दिल के दरवाज़े खोल के तो देखो,
कोमल से इन होठों से कुछ बोल के तो देखो।
कितना सुकून है इस एहसास में,
बस तड़प रहा हूं, तेरे प्यार की प्यास से।
एक बार मुझे अपना बना के तो देखो,
बस एक बार मुझे आजमा के तो देखो।
हो जाएँगी दूरियाँ सब कम,
एक बार तुम पास आ के तो देखो।
तेरी बाहों में मिल जाएगी जन्नत मुझे,
एक बार सीने से लगा के तो देखो।
खिल उठेगा ये अमित तेरा फूल सा,
एक बार तुम मुस्कुरा के तो देखो।
कोमल से इन होठों से कुछ बोल के तो देखो।
कितना सुकून है इस एहसास में,
बस तड़प रहा हूं, तेरे प्यार की प्यास से।
एक बार मुझे अपना बना के तो देखो,
बस एक बार मुझे आजमा के तो देखो।
हो जाएँगी दूरियाँ सब कम,
एक बार तुम पास आ के तो देखो।
तेरी बाहों में मिल जाएगी जन्नत मुझे,
एक बार सीने से लगा के तो देखो।
खिल उठेगा ये अमित तेरा फूल सा,
एक बार तुम मुस्कुरा के तो देखो।
दूर जाओ ना , तसव्वुर से हमको रोना है।
कसक उठी है , परेशान दिल को होना है।
उम्र गुज़री है मेरी इश्क़ के मयखाने में,
जाम-ए-उल्फ़त को इसी में हमें डुबोना है।
दरख़्त ज़िंदा है कांटा हुआ चमन इसका,
उम्मीद फिर भी है चमन-ए-बहार होना है।
हो चुकी शाम चाहतों का सहर है लेकिन,
वक्त ठहरो ज़रा दीदार उनसे होना है।
कसक उठी है , परेशान दिल को होना है।
उम्र गुज़री है मेरी इश्क़ के मयखाने में,
जाम-ए-उल्फ़त को इसी में हमें डुबोना है।
दरख़्त ज़िंदा है कांटा हुआ चमन इसका,
उम्मीद फिर भी है चमन-ए-बहार होना है।
हो चुकी शाम चाहतों का सहर है लेकिन,
वक्त ठहरो ज़रा दीदार उनसे होना है।
❤1👏1
कभी बे सबब भी चले आओ
हर मुलाकात का कोई सबब हो
ये ज़रूरी तो नहीं
यूं भी दिया जा सकता है ख़त_ए_मोहब्बत
पैग़ाम लिखने के लिए दूर जाना
ज़रूरी तो नहीं
तुम हाथ थाम लो तो मिट जाए दिल की तीरगी
अंधेरा मिटाने को आफ़ताब ओ क़मर
ज़रूरी तो नहीं
🌹🌹🌹🌹
तीरगी _ अंधेरा
आफ़ताब ओ क़मर_ सूरज और चांद
हर मुलाकात का कोई सबब हो
ये ज़रूरी तो नहीं
यूं भी दिया जा सकता है ख़त_ए_मोहब्बत
पैग़ाम लिखने के लिए दूर जाना
ज़रूरी तो नहीं
तुम हाथ थाम लो तो मिट जाए दिल की तीरगी
अंधेरा मिटाने को आफ़ताब ओ क़मर
ज़रूरी तो नहीं
🌹🌹🌹🌹
तीरगी _ अंधेरा
आफ़ताब ओ क़मर_ सूरज और चांद
👍1
दिल में कोई और है,आरज़ू किसी से
अब मैं करता नहीं, गुफ्तगू किसी से
हां दोनों की तलब थी,दोनों मिले मुझे
सुकून किसी से मिला,खुशबू किसी से
तुझे वश में करना, मुमकिन कहां है
मैं सीख कर आऊंगा, जादू किसी से
उसकी मर्जी, वो जिसे बनाए अपना
किसी का दिल,मैं क्यों मांगू किसी से
अब महफिल, यूं ही नहीं है साथ मेरे
