✅ इंटरपोल’ क्या है?
‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन’ (International Criminal Police Organisation– Interpol) अथवा ‘इंटरपोल’, 194 सदस्यीय अंतरसरकारी संगठन है।
इसका मुख्यालय फ्राँस के ‘लियोन’ (Lyon) शहर में है।
इसकी स्थापना वर्ष 1923 में ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस आयोग’ के रूप में की गई थी, और वर्ष 1956 से इसे ‘इंटरपोल’ कहा जाने लगा।
भारत वर्ष 1949 में इस संगठन में शामिल हुआ था और इसके सबसे पुराने सदस्यों में से एक है।
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‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन’ (International Criminal Police Organisation– Interpol) अथवा ‘इंटरपोल’, 194 सदस्यीय अंतरसरकारी संगठन है।
इसका मुख्यालय फ्राँस के ‘लियोन’ (Lyon) शहर में है।
इसकी स्थापना वर्ष 1923 में ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक पुलिस आयोग’ के रूप में की गई थी, और वर्ष 1956 से इसे ‘इंटरपोल’ कहा जाने लगा।
भारत वर्ष 1949 में इस संगठन में शामिल हुआ था और इसके सबसे पुराने सदस्यों में से एक है।
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Q.भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory: IAO) निम्नलिखित में से कहाँ अवस्थित है?
Anonymous Quiz
21%
A.पुडुचेरी
29%
B.लक्षद्वीप
26%
C.चंडीगढ़
25%
D.लद्दाख
Answer D
Question 5 Explanation:
भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory (IAO)) दक्षिण पूर्व लद्दाख में लेह के निकट हान्ले में स्थित है। प्रकाशीय तथा अवरक्त खगोल-भौतिकी हेतु यह विश्व की सबसे ऊँची वेधशला है। इसका संचालन भारतीय ताराभौतिकी संस्थान द्वारा होता हे। इस वेधशाला की स्थापना से संस्थान की रात्रिकालीन खगोल संबंधी सुविधाओं में वृद्धि की है। यहां वर्ष 2001 से 2 मीटर व्यास का हिमालययी चंद्र दूरदर्शी कार्यरत है। सात इकाइयों वाला एक उत्तुंग गामा किरण दूरदर्शी भी हान्ले में हाल ही में स्थापित किया गया है।
Question 5 Explanation:
भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory (IAO)) दक्षिण पूर्व लद्दाख में लेह के निकट हान्ले में स्थित है। प्रकाशीय तथा अवरक्त खगोल-भौतिकी हेतु यह विश्व की सबसे ऊँची वेधशला है। इसका संचालन भारतीय ताराभौतिकी संस्थान द्वारा होता हे। इस वेधशाला की स्थापना से संस्थान की रात्रिकालीन खगोल संबंधी सुविधाओं में वृद्धि की है। यहां वर्ष 2001 से 2 मीटर व्यास का हिमालययी चंद्र दूरदर्शी कार्यरत है। सात इकाइयों वाला एक उत्तुंग गामा किरण दूरदर्शी भी हान्ले में हाल ही में स्थापित किया गया है।
Q. म्यामांर को पहले किस नाम से जाना जाता था?
Anonymous Quiz
20%
A. रंगून
68%
B. बर्मा
8%
C. साइगॉन
4%
D. सोमालिया
प्रश्न-स्कूलों में राष्ट्रीय पीएम पोषण योजना के संबंध में विकल्प में कौन-सा तथ्य सही नहीं है?
