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✅काला नमक चावल’ या बुद्ध चावल’, जो हाल ही में खबरों में था, किस भारतीय राज्य से जुड़ा है?

उत्तर – उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश 20 टन बुद्ध चावल की एक खेप को सिंगापुर को निर्यात करेगा, इसे “काला नमक” चावल के रूप में भी जाना जाता है। चावल की यह किस्म भारत में सुगंधित चावल की बेहतरीन किस्मों में से एक है। यह राज्य के कृषि निर्यात को बढ़ावा देगा। राज्य सरकार ने इसे सिद्धार्थ नगर जिले का वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) घोषित किया है।

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✅राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के अध्यक्ष कौन हैं?

उत्तर – भगवान लाल साहनी

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के अध्यक्ष भगवान लाल साहनी हैं। उन्होंने हाल ही में कहा है कि आयोग ओबीसी की लगभग चार श्रेणियों के पक्ष में है, जैसा कि न्यायमूर्ति रोहिणी आयोग द्वारा सुझाया गया है। जस्टिस रोहिणी आयोग ओबीसी के उप-वर्गीकरण का अध्ययन कर रहा है। यह आयोग इस वर्ष जुलाई में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा।

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Current updates..
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✅ विश्व में घास के प्रमुख मैदान एवं क्षेत्र

►- प्रेयरीज >>> उत्तरी अमेरिका
►- लानोज >>> अमेजन नदी के उत्तरी ओरनीको बेसिन
►- कम्पास >>> अमेजन नदी के दक्षिण भाग में ब्राजील
►- कटिंगा >>> ब्राजील के उष्ण कटिबंधीय वन
►- पार्कलैण्ड >>> अफ्रीका
►- पम्पास >>> द. अमेरिका(अर्जेण्टीना के मैदानी भागों में)
►- वेल्ड >>> द.अफ्रीका के भूमध्य सागरीय जलवायु में
►- डाउंस >>> आस्ट्रेलिया(मरे-डार्लिंग बेसिन में)
►- स्टेपीज >>> यूरेशिया

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✅मिशन इन्द्रधनुष’ क्या है?

भारत सरकार द्वारा “मिशन इन्द्रधनुष” की शुरुआत दिसंबर 2014 में की गयी थी, इसका उद्देश्य टीकाकरण कार्यक्रम को पुन: सक्रिय करने और सभी बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए तेजी से पूर्ण टीकाकरण कवरेज के अंतर्गत लाना था।

मिशन इन्द्रधनुष का लक्ष्य:

मिशन इन्द्रधनुष का अंतिम लक्ष्य दो वर्ष की आयु तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए सभी उपलब्ध टीकों सहित पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना है।

इस मिशन के अंतर्गत कवर किए जाने वाले रोग:

मिशन इन्द्रधनुष के तहत, 12 टीका-निरोध्य बीमारियों (Vaccine-Preventable Diseases– VPD) अर्थात डिप्थीरिया, काली खांसी, टेटनस, पोलियो, तपेदिक, हेपेटाइटिस बी, मेनिनजाइटिस और निमोनिया, हिमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप-बी संक्रमण, जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकस कंजुगेट वैक्सीन (PCV), खसरा-रूबेला (MR) के खिलाफ टीकाकरण किया जाता है।

हालांकि, जापानी इंसेफेलाइटिस और हिमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप-बी, बीमारियों के खिलाफ देश के चयनित जिलों में टीकाकरण किया जा रहा है।

गहन मिशन इन्द्रधनुष (IMI):

टीकाकरण कार्यक्रम को और तीव्र करने हेतु प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 अक्टूबर, 2017 को गहन इन्द्रधनुष मिशन (Intensified Mission Indradhanush- IMI) शुरू किया गया।

इसका लक्ष्य, दो वर्ष तक की आयु तक के उन बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक पहुंचने का है जो नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से वंचित रह गए या छूट गए हैं।

इस विशेष अभियान के तहत, दिसंबर 2018 तक 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने हेतु चुनिंदा जिलों और शहरों में टीकाकरण कवरेज में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

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✅ UNHRC के बारे में:

‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) का पुनर्गठन वर्ष 2006 में इसकी पूर्ववर्ती संस्था, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UN Commission on Human Rights) के प्रति ‘विश्वसनीयता के अभाव’ को दूर करने में सहायता करने हेतु किया गया था।

इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

संरचना:

वर्तमान में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) में 47 सदस्य हैं, तथा समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।

प्रत्येक सदस्य तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होता है।

किसी देश को एक सीट पर लगातार अधिकतम दो कार्यकाल की अनुमति होती है।

UNHRC के कार्य:

परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की ‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’ (Universal Periodic Review- UPR) के माध्यम से मानव अधिकार संबंधी विषयों पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।

यह विशेष देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।

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✅ घाना: कोवैक्स टीका हासिल करने वाला पहला देश

कोवैक्स (COVAX)- उच्च और निम्न-आय वाले देशों के बीच वैक्सीन असमानता को कम करने की एक पहल के अंर्तगत, एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन की 600,000 खुराक के साथ राजधानी अकरा में पहुँचने के साथ ही, घाना, कोवैक्स टीका हासिल करने वाला पहला देश बन गया है।

COVAX क्या है?

COVAX, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दो अंतर्राष्ट्रीय समूहों – GAVI वैक्सीन गठबंधन और महामारी की तैयारी में नवाचारों हेतु गठबंधन’ (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations- CEPI) के बीच एक साझेदारी है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों को टीकों की आपूर्ति करना है।

इसके लिए, उच्च आय वाले देशों तथा बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा वित्त पोषण किया जाता है।

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✅ राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM)

(National Urban Digital Mission)


आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।

शहरों और नगरों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए पीपुल्स, प्रोसेस और प्लेटफॉर्म जैसे तीन स्तंभों पर काम करते हुए शहरी भारत के लिए साझा डिजिटल बुनियादी ढांचा विकसित करेगा।

यह मिशन वर्ष 2022 तक 2022 शहरों और 2024 तक भारत के सभी शहरों और नगरों में शहरी शासन और सेवा वितरण के लिए नागरिक केन्द्रित और इकोसिस्टम द्वारा संचालित दृष्टिकोण को साकार करने का काम करेगा।

इस मिशन के तहत, फरवरी 2019 में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए नेशनल अर्बन इनोवेशन स्टैक (एनयूआईएस) की रणनीति और दृष्टिकोण आधारित प्रौद्योगिकी डिजाइन सिद्धांतों का अनुसरण किया है।

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✅ बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICOLD)

(International Commission on Large Dams)

संदर्भ:


हाल ही में, बांधों और नदियों के सतत विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICOLD) की विशाल बांध संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया है।

बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग / ‘इंटरनेशनल कमीशन ऑन लार्ज डैम’ (ICOLD) एक गैर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो बांध इंजीनियरिंग में जानकारी और अनुभव के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करता है।

ICOLD की स्थापना 1928 में हुई थी और इसमें लगभग 10000 निजी सदस्यों के साथ 100 से अधिक देशों की राष्ट्रीय समितियाँ शामिल है।

इसके सदस्यों में ज्यादातर इंजीनियर, भूविज्ञानी और वैज्ञानिक सरकारी या निजी संगठनों, परामर्श फर्मों, विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और निर्माण कंपनियां आदि होते हैं।

ICOLD, मानकों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने में पेशेवरों का नेतृत्व करता है तथा यह सुनिश्चित करता है, कि निर्मित किये जाने वाले बांध पर्यावरण की दृष्टि से स्थायी और सामाजिक रूप से न्यायसंगत हों तथा इनका सञ्चालन सुरक्षित और कुशलतापूर्वक किया जाए।

इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

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According to UNESCO, any language that is spoken by less than 10,000 people is potentially endangered.
In India, after the 1971 census, the government decided that any language spoken by less than 10,000 people need not be included in the official list of languages. In India, therefore, all the languages that are spoken by less than 10,000 people are treated by the state as not worthy of mention and treated by the UNESCO as potentially endangered. As per my survey, there are close to 780 languages in India, out of which about 600 are potentially endangered. The census of 1991 and 2001 show not more than 122 languages.
यूनेस्को for upsc pcs
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संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन' (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह शिक्षा, विज्ञान एवं संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से शांति स्थापित करने का  प्रयास करती है। 

यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास समूह (United Nations Sustainable Development Group- UNSDG) का सदस्य है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों एवं संगठनों के इस समूह का उद्देश्य सतत् विकास लक्ष्यों को पूरा करना है। 

यूनेस्को का मुख्यालय पेरिस में अवस्थित है एवं विश्व में इसके 50 से अधिक क्षेत्रीय कार्यालय हैं।

इसके 193 सदस्य देश एवं 11 संबद्ध सदस्य (अप्रैल 2020 तक) हैं और यह सामान्य सम्मेलन एवं कार्यकारी बोर्ड के माध्यम से नियंत्रित होता है।

यूनेस्को के सदस्य देशों में शामिल तीन देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य नहीं हैं: कुक द्वीप (Cook Islands), निउए (Niue) एवं फिलिस्तीन, जबकि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में से तीन देश इज़रायल ,लिकटेंस्टीन,संयुक्त राज्य अमेरिका यूनेस्को के सदस्य देश नहीं हैं।

उद्देश्य:

यूनेस्को के निम्नलिखित उद्देश्य हैं
: 

सभी के लिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उन्हें उम्र भर सीखने हेतु प्रेरित करना।

सतत् विकास के लिये नीति एवं विज्ञान संबंधी ज्ञान का उपयोग करना।

उभरती सामाजिक और नैतिक चुनौतियों को संबोधित करना।

सांस्कृतिक विविधता,परस्पर संवाद एवं शांति की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना।

संचार एवं सूचना के माध्यम से समावेशी ज्ञान से युक्त समाज का निर्माण करना।

विश्व के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे ‘अफ्रीका’ एवं ‘लैंगिक समानता’ पर ध्यान केंद्रित करना।

इतिहास

वर्ष 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धुरी राष्ट्रों का सामना कर रहे यूरोपीय देशों ने  यूनाइटेड किंगडम में ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ़ अलाइड मिनिस्टर्स ऑफ एजुकेशन’ (Conference of Allied Ministers of Education - CAME) का आयोजन किया था।

केम (CAME) के प्रस्ताव के आधार पर एक ‘शैक्षिक और सांस्कृतिक संगठन’ की स्थापना के लिये नवंबर 1945 में लंदन में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन बुलाया गया था।

सम्मेलन के अंत में 16 नवंबर, 1945 को यूनेस्को की स्थापना की गई थी। 

यूनेस्को के जनरल कॉन्फ्रेंस का प्रथम सत्र वर्ष 1946 में नवंबर-दिसंबर के दौरान पेरिस में आयोजित किया गया था।
यूनेस्को की विशेषज्ञताएँ 

शिक्षा जीवन बदल देती है


यूनेस्को संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र ऐसी एजेंसी है जिसे शिक्षा के सभी पहलुओं को शामिल करने का अधिकार प्राप्त है।

यूनेस्को को सतत् विकास लक्ष्य-4 के माध्यम से ‘वैश्विक शिक्षा एजेंडा 2030’ का नेतृत्व सौंपा गया है। 

‘एजुकेशन 2030 फ्रेमवर्क फॉर एक्शन’ (‘Education 2030 Framework for Action) (इंचियोन घोषणा- IncheonDeclaration) वैश्विक शिक्षा एजेंडा 2030 को प्राप्त करने के लिये एक रोडमैप हैं।

इसके कार्यों में शुरुआती शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा और उससे आगे तक शैक्षिक विकास शामिल है।

इसके विषयों में वैश्विक नागरिकता एवं सतत् विकास, मानवाधिकार और लैंगिक समानता, स्वास्थ्य तथा एचआईवी और एड्स के साथ ही तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल विकास शामिल है। 

धरोहर की रक्षा एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देना

यह सत्य प्रतीत होता है कि एक मज़बूत सांस्कृतिक घटक के बिना कोई भी विकास सतत् नहीं हो सकता है।

यूनेस्को ने विकास की रणनीतियों और प्रक्रियाओं में संस्कृत को उचित स्थान देने के लिये एक त्रिस्तरीय दृष्टिकोण को अपनाया है। 

