Class 6 Science Chapter 3 Notes in Hindi
1) तंतु किसे कहते हैं?
धागे कि सबसे पतली लड़ियो को तंतु कहते हैं।
2) प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु पादप और जंतु से प्राप्त होते हैं उन्हें प्राकृतिक तंतु कहते हैं। जैसे :- सुती, जूट, रेशमी तथा ऊनी
3) संश्लिष्ट तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु रासायनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं। जैसे :- पॉलिएस्टर, नायलॉन तथा येक्रिलिक।
4) कपास ओटन किसे कहते हैं?
कपास को बीजों से कंकतन द्वारा अलग करने की प्रक्रिया को कपास ओटन कहा जाता है।
5) कपास की खेती किन राज्यों में की जाती है।
महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में।
6) पटसन किस पादप से प्राप्त किया जाता है?
जूट पादप से।
7) पटसन तंतु को पटसन पादप के किस हिस्से से प्राप्त किया जाता हैं?
पटसन पादप के तने से।
8) कताई किसे कहते हैं?
रेशों से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
9) तकली किसे कहते हैं?
कताई के एक सरल युक्ति हस्त तकुआ का उपयोग किया जाता हैं जिसे तकली कहते हैं।
10) ग्रामोद्योग क्या हैं? और इसे कब बनाया गया था?
खादी के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1956 में एक संगठन का निर्माण किया जिसे खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग कहते हैं।
11) बुनाई/ वीविंग किसे कहते हैं?
तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।
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1) तंतु किसे कहते हैं?
धागे कि सबसे पतली लड़ियो को तंतु कहते हैं।
2) प्राकृतिक तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु पादप और जंतु से प्राप्त होते हैं उन्हें प्राकृतिक तंतु कहते हैं। जैसे :- सुती, जूट, रेशमी तथा ऊनी
3) संश्लिष्ट तंतु किसे कहते हैं?
जो तंतु रासायनिक पदार्थों से प्राप्त होते हैं उन्हें संश्लिष्ट तंतु कहते हैं। जैसे :- पॉलिएस्टर, नायलॉन तथा येक्रिलिक।
4) कपास ओटन किसे कहते हैं?
कपास को बीजों से कंकतन द्वारा अलग करने की प्रक्रिया को कपास ओटन कहा जाता है।
5) कपास की खेती किन राज्यों में की जाती है।
महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में।
6) पटसन किस पादप से प्राप्त किया जाता है?
जूट पादप से।
7) पटसन तंतु को पटसन पादप के किस हिस्से से प्राप्त किया जाता हैं?
पटसन पादप के तने से।
8) कताई किसे कहते हैं?
रेशों से तागा बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं।
9) तकली किसे कहते हैं?
कताई के एक सरल युक्ति हस्त तकुआ का उपयोग किया जाता हैं जिसे तकली कहते हैं।
10) ग्रामोद्योग क्या हैं? और इसे कब बनाया गया था?
खादी के प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1956 में एक संगठन का निर्माण किया जिसे खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग कहते हैं।
11) बुनाई/ वीविंग किसे कहते हैं?
तागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।
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Class 6 Science Chapter 7 Important Notes
● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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● पौधों को 3 संवर्गों में वर्गीकृत कर सकते हैं :- (क) शाक, (ख) वृक्ष, (ग) झाड़ी।
● हरे एवं कोमल तने वाले पौधों को शाक कहते हैं।
●कुछ पौधों में शाखाएं तने के आधार के समीप से निकलती है तना कठोर होता है परंतु अधिक मोटा नहीं होता। इन्हें झाड़ी कहते हैं।
●कुछ पौधे बहुत ऊंचे होते हैं तथा इनके तने सुदृढ़ एवं गहरे होते हैं इनमें शाखाएं भूमि से अधिक ऊंचाई पर तने के ऊपरी भाग से निकलती है। इन्हें वृक्ष कहते हैं।
◆कमजोर तने वाले पौधे सीधे खड़े नहीं हो सकते और यह भूमि पर फैल जाते हैं। इन्हें विसर्पी लता कहते हैं।
कुछ पौधे सहायता से ऊपर चढ़ जाते हैं ऐसे पौधे आरोही कहलाते हैं। यह शाक, झाड़ी और पेड़ों से अलग होते हैं।
◆पत्ती का वह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है वह पर्णवृंत कहलाता है।
●पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं।
●पत्ती के मध्य में एक मोटी शिरा होती है जिसे मध्य शिरा कहते हैं।
पत्तियों पर शिराओं द्वारा बनाए गए डिजाइन को शिरा विन्यास कहते हैं।
जिन पत्तियों में शिराएं एक दूसरे के समांतर होते हैं ऐसे शिरा विन्यास को समांतर शिरा विन्यास कहते हैं।
●पत्तियों में से जल वाष्प के रूप में जल की बूंदे निकलती है इस क्रिया को वाष्पोत्सर्जन कहते हैं।
हरी पत्तियां सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके अपना भोजन बनाती है इस प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।
जड़े पौधे को मिट्टी में मजबूती से जमाई रखती है इसे मिट्टी में पौधे का स्थिरक कहा जाता है।
●जिन पौधे की पत्तियां जलिका रूपी शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधे में मुख्य जड़ होते हैं उसे मुसला जड़ कहते हैं तथा मुख्य जड़ के साथ छोटी जड़ों को पाश्र्व कहते हैं।
●जिन पौधे की पत्तियां समांतर शिरा विन्यास वाली होती है एवं जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं इन्हें रेशेदार जड़ कहते हैं।
◆पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं।
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Important questions answers
1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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1 : मुसला जड़ और रेशेदार जड़ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मूसला जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ होती है उसे मुसला जड़ कहते हैं।
रेशेदार जड़ :- जिन पौधों में मुख्य जड़ नहीं होते हैं सभी जड़े एक समान लगते हैं उसे रेशेदार जड़ कहते हैं।
2 : बिना जड़ निकाले कैसे पता लगाएं कि कौन से पौधे का जड़ मुसला जड़ है और रेशेदार जड़ है?