(a) 29 सितंबर ‚ 2021 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 5 और वर्षों के लिए स्कूलों में केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय पीएम पोषण योजना में निरंतरता/संशोधन/सुधार को मंजूरी प्रदान की गई।
(b) इस योजना का पुराना नाम स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए राष्ट्रीय योजना (मध्याह्न भोजन योजना) था।
(c) इस योजना पर केन्द्र सरकार 5 वर्षों में 54061.73करोड़ रुपये व्यय करेगी।
(d) वर्ष 2021-22 में केन्द्र सरकार ने इस योजना में 24,400 करोड़ से अधिक रुपये का निवेश किया‚ जिसमें खाद्यान्न पर लगभग 10,200करोड़ रुपये की लागत शामिल है।
नीचे दिये गए प्रश्न का का उत्तर चुने
👇
(a) 29 सितंबर ‚ 2021 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 5 और वर्षों के लिए स्कूलों में केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय पीएम पोषण योजना में निरंतरता/संशोधन/सुधार को मंजूरी प्रदान की गई।
(b) इस योजना का पुराना नाम स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए राष्ट्रीय योजना (मध्याह्न भोजन योजना) था।
(c) इस योजना पर केन्द्र सरकार 5 वर्षों में 54061.73करोड़ रुपये व्यय करेगी।
(d) वर्ष 2021-22 में केन्द्र सरकार ने इस योजना में 24,400 करोड़ से अधिक रुपये का निवेश किया‚ जिसमें खाद्यान्न पर लगभग 10,200करोड़ रुपये की लागत शामिल है।
नीचे दिये गए प्रश्न का का उत्तर चुने
👇
Explain
सही उत्तर D
29 सितंबर‚ 2021 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 5 और वर्षों के लिए स्कूलों में केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय पीएम पोषण योजना में निरंतरता/संशोधन/सुधार को मंजूरी प्रदान की गई।
इस योजना का पुराना नाम स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए राष्ट्रीय योजना (मध्याह्न भोजन योजना) था।
इस योजना की अवधि 5 वर्ष (वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26) तक होगी।
इस योजना पर केन्द्र सरकार 5 वर्षों में 54,061.73 करोड़ रुपये व्यय करेगी।
राज्य सरकारों और केन्द्रशासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा इस योजना पर 31,733.17 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी।
केन्द्र सरकार खाद्यान्न पर लगभग 45000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत भी वहन करेगी।
इस प्रकार इस योजना का कुल बजट 1,30,794.90 करोड़ रुपये का होगा।
इस केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत सरकारी‚ सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की पहली कक्षा से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी स्कूली बच्चे शामिल हैं।
योजनान्तर्गत देशभर के 11.20 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 11.80 करोड़ बच्चे लाभान्वित होंगे।
वर्ष 2021-22 के दौरान भारत सरकार ने इस योजना में 24,400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया‚ जिसमें खाद्यान्न पर लगभग 11,500 करोड़ रुपये की लागत शामिल है।
इस योजना को प्राथमिक कक्षाओं के सभी 11.80 करोड़ बच्चों के अलावा‚ पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं अथवा बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले छात्रों तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है।
तिथि भोजन की अवधारणा को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
तिथि भोजन एक सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम है‚ जिसमें लोग विशेष अवसरों/ त्यौहारों पर बच्चों को विशेष भोजन प्रदान करते हैं।
सरकार बच्चों को प्रकृति और बागवानी के साथ प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने के लिए स्कूलों में स्कूल पोषण उद्यानों के विकास को बढ़ावा दे रही है।
इन बगीचों की फसल का उपयोग मध्याह्न भोजन में अतिरिक्त सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने के लिए किया जाता है।
इस योजना का सोशल ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया है।
आकांक्षी जिलों और उच्च रक्ताल्पता वाले जिलों में बच्चों को पूरक पोषाहार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान योजना में किए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों एवं सब्जियों के आधार पर विशिष्ट संस्कृति से जुड़े व्यंजनों और नए मेन्यू को बढ़ावा देने हेतु ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सभी स्तरों पर पाक कला प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत के लिए वोकल फॉर लोकल: मध्याह्न योजना के कार्यान्वयन में किसान उत्पादक संगठनों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के साथ ही स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु स्थानीय रूप से उगाए जाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
#Yojna
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सही उत्तर D
29 सितंबर‚ 2021 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा 5 और वर्षों के लिए स्कूलों में केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय पीएम पोषण योजना में निरंतरता/संशोधन/सुधार को मंजूरी प्रदान की गई।
इस योजना का पुराना नाम स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए राष्ट्रीय योजना (मध्याह्न भोजन योजना) था।
इस योजना की अवधि 5 वर्ष (वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26) तक होगी।
इस योजना पर केन्द्र सरकार 5 वर्षों में 54,061.73 करोड़ रुपये व्यय करेगी।
राज्य सरकारों और केन्द्रशासित प्रदेश के प्रशासन द्वारा इस योजना पर 31,733.17 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी।
