✅ प्रथम संशोधन अधिनियम, 1951:
संशोधनः
इसके तहत सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को उन्नति के लिये विशेष उपबंध बनाने हेतु राज्यों को शक्तियाँ दी गई।
कानून की रक्षा के लिये संपत्ति अधिग्रहण आदि की व्यवस्था।
भमि सुधार तथा न्यायिक समीक्षा से जुड़े अन्य कानूनों को नौंवी अनुसूची में स्थान दिया गया।
अनुच्छेद 31 में दो उपखंड 31(क) और 31 (ख) जोड़े गये।Gk_trick
वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के तीन आधार जोड़े गये, ये थे- लोक आदेश, अपराध करने के लिये उकसाना तथा विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिये। प्रतिबंधों को और तर्क सांगत बनाया और इस प्रकार ये न्याययोज्य बना दिये गए।
यह व्यवस्था की गई कि राज्य ट्रेडिंग और राज्य द्वारा किसी व्यवसाय या व्यापार के राष्ट्रीयकरण को केवल इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि यह व्यापार या व्यवसाय के अधिकार का उल्लंघन करता है।
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#Polity
संशोधनः
इसके तहत सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को उन्नति के लिये विशेष उपबंध बनाने हेतु राज्यों को शक्तियाँ दी गई।
कानून की रक्षा के लिये संपत्ति अधिग्रहण आदि की व्यवस्था।
भमि सुधार तथा न्यायिक समीक्षा से जुड़े अन्य कानूनों को नौंवी अनुसूची में स्थान दिया गया।
अनुच्छेद 31 में दो उपखंड 31(क) और 31 (ख) जोड़े गये।Gk_trick
वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के तीन आधार जोड़े गये, ये थे- लोक आदेश, अपराध करने के लिये उकसाना तथा विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिये। प्रतिबंधों को और तर्क सांगत बनाया और इस प्रकार ये न्याययोज्य बना दिये गए।
यह व्यवस्था की गई कि राज्य ट्रेडिंग और राज्य द्वारा किसी व्यवसाय या व्यापार के राष्ट्रीयकरण को केवल इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि यह व्यापार या व्यवसाय के अधिकार का उल्लंघन करता है।
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#Polity
✅भाग 1: संघ और उसका राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद 1 :- संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूचित व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
◆ अक्सर एग्जाम में पूछे जाते है ,जो हमारे नज़र के सामने होते है और हम एग्जाम के वक़्त भूल जाते है।
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#Polity
अनुच्छेद 1 :- संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूचित व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
◆ अक्सर एग्जाम में पूछे जाते है ,जो हमारे नज़र के सामने होते है और हम एग्जाम के वक़्त भूल जाते है।
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✅भाग 2: नागरिकता
अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता
अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का ना होना
अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
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#Polity
अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता
अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का ना होना
अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
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◆ स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 19 :- वाक् की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण\
अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21 क :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 22 :– कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से सरंक्षण
अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार और बाल आश्रम
अनुच्छेद 24 :- कारखानों में बालक का नियोजन का प्रतिशत
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#Polity
अनुच्छेद 19 :- वाक् की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण\
अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21 क :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 22 :– कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से सरंक्षण
अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार और बाल आश्रम
अनुच्छेद 24 :- कारखानों में बालक का नियोजन का प्रतिशत
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#Polity
◆ धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार
अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 :- धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 27 :- किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता
अनुच्छेद 28 :- कुल शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता
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#Polity
अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 :- धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 27 :- किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता
अनुच्छेद 28 :- कुल शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता
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◆संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
अनुच्छेद 31क :- संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