संस्कृति एवं विकास के लिये दुनिया भर में वकालत करना।

स्पष्ट नीतियों एवं कानूनी ढाँचे को निर्धारित करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के साथ जुड़ना।

रचनात्मक उद्योगों को मज़बूत करने, सांस्कृतिक बहुलता को प्रोत्साहित करने एवं विरासतों को सुरक्षित रखने के लिये स्थानीय हितधारक तथा सरकारों की सहायता हेतु ज़मीनी स्तर पर कार्य करना।

विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के बचाव एवं सुरक्षा के लिये यूनेस्को के कुछ महत्त्वपूर्ण अभिसमय तथा अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ:

सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की विविधता का संरक्षण एवं संवर्द्धन पर अभिसमय (2005)।

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये अभिसमय (2003)।

सांस्कृतिक विविधता पर सार्वभौमिक घोषणा (2001)।

अंतःजलीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर अभिसमय (2001)।

विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर अभिसमय (1972)।

सांस्कृतिक संपदा के अवैध आयात, निर्यात तथा स्वामित्व के हस्तांतरण पर प्रतिबंध एवं रोकथाम के साधनों पर अभिसमय (1970)।

सतत् भविष्य के लिये विज्ञान

विज्ञान हमें वर्तमान में आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने एवं सतत् विकास की स्थिति प्राप्त करने में समर्थ बनाता है। 

यूनेस्को देशों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) में निवेश करने, राष्ट्रीय विज्ञान नीतियों के विकास, उनकी विज्ञान प्रणालियों में सुधार करने और STI संकेतकों के माध्यम से प्रदर्शन की निगरानी एवं मूल्यांकन की क्षमता निर्मित करने के लिये काम करता है।

यूनेस्को अपने सदस्य देशों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग के बारे में विशेष रूप से जैव नैतिकता के क्षेत्र में जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के लिये प्रोत्साहित करने हेतु भी कार्य करता है। 


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सामाजिक एवं मानव विज्ञान

यूनेस्को न्यायसंगत और समावेशी सोसाइटी हेतु ज्ञान का निर्माण एवं उसका उपयोग करने के लिये लोगों को सक्षम बनाने में मदद करता है। इसके साथ ही यूनेस्को स्थायी शांति एवं लोगों को एक-दूसरे का सहयोग करने में मदद करता है।  

यह सामाजिक परिवर्तनों का प्रबंधन (Management of Social Transformations- MOST), युवाओं से संबंधित कार्यक्रम और शांति तथा अहिंसा की संस्कृति (जिसमें लोकतंत्र और वैश्विक नागरिकता, परस्पर संवाद, शांति निर्माण की पहल शामिल है) जैसे अपने अंतर-सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से पारस्परिक समझ को प्रोत्साहित करता है।

संचार एवं सूचना 

यूनेस्को पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उनकी सुरक्षा को बढ़ावा देता है। ऑनलाइन घृणास्पद भाषा की रोकथाम करता है, इसके अलावा जागरूकता के माध्यम से दुष्प्रचार एवं गलत सूचना के प्रसार को रोकता  है। 

यह स्वतंत्र समाधान को प्रोत्साहित करके जिसमें मुक्त शैक्षिक संस्थान, हाशिये के लोगो तक पहुँच और साइबर स्पेस में बहुभाषावाद शामिल हैं, के माध्यम से ज्ञान एवं सूचनाओं तक सार्वभौमिक पहुँच में भी सहयोग करता है।

यूनेस्को की वैश्विक प्राथमिकताएँ - ‘अफ्रीका’ एवं ‘लैंगिक समानता’

अफ्रीका

यूनेस्को एक मज़बूत और बेहतर लक्षित रणनीति के साथ 54 अफ्रीकी देशों पर केंद्रित है।

अफ्रीकी संघ द्वारा एजेंडा 2063 और  एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट 2030 को अपनाना अफ्रीकी आर्थिक समुदाय के विकास तथा अफ्रीकी पुनर्जागरण के लिये एक आधार तैयार करता है।

