हर रोज एक नए फूल पर
मंडराने वाली तितली,
मेरे चरित्र पर सवाल करती है,
वक्त का दोष बताकर वो,
दिलों पर वो वार करती है ।।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
#inspired_by_someone_story
मंडराने वाली तितली,
मेरे चरित्र पर सवाल करती है,
वक्त का दोष बताकर वो,
दिलों पर वो वार करती है ।।
-लफ़्ज-ए-प्रशान्त✍🏻
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