अनुच्छेद 31ख :- कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण
अनुच्छेद 31ग :- कुछ निदेशक तत्वों को प्रभाव करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
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अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
अनुच्छेद 31क :- संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
अनुच्छेद 31ख :- कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण
अनुच्छेद 31ग :- कुछ निदेशक तत्वों को प्रभाव करने वाली विधियों की व्यावृत्ति
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◆ सांविधानिक उपचारों का अधिकार
अनुच्छेद 32 :- अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार
अनुच्छेद 33 :- इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में, उपांतरण करने की संसद की शक्ति
अनुच्छेद 34 :- जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बन्धन
अनुच्छेद 35 :- इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने का विधान ऊपर
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अनुच्छेद 32 :- अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार
अनुच्छेद 33 :- इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में, उपांतरण करने की संसद की शक्ति
अनुच्छेद 34 :- जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बन्धन
अनुच्छेद 35 :- इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने का विधान ऊपर
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✅अल्पसंख्यक के लिए संवैधानिक प्रावधान:
◆ अनुच्छेद 29: इसके अंतर्गत किए गए प्रावधानों के अनुसार, भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा। और, राज्य द्वारा पोषित या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।
यह अनुच्छेद, धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यकों दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना है, कि इस अनुच्छेद का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में ‘नागरिकों के वर्ग’ शब्द के इस्तेमाल में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।
◆ अनुच्छेद 30:
धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्र्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।
अनुच्छेद 30 के तहत सुरक्षा, केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) तक ही सीमित है और नागरिकों के किसी भी वर्ग (अनुच्छेद 29 के तहत) तक नहीं है।
◆ अनुच्छेद 350-ख:
7वें संवैधानिक (संशोधन) अधिनियम 1956 के तहत, इस अनुच्छेद को सम्मिलित किया गया था। यह अनुच्छेद, भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है।
इस विशेष अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह संविधान के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच करे।
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◆ अनुच्छेद 29: इसके अंतर्गत किए गए प्रावधानों के अनुसार, भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा। और, राज्य द्वारा पोषित या राज्य-निधि से सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।
यह अनुच्छेद, धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ भाषाई अल्पसंख्यकों दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने माना है, कि इस अनुच्छेद का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में ‘नागरिकों के वर्ग’ शब्द के इस्तेमाल में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।
◆ अनुच्छेद 30:
धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्र्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।
अनुच्छेद 30 के तहत सुरक्षा, केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषाई) तक ही सीमित है और नागरिकों के किसी भी वर्ग (अनुच्छेद 29 के तहत) तक नहीं है।
◆ अनुच्छेद 350-ख:
7वें संवैधानिक (संशोधन) अधिनियम 1956 के तहत, इस अनुच्छेद को सम्मिलित किया गया था। यह अनुच्छेद, भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी का प्रावधान करता है।
इस विशेष अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह संविधान के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच करे।
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■ ~•अनुच्छेद 165 – राज्य के लिए महाधिवक्ता
(1) प्रत्येक राज्य का राज्यपाल एक ऐसे व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य है।
(2) महाधिवक्ता का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह दें और कानूनी चरित्र के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करें, जो समय-समय पर उसे सौंपे या सौंपे जाएं। राज्यपाल, और इस संविधान या उस समय के लिए लागू किसी अन्य कानून के तहत या उसके द्वारा प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करने के लिए।
(3) महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल सरकारी कार्य के संचालन का निर्धारण करे।
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(1) प्रत्येक राज्य का राज्यपाल एक ऐसे व्यक्ति को राज्य का महाधिवक्ता नियुक्त करेगा जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य है।