जिन पौधों के पत्ते समांतर शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े रेशेदार होती है।
जिन पौधों के पत्ते जलिका रुपी शिरा विन्यास वाले होते हैं उनकी जड़े मूसला जड़ होती है।
3 : पौधे के अन्य भागों में भोजन कैसे पहुंचता है?
तने द्वारा जड़ों से पत्तियों को जल और पत्तियों से भोजन, पौधे के अन्य भागों तक पहुंचता है।
4 : पुष्प के विभिन्न भागों के नाम बताइए।
पुष्प के विभिन्न भाग :- बाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर
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"Class 6 Science Chapter 9 Notes"
●समुंद्र में जंतु एवं पौधे लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं तथा श्वसन के लिए जल में मिले वायु ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
●रेगिस्तान (मरुस्थल) दिन में बहुत गर्म होता हैं और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है।
●जिन विशेष संरचनाएं विशिष्ट संरचनाएं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे 'अनुकूलन' कहते हैं।
●आवास :- किसी सजीव का वह स्थान जिसमें वह रहता है उसका आवास कहलाता है।
●स्थलीय आवास :- जमीन पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतुओं के आवास को स्थानीय आवास कहते हैं।
●जलीय आवास :- जलाशय, दल-दल, झील, नदियां एवं समुद्र जहां पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उसे जलीय आवास है।
●जैव घटक :- किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।
●अजैव घटक :- चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएं आवास के अजैव घटक हैं।
सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक है।
●पर्यनुकूलन :- अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के साथ समाजस्य स्थापित करने के लिए कुछ जीवो में थोड़े समय के लिए परिवर्तन हो सकते हैं अल्प अवधि में किसी एक जीव के शरीर में होने वाले यह छोटे-छोटे परिवर्तन पर्यनुकूलन कहलाते हैं। जैसे :- यदि हम मैदानी क्षेत्र में रहते हैं और अचानक ही ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में चले जाए तो हमें कुछ दिनों तक सांस लेने में शारीरिक व्यायाम में असुविधा हो सकती है।
◆ पहाड़ पर हमें तीव्र गति से सोंग्स देना पड़ता है। कुछ दिनों बाद हमारा शरीर पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण के प्रति अपने आप को ढाल लेता है तथा हमें श्वास लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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●समुंद्र में जंतु एवं पौधे लवणीय जल (खारे पानी) में रहते हैं तथा श्वसन के लिए जल में मिले वायु ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
●रेगिस्तान (मरुस्थल) दिन में बहुत गर्म होता हैं और रात में बहुत ज्यादा ठंडा होता है।
●जिन विशेष संरचनाएं विशिष्ट संरचनाएं अथवा स्वभाव की उपस्थिति किसी पौधे अथवा जंतु को उसके परिवेश में रहने के योग्य बनाती है उसे 'अनुकूलन' कहते हैं।
●आवास :- किसी सजीव का वह स्थान जिसमें वह रहता है उसका आवास कहलाता है।
●स्थलीय आवास :- जमीन पर पाए जाने वाले पौधे एवं जंतुओं के आवास को स्थानीय आवास कहते हैं।
●जलीय आवास :- जलाशय, दल-दल, झील, नदियां एवं समुद्र जहां पौधे एवं जंतु जल में रहते हैं उसे जलीय आवास है।
●जैव घटक :- किसी आवास में पाए जाने वाले सभी जीव जैसे कि पौधे एवं जंतु उसके जैव घटक हैं।
●अजैव घटक :- चट्टान, मिट्टी, वायु एवं जल जैसी अनेक निर्जीव वस्तुएं आवास के अजैव घटक हैं।
सूर्य का प्रकाश एवं ऊष्मा भी परिवेश के अजैव घटक है।
●पर्यनुकूलन :- अपने परिवेश में होने वाले परिवर्तनों के साथ समाजस्य स्थापित करने के लिए कुछ जीवो में थोड़े समय के लिए परिवर्तन हो सकते हैं अल्प अवधि में किसी एक जीव के शरीर में होने वाले यह छोटे-छोटे परिवर्तन पर्यनुकूलन कहलाते हैं। जैसे :- यदि हम मैदानी क्षेत्र में रहते हैं और अचानक ही ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में चले जाए तो हमें कुछ दिनों तक सांस लेने में शारीरिक व्यायाम में असुविधा हो सकती है।