लैंगिक समानता

यूनेस्को का मत है कि पुरुष और महिलाओं को समान नागरिक के रूप में समान अवसर, विकल्प, क्षमता, शक्ति और ज्ञान का अवसर प्राप्त होना चाहिये।

लैंगिक असमानताओं से निपटने के लिये ज्ञान, मूल्यों, दृष्टिकोण और कौशल से अवगत कराना सभी के लिये एक स्थायी भविष्य बनाने की पूर्व निर्धारित शर्त है। 

लैंगिक समानता के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम एस प्रकार हैं:

यूनेस्को प्राथमिकता लैंगिक समानता कार्ययोजना

लैंगिक समानता उपकरण

लैंगिक दृष्टिकोण

लिंग संबंधी यूनेस्को की अध्यक्षता एवं नेटवर्क

 लड़कियों एवं महिलाओं की शिक्षा के लिये यूनेस्को पुरस्कार

यूनेस्को युवा मोबाइल

यूनेस्को के कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम

यूनेस्को विश्व विरासत सम्मेलन और सूची

विश्व विरासत अभिसमय-1972 सांस्कृतिक संपदा एवं प्रकृति के संरक्षण की अवधारणा को एक साथ जोड़ता है। 

यह अभिसमय उन प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक स्थलों (विश्व विरासत स्थल) को परिभाषित करता है जिन्हें विश्व विरासत सूची में शामिल किया जा सकता है।

इस अभिसमय में शामिल सदस्यों को सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासतों के संरक्षण को अपने क्षेत्रीय योजना कार्यक्रमों में शामिल करने, उन स्थलों पर कर्मचारियों की नियुक्ति तथा संरक्षण हेतु वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान करने के लिये प्रोत्साहित किया जाता है। 

यह बताता है कि विश्व विरासत कोष का उपयोग एवं प्रबंधन किस प्रकार किया जाना है।

विश्व के 167 देशों में विश्व विरासत स्थलों की संख्या 1121 है। भारत में अब तक 38 विश्व विरासत स्थल हैं जिनमें 30 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक एवं 1 मिश्रित स्थल है।

मानव व जीवमंडल कार्यक्रम (MAB) 

यह एक अंतर-सरकारी वैज्ञानिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य लोगों और उनके वातावरण के मध्य मज़बूत संबंधों के लिये एक वैज्ञानिक आधार स्थापित करना है।

यह आर्थिक विकास के लिये नवाचारी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करता है जो सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से उचित तथा पर्यावरणीय रूप से धारणीय है।

वर्तमान में 124 देशों में बायोस्फीयर रिज़र्व के वैश्विक नेटवर्क स्थलों की संख्या 701 है जिनमें  21 सीमापारीय स्थल शामिल हैं।

भारत में 18 बायोस्फीयर रिज़र्व हैं जिनमें से 11 बायोस्फीयर रिज़र्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानव व जैवमंडल (MAB) कार्यक्रम के तहत चिह्नित किया गया है।
इंटरनेशनल जियोसाइंस एंड वर्ल्ड जियोपार्क प्रोग्राम (IGGP)

इंटरनेशनल जियोसाइंस प्रोग्राम (IGCP) पृथ्वी के भविष्य को दिशा देने हेतु जियोसांइटिस्ट के वैश्विक नेटवर्क की बौद्धिक क्षमता का उपयोग करता है जिसके तहत जलवायु परिवर्तन के समय अनुकूलनशीलता एवं प्राकृतिक जोखिम लचीलापन, उत्तरदायी संसाधनों के निष्कासन तथा तत्परता पर ध्यान केंद्रित करना भी शामिल है।

यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क सतत् विकास हेतु प्रयोगशालाएँ हैं जो पृथ्वी की धरोहर की पहचान, प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों की स्थिरता को प्रोत्साहित करता है।

अप्रैल 2019 तक 41 सदस्य देशों में 147 यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क हैं जिसमें कुल 288,000 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र शामिल है।

अंतर्राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजिकल कार्यक्रम(IHP)

अंतर-सरकारी हाइड्रोलॉजिकल कार्यक्रम (IHP) संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एकमात्र ऐसा अंतर-सरकारी कार्यक्रम है जो जल अनुसंधान और प्रबंधन तथा उससे संबंधित शिक्षा एवं क्षमता विकसित करने के लिये समर्पित है।

