राजकोषीय नीति की सीमाएँ
◆नीति की आवश्यकता, उसके लागू होने तथा उसके प्रभावी होने में काफी समय का लग जाना।
सरकारों के लोक लुभावन कार्यक्रमों एवं योजनाओं के कारण व्यय में वृद्धि होती है जिससे राजकोषीय नीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
◆राजकोषीय नीति से न तो ब्याज दर प्रभावित होती है और न ही उपभोक्ता का व्यवहार, अतः राजकोषीय नीति बहुत सीमित है।
राजकोषीय नीति में अधिक विस्तारवादी रुख से सरकार निजी क्षेत्र को दुष्प्रभावित भी कर सकती है।
अंततः राजकोषीय नीति का क्रियान्वयन प्रशासनिक तंत्र की कुशलता पर ही निर्भर करता है।
@Gk_trick
#Eco
◆नीति की आवश्यकता, उसके लागू होने तथा उसके प्रभावी होने में काफी समय का लग जाना।
सरकारों के लोक लुभावन कार्यक्रमों एवं योजनाओं के कारण व्यय में वृद्धि होती है जिससे राजकोषीय नीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
◆राजकोषीय नीति से न तो ब्याज दर प्रभावित होती है और न ही उपभोक्ता का व्यवहार, अतः राजकोषीय नीति बहुत सीमित है।
राजकोषीय नीति में अधिक विस्तारवादी रुख से सरकार निजी क्षेत्र को दुष्प्रभावित भी कर सकती है।
अंततः राजकोषीय नीति का क्रियान्वयन प्रशासनिक तंत्र की कुशलता पर ही निर्भर करता है।
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#Eco
✅प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन सा कर एक इंडिरेक्ट टैक्स है?
ऑप्शन:
A. आयकर
B. संपत्ति कर
C. व्यवसाय कर
D. बिक्री कर
उत्तर: D. बिक्री कर
इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) यानी अप्रत्यक्ष कर सप्लाई चेन (आम तौर पर कोई उत्पादक या रिटेलर) में किसी एक एंटिटी द्वारा संग्रहित किया जाता है और सरकार को भुगतान किया जाता है लेकिन वस्तु या सेवा की खरीद कीमत के हिस्से के रूप में इसे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है. आखिरकार उपभोक्ता ही उत्पाद के लिए अधिक भुगतान के जरिए टैक्स अदा करता है.
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A. आयकर
B. संपत्ति कर
C. व्यवसाय कर
D. बिक्री कर
उत्तर: D. बिक्री कर
इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax) यानी अप्रत्यक्ष कर सप्लाई चेन (आम तौर पर कोई उत्पादक या रिटेलर) में किसी एक एंटिटी द्वारा संग्रहित किया जाता है और सरकार को भुगतान किया जाता है लेकिन वस्तु या सेवा की खरीद कीमत के हिस्से के रूप में इसे उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है. आखिरकार उपभोक्ता ही उत्पाद के लिए अधिक भुगतान के जरिए टैक्स अदा करता है.
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उत्तर: D. 7वीं पंचवर्षीय योजना
जवाहर रोज़गार योजना 1 अप्रैल 1989 को राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार कार्यक्रम योजना की शुरुआत की गयी थी.
7वीं पंचवर्षीय योजना में जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई थी. जवाहर रोजगार योजना 1989 में राजीव गांधी सरकार द्वारा शुरू की गई थी. ... सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990) ने लघु-स्तरीय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास पर भी जोर दिया. सातवीं पंचवर्षीय योजना ने 'सामाजिक न्याय' को भी प्रोत्साहित किया.
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जवाहर रोज़गार योजना 1 अप्रैल 1989 को राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार कार्यक्रम और ग्रामीण भूमिहीन रोजगार कार्यक्रम योजना की शुरुआत की गयी थी.
7वीं पंचवर्षीय योजना में जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई थी. जवाहर रोजगार योजना 1989 में राजीव गांधी सरकार द्वारा शुरू की गई थी. ... सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-1990) ने लघु-स्तरीय और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास पर भी जोर दिया. सातवीं पंचवर्षीय योजना ने 'सामाजिक न्याय' को भी प्रोत्साहित किया.