(2) महाधिवक्ता का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसे कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह दें और कानूनी चरित्र के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करें, जो समय-समय पर उसे सौंपे या सौंपे जाएं। राज्यपाल, और इस संविधान या उस समय के लिए लागू किसी अन्य कानून के तहत या उसके द्वारा प्रदत्त कार्यों का निर्वहन करने के लिए।
(3) महाधिवक्ता राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राज्यपाल सरकारी कार्य के संचालन का निर्धारण करे।
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भारत चुनाव आयोग
© यह मुख्य रूप से भारत गणराज्य का एक स्वशासी निकाय है। इसका संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण होता है।
✍️ EIC की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। ECI का मुख्यालय नई दिल्ली में है। ECI 15 अक्टूबर 1989 तक भारत के "मुख्य चुनाव आयुक्त" के साथ एक सदस्यीय निकाय था।
✍️ 16 अक्टूबर 1989 से, भारत के चुनाव आयुक्त ने दो और चुनाव आयुक्तों को नामित किया और फिर मतदान की आयु 21 से बदलकर 18 वर्ष कर दी गई। ECI एक बहु-सदस्यीय निकाय है और इसमें तीन चुनाव आयुक्त हैं।
✍️ इस प्रकार, भारत के संविधान का भाग XV चुनाव के भाग से संबंधित है। "अनुच्छेद 324 से 329" चुनाव आयोग और सदस्यों की पात्रता, शक्तियां, कार्यकाल और कार्य से संबंधित है।
✍️ ECI की भूमिका
भारत के चुनाव आयोग की मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका पूरे देश में "स्वतंत्र और निष्पक्ष" चुनाव को लागू करना और संचालित करना और हिंसा और उल्लंघन के किसी भी मामले के लिए उचित कार्रवाई करना है।
✍️ ECI ने 1952 से भारत में राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया है।
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Current topics
© यह मुख्य रूप से भारत गणराज्य का एक स्वशासी निकाय है। इसका संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण होता है।
✍️ EIC की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी। ECI का मुख्यालय नई दिल्ली में है। ECI 15 अक्टूबर 1989 तक भारत के "मुख्य चुनाव आयुक्त" के साथ एक सदस्यीय निकाय था।
✍️ 16 अक्टूबर 1989 से, भारत के चुनाव आयुक्त ने दो और चुनाव आयुक्तों को नामित किया और फिर मतदान की आयु 21 से बदलकर 18 वर्ष कर दी गई। ECI एक बहु-सदस्यीय निकाय है और इसमें तीन चुनाव आयुक्त हैं।
✍️ इस प्रकार, भारत के संविधान का भाग XV चुनाव के भाग से संबंधित है। "अनुच्छेद 324 से 329" चुनाव आयोग और सदस्यों की पात्रता, शक्तियां, कार्यकाल और कार्य से संबंधित है।
✍️ ECI की भूमिका
भारत के चुनाव आयोग की मुख्य और महत्वपूर्ण भूमिका पूरे देश में "स्वतंत्र और निष्पक्ष" चुनाव को लागू करना और संचालित करना और हिंसा और उल्लंघन के किसी भी मामले के लिए उचित कार्रवाई करना है।
✍️ ECI ने 1952 से भारत में राज्यों और राष्ट्रीय चुनावों का सफलतापूर्वक संचालन किया है।
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Current topics
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Election Commission of India
© It is primarily a self-governing body of the Republic of India. It has control over the entire election process.
✍️ EIC was established on 25 January 1950. The headquarter of ECI is in New Delhi. ECI was a single-member body with the "Chief Election Commissioner" of India as its head until 15 October 1989.
✍️ From 16 October 1989, the Election Commissioner of India nominated two more Election Commissioners and then the voting age was changed from 21 to 18 years. ECI is a multi-member body and has three Election Commissioners.
✍️ Thus, Part XV of the Constitution of India deals with the part of elections. "Articles 324 to 329" deals with the eligibility, powers, tenure and functions of the Election Commission and members.
✍️ Role of ECI
The main and vital role of the Election Commission of India is to implement and conduct “free and fair” elections throughout the country and take appropriate action for any cases of violence and violations.
✍️ ECI has successfully conducted state and national elections in India since 1952.
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© It is primarily a self-governing body of the Republic of India. It has control over the entire election process.
✍️ EIC was established on 25 January 1950. The headquarter of ECI is in New Delhi. ECI was a single-member body with the "Chief Election Commissioner" of India as its head until 15 October 1989.
✍️ From 16 October 1989, the Election Commissioner of India nominated two more Election Commissioners and then the voting age was changed from 21 to 18 years. ECI is a multi-member body and has three Election Commissioners.
✍️ Thus, Part XV of the Constitution of India deals with the part of elections. "Articles 324 to 329" deals with the eligibility, powers, tenure and functions of the Election Commission and members.
✍️ Role of ECI
The main and vital role of the Election Commission of India is to implement and conduct “free and fair” elections throughout the country and take appropriate action for any cases of violence and violations.
✍️ ECI has successfully conducted state and national elections in India since 1952.
