अतिमहत्वपूर्ण सीरीज : 05
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✍आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने छायावाद को स्पष्ट करते हुए लिखा है -"छायावाद शब्द का प्रयोग दो अर्थों में समझना चाहिए। एक तो रहस्यवाद के अर्थ में,जहां उसका संबंध काव्य-वस्तु से होता है अर्थात् जहां कवि उस अनंत और अज्ञात प्रियतम को को आलम्बन बनाकर अत्यंत चित्रमयी भाषा में प्रेम की अनेक प्रकार से व्यंजना करता है। छायावाद शब्द का दूसरा प्रयोग काव्य शैली या पद्धति-विशेष के व्यापक अर्थ में है।... छायावाद एक शैली विशेष है,जो लाक्षणिक प्रयोगों,अप्रस्तुत विधानों और अमूर्त उपमानों को लेकर चलती है।"
✍महादेवी वर्मा के अनुसार "छायावाद का कवि धर्म के अध्यात्म से अधिक दर्शन के ब्रह्म का ऋणी है, जो मूर्त और अमूर्त विश्व को मिलाकर पूर्णता पाता है। ... अन्यत्र वे लिखती हैं कि "छायावाद प्रकृति के बीच जीवन का उद्-गीथ है।"
✍डॉ. राम कुमार वर्मा के अनुसार -
1."आत्मा और परमात्मा का गुप्त वाग्विलास रहस्यवाद है और वही छायावाद है।"
2."छायावाद या रहस्यवाद जीवात्मा की उस अंतर्निहित प्रवृत्ति का प्रकाशन है जिसमें वह दिव्य और अलौकिक सत्ता से अपना शांत और निश्चल संबंध जोड़ना चाहती है और यह संबंध इतना बढ़ जाता है कि दोनों में कुछ अंतर ही नहीं रह जाता है।"
3."परमात्मा की छाया आत्मा पर पड़ने लगती है और आत्मा की छाया परमात्मा पर। यही छायावाद है।"
✍आचार्य नंददुलारे वाजपेयी के अनुसार -"मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म किंतु व्यक्त सौंदर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।"
✍शांतिप्रिय द्विवेदी ने छायावाद और रहस्यवाद में गहरा संबंध स्थापित करते हुए कहा है-"जिस प्रकार मैटर ऑफ़ फैक्ट(इतिवृत्तात्मक) के आगे की चीज छायावाद है, उसी प्रकार छायावाद के आगे की चीज रहस्यवाद है।"
✍गंगाप्रसाद पांडेय ने कहा -"छायावाद नाम से ही उसकी छायात्मकता स्पष्ट है। विश्व की किसी वस्तु में एक अज्ञात सप्राण छाया की झांकी पाना अथवा उसका आरोप करना ही छायावाद है। ...जिस प्रकार छाया स्थूल वस्तुवाद के आगे की चीज है, उसी प्रकार रहस्यवाद छायावाद के आगे की चीज है।"
✍छायावाद के स्तम्भ जयशंकर प्रसाद ने छायावाद को अपने ढ़ग से परिभाषित करते हुए कहा है - "कविता के क्षेत्र में पौराणिक युग की किसी घटना अथवा देश-विदेश की सुंदरी के बाह्य वर्णन से भिन्न जब वेदना के आधार पर स्वानुभूतिमयी अभिव्यक्ति होने लगी तब हिंदी में उसे छायावाद के नाम से अभिहित किया गया।"
✍डॉ. नगेन्द्र छायावाद को "स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह मानते हैं"।
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✍आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने छायावाद को स्पष्ट करते हुए लिखा है -"छायावाद शब्द का प्रयोग दो अर्थों में समझना चाहिए। एक तो रहस्यवाद के अर्थ में,जहां उसका संबंध काव्य-वस्तु से होता है अर्थात् जहां कवि उस अनंत और अज्ञात प्रियतम को को आलम्बन बनाकर अत्यंत चित्रमयी भाषा में प्रेम की अनेक प्रकार से व्यंजना करता है। छायावाद शब्द का दूसरा प्रयोग काव्य शैली या पद्धति-विशेष के व्यापक अर्थ में है।... छायावाद एक शैली विशेष है,जो लाक्षणिक प्रयोगों,अप्रस्तुत विधानों और अमूर्त उपमानों को लेकर चलती है।"
