है क्या कहलाता है – विद्युत मोटर
प्रतिध्वनि किस कारण सुनी जाती है – ध्वनि तरंगों का परावर्तन
@Gk_trick
#Sci
किस रेडियोधर्मी तत्व का भारत में विशाल भंडार पाया जाता है – थोरियम
किसी मानव आंख की रेटिना पर बना प्रतिबिंब है – वास्तविक एवं उल्टा
फोटोग्राफी में उपयोग किया जाने वाला प्रकाश संवेदी योगिक कौन सा है – सिल्वर ब्रोमाइड
1 ग्राम वाले पदार्थ का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को क्या कहते हैं – विशिष्ट ऊष्मा
पीतल किसका मिश्रण है – तांबा और जस्ता ( Trick – ताजा पीतल )
उपकरण जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है क्या कहलाता है – विद्युत मोटर
प्रतिध्वनि किस कारण सुनी जाती है – ध्वनि तरंगों का परावर्तन
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सामान्य विज्ञान से संबधित कुछ प्रश्न
पानी से भरे एक बर्तन में बर्फ का एक टुकड़ा तैर रहा है , पूरी बर्फ के पिघलने पर बर्तन का जल स्तर – अपरिवर्तित रहेगा
दो समांतर दर्पणों के बीच धातु के एक गोले को रखा जाता है इससे बने प्रतिबिंबों की संख्या कितनी होगी – असंख्य
डिप्थीरिया बीमारी किस अंग को प्रभावित करती है – गले को
जब लिफ्ट ऊपर की ओर जाती है तो आदमी का भार वास्तविक भार से कम होता है क्योंकि – उसकी चाल ऊपर की ओर समरूप होती है
कौन से रंग का तरंग धैर्य सबसे अधिक होता है – लाल
एसिड बदलता है – नीले लिटमस को लाल में
चीनी के घोल में तापक्रम बढ़ाने पर चीनी की विलेयता – बढ़ती है
कार्बन का शुद्धतम रूप कौन सा है – हीरा
कौन सी गैस का आवरण सूर्य से निकली पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करता है – ओजोन
रेक्टिफायर का प्रयोग किया जाता है – AC को DC में बदलने के लिए
फोटोग्राफी में पिक्सर के रूप में किसका प्रयोग किया जाता है – सोडियम थायोसल्फेट
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पानी से भरे एक बर्तन में बर्फ का एक टुकड़ा तैर रहा है , पूरी बर्फ के पिघलने पर बर्तन का जल स्तर – अपरिवर्तित रहेगा
दो समांतर दर्पणों के बीच धातु के एक गोले को रखा जाता है इससे बने प्रतिबिंबों की संख्या कितनी होगी – असंख्य
डिप्थीरिया बीमारी किस अंग को प्रभावित करती है – गले को
जब लिफ्ट ऊपर की ओर जाती है तो आदमी का भार वास्तविक भार से कम होता है क्योंकि – उसकी चाल ऊपर की ओर समरूप होती है
कौन से रंग का तरंग धैर्य सबसे अधिक होता है – लाल
एसिड बदलता है – नीले लिटमस को लाल में
चीनी के घोल में तापक्रम बढ़ाने पर चीनी की विलेयता – बढ़ती है
कार्बन का शुद्धतम रूप कौन सा है – हीरा
कौन सी गैस का आवरण सूर्य से निकली पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित करता है – ओजोन
रेक्टिफायर का प्रयोग किया जाता है – AC को DC में बदलने के लिए
फोटोग्राफी में पिक्सर के रूप में किसका प्रयोग किया जाता है – सोडियम थायोसल्फेट
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#Sci
सामान्य विज्ञान से संबधित कुछ प्रश्न
सबसे लम्बा कृमि (वर्म) – टेप वर्म
प्रकाश वर्ष मात्रक है – दूरी का
कपड़ा सुखाने तथा दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन कार्य करता है – अपकेन्द्रीय बल के सिद्धांत पर
1 अश्व शक्ति बराबर होता है -746 वाट के
जल का घनत्व अधिकत्तम तथा आयतन न्यूनतम होता है – 4°C पर
पदार्थ का लघुत्तम अंश क्या है – क्वार्क
लेंस की क्षमता का मात्रक है – डाईऑप्टर
इन्द्रधनुष के बीच का रंग होता है – हरा
रंग का प्रकीर्णन निर्भर करता है -तरंगदैर्ध्य पर
रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब होता है – वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से छोटा
इन्द्रधनुष बनता है – सूर्य के ठीक विपरीत
फ्यूज तार किससे बनती है – टिन और सीसा की मिश्रधातु
सूर्य प्रकीर्णन के कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश दिखाई देता है – काला
समुद्र का जल नीला दिखाई देता है – प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण
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सबसे लम्बा कृमि (वर्म) – टेप वर्म
प्रकाश वर्ष मात्रक है – दूरी का
कपड़ा सुखाने तथा दूध से मक्खन निकालने वाली मशीन कार्य करता है – अपकेन्द्रीय बल के सिद्धांत पर
1 अश्व शक्ति बराबर होता है -746 वाट के
जल का घनत्व अधिकत्तम तथा आयतन न्यूनतम होता है – 4°C पर
पदार्थ का लघुत्तम अंश क्या है – क्वार्क
लेंस की क्षमता का मात्रक है – डाईऑप्टर
इन्द्रधनुष के बीच का रंग होता है – हरा
रंग का प्रकीर्णन निर्भर करता है -तरंगदैर्ध्य पर
रेटिना पर बना प्रतिबिम्ब होता है – वास्तविक, उल्टा तथा वस्तु से छोटा
इन्द्रधनुष बनता है – सूर्य के ठीक विपरीत
फ्यूज तार किससे बनती है – टिन और सीसा की मिश्रधातु
सूर्य प्रकीर्णन के कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश दिखाई देता है – काला
समुद्र का जल नीला दिखाई देता है – प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण