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Current topics
✅ राज्य सभा सम्पूर्ण जानकारी
80-अनुच्छेद के अनुसार 3 अप्रेल, 1952 को राज्य सभा का गठन किया गया था।
राज्य सभा कि प्रथम बैठक 13 मई, 1952 को हुई थी।
राज्य सभा के उपनाम-
-(1) संसद का उच्च/वरिष्ठ सदन
-(2) विद्ववानो का सदन
-(3) राज्यो का सदन
-(4) अलोकप्रिय सदन
-(5) संसद का द्वितिय सदन
-(6) संसद का स्थाई सदन (क्योकि राज्य सभा को कभी भंग नही किया जा सकता है केवल स्थगित किया जा सकता है।
अध्यक्ष-
-राज्य सभा के अध्यक्ष को सभापति भी कहते है जो कि वर्तमान का उपराष्ट्रपति होता है।
-राज्य सभा एकमात्र ऐसा सदन है जिसका अध्यक्ष उस सदन का सदस्य न होते हुए भी अध्यक्ष होता है।
-भारत का प्रथम राज्य सभा अध्यक्ष (प्रथम उपराष्ट्रपति) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन था
वर्तमान राज्य सभा अध्यक्ष (उपराष्ट्रपति) वैकेया नायडु है।
उपाध्यक्ष-
-राज्य सभा के सदस्य अपने मे से ही उपसभापति/उपाध्यक्ष का चयन करते है
-राज्य सभा का प्रथम उपाध्यक्ष S.V कृष्णामूर्ति राव था
त्याग पत्र-
राज्य सभा का अध्यक्ष अपना त्याग-पत्र (उपराष्ट्रपति के रूप मे) राष्ट्रपति को देता है जबकि उपाध्यक्ष अपना त्याग-पत्र अध्यक्ष (उपराष्ट्रपति) को देता है।
कार्यकाल-
राज्य सभा के सभापति का कार्यकाल (उपराष्ट्रपति के रूप मे) 5 वर्ष होता है जबकि उपाध्यक्ष व सदस्यो का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
निर्वाचन (चुनाव)-
-राज्य सभा के सदस्यो का निर्वाचन उस राज्य कि विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्यो (M.L.A) द्वारा किया जाता है।
-राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य प्रति 2 वर्षो बाद सेवानिवृत होते रहते है और उनके स्थान पर नये सदस्य आ जाते है तथा सेवानिवृत सदस्यो को पुनः भी चुना जा सकता है
आयु-
-राज्य सभा सदस्य हेतु न्यून्तम आयु 30 वर्ष तथा अधिकतम कितनी भी हो सकती है।
शपथ-
-राज्य सभा के अध्यक्ष को शपत राष्ट्रपति दिलाता है जब राष्ट्रपति अनुपस्थित हो तो राष्ट्रपति द्वारा नामित/नियुक्त व्यक्ति शपत दिलाता है
- राज्य सभा सदस्यो को शपत राज्य सभा अध्यक्ष दिलाता है।
वर्तमान राज्य सभा सिटें - 245
(1) राज्यो+केन्द्रशासित प्रदेशो से निर्वाचित- 233
(2) राष्ट्रपति द्वारा मनोनित- 12
अधिकतम राज्य सभा सिटें - 250
(1) राज्यों + केन्द्रशासित प्रदेशों से निर्वाचित- 238
(2) राष्ट्रपति द्वारा मनोनित- 12
-अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा, खेल जगत आदि क्षेत्रो से मनोनित किये जाते है।
-राष्ट्रपति द्वारा संसद मे कुल 14 सदस्य (2 लोक सभा+ 12 राज्य सभा) मनोनित किये जाते है।
-सर्वाधिक राज्य सभा सिटो वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जिसमे कुल 31 सिटे है।
-राजस्थान कि कुल राज्य सभा सिटे 10 है
-दिल्ली कि कुल राज्य सभा सिटे 3 है
-पोण्डिचेरी कि कुल राज्य सभा सिट 1 है
राज्य सभा के विशेष अधिकार/शक्तियां
(1) अनुच्छेद 249-
-इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सभा राज्य सुची के किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दे सकती है।
(2) अनुच्छेद 252-
-इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सभा दो/दो से अधिक विधान मण्डलो द्वारा पारित विषय पर कानून बना सकती है।
-(3) अनुच्छेद 312-
-इस अनुच्छेद के अनुसार केवल राज्य सभा ही नयी अखिल-भारतीय सेवाओ का सर्जन/गठन कर सकती है
-भारत मे वर्तमान मे कुल 3 अखिल-भारतीय/प्रशासनिक सेवाएं है।
जैसे-
-(अ) I.A.S- Indian Administrative Service (भारतीय प्रशासनिक सेवा)
-(ब) I.P.S- Indian Police Service (भारतीय पुलिस सेवा)
-(स) I.F.S- Indian Forest Service (भारतीय वन सेवा)
लॉर्ड रिपन-
-सिविल सर्विस/अखिल भारतीय सेवाओं के जनक लॉर्ड रिपन है।
-सिविल सर्विस डे 21 अप्रेल को मनाया जाता है।
-राज्य सभा धन विधेयक मे कोई फेर बदल नही कर सकती केवल सुझाव दे सकती है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम अभिनेता पृथ्वीराज कपूर है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाली प्रथम अभिनेत्री नरगिस दत है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस है।
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80-अनुच्छेद के अनुसार 3 अप्रेल, 1952 को राज्य सभा का गठन किया गया था।