वैश्विक जल आकलन कार्यक्रम (WWAP)

वैश्विक स्तर पर बढ़ती जल संकट की समस्या विकासशील देशों की सुरक्षा, स्थिरता, पर्यावरणीय धारणीयता के लिये खतरा है।

यह कार्यक्रम विश्व में ताज़े जल की स्थिति के आकलन पर केंद्रित है। यह विश्व जल विकास रिपोर्ट (World Water Development Report-WWDR) के भागीदारों एवं संयुक्त राष्ट्र-जल के 31 सदस्यों (31 UN-Water members) के कार्यों के साथ समन्वय भी करता है।

इंटरनेशनल बेसिक साइंस प्रोग्राम (IBSP)

यह एक अंतर्राष्ट्रीय बहु-विषयक कार्यक्रम है जिसे आधारभूत वैज्ञानिक शिक्षा में किसी देश की राष्ट्रीय क्षमता को मज़बूत करने के लिये यूनेस्को के सदस्य देशों द्वारा स्थापित किया गया है ताकि विज्ञान के क्षेत्र में अंतर-सरकारी सहयोग को सुदृढ़ किया जा सके। 

यूनेस्को की महत्त्वपूर्ण रिपोर्ट्स

यूनेस्को विज्ञान रिपोर्ट

यूनेस्को विज्ञान रिपोर्ट विश्व भर में नियमित रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार  शासन (STI) का खाका तैयार करती है। यह रिपोर्ट विकास एवं शांति के लिये विश्व विज्ञान दिवसको मनाने हेतु प्रत्येक 5 वर्ष में 10 नवंबर को प्रकाशित की जाती  है। 

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग रिपोर्ट एसडीजी एजेंडा में शिक्षा पर सतत् विकास लक्ष्य (SDG4) एवं उसके 10 लक्ष्यों तथा शिक्षा से संबंधित अन्य लक्ष्यों की प्रगति का आकलन करती है।

ग्लोबल एजुकेशन मॉनीटरिंग (GEM) रिपोर्ट शिक्षा पर सतत विकास लक्ष्य (SDG 4) और उसके 10 लक्ष्यों के साथ-साथ SDG एजेंडे में अन्य संबंधित शिक्षा लक्ष्यों की प्रगति का मूल्यांकन करती है। 

यह रिपोर्ट विभिन्न निजी क्षेत्रों तथा जवाबदेही तंत्रों का परीक्षण करती है जो सरकारों, स्कूलों, शिक्षकों, माता-पिता, अंतर्राष्ट्रीय समुदायों को शामिल करते हैं और समावेशी, न्यायसंगत तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जवाबदेह होते हैं

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मैकब्राइड रिपोर्ट 1980

मैकब्राइड आयोग की व्यापक रिपोर्ट को "मेनी वॉयसेस, वन वर्ल्ड" (Many Voices, OneWorld”) के नाम से भी जाना जाता है।

यह आधुनिक समाज में विशेषकर मास मीडिया एवं न्यूज़ से संबंधित संचार समस्याओं का विश्लेषण करती है। इसके साथ ही इसमें नई  तकनीकों की उत्पति पर विचार करना एवं भविष्य में शांति और मानव विकास हेतु इन समस्याओं को समाप्त करने के लिये एक तरह के संचार (नई वैश्विक सूचना एवं संचार आदेश) का सुझाव देना भी शामिल है।

भारत के लिये यूनेस्को की स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट: दिव्यांग बच्चे

वर्ष 2019 की रिपोर्ट, इस वार्षिक रिपोर्ट का प्रथम संस्करण था जिसे भारत में यूनेस्को द्वारा प्रकाशित किया गया। 

यह दिव्यांग बच्चों (CWDs) की शिक्षा के अधिकार के संबंध में उपलब्धियों और चुनौतियों पर प्रकाश डालती है।

यूनेस्को की स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट 2019 शिक्षा प्रणाली को यह समझाने में सहायक साबित हो सकती है कि दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की ज़रूरतें क्या हैं? यह रिपोर्ट हाशिये पर स्थित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिये हमारे सामूहिक उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण गति दे सकती है।