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#Eco
प्रमुख क्रांति
🎡हरित क्रांति -- खाद्यान्न उत्पादन
🎡श्वेत क्रांति -- दुग्ध उत्पादन
🎡नीली क्रांति -- मत्स्य उत्पादन
🎡भूरी क्रांति -- उर्वरक उत्पादन
🎡रजत क्रांति -- अंडा उत्पादन
🎡पीली क्रांति -- तिलहन उत्पादन
🎡कृष्ण क्रांति -- बायोडीजल उत्पादन
🎡लाल क्रांति -- टमाटर/मांस उत्पादन
🎡गुलाबी क्रांति -- झींगा मछली उत्पादन
🎡बादामी क्रांति -- मासाला उत्पादन
🎡सुनहरी क्रांति -- फल उत्पादन
🎡अमृत क्रांति -- नदी जोड़ो परियोजनाएं
🎡गोल क्रांति-- आलु
🎡इंद्रधनुषीय क्रांति-- सभी क्रांतियो पर निगरानी रखने हेतु
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🎡हरित क्रांति -- खाद्यान्न उत्पादन
🎡श्वेत क्रांति -- दुग्ध उत्पादन
🎡नीली क्रांति -- मत्स्य उत्पादन
🎡भूरी क्रांति -- उर्वरक उत्पादन
🎡रजत क्रांति -- अंडा उत्पादन
🎡पीली क्रांति -- तिलहन उत्पादन
🎡कृष्ण क्रांति -- बायोडीजल उत्पादन
🎡लाल क्रांति -- टमाटर/मांस उत्पादन
🎡गुलाबी क्रांति -- झींगा मछली उत्पादन
🎡बादामी क्रांति -- मासाला उत्पादन
🎡सुनहरी क्रांति -- फल उत्पादन
🎡अमृत क्रांति -- नदी जोड़ो परियोजनाएं
🎡गोल क्रांति-- आलु
🎡इंद्रधनुषीय क्रांति-- सभी क्रांतियो पर निगरानी रखने हेतु
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#Eco
विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) क्या हैं?
✍ SEZ किसी देश के भीतर ऐसे क्षेत्र हैं जो प्रायः शुल्क मुक्त (राजकोषीय रियायत) होते हैं और यहाँ मुख्य रूप से निवेश को प्रोत्साहित करने तथा रोज़गार उत्पन्न करने के लिये अलग-अलग व्यापार और वाणिज्यिक कानून होते हैं।
✍SEZ इन क्षेत्रों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिये भी बनाए गए हैं, जिससेव्यापार सुगमता में आसानी (ease of doing business) होती है।
एशिया का पहला निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (Export Processing Zones- EPZ) वर्ष 1965 में कांडला, गुजरात में स्थापित किया गया था।
✍इन EPZs की संरचना SEZ के समान थी, सरकार ने वर्ष 2000 में EPZ की सफलता को सीमित करने वाली ढाँचागत और नौकरशाही चुनौतियों के निवारण के लिये विदेश व्यापार नीति के तहत SEZ की स्थापना शुरू की।
विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया और वर्ष 2006 में SEZ नियमों के साथ लागू हुआ।
✍भारत के SEZ को चीन के सफल मॉडल के साथ मिलकर संरचित किया गया था। वर्तमान में 379 SEZs अधिसूचित हैं, जिनमें से 265 वर्तमान में संचालित हैं। लगभग 64% SEZ पाँच राज्यों- तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित हैं।
✍भारत की मौजूदा SEZ नीति का अध्ययन करने के लिये वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बाबा कल्याणी के नेतृत्व वाली समिति का गठन किया गया था तथा उसने नवंबर 2018 में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।
✍इसे विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation- WTO) के अनुकूल बनाने की दिशा में SEZ नीति का मूल्यांकन करने और क्षमता उपयोग एवं SEZ के संभावित उत्पादन को अधिकतम करने के लिये वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को लाने के व्यापक उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया था।
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✍ SEZ किसी देश के भीतर ऐसे क्षेत्र हैं जो प्रायः शुल्क मुक्त (राजकोषीय रियायत) होते हैं और यहाँ मुख्य रूप से निवेश को प्रोत्साहित करने तथा रोज़गार उत्पन्न करने के लिये अलग-अलग व्यापार और वाणिज्यिक कानून होते हैं।
✍SEZ इन क्षेत्रों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिये भी बनाए गए हैं, जिससेव्यापार सुगमता में आसानी (ease of doing business) होती है।
एशिया का पहला निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र (Export Processing Zones- EPZ) वर्ष 1965 में कांडला, गुजरात में स्थापित किया गया था।
✍इन EPZs की संरचना SEZ के समान थी, सरकार ने वर्ष 2000 में EPZ की सफलता को सीमित करने वाली ढाँचागत और नौकरशाही चुनौतियों के निवारण के लिये विदेश व्यापार नीति के तहत SEZ की स्थापना शुरू की।
विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम वर्ष 2005 में पारित किया गया और वर्ष 2006 में SEZ नियमों के साथ लागू हुआ।
✍भारत के SEZ को चीन के सफल मॉडल के साथ मिलकर संरचित किया गया था। वर्तमान में 379 SEZs अधिसूचित हैं, जिनमें से 265 वर्तमान में संचालित हैं। लगभग 64% SEZ पाँच राज्यों- तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित हैं।
✍भारत की मौजूदा SEZ नीति का अध्ययन करने के लिये वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बाबा कल्याणी के नेतृत्व वाली समिति का गठन किया गया था तथा उसने नवंबर 2018 में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।
✍इसे विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation- WTO) के अनुकूल बनाने की दिशा में SEZ नीति का मूल्यांकन करने और क्षमता उपयोग एवं SEZ के संभावित उत्पादन को अधिकतम करने के लिये वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को लाने के व्यापक उद्देश्य के साथ स्थापित किया गया था।
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