✍महादेवी वर्मा के अनुसार "छायावाद का कवि धर्म के अध्यात्म से अधिक दर्शन के ब्रह्म का ऋणी है, जो मूर्त और अमूर्त विश्व को मिलाकर पूर्णता पाता है। ... अन्यत्र वे लिखती हैं कि "छायावाद प्रकृति के बीच जीवन का उद्-गीथ है।"
✍डॉ. राम कुमार वर्मा के अनुसार -
1."आत्मा और परमात्मा का गुप्त वाग्विलास रहस्यवाद है और वही छायावाद है।"
2."छायावाद या रहस्यवाद जीवात्मा की उस अंतर्निहित प्रवृत्ति का प्रकाशन है जिसमें वह दिव्य और अलौकिक सत्ता से अपना शांत और निश्चल संबंध जोड़ना चाहती है और यह संबंध इतना बढ़ जाता है कि दोनों में कुछ अंतर ही नहीं रह जाता है।"
3."परमात्मा की छाया आत्मा पर पड़ने लगती है और आत्मा की छाया परमात्मा पर। यही छायावाद है।"
✍आचार्य नंददुलारे वाजपेयी के अनुसार -"मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म किंतु व्यक्त सौंदर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार से छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है।"
✍शांतिप्रिय द्विवेदी ने छायावाद और रहस्यवाद में गहरा संबंध स्थापित करते हुए कहा है-"जिस प्रकार मैटर ऑफ़ फैक्ट(इतिवृत्तात्मक) के आगे की चीज छायावाद है, उसी प्रकार छायावाद के आगे की चीज रहस्यवाद है।"
✍गंगाप्रसाद पांडेय ने कहा -"छायावाद नाम से ही उसकी छायात्मकता स्पष्ट है। विश्व की किसी वस्तु में एक अज्ञात सप्राण छाया की झांकी पाना अथवा उसका आरोप करना ही छायावाद है। ...जिस प्रकार छाया स्थूल वस्तुवाद के आगे की चीज है, उसी प्रकार रहस्यवाद छायावाद के आगे की चीज है।"
✍छायावाद के स्तम्भ जयशंकर प्रसाद ने छायावाद को अपने ढ़ग से परिभाषित करते हुए कहा है - "कविता के क्षेत्र में पौराणिक युग की किसी घटना अथवा देश-विदेश की सुंदरी के बाह्य वर्णन से भिन्न जब वेदना के आधार पर स्वानुभूतिमयी अभिव्यक्ति होने लगी तब हिंदी में उसे छायावाद के नाम से अभिहित किया गया।"
✍डॉ. नगेन्द्र छायावाद को "स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह मानते हैं"।
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प्रभा पत्रिका के संपादक नहीं थे-
Anonymous Quiz
28%
माखनलाल चतुर्वेदी
22%
कालू राम गंगरोड
22%
बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
28%
उपर्युक्त सभी
रिविजन सीरीज डेली : 01
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💐"उद्दात्तता" काव्य का मूल स्रोत्र है - लोंजाइनस
💐त्रासदी का लक्ष्य है - भावों का विरेचन एवम यथार्थ का ज्ञान
💐"कला आशयजन्य नहीं है" - अरस्तू
💐चौपाई में 16 मात्राएं, दोहा और सोरठा में 24 मात्राएं, उल्लाला में 28 मात्राएं एवम हरिगीतिका में भी 28 मात्राएं होती हैं।
💐'दण्डक' किसे कहते हैं - वर्ण वृत्त में 26 वर्ण से अधिक वाले दण्डक कहलाते हैं।