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Answer : 1/16वां सेकेंड
रेटिना पर किसी वस्तु को प्रभाव/छाप के हटाने के साथ नहीं समाप्त होती बल्कि वस्तु के रेटिना के सामने से हटने पर सेेकेण्ड के सोलहवें भाग तक बनी रहती है। इसलिए यदि स्थिर चित्र/प्रतिचित्र की सेकेण्ड के सोलहवें भाग से तीव्रतर प्रकाशित कर चलाया जाए तो आंखों के दृष्टिकोण से ये तस्वीरें चलती हुई प्रतीत होती है।
#Sci
रेटिना पर किसी वस्तु को प्रभाव/छाप के हटाने के साथ नहीं समाप्त होती बल्कि वस्तु के रेटिना के सामने से हटने पर सेेकेण्ड के सोलहवें भाग तक बनी रहती है। इसलिए यदि स्थिर चित्र/प्रतिचित्र की सेकेण्ड के सोलहवें भाग से तीव्रतर प्रकाशित कर चलाया जाए तो आंखों के दृष्टिकोण से ये तस्वीरें चलती हुई प्रतीत होती है।
#Sci
✅ आनुवंशिक विज्ञान
संदर्भ: आनुवंशिकी के जनक (father of genetics) ‘ग्रेगर मेंडल’ के 200 वर्ष।
जेनेटिक्स: आनुवंशिकी (Genetics), जीवों में जीन, आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Variation) और आनुवंशिकता (Heredity) का अध्ययन है।
पहली बार प्रयोगात्मक रूप से ‘आनुवंशिकी’ की स्थापना ‘ग्रेगर मेंडल’ (एक भिक्षु) (1822 से 1884) द्वारा की गयी थी।
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संदर्भ: आनुवंशिकी के जनक (father of genetics) ‘ग्रेगर मेंडल’ के 200 वर्ष।
जेनेटिक्स: आनुवंशिकी (Genetics), जीवों में जीन, आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Variation) और आनुवंशिकता (Heredity) का अध्ययन है।
पहली बार प्रयोगात्मक रूप से ‘आनुवंशिकी’ की स्थापना ‘ग्रेगर मेंडल’ (एक भिक्षु) (1822 से 1884) द्वारा की गयी थी।
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Class 6 Science Chapter 5 Notes
● गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूंसे को हाथों द्वारा अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं।
● सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणो अथवा अनाज को पृथक करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं।
● निष्पावन, अनाज के भारी बीजो से भूसे को अलग करने की एक विधि है इसे खाली मैदान में ऊंचे समतल स्थान पर खड़े होकर किया जाता है।
◆ मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रकम को अवसादन कहते हैं।
◆अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
◆किसी मिश्रण के कणों की आमाप में अंतर का उपयोग चालन तथा निस्यंदन प्रक्रियाओं द्वारा पृथक्करण में किया जाता है।
◆जल को उसके वास्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।
◆जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
◆जिस विलियन में कोई पदार्थ और अधिक ना घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलियन होता है।
◆जल विलय पदार्थों की विभिन्न मात्राएं घोलता है।
रेत और जल के मिश्रण में रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं और निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक किया जा सकता हैं।
◆द्रव तथा उसमें अविलेय पदार्थ के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है।
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● गेहूं, चावल तथा दालों से कुछ बड़े मिट्टी के कणों, पत्थर तथा भूंसे को हाथों द्वारा अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं।
● सूखे पौधों की डंडियों से अन्नकणो अथवा अनाज को पृथक करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं।
● निष्पावन, अनाज के भारी बीजो से भूसे को अलग करने की एक विधि है इसे खाली मैदान में ऊंचे समतल स्थान पर खड़े होकर किया जाता है।
◆ मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रकम को अवसादन कहते हैं।
◆अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं।
◆किसी मिश्रण के कणों की आमाप में अंतर का उपयोग चालन तथा निस्यंदन प्रक्रियाओं द्वारा पृथक्करण में किया जाता है।
◆जल को उसके वास्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।
◆जल वाष्प से उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।
◆जिस विलियन में कोई पदार्थ और अधिक ना घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलियन होता है।
◆जल विलय पदार्थों की विभिन्न मात्राएं घोलता है।
रेत और जल के मिश्रण में रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं और निस्तारण की विधि द्वारा जल को पृथक किया जा सकता हैं।
◆द्रव तथा उसमें अविलेय पदार्थ के अवयवों को निस्यंदन के उपयोग से पृथक किया जा सकता है।
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Class 6 Science Chapter 7 Important Notes
● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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#sci
#ncert6sci
#ncertseries
Important questions answers
1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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