◆ पहाड़ पर हमें तीव्र गति से सोंग्स देना पड़ता है। कुछ दिनों बाद हमारा शरीर पर्वतीय क्षेत्र के वातावरण के प्रति अपने आप को ढाल लेता है तथा हमें श्वास लेने में कोई परेशानी नहीं होती है।
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सजीव जीवो के लक्ष्ण :-
● सजीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
●सजीवों में वृद्धि होती है।
●सभी सजीव शोषण करते हैं /सांस लेते हैं।
●सभी सजीव उद्दीपन करते हैं।
●सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
●सभी सजीव गति करते हैं।
●सभी सजीव प्रजनन करते हैं।
उद्दीपन :-
◆मनोविज्ञान में अर्थ :- इंद्रियों द्वारा पकड़े जाने योग्य किसी भी 'परिवर्तन' को उद्दीपन कहते हैं।
◆उद्दीपन का शाब्दिक अर्थ :- ज्योति अग्नि अथवा किसी भाव को बढ़ा देना है। 'उत्' उपसर्ग पूर्वक 'दीप' मूल शब्द में 'णिच्' (संस्कृत) 'अन' (हिंदी) प्रत्यय लगाने पर उद्दीपन शब्द की निष्पत्ति होती है।
◆ उत्सर्जन :- सजीवों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
Book Notes :-
●किसी स्थान का परिवेश जिसमें पौधे, जंतु एवं अन्य जीव रहते हैं उनका आवास कहलाता है।
●विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जंतुओं एक ही आवास में एक साथ रह सकते हैं।
●पौधों और जीवो के विशिष्ट लक्षण एवं स्वभाव जो उन्हें एक आवास विशेष में रहने के अनुकूल बनाते हैं अनुकूलन कहलाता है।
●आवास अनेक प्रकार के होते हैं परंतु सामान्यतः इन्हें स्थलीय (जमीन पर) एवं जलीय आवास (जल में) वर्गीकृत किया जाता है।
●विभिन्न आवास में सजीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती है।
पौधे, जंतु एवं सूक्ष्म जीव संयुक्त रूप से जैव घटक बनाते हैं।
●चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश एवं ताप हमारे परिवेश के कुछ अवशेष घटक हैं।
●सजीव वस्तुओं के कुछ सामान्य लक्षण है :- उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वह श्वसन, उत्सर्जन, पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया, प्रजनन, वृद्धि एवं गति करते हैं।
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● सजीव वस्तुओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
●सजीवों में वृद्धि होती है।
●सभी सजीव शोषण करते हैं /सांस लेते हैं।
●सभी सजीव उद्दीपन करते हैं।
●सभी सजीव उत्सर्जन करते हैं।
●सभी सजीव गति करते हैं।
●सभी सजीव प्रजनन करते हैं।
उद्दीपन :-
◆मनोविज्ञान में अर्थ :- इंद्रियों द्वारा पकड़े जाने योग्य किसी भी 'परिवर्तन' को उद्दीपन कहते हैं।
◆उद्दीपन का शाब्दिक अर्थ :- ज्योति अग्नि अथवा किसी भाव को बढ़ा देना है। 'उत्' उपसर्ग पूर्वक 'दीप' मूल शब्द में 'णिच्' (संस्कृत) 'अन' (हिंदी) प्रत्यय लगाने पर उद्दीपन शब्द की निष्पत्ति होती है।
◆ उत्सर्जन :- सजीवों द्वारा अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
Book Notes :-
●किसी स्थान का परिवेश जिसमें पौधे, जंतु एवं अन्य जीव रहते हैं उनका आवास कहलाता है।
●विभिन्न प्रकार के पौधे एवं जंतुओं एक ही आवास में एक साथ रह सकते हैं।
●पौधों और जीवो के विशिष्ट लक्षण एवं स्वभाव जो उन्हें एक आवास विशेष में रहने के अनुकूल बनाते हैं अनुकूलन कहलाता है।
●आवास अनेक प्रकार के होते हैं परंतु सामान्यतः इन्हें स्थलीय (जमीन पर) एवं जलीय आवास (जल में) वर्गीकृत किया जाता है।
●विभिन्न आवास में सजीवों की विविध प्रजातियां पाई जाती है।
पौधे, जंतु एवं सूक्ष्म जीव संयुक्त रूप से जैव घटक बनाते हैं।
●चट्टान, मिट्टी, वायु, जल, प्रकाश एवं ताप हमारे परिवेश के कुछ अवशेष घटक हैं।
●सजीव वस्तुओं के कुछ सामान्य लक्षण है :- उन्हें भोजन की आवश्यकता होती है, वह श्वसन, उत्सर्जन, पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया, प्रजनन, वृद्धि एवं गति करते हैं।
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