पानी आँख में भरकर लाया जा सकता है,
जलता शहर अब भी बचाया जा सकता है
आओ पीठ पर हाथ धरें और रो लें हम,
ग़म अपना आपस में बँटाया जा सकता है
यह जो ज़ुल्म के सामने सीना ताने खड़े हैं,
इनसे ख़्वाब कोई नया बोया जा सकता है
इतनी कड़वाहट भी न घोल पानी में,
ज़हर भी आँखों से बहाया जा सकता है
सूरज के ढलने का मातम न मना,
चिराग़ एक और जलाया जा सकता है..!!
जलता शहर अब भी बचाया जा सकता है
आओ पीठ पर हाथ धरें और रो लें हम,
ग़म अपना आपस में बँटाया जा सकता है
यह जो ज़ुल्म के सामने सीना ताने खड़े हैं,
इनसे ख़्वाब कोई नया बोया जा सकता है
इतनी कड़वाहट भी न घोल पानी में,
ज़हर भी आँखों से बहाया जा सकता है
सूरज के ढलने का मातम न मना,
चिराग़ एक और जलाया जा सकता है..!!
🌸🌸 अदम गोंडवी 🌸🌸
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Tu na mila
Ye malaal ek taraf
Tu kyun na mila,
Ye sawal ek taraf,
Tere saye mein bitaaye lamhe ek taraf,
Unn lamhon ko tera,
Tanha chor jana ek taraf,
Wo seher me tera hona ek taraf,
Abb mujhe,
Tera yun akela chor jana ek taraf,
Tere saath umar bhar,
Ka khawab dekhna ek taraf,
Abb unn khawabon ko tanha kr jana ek taraf,
Mere virane mein,
Tera phul barsana ek taraf,
Abb unn phulon ka murjha jana ek taraf
Tumhari wo talkh baatein ek taraf,
Tumhara mujhe jaan bulana ek taraf.
Teri mujhse berukhi ek taraf,
Aur meri tujhse mohabbat ek taraf.
😊🫶
Ye malaal ek taraf
Tu kyun na mila,
Ye sawal ek taraf,
Tere saye mein bitaaye lamhe ek taraf,
Unn lamhon ko tera,
Tanha chor jana ek taraf,
Wo seher me tera hona ek taraf,
Abb mujhe,
Tera yun akela chor jana ek taraf,
Tere saath umar bhar,
Ka khawab dekhna ek taraf,
Abb unn khawabon ko tanha kr jana ek taraf,
Mere virane mein,
Tera phul barsana ek taraf,
Abb unn phulon ka murjha jana ek taraf
Tumhari wo talkh baatein ek taraf,
Tumhara mujhe jaan bulana ek taraf.
Teri mujhse berukhi ek taraf,
Aur meri tujhse mohabbat ek taraf.
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कितना ही परहेज़ कर लीजिये आप,
सबके हिस्से आयेगा कम्बख़्त ये इश्क़!
~🙂
सबके हिस्से आयेगा कम्बख़्त ये इश्क़!
~
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Forwarded from MOHABBAT 🤍
एक चेहरा है जिसे देख नहीं पाता हूं
हार ऐसी है कि बर्दाश्त नहीं होती है!!
🤍
हार ऐसी है कि बर्दाश्त नहीं होती है!!