केन्द्र सरकार खाद्यान्न पर लगभग 45000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत भी वहन करेगी।
इस प्रकार इस योजना का कुल बजट 1,30,794.90 करोड़ रुपये का होगा।
इस केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत सरकारी‚ सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की पहली कक्षा से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी स्कूली बच्चे शामिल हैं।
योजनान्तर्गत देशभर के 11.20 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 11.80 करोड़ बच्चे लाभान्वित होंगे।
वर्ष 2021-22 के दौरान भारत सरकार ने इस योजना में 24,400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया‚ जिसमें खाद्यान्न पर लगभग 11,500 करोड़ रुपये की लागत शामिल है।
इस योजना को प्राथमिक कक्षाओं के सभी 11.80 करोड़ बच्चों के अलावा‚ पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं अथवा बाल वाटिकाओं में पढ़ने वाले छात्रों तक विस्तारित करने का प्रस्ताव है।
तिथि भोजन की अवधारणा को व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
तिथि भोजन एक सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम है‚ जिसमें लोग विशेष अवसरों/ त्यौहारों पर बच्चों को विशेष भोजन प्रदान करते हैं।
सरकार बच्चों को प्रकृति और बागवानी के साथ प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने के लिए स्कूलों में स्कूल पोषण उद्यानों के विकास को बढ़ावा दे रही है।
इन बगीचों की फसल का उपयोग मध्याह्न भोजन में अतिरिक्त सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने के लिए किया जाता है।
इस योजना का सोशल ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया है।
आकांक्षी जिलों और उच्च रक्ताल्पता वाले जिलों में बच्चों को पूरक पोषाहार सामग्री उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रावधान योजना में किए गए हैं।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों एवं सब्जियों के आधार पर विशिष्ट संस्कृति से जुड़े व्यंजनों और नए मेन्यू को बढ़ावा देने हेतु ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सभी स्तरों पर पाक कला प्रतियोगिताओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत के लिए वोकल फॉर लोकल: मध्याह्न योजना के कार्यान्वयन में किसान उत्पादक संगठनों और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के साथ ही स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु स्थानीय रूप से उगाए जाने वाले पारंपरिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
#Yojna
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Q.) आंत के अंगों के अध्ययन को क्या कहा जाता है?
Anonymous Quiz
22%
A. एजियोलॉजी
22%
B. आर्थोलॉजी
27%
C. एंथ्रोपोलॉजी
28%
D. स्प्लेनकोलॉजी
Q.'लूखा नदी' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
यह मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह नदी लूनार नदी (वाह लूनार) से जल प्राप्त करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
यह मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह नदी लूनार नदी (वाह लूनार) से जल प्राप्त करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Anonymous Quiz
12%
A.केवल 1
26%
B.केवल 2
58%
C.1 और 2 दोनों
4%
D.न तो 1 और न ही 2
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
लूखा मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में बहती है जहाँ मेघालय की अधिकांश रैट-होल कोयला खदानें स्थित हैं। अत: कथन 1 सही है।
यह कोयला और चूना पत्थर के निरंतर बड़े पैमाने पर खनन का शिकार बन गई है, जो कथित तौर पर प्रदूषण के लिये ज़िम्मेदार हैं, परिणामस्वरूप ये नदी को विचित्र शीतकालीन अवस्था में परिवर्तित कर देते हैं।
यह लूनार नदी (वाह लूनार)/Lunar river (Wah Lunar) से नीचे की ओर प्रवाहित होने के दौरान नरपुह रिज़र्व फॉरेस्ट और इस क्षेत्र की लहरदार पहाड़ियों से निकलने वाली छोटी धाराओं से जल ग्रहण करती है। अत: कथन 2 सही है।
नदी मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहती है और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए गद्दम गाँव (Gaddum Village) के पास लूनार नदी में शामिल होने के पश्चात् एक दक्षिणी मार्ग का अनुसरण करती है।
यह नदी सोनपुर गाँव से होकर दक्षिणी असम की बराक घाटी में पहुँचती है और बांग्लादेश के बाढ़ के मैदानों में समाप्त होती है।
उत्तर: C
व्याख्या:
लूखा मेघालय के पूर्वी जयंतिया पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में बहती है जहाँ मेघालय की अधिकांश रैट-होल कोयला खदानें स्थित हैं। अत: कथन 1 सही है।
यह कोयला और चूना पत्थर के निरंतर बड़े पैमाने पर खनन का शिकार बन गई है, जो कथित तौर पर प्रदूषण के लिये ज़िम्मेदार हैं, परिणामस्वरूप ये नदी को विचित्र शीतकालीन अवस्था में परिवर्तित कर देते हैं।
यह लूनार नदी (वाह लूनार)/Lunar river (Wah Lunar) से नीचे की ओर प्रवाहित होने के दौरान नरपुह रिज़र्व फॉरेस्ट और इस क्षेत्र की लहरदार पहाड़ियों से निकलने वाली छोटी धाराओं से जल ग्रहण करती है। अत: कथन 2 सही है।
नदी मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर रहती है और दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए गद्दम गाँव (Gaddum Village) के पास लूनार नदी में शामिल होने के पश्चात् एक दक्षिणी मार्ग का अनुसरण करती है।
यह नदी सोनपुर गाँव से होकर दक्षिणी असम की बराक घाटी में पहुँचती है और बांग्लादेश के बाढ़ के मैदानों में समाप्त होती है।
प्रश्न: फॉकलैंड द्वीप की राजधानी क्या है?