पहले फ़कीर, मैं बिछड़ा हूं किसी से
अब मैं करता नहीं, गुफ्तगू किसी से
हां दोनों की तलब थी,दोनों मिले मुझे
सुकून किसी से मिला,खुशबू किसी से
तुझे वश में करना, मुमकिन कहां है
मैं सीख कर आऊंगा, जादू किसी से
उसकी मर्जी, वो जिसे बनाए अपना
किसी का दिल,मैं क्यों मांगू किसी से
अब महफिल, यूं ही नहीं है साथ मेरे
पहले फ़कीर, मैं बिछड़ा हूं किसी से
मेरे आंसू आंखों से, पोछती रहती है
दिल लगाती नहीं है,सोचती रहती है
अज़ीब है,उस बेदर्द की मोहब्बत भी
गले लग कर ज़ख्म, नोचती रहती है
ख्वाबों में आए न आए,उसकी मर्ज़ी
ज़ेहन में एक तसवीर घूमती रहती है
मैंने चिराग़ नहीं जलाया है,बरसों से
मेरी परछाई मुझको, ढूंढती रहती है
खुशी मिलती है देखकर, दर्द में मुझे
दूर होकर भी ख्याल,पूछती रहती है
दिल को पत्थर बताकर एक लड़की
मंदिर मस्ज़िद के पत्थर,चूमती रहती है
मैं कैसे भूल जाऊं,उसकी मोहब्बत
पहाड़ों में आवाज़, गूंजती रहती है
दिल लगाती नहीं है,सोचती रहती है
अज़ीब है,उस बेदर्द की मोहब्बत भी
गले लग कर ज़ख्म, नोचती रहती है
ख्वाबों में आए न आए,उसकी मर्ज़ी
ज़ेहन में एक तसवीर घूमती रहती है
मैंने चिराग़ नहीं जलाया है,बरसों से
मेरी परछाई मुझको, ढूंढती रहती है
खुशी मिलती है देखकर, दर्द में मुझे
दूर होकर भी ख्याल,पूछती रहती है
दिल को पत्थर बताकर एक लड़की
मंदिर मस्ज़िद के पत्थर,चूमती रहती है
मैं कैसे भूल जाऊं,उसकी मोहब्बत
पहाड़ों में आवाज़, गूंजती रहती है
❤2👍2
तेरे नाम से ही दिन की शुरुआत है,
तेरी यादों से ही मेरी रात है।
दिल में बसी है तस्वीर तेरी,
तू ही मेरी ज़िन्दगी की हर बात है।
तेरी यादों से ही मेरी रात है।
दिल में बसी है तस्वीर तेरी,
तू ही मेरी ज़िन्दगी की हर बात है।
👍3
तेरी आँखों में खोया, मैं एक जहां पाया,
तेरे होठों की मुस्कान से, दिल का गुलिस्तां खिलाया।
ज़ुल्फ़ों की छाँव में, चाँद सा चेहरा तेरा,
तेरे बिना ये ज़िंदगी, एक अधूरा सवेरा।
दिल की धड़कन में, बस तेरा ही नाम समाया,
कह दूँ तुझसे, इज़हार-ए-मोहब्बत आज मैं?
मेरी दुनिया, मेरी जान, मेरे अरमान हो तुम,
इक तुम ही हो, जिसके लिए धड़कता है ये दिल,
कबूल करोगी मेरी मोहब्बत, बन जाओगी मेरी हमदम?
तेरे होठों की मुस्कान से, दिल का गुलिस्तां खिलाया।
ज़ुल्फ़ों की छाँव में, चाँद सा चेहरा तेरा,
तेरे बिना ये ज़िंदगी, एक अधूरा सवेरा।
दिल की धड़कन में, बस तेरा ही नाम समाया,
कह दूँ तुझसे, इज़हार-ए-मोहब्बत आज मैं?
मेरी दुनिया, मेरी जान, मेरे अरमान हो तुम,
इक तुम ही हो, जिसके लिए धड़कता है ये दिल,
कबूल करोगी मेरी मोहब्बत, बन जाओगी मेरी हमदम?