🤍
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मैंने अपने सनम का सनम बदलते देखा हैं,
जिसकी हर साँस मे मेरी वफ़ा का ज़िक्र था,
उसकी आँखों मे किसी और का आशियाना बनते देखा हैं,
जिसकी मुस्कुराहट कि वजह हम हुआ करते थे,
उसे किसी और कि बाहों मे मुस्कुराते देखा हैं,
सोचा था उम्र भर का साथ होगा उस राहगुज़र पर,
बीच सफर में खुद को तन्हा देखा हैं,
अब ना कोई शिकायत हैं ना कोई गिला उससे,
मैंने अपनी मोहब्बत का ये अंजाम देखा हैं,
मैंने अपने सनम का सनम बदलते देखा हैं।🥀🥀
#heer_writes
जिसकी हर साँस मे मेरी वफ़ा का ज़िक्र था,
उसकी आँखों मे किसी और का आशियाना बनते देखा हैं,
जिसकी मुस्कुराहट कि वजह हम हुआ करते थे,
उसे किसी और कि बाहों मे मुस्कुराते देखा हैं,
सोचा था उम्र भर का साथ होगा उस राहगुज़र पर,
बीच सफर में खुद को तन्हा देखा हैं,
अब ना कोई शिकायत हैं ना कोई गिला उससे,
मैंने अपनी मोहब्बत का ये अंजाम देखा हैं,
मैंने अपने सनम का सनम बदलते देखा हैं।🥀🥀
#heer_writes
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गए दिनों का मलाल मत करना,
मरे हुए आशिक से अब कोई सवाल मत करना,
अब तेरे किसी mgs का जवाब नहीं आएगा,
इस खामोश शहर में अब कोई ख्वाब नहीं आएगा,
हर कतरे में बेहती थी जो वफ़ा,
वो राख़ हों चुकी हैं,
तेरी चाहत में जो जली शमा, वो अब जल कर राख हों चुकी हैं,
अब मेरी राहों में दिये मत जलाना,
बीते हुए मौसमों को फिर से वापस मत बुलाना,
गए दोनों का मलाल मत करना,
मरे हुए आशिक से अब कोई सवाल मत करना..!!
#heer_writes
मरे हुए आशिक से अब कोई सवाल मत करना,
अब तेरे किसी mgs का जवाब नहीं आएगा,
इस खामोश शहर में अब कोई ख्वाब नहीं आएगा,
हर कतरे में बेहती थी जो वफ़ा,
वो राख़ हों चुकी हैं,
तेरी चाहत में जो जली शमा, वो अब जल कर राख हों चुकी हैं,
अब मेरी राहों में दिये मत जलाना,
बीते हुए मौसमों को फिर से वापस मत बुलाना,
गए दोनों का मलाल मत करना,
मरे हुए आशिक से अब कोई सवाल मत करना..!!
#heer_writes
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यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है
जिसे अपना अपना ख़ुदा कहें उसे सज्दा करना हराम है
मेरी बे-रूख़ी से न हो ख़फ़ा मेरे नासेहा मुझे ये बता
जो नज़र से पीता हूँ मैं यहाँ वो शराब कैसे हराम है
जो पतिंगा लौ पे फ़िदा हुआ तो तड़प के शमा ने ये कहा
इसे मेरे दर्द से क्या ग़रज़ ये तो रौशनी का ग़ुलाम है
शब-ए-इंतिज़ार में बारहा मुझे ‘अनवर’ ऐसा गुमाँ हुआ
जिसे मौत कहता है ये जहाँ वो किसी के वादे का नाम है
अनवर मिर्जापुरी
जिसे अपना अपना ख़ुदा कहें उसे सज्दा करना हराम है
मेरी बे-रूख़ी से न हो ख़फ़ा मेरे नासेहा मुझे ये बता
जो नज़र से पीता हूँ मैं यहाँ वो शराब कैसे हराम है
जो पतिंगा लौ पे फ़िदा हुआ तो तड़प के शमा ने ये कहा
इसे मेरे दर्द से क्या ग़रज़ ये तो रौशनी का ग़ुलाम है
शब-ए-इंतिज़ार में बारहा मुझे ‘अनवर’ ऐसा गुमाँ हुआ
जिसे मौत कहता है ये जहाँ वो किसी के वादे का नाम है
अनवर मिर्जापुरी
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🦋 💗 🖤
हम वो आखिरी नस्ल हैं जिसने बाप से मारे खाई हैं,
हम वो पहली नस्ल हैं जो अपनी औलाद से डरती हैं..
🤍 ❤️ 😘
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