यूनेस्को एवं भारत

 यूनेस्को के साथ सहयोग के लिये भारतीय  राष्ट्रीय आयोग (INCCU)

भारत यूनेस्को की शुरुआत यानी वर्ष 1946 से ही इसका सदस्य रहा है।

यूनेस्को के अनुसार, प्रत्येक सदस्य देश का एक मुख्य संस्थान होना चाहिये जो यूनेस्को के साथ कार्य करेगा। इस प्रकार भारत में यूनेस्को के साथ सहयोग के लिये भारतीय राष्ट्रीय आयोग को अधिकृत किया गया था।

भारत में यूनेस्को के दो कार्यालय हैं:

दक्षिण और मध्य एशिया के 11 देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, ईरान, मालदीव, मंगोलिया, म्याँमार, नेपाल पाकिस्तान एवं श्रीलंका) के लिये नई दिल्ली क्लस्टर कार्यालय है।

महात्‍मा गांधी शांति एवं सतत् विकास शिक्षा संस्‍थान(Mahatma Gandhi Institute of Education for Peace and Sustainable Development- MGIEP) भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्तपोषित एवं सहायता प्राप्त है।

यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार एवं भारत 

सहिष्णुता एवं अहिंसा को प्रोत्साहित करने के लिये ‘ यूनेस्को  मदनजीत सिंह पुरस्कार’ 

इसकी स्थापना यूनेस्को के सद्भावना दूत, भारतीय कलाकार, लेखक एवं रणनीतिकार श्री मदनजीत सिंह द्वारा दिये गए दान की सहायता से की गई है।

इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1995 में की गई जिसे सहिष्णुता के लिये संयुक्त राष्ट्र वर्ष और महात्मा गांधी के जन्म की 125वीं वर्षगाँठ के रूप में चिह्नित किया गया था।

वर्ष 1996 से यह पुरस्कार प्रत्येक 2 वर्ष में दिया जाता रहा है तथा वर्ष 2002 से इस पुरस्कार के तहत दी जाने वाली राशि 100,000 यूएस डॉलर है।

विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिये यूनेस्को कलिंग पुरस्कार

इस पुरस्कार की स्थापना भारत में कलिंग फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं संस्थापक श्री बिजोयानंद पटनायक के द्वारा किये गए दान के बाद वर्ष 1951 में यूनेस्को द्वारा की गई थी।
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✅ समलैंगिक विवाह, बरबादी का कारण हो सकती है: उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार का तर्क

केंद्र सरकार ने, समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के लिए विवाह संबंधी मौजूदा कानूनों में किसी भी बदलाव का विरोध किया है।

कृपया ध्यान दें, 2018 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक ऐतिहासिक फैसले में, भारत में मर्जी से समलैंगिक यौन संबंध को गैर-अपराधिक घोषित कर दिया गया था।

केंद्र सरकार के तर्क:

पार्टनर के रूप में एक साथ रहना और समान-लिंग के लोगों के साथ यौन संबंध बनाने की तुलना पति, पत्नी और बच्चों वाले भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती। भारत में शादी केवल दो व्यक्तियों के मिलन का विषय नहीं है, बल्कि एक बायोलॉजिकल पुरुष और एक बायोलॉजिकल महिला के बीच एक अहम बंधन है।

पति को बायोलॉजिकल पुरुष के रूप में और पत्नी को एक बायोलॉजिकल महिला के रूप में मानने के अलावा कोई पति-पत्नी की अन्य व्याख्या सभी वैधानिक प्रावधानों को अव्यवहारिक बना देगी।

इस तरह के हस्तक्षेप से देश में व्यक्तिगत कानूनों के नाजुक संतुलन पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे।

समलैंगिक व्यक्तियों के विवाह का पंजीकरण करना, व्यक्तियों पर लागू होने वाले मौजूदा निजी और संहिताबद्ध कानून प्रावधानों, जैसे कि ‘निषिद्ध संबंधो की सीमा’, ‘विवाह की शर्तें’, ‘औपचारिक और अनुष्ठान संबंधी आवश्यकताएं’ आदि का भी उल्लंघन होगा।

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