🔥2
आज कल कुछ
खोई सी हैं हवाएं
बदले हैं नज़ारे और
बदली हुईं अदाएं
न वो सुकून है हवा में
न दिलकश नजारा है
तुझे देखकर जीते थे
कहां गईं वो फिजाएं
तेरे आने से दिल मेरा
जोरों से धड़कता था
कहां गईं वो मेरे दिल की
बिखरी हुई सी आहें
तुझे पाने की चाहत में
अमित सब कुछ भुला बैठा
बरसों से मैं बैठा हूं
फैलाकर अपनी बांहे
आज कल कुछ
खोई सी हैं हवाएं
बदले हैं नज़ारे और
बदली हुई अदाएं
खोई सी हैं हवाएं
बदले हैं नज़ारे और
बदली हुईं अदाएं
न वो सुकून है हवा में
न दिलकश नजारा है
तुझे देखकर जीते थे
कहां गईं वो फिजाएं
तेरे आने से दिल मेरा
जोरों से धड़कता था
कहां गईं वो मेरे दिल की
बिखरी हुई सी आहें
तुझे पाने की चाहत में
अमित सब कुछ भुला बैठा
बरसों से मैं बैठा हूं
फैलाकर अपनी बांहे
आज कल कुछ
खोई सी हैं हवाएं
बदले हैं नज़ारे और
बदली हुई अदाएं
👍2❤1
सुना है सूखे फूल भी यादों की सौगात ले कर आते हैं,
जिन यादों को कई ज़माने से भुला बैठा,
उन लम्हों में भी सूखे बिखरे फूल मुस्कुराते हैं,
न जाने कब से बंद पड़े किताबों में,
ये फूल तेरी मेरी कुछ कहानियां कह जाते हैं,
सुर्ख सा रंग भी कुछ कुछ उड़ सा जाता है,
पंखुड़ियां भी नज़ाकत कम दिखाती हैं,
पर तेरे फूल की मौजूदगी मेरे जहां को रंग सी जाती है,
उस पन्ने का हर लफ्ज़ बेजुबान सा लगता है,
जिस पन्ने में मुझाया फूल अपनी दास्तां सुनाता है,
साल दर साल बैठे तेरी यादों के सहारे,
पर तेरी महक आज भी उस सूखे फूल से चली आती है,
वो ज़माना... वो दौर फिर उमड़ आता है जब,
किताब में रखा तेरा कुछ जबां सा फूल मेरे अश्क में समा जाता है।
जिन यादों को कई ज़माने से भुला बैठा,
उन लम्हों में भी सूखे बिखरे फूल मुस्कुराते हैं,
न जाने कब से बंद पड़े किताबों में,
ये फूल तेरी मेरी कुछ कहानियां कह जाते हैं,
सुर्ख सा रंग भी कुछ कुछ उड़ सा जाता है,
पंखुड़ियां भी नज़ाकत कम दिखाती हैं,
पर तेरे फूल की मौजूदगी मेरे जहां को रंग सी जाती है,
उस पन्ने का हर लफ्ज़ बेजुबान सा लगता है,
जिस पन्ने में मुझाया फूल अपनी दास्तां सुनाता है,
साल दर साल बैठे तेरी यादों के सहारे,
पर तेरी महक आज भी उस सूखे फूल से चली आती है,
वो ज़माना... वो दौर फिर उमड़ आता है जब,
किताब में रखा तेरा कुछ जबां सा फूल मेरे अश्क में समा जाता है।
👍2❤1
उसकी यादों में डूब जायेंगे।
गर दिल ना लगे तेरे पास आयेंगे।।
ना आना कि यहाँ कौन रहता है तेरा।
जमाना पूछेगा हमसे तो क्या बतायेंगे।।
ज़माने की परवाह किसे पड़ी है।
मुश्किलें हमारी वो थोड़े ना सुलझायेंगे।।
अब क्या सुलझाना जो खुद उलझा हो इसमें।
जनाब ! रूख से परदा जरा हटायेंगे।।
वो पर्दानशी ! जो पर्दे से झाकती हो सबको।
ना उठा परदा कि ये जख़्म सारे दिख जायेंगे।।
जख़्म दिलका है बातों-बातों में दिख ही जायेंगे।
ना दिखाया तो एक रोज़ ये नासूर बन जायेंगे।।
ना दवा देता कोई सब जख़्म कुरेदते हैं रहते।
दर्द एक हद से आगे बढ़ जाये तो मर जायेंगे।।
है कौन जिंदा यहाँ आ छूकर देख मुझे।
बेजान इस जिस्म में ...जान भी ना पायेंगे।।
जान मेरी भी जा चुकी है दूर बहुत दूर मुझसे।
जरा सा पूछो ना तुम। तुम्हारे बुलाने से वो आयेंगे।।
लिख भेजा है उन्हें हमने एक पैगाम तेरे नाम का।
गर वो आयें तो फिर हम मर जायेंगे।।
रूहे सुकून उन्हें ना मिल पायेंगे।
जो जा चुकें हो पहले 'बता कहाँ से आयेंगे।।
