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✅ राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है?

परिचय:

भारतीय राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के सांसदों द्वारा वोट डाले जाते हैं।

चुनाव का आयोजन भारतीय चुनाव आयोग (EC) द्वारा किया जाता है।

निर्वाचक मंडल संसद के उच्च एवं निम्न सदन (राज्यसभा और लोकसभा सांसदों) के सभी निर्वाचित सदस्यों एवं राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं (विधायकों) के निर्वाचित सदस्यों से बना होता है।

◆ संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का चुनाव।

अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया।

अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति के पद का कार्यकाल।

अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन हेतु पात्रता।

अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के रूप में चुनाव हेतु योग्यता।

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◆राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

प्रक्रिया:

मतदान से पूर्व नामांकन चरण आता है, जहाँ उम्मीदवार चुनाव में खड़े होने का इरादा प्रस्तुत करता है और 50 प्रस्तावकों एवं 50 समर्थकों की हस्ताक्षरित सूची के साथ नामांकन दाखिल करता है।

ये प्रस्तावक और समर्थक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के निर्वाचक मंडल के सदस्यों में से कोई भी हो सकते हैं।

50 प्रस्तावकों और समर्थकों की आवश्यकता से संबंधित नियम तब लागू किया गया जब चुनाव आयोग ने 1974 में देखा कि कई ऐसे उम्मीदवारों, जिनमें से कई के जीतने की संभावना भी कम थी, द्वारा चुनाव लड़ने के लिये नामांकन दाखिल किया गया।

एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है।

प्रत्येक वोट का मूल्य क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?

प्रत्येक सांसद या विधायक द्वारा डाले गए वोट की गणना एक वोट के रूप में नहीं की जाती है।

राज्यसभा और लोकसभा के प्रत्येक सांसद के वोट का मूल्य 700 निश्चित है।

विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों की जनसंख्या पर निर्भर करता है।

संविधान (84वाँ संशोधन) अधिनियम 2001 के अनुसार, वर्तमान में राज्यों की जनसंख्या वर्ष 1971 की जनगणना के आँकड़ों पर आधारित है जिसमें बदलाव वर्ष 2026 के बाद की जनगणना के आँकड़े प्रकाशित होने के बाद किया जाएगा।

प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य राज्य की विधानसभा में विधायकों की संख्या से विभाजित करके तथा प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित करके निर्धारित किया जाता है।

उदाहरण के लिये उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के लिये सबसे अधिक वोट मूल्य 208 है। महाराष्ट्र में एक विधायक का वोट मूल्य 175 है, जबकि अरुणाचल प्रदेश में यह सिर्फ 8 है।

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जीत सुनिश्चित करने के लिये क्या आवश्यक है?

एक मनोनीत उम्मीदवार साधारण बहुमत के आधार पर जीत हासिल नहीं करता है बल्कि वोटों के एक विशिष्ट कोटे को हासिल करने की प्रणाली के माध्यम से जीत सुनिश्चित होती है। मतगणना के दौरान चुनाव आयोग द्वारा मतपत्रों के माध्यम से निर्वाचक मंडल द्वारा डाले गए सभी वैध मतों का योग किया जाता है तथा जीत के लिये उम्मीदवार को डाले गए कुल मतों का 50% + 1 प्राप्त करना होता है।

आम चुनावों के विपरीत यहाँ मतदाता एक पार्टी के उम्मीदवार के लिये वोट करते है तथा निर्वाचक मंडल के मतदाता मतपत्र पर उम्मीदवारों के नाम वरीयता क्रम में लिखे जाते हैं।

राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत पद्धति द्वारा होता है तथा गुप्त मतदान की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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◆ राष्ट्रपति पर महाभियोग:

अनुच्छेद 61 के अनुसार, राष्ट्रपति को उसके कार्यकाल की समाप्ति से पहले केवल ‘संविधान के उल्लंघन (Violation Of The Constitution) के आधार पर पद से हटाया जा सकता है।

हालाँकि भारतीय संविधान में 'संविधान का उल्लंघन' वाक्यांश के अर्थ को परिभाषित नहीं किया गया है।

राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया (Impeachment Process) संसद के किसी भी सदन में शुरू की जा सकती है।