💐"स्वछंद छंद में 'आर्ट ऑफ म्यूजिक' नहीं मिल सकता, वहां 'आर्ट ऑफ रीडिंग' है, वह स्वर प्रधान नहीं व्यंजन प्रधान है" - निराला
💐मुक्त छंद की कल्पना हिंदी में विधिवत किस युग में प्रारम्भ हुई - छायावाद
💐'लीव्स ऑफ द ग्रास' पुस्तक किसकी है - वाल्ट व्हिटमैन
💐छंद में लय क्या है - लय एक संयत व्यवस्था है जो स्वर के आरोह-अवरोह से उत्पन्न होती है।
💐छंदशास्त्र को अन्य किस नाम से जानते हैं - पिंगलशास्त्र
💐दोषों के लक्षणों का विवेचन सर्वप्रथम किसने किया - वामन
💐"मुख्यार्थ का जिससे अपकर्ष हो वह दोष है" - मम्मट
💐"गुण काव्य की संपत्ति अर्थात सौंदर्य विधायक तत्व और दोष उसकी विपत्त्ति अर्थात सौंदर्य विघातक तत्व है" - दण्डी
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प्रेषक : Hightech Hindi Youtube Channel
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💐"उद्दात्तता" काव्य का मूल स्रोत्र है - लोंजाइनस
💐त्रासदी का लक्ष्य है - भावों का विरेचन एवम यथार्थ का ज्ञान
💐"कला आशयजन्य नहीं है" - अरस्तू
💐चौपाई में 16 मात्राएं, दोहा और सोरठा में 24 मात्राएं, उल्लाला में 28 मात्राएं एवम हरिगीतिका में भी 28 मात्राएं होती हैं।
💐'दण्डक' किसे कहते हैं - वर्ण वृत्त में 26 वर्ण से अधिक वाले दण्डक कहलाते हैं।
💐"स्वछंद छंद में 'आर्ट ऑफ म्यूजिक' नहीं मिल सकता, वहां 'आर्ट ऑफ रीडिंग' है, वह स्वर प्रधान नहीं व्यंजन प्रधान है" - निराला
💐मुक्त छंद की कल्पना हिंदी में विधिवत किस युग में प्रारम्भ हुई - छायावाद
💐'लीव्स ऑफ द ग्रास' पुस्तक किसकी है - वाल्ट व्हिटमैन
💐छंद में लय क्या है - लय एक संयत व्यवस्था है जो स्वर के आरोह-अवरोह से उत्पन्न होती है।
💐छंदशास्त्र को अन्य किस नाम से जानते हैं - पिंगलशास्त्र
💐दोषों के लक्षणों का विवेचन सर्वप्रथम किसने किया - वामन
💐"मुख्यार्थ का जिससे अपकर्ष हो वह दोष है" - मम्मट
💐"गुण काव्य की संपत्ति अर्थात सौंदर्य विधायक तत्व और दोष उसकी विपत्त्ति अर्थात सौंदर्य विघातक तत्व है" - दण्डी
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“यदि द्विवेदी जी न उठ खड़े होते तो जैसी अव्यवस्थित व्याकरण विरूद्ध और ऊटपटांग भाषा चारो ओर दिखाई पड़ती थी, उसकी परंपरा जल्दी न रूकती।" कथन किसके सम्बन्ध में कहा गया है-
Anonymous Poll
42%
रामचन्द्र शुक्ल
35%
महावीर प्रसाद द्विवेदी
22%
हजारी प्रसाद द्विवेदी
10%
नन्द दुलारे वाजपेयी
दौलतपुर किसका जन्मस्थान है-
Anonymous Poll
24%
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
17%
निराला
44%
कुंवर नारायण
22%
इनमें से कोई नहीं
‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन’. किसका निबन्ध है-
Anonymous Poll
12%
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
29%
हजारी प्रसाद द्विवेदी
40%
नन्द दुलारे वाजपेयी
34%
महावीर प्रसाद द्विवेदी
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पर नया वीडियो आ गया। अभी देखें।
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'भारत एक बाजार है' किसकी कृति है-
Anonymous Quiz
16%
अरविंद अडिगा
30%
कुँवर नारायण
44%
नीलेश रघुवंशी
10%
विष्णु नागर