हाथो से लगा 'देख जी भरके निगाहों से मुझे।
तड़प ऐसी किसी और में कहाँ पायेंगे।।
गर दिल ना लगे तेरे पास आयेंगे।।
ना आना कि यहाँ कौन रहता है तेरा।
जमाना पूछेगा हमसे तो क्या बतायेंगे।।
ज़माने की परवाह किसे पड़ी है।
मुश्किलें हमारी वो थोड़े ना सुलझायेंगे।।
अब क्या सुलझाना जो खुद उलझा हो इसमें।
जनाब ! रूख से परदा जरा हटायेंगे।।
वो पर्दानशी ! जो पर्दे से झाकती हो सबको।
ना उठा परदा कि ये जख़्म सारे दिख जायेंगे।।
जख़्म दिलका है बातों-बातों में दिख ही जायेंगे।
ना दिखाया तो एक रोज़ ये नासूर बन जायेंगे।।
ना दवा देता कोई सब जख़्म कुरेदते हैं रहते।
दर्द एक हद से आगे बढ़ जाये तो मर जायेंगे।।
है कौन जिंदा यहाँ आ छूकर देख मुझे।
बेजान इस जिस्म में ...जान भी ना पायेंगे।।
जान मेरी भी जा चुकी है दूर बहुत दूर मुझसे।
जरा सा पूछो ना तुम। तुम्हारे बुलाने से वो आयेंगे।।
लिख भेजा है उन्हें हमने एक पैगाम तेरे नाम का।
गर वो आयें तो फिर हम मर जायेंगे।।
रूहे सुकून उन्हें ना मिल पायेंगे।
जो जा चुकें हो पहले 'बता कहाँ से आयेंगे।।
हाथो से लगा 'देख जी भरके निगाहों से मुझे।
तड़प ऐसी किसी और में कहाँ पायेंगे।।
👍2
किसी दिन तो आयेंगे ये हाँथ काबू में…
किसी दिन तो मेरे हाँथ से ये बालियाँ निकलेंगी।
अब भी हैं तेरे होठों पे निशान मेरे होठों के।
इससे बेहतर इश्क़ की निशानी क्या होगी?
सुना है नया आशिक़ उसका शायर नहीं है…
अब इससे ज़्यादा हुस्न की बदनामी क्या होगी!
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किसी दिन तो मेरे हाँथ से ये बालियाँ निकलेंगी।
अब भी हैं तेरे होठों पे निशान मेरे होठों के।
इससे बेहतर इश्क़ की निशानी क्या होगी?
सुना है नया आशिक़ उसका शायर नहीं है…
अब इससे ज़्यादा हुस्न की बदनामी क्या होगी!
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👍1
जिन पलों में टूटकर चाहा था उन लम्हों का क्या कहना
खुद को भी टूटने से बचा न सके उन ख़्वाबों का क्या कहना ll
बरसात तेरे इश्क़ की बारहों मास बरसती रही मुझ पर
ऐसे आलम को निगाहों में कैद, उन यादों का क्या कहना ll
आरज़ूओं को मैंने कितना सुलगते हुए देखा है अपनी
आ जाओ काश कभी सामने उन सौगातों का क्या कहना ll
एक मुलाक़ात को जो तरस जाएँ हम आज भी
बहुत हुए दूर अब हम,उन बहानों का क्या कहना ll
कहाँ है फुरसत अब जो मेरे अश्कों को तुम पोंछ सको
जहाँ दूर दूर तक जले दिल में उन चिरागों का क्या कहना ll
रोशन होती थी हर रात अँधेरी मेरी तेरे ही आगोश में
कहाँ गए वो मौसम सुहाने,उन चाहत भरे आसमानों का क्या कहना ll
बेखुदी तेरे प्यार की मोहब्बत भरे रंगीन मिज़ाज़ तेरे
कैसे भूल जाऊँ मेरे अरमान ऐसी खिज़ाओं का क्या कहनाll
बेहद खूबसूरत रहा तेरे मेरे जज्बातों का सफ़र ए कारवाँ
अब तो होश भी नहीं आता अब ,ऐसे तूफानों का क्या कहना ll
रहते हैं हम गुम कुछ इस क़दर तेरी यादों की महफ़िल में
न बज़्म है कोई, न ही कोई गज़ल अब लिखते हैं ऐसी तन्हाइयों का क्या कहना ll
खुद को भी टूटने से बचा न सके उन ख़्वाबों का क्या कहना ll
बरसात तेरे इश्क़ की बारहों मास बरसती रही मुझ पर
ऐसे आलम को निगाहों में कैद, उन यादों का क्या कहना ll
आरज़ूओं को मैंने कितना सुलगते हुए देखा है अपनी
आ जाओ काश कभी सामने उन सौगातों का क्या कहना ll
एक मुलाक़ात को जो तरस जाएँ हम आज भी