राष्ट्रपति के विरुद्ध प्रस्ताव पर सदन के कम-से-कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होना आवश्यक है।

राष्ट्रपति पर महाभियोग का प्रस्ताव मूल सदन (Originating House) में विशेष बहुमत (दो-तिहाई) द्वारा पारित किया जाना चाहिये।

इसके बाद प्रस्ताव को दूसरे सदन में विचार हेतु भेजा जाता है। दूसरा सदन एक निरीक्षक के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रपति पर लगे आरोपों की जांँच के लिये एक प्रवर समिति का गठन किया गया है।

प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति को अधिकृत वकील के माध्यम से अपना बचाव करने का अधिकार है। वह अपना बचाव करने का विकल्प चुन सकता है या ऐसा करने के लिये भारत के किसी व्यक्ति/वकील या अटॉर्नी जनरल को नियुक्त कर सकता है।

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प्रश्न. भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

1) प्रत्येक विधायक के वोट का मूल्य अलग-अलग राज्यों में भिन्न होता है। 2) लोकसभा सांसदों के वोट का मूल्य राज्यसभा के सांसदों के वोट मूल्य से अधिक होता है। उत्तरदे
Anonymous Poll
32%
(A) केवल 1
24%
(B) केवल 2
39%
(C) 1और 2 दोनो
5%
(D) न तो 1 नही 2
सही उत्तर A
CA
25 जुलाई CA
द्रौपदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने उन्हें शपथ दिलाई। बता दें कि मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं, सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाली पहली आदिवासी महिला और स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।
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✅अल्पसंख्यक के लिए संवैधानिक प्रावधान:

◆ अनुच्छेद 29: 
इसके अंतर्गत किए गए प्रावधानों के अनुसार, भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा। और, राज्य द्वारा पोषित या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।

यह अनुच्छेद, धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यकों दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना है, कि इस अनुच्छेद का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में ‘नागरिकों के वर्ग’ शब्द के इस्तेमाल में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।

◆ अनुच्छेद 30:

धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्र्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

अनुच्छेद 30 के तहत सुरक्षा, केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) तक ही सीमित है और नागरिकों के किसी भी वर्ग (अनुच्छेद 29 के तहत) तक नहीं है।

◆ अनुच्छेद 350-ख:

7वें संवैधानिक (संशोधन) अधिनियम 1956 के तहत, इस अनुच्छेद को सम्मिलित किया गया था। यह अनुच्छेद, भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है।

इस विशेष अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह संविधान के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच करे।

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Share #polity
✅ आनुवंशिक विज्ञान

संदर्भ: आनुवंशिकी के जनक (father of genetics) ‘ग्रेगर मेंडल’ के 200 वर्ष।

जेनेटिक्स: आनुवंशिकी (Genetics), जीवों में जीन, आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Variation) और आनुवंशिकता (Heredity) का अध्ययन है।

पहली बार प्रयोगात्मक रूप से ‘आनुवंशिकी’ की स्थापना ‘ग्रेगर मेंडल’ (एक भिक्षु) (1822 से 1884) द्वारा की गयी थी।

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#Imp #Sci
◆ ‘ग्रेगर मेंडल’ (Gregor Mendel) का विज्ञान में योगदान:

वंशानुक्रम के सिद्धांत (Principles of Inheritance):
 ‘मटर के पौधे के प्रजनन’ के साथ प्रयोग करके, मेंडल ने वंशानुक्रम के तीन सिद्धांत विकसित किए जो आनुवंशिक लक्षणों के संचरण का वर्णन करते हैं। इससे पहले ‘जीन’ की उपस्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

आज तक, वंशानुगतता या वंशानुक्रम (Inheritance) की सबसे बुनियादी घटनाओं की व्याख्या करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा ‘मेंडल’ के सिद्धांतों का उपयोग किया जाता है।

जीव विज्ञान की नींव: चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रतिपादित ‘विकासवादी सिद्धांत’ के साथ मेंडल के सिद्धांत ने जीव विज्ञान की नींव रखी।

कई मानव रोगों का इलाज: ‘ग्रेगर मेंडल’ ने मानव रोग अनुसंधान में सहायक चिकित्सीय पद्धतियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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