Anonymous Quiz
12%
A. जेरूसलम
26%
B. पोर्ट ब्लेयर
50%
C. पोर्ट स्टेनली
12%
D. ओटावा
उत्तर: C. पोर्ट स्टेनली
फ़ॉकलैंड द्वीप-समूह दक्षिण अटलांटिक महासागर में अर्जेन्टीना की तट से लगा एक द्वीपसमूह हैं. इसके पूर्व में शैग रॉक्स (दक्षिण जॉर्जिया) और दक्षिण में ब्रिटिश अंटार्कटिक क्षेत्र है. इस द्वीपसमूह में दो मुख्य द्वीप हैं, पूर्व फ़ॉकलैंड और पश्चिम फ़ॉकलैंड, इनके साथ ही ७७६ छोटे द्वीप हैं. पूर्व फ़ॉकलैंड में स्थित स्टेनली देश की राजधानी है. यह द्वीपसमूह यूनाइटेड किंगडम का स्वशासी प्रवासी क्षेत्र है. १८३३ में ब्रिटिश शासन की पुनर्स्थापना के बाद अर्जेन्टीना ने इस पर अपनी प्रभुता का दावा किया है.
फ़ॉकलैंड द्वीप-समूह दक्षिण अटलांटिक महासागर में अर्जेन्टीना की तट से लगा एक द्वीपसमूह हैं. इसके पूर्व में शैग रॉक्स (दक्षिण जॉर्जिया) और दक्षिण में ब्रिटिश अंटार्कटिक क्षेत्र है. इस द्वीपसमूह में दो मुख्य द्वीप हैं, पूर्व फ़ॉकलैंड और पश्चिम फ़ॉकलैंड, इनके साथ ही ७७६ छोटे द्वीप हैं. पूर्व फ़ॉकलैंड में स्थित स्टेनली देश की राजधानी है. यह द्वीपसमूह यूनाइटेड किंगडम का स्वशासी प्रवासी क्षेत्र है. १८३३ में ब्रिटिश शासन की पुनर्स्थापना के बाद अर्जेन्टीना ने इस पर अपनी प्रभुता का दावा किया है.
Q.) आठ हजारी पर्वत शिखरों में से किस शिखर की ऊंचाई सबसे कम है, पर उस पर सफलतापूर्वक चढ़ाई सबसे बाद में की गई?
Anonymous Quiz
22%
A. नंगा पर्वत
33%
B. अन्नपूर्णा
16%
C. गाशरब्रुम
29%
D. शिशापांगमा
उत्तर- D. शिशापांगमा
आठ हजारी पर्वत शिखरों में से शिशापांगमा शिखर की ऊंचाई सबसे कम है, पर उस पर सफलतापूर्वक चढ़ाई सबसे बाद में की गई. शिशापांगमा की ऊंचाई 8027 मीटर यानी 26,335 फीट है. इस पर पहली बार चढ़ाई 2 मई 1964 में की गई. यह शिखर चीन में स्थित है. शिशापांगमा जो गोसाईंथान भी कहलाता है. ये हिमालय का ऊंचा पर्वत है. यह तिब्बत के शिगात्से विभाग के न्यलाम ज़िले में स्थित है और नेपालकी सीमा से 5 किमी दूर है. तिब्बत पर चीन का नियंत्रण है और चीन ने उसे बाहरी विश्व से बहुत देर तक बंद रखा था जिस कारणवश यह विश्व का अंतिम आठ हज़ारी पर्वत था जिसे मानवों द्वारा चढ़ा गया.