राज्य सभा कि प्रथम बैठक 13 मई, 1952 को हुई थी।
राज्य सभा के उपनाम-
-(1) संसद का उच्च/वरिष्ठ सदन
-(2) विद्ववानो का सदन
-(3) राज्यो का सदन
-(4) अलोकप्रिय सदन
-(5) संसद का द्वितिय सदन
-(6) संसद का स्थाई सदन (क्योकि राज्य सभा को कभी भंग नही किया जा सकता है केवल स्थगित किया जा सकता है।
अध्यक्ष-
-राज्य सभा के अध्यक्ष को सभापति भी कहते है जो कि वर्तमान का उपराष्ट्रपति होता है।
-राज्य सभा एकमात्र ऐसा सदन है जिसका अध्यक्ष उस सदन का सदस्य न होते हुए भी अध्यक्ष होता है।
-भारत का प्रथम राज्य सभा अध्यक्ष (प्रथम उपराष्ट्रपति) डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन था
वर्तमान राज्य सभा अध्यक्ष (उपराष्ट्रपति) वैकेया नायडु है।
उपाध्यक्ष-
-राज्य सभा के सदस्य अपने मे से ही उपसभापति/उपाध्यक्ष का चयन करते है
-राज्य सभा का प्रथम उपाध्यक्ष S.V कृष्णामूर्ति राव था
त्याग पत्र-
राज्य सभा का अध्यक्ष अपना त्याग-पत्र (उपराष्ट्रपति के रूप मे) राष्ट्रपति को देता है जबकि उपाध्यक्ष अपना त्याग-पत्र अध्यक्ष (उपराष्ट्रपति) को देता है।
कार्यकाल-
राज्य सभा के सभापति का कार्यकाल (उपराष्ट्रपति के रूप मे) 5 वर्ष होता है जबकि उपाध्यक्ष व सदस्यो का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
निर्वाचन (चुनाव)-
-राज्य सभा के सदस्यो का निर्वाचन उस राज्य कि विधान सभाओ के निर्वाचित सदस्यो (M.L.A) द्वारा किया जाता है।
-राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य प्रति 2 वर्षो बाद सेवानिवृत होते रहते है और उनके स्थान पर नये सदस्य आ जाते है तथा सेवानिवृत सदस्यो को पुनः भी चुना जा सकता है
आयु-
-राज्य सभा सदस्य हेतु न्यून्तम आयु 30 वर्ष तथा अधिकतम कितनी भी हो सकती है।
शपथ-
-राज्य सभा के अध्यक्ष को शपत राष्ट्रपति दिलाता है जब राष्ट्रपति अनुपस्थित हो तो राष्ट्रपति द्वारा नामित/नियुक्त व्यक्ति शपत दिलाता है
- राज्य सभा सदस्यो को शपत राज्य सभा अध्यक्ष दिलाता है।
वर्तमान राज्य सभा सिटें - 245
(1) राज्यो+केन्द्रशासित प्रदेशो से निर्वाचित- 233
(2) राष्ट्रपति द्वारा मनोनित- 12
अधिकतम राज्य सभा सिटें - 250
(1) राज्यों + केन्द्रशासित प्रदेशों से निर्वाचित- 238
(2) राष्ट्रपति द्वारा मनोनित- 12
-अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा, खेल जगत आदि क्षेत्रो से मनोनित किये जाते है।
-राष्ट्रपति द्वारा संसद मे कुल 14 सदस्य (2 लोक सभा+ 12 राज्य सभा) मनोनित किये जाते है।
-सर्वाधिक राज्य सभा सिटो वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जिसमे कुल 31 सिटे है।
-राजस्थान कि कुल राज्य सभा सिटे 10 है
-दिल्ली कि कुल राज्य सभा सिटे 3 है
-पोण्डिचेरी कि कुल राज्य सभा सिट 1 है
राज्य सभा के विशेष अधिकार/शक्तियां
(1) अनुच्छेद 249-
-इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सभा राज्य सुची के किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दे सकती है।
(2) अनुच्छेद 252-
-इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सभा दो/दो से अधिक विधान मण्डलो द्वारा पारित विषय पर कानून बना सकती है।
-(3) अनुच्छेद 312-
-इस अनुच्छेद के अनुसार केवल राज्य सभा ही नयी अखिल-भारतीय सेवाओ का सर्जन/गठन कर सकती है
-भारत मे वर्तमान मे कुल 3 अखिल-भारतीय/प्रशासनिक सेवाएं है।
जैसे-
-(अ) I.A.S- Indian Administrative Service (भारतीय प्रशासनिक सेवा)
-(ब) I.P.S- Indian Police Service (भारतीय पुलिस सेवा)
-(स) I.F.S- Indian Forest Service (भारतीय वन सेवा)
लॉर्ड रिपन-
-सिविल सर्विस/अखिल भारतीय सेवाओं के जनक लॉर्ड रिपन है।
-सिविल सर्विस डे 21 अप्रेल को मनाया जाता है।
-राज्य सभा धन विधेयक मे कोई फेर बदल नही कर सकती केवल सुझाव दे सकती है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम अभिनेता पृथ्वीराज कपूर है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाली प्रथम अभिनेत्री नरगिस दत है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम खिलाड़ी सचिन तेन्दुलकर है।
-राज्य सभा सदस्य बनने वाला प्रथम वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस है।
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आज केशवानंद भारती केस के 51 साल पूरे हो गए।
केशवानंद भारती केस (1973)