आठ हजारी पर्वत शिखरों में से शिशापांगमा शिखर की ऊंचाई सबसे कम है, पर उस पर सफलतापूर्वक चढ़ाई सबसे बाद में की गई. शिशापांगमा की ऊंचाई 8027 मीटर यानी 26,335 फीट है. इस पर पहली बार चढ़ाई 2 मई 1964 में की गई. यह शिखर चीन में स्थित है. शिशापांगमा जो गोसाईंथान भी कहलाता है. ये हिमालय का ऊंचा पर्वत है. यह तिब्बत के शिगात्से विभाग के न्यलाम ज़िले में स्थित है और नेपालकी सीमा से 5 किमी दूर है. तिब्बत पर चीन का नियंत्रण है और चीन ने उसे बाहरी विश्व से बहुत देर तक बंद रखा था जिस कारणवश यह विश्व का अंतिम आठ हज़ारी पर्वत था जिसे मानवों द्वारा चढ़ा गया.
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सी किताब लुई फिशर द्वारा लिखी गई है?
Anonymous Quiz
25%
A. विंग्स ऑफ़ फायर
20%
B. इटरनल इंडिया
43%
C. गांधी एंड स्टालिन
12%
D. वी द पीपल
उत्तर C
लुई फिशर का जन्म सन् I896 में फिलाडेल्फिया की झुग्गियों में हुआ था, एक निश्चित कार्यकाल तक स्कूल शिक्षक एवं फिलिस्तीन में यहूदी सेना के सदस्य के रूप में कार्य करने के बाद, लुई फिशर जर्मनी से यूरोप को कवर करने वाले पत्रकार बन गए तथा फिर, 1922 में मास्को में आधारित संवाददाता बन गए . पाश्चात्य से उनका मोहभंग एवं पूंजीवाद के विकल्प के प्रति उत्कंठा, जोकि लोगों से पहले मुनाफे को रखता था, अर्थात् कि वे साम्यवादी प्रयोग के प्रति सहानुभूति रखते थे और इसकी अंतिम सफलता की उम्मीद करते थे .
लुई फिशर का जन्म सन् I896 में फिलाडेल्फिया की झुग्गियों में हुआ था, एक निश्चित कार्यकाल तक स्कूल शिक्षक एवं फिलिस्तीन में यहूदी सेना के सदस्य के रूप में कार्य करने के बाद, लुई फिशर जर्मनी से यूरोप को कवर करने वाले पत्रकार बन गए तथा फिर, 1922 में मास्को में आधारित संवाददाता बन गए . पाश्चात्य से उनका मोहभंग एवं पूंजीवाद के विकल्प के प्रति उत्कंठा, जोकि लोगों से पहले मुनाफे को रखता था, अर्थात् कि वे साम्यवादी प्रयोग के प्रति सहानुभूति रखते थे और इसकी अंतिम सफलता की उम्मीद करते थे .
प्रश्न: इसरो की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
Anonymous Quiz
14%
A. 1967
23%
B. 1968
59%
C.1969
3%
D.1970
उत्तर: C. 1969
विक्रम ए. साराभाई को भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संस्थापक जनक माना जाता है. इसरो का गठन 15 अगस्त, 1969 को हुआ था.
हमारे देश में अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों की शुरूआत 1960 के दौरान हुई, जिस समय संयुक्त राष्ट्र अमरीका में भी उपग्रहों का प्रयोग करने वाले अनुप्रयोग परीक्षणात्मक चरणों पर थे. अमरीकी उपग्रह ‘सिनकाम-3’ द्वारा प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में टोकियो ओलंपिक खेलों के सीधे प्रसारण ने संचार उपग्रहों की सक्षमता को प्रदर्शित किया, जिससे डॉ. विक्रम साराभाई, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक ने तत्काल भारत के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लाभों को पहचाना.
विक्रम ए. साराभाई को भारत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों का संस्थापक जनक माना जाता है. इसरो का गठन 15 अगस्त, 1969 को हुआ था.
हमारे देश में अंतरिक्ष अनुसंधान गतिविधियों की शुरूआत 1960 के दौरान हुई, जिस समय संयुक्त राष्ट्र अमरीका में भी उपग्रहों का प्रयोग करने वाले अनुप्रयोग परीक्षणात्मक चरणों पर थे. अमरीकी उपग्रह ‘सिनकाम-3’ द्वारा प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में टोकियो ओलंपिक खेलों के सीधे प्रसारण ने संचार उपग्रहों की सक्षमता को प्रदर्शित किया, जिससे डॉ. विक्रम साराभाई, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक ने तत्काल भारत के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लाभों को पहचाना.