✍️ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोलक नाथ मामले में अपना फैसला पलट दिया . इसने 24 वें संशोधन अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा और कहा कि संसद को किसी भी मौलिक अधिकार को कम करने या छीनने का अधिकार है ।
✍️साथ ही, इसने संविधान की 'बुनियादी संरचना' (या 'बुनियादी विशेषताएं') का एक नया सिद्धांत निर्धारित किया।
✍️इसने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद की घटक शक्ति उसे संविधान की 'बुनियादी संरचना' को बदलने में सक्षम नहीं बनाती है।
✍️इसका मतलब यह है कि संसद किसी मौलिक अधिकार को कम नहीं कर सकती या छीन नहीं सकती जो संविधान की 'बुनियादी संरचना' का हिस्सा है ।
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केशवानंद भारती केस (1973)
✍️ इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गोलक नाथ मामले में अपना फैसला पलट दिया . इसने 24 वें संशोधन अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा और कहा कि संसद को किसी भी मौलिक अधिकार को कम करने या छीनने का अधिकार है ।
✍️साथ ही, इसने संविधान की 'बुनियादी संरचना' (या 'बुनियादी विशेषताएं') का एक नया सिद्धांत निर्धारित किया।
✍️इसने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 368 के तहत संसद की घटक शक्ति उसे संविधान की 'बुनियादी संरचना' को बदलने में सक्षम नहीं बनाती है।
✍️इसका मतलब यह है कि संसद किसी मौलिक अधिकार को कम नहीं कर सकती या छीन नहीं सकती जो संविधान की 'बुनियादी संरचना' का हिस्सा है ।
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#Translation
Today marks 51 years of the Kesavananda Bharati case.
Keshavananda Bharati Case (1973)
✍️In this case, the Supreme Court reversed its decision in the Golak Nath case. It upheld the validity of the 24th Amendment Act and said that Parliament has the right to abridge or take away any fundamental right.
✍️Also, it laid down a new doctrine of the 'basic structure' (or 'basic features') of the Constitution.
It ruled that the constituent power of Parliament under Article 368 does not enable it to change the 'basic structure' of the Constitution.
✍️This means that Parliament cannot abridge or take away any fundamental right which is part of the 'basic structure' of the Constitution.
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Today marks 51 years of the Kesavananda Bharati case.
Keshavananda Bharati Case (1973)
✍️In this case, the Supreme Court reversed its decision in the Golak Nath case. It upheld the validity of the 24th Amendment Act and said that Parliament has the right to abridge or take away any fundamental right.
✍️Also, it laid down a new doctrine of the 'basic structure' (or 'basic features') of the Constitution.
It ruled that the constituent power of Parliament under Article 368 does not enable it to change the 'basic structure' of the Constitution.
✍️This means that Parliament cannot abridge or take away any fundamental right which is part of the 'basic structure' of the Constitution.
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संसद का संयुक्त सत्र (Joint Session of Parliament)
▶️ भारत का संविधान, अनुच्छेद 108 के तहत दोनों के बीच किसी भी गतिरोध को तोड़ने के लिये लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है।
▶️ संयुक्त बैठक राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाती है और इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
▶️ अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करते हैं।
दोनों की अनुपस्थिति में, इसकी अध्यक्षता राज्य सभा के उपसभापति करते हैं।
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▶️ भारत का संविधान, अनुच्छेद 108 के तहत दोनों के बीच किसी भी गतिरोध को तोड़ने के लिये लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है।
▶️ संयुक्त बैठक राष्ट्रपति द्वारा बुलाई जाती है और इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
▶️ अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करते हैं।
दोनों की अनुपस्थिति में, इसकी अध्यक्षता राज्य सभा के उपसभापति करते हैं।
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