बहुत हुए दूर अब हम,उन बहानों का क्या कहना ll
कहाँ है फुरसत अब जो मेरे अश्कों को तुम पोंछ सको
जहाँ दूर दूर तक जले दिल में उन चिरागों का क्या कहना ll
रोशन होती थी हर रात अँधेरी मेरी तेरे ही आगोश में
कहाँ गए वो मौसम सुहाने,उन चाहत भरे आसमानों का क्या कहना ll
बेखुदी तेरे प्यार की मोहब्बत भरे रंगीन मिज़ाज़ तेरे
कैसे भूल जाऊँ मेरे अरमान ऐसी खिज़ाओं का क्या कहनाll
बेहद खूबसूरत रहा तेरे मेरे जज्बातों का सफ़र ए कारवाँ
अब तो होश भी नहीं आता अब ,ऐसे तूफानों का क्या कहना ll
रहते हैं हम गुम कुछ इस क़दर तेरी यादों की महफ़िल में
न बज़्म है कोई, न ही कोई गज़ल अब लिखते हैं ऐसी तन्हाइयों का क्या कहना ll
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Hindi shayari. हिंदी शायरी💝
प्रेम तब तक प्रेम है, जब तक समर्पण की भावना रहे। जब समर्पण की भावना समाप्त हो जाए तो प्रेम एक समझौता बनकर रह जाता है।
पढ़ें प्रेम और रोमांस से भरी शायरियां।
पढ़ें प्रेम और रोमांस से भरी शायरियां।
नमस्ते मित्रों बहुत समय के बाद उपस्थित हैं अब से निरंतर चैनल पर शायरियां भेजते रहेंगे
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चलो ख्वाबों खयालों में,अपने बीते ज़माने में
कि जब दिल से मिले दिल दोनों के ,आजमाने में।
मेरा जीवन था एक सहरा मगर तेरी अदाओं ने
बना डाला बहारों से सजा घर आशियाने में।
कभी रूठा जो तुमसे मैं तो तुमने झट' मना लिया
मगर मेरा तो पूरा दिन गया तुमको मनाने में।
अदायें इस क़दर मगरूर होती हैं ये तब जाना
कि जब मैं हार जाता था सनम तुमको हँसाने में
वो भी क्या दिन थे यारा भूलके भी भूलते नहीं
कि जब तुम और मैं थे सिर्फ "हम" अपने फ़साने में।
@hindi_shayari_dil_se
कि जब दिल से मिले दिल दोनों के ,आजमाने में।
मेरा जीवन था एक सहरा मगर तेरी अदाओं ने
बना डाला बहारों से सजा घर आशियाने में।
कभी रूठा जो तुमसे मैं तो तुमने झट' मना लिया
मगर मेरा तो पूरा दिन गया तुमको मनाने में।
अदायें इस क़दर मगरूर होती हैं ये तब जाना
कि जब मैं हार जाता था सनम तुमको हँसाने में
वो भी क्या दिन थे यारा भूलके भी भूलते नहीं
कि जब तुम और मैं थे सिर्फ "हम" अपने फ़साने में।
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Hindi shayari. हिंदी शायरी💝
प्रेम तब तक प्रेम है, जब तक समर्पण की भावना रहे। जब समर्पण की भावना समाप्त हो जाए तो प्रेम एक समझौता बनकर रह जाता है।
पढ़ें प्रेम और रोमांस से भरी शायरियां।
पढ़ें प्रेम और रोमांस से भरी शायरियां।
इतनी याद मत आ,
बस कर अब मान भी जा।
रातों की तनहाइयाँ,
जीने नहीं देती,
रहम कर मुझपर,
मुझे तो मत सता।
तेरी चूड़ी की खनक,
कैसे भूल सकूंगा?
तेरी पायल की छनक,
कैसे भूल सकूंगा?
तेरे कानों की बाली,
याद नहीं आएगी?
तेरे होठों की लाली,
क्या नहीं तड़पाएगी?
बनकर हवा का झोंका,
तू चली आ,
बनकर खुशबु तू,
मेरी सांसें महका।
तेरी झील सी आंखें,
नींद चुरा लेगी,
तेरे माथे की बिंदिया भी,
कहाँ सोने देगी?
तेरे बालों की लटें,
जब गाल पर आएगी,
तब ये कमबख्त,
मुझे बहुत जलाएगी।
इन आँखों के काजल से,
घायल कर जाएगी,
फिर से मुझे लगता है,
तू दीवाना बनाएगी।
देख मेरी व्याकुलता,
अब तो समझ जा,
आ जा मेरी बांहों में,
मुझे तो मत तड़पा।
प्यासा है अमित बस,
सिर्फ तेरे प्यार का,
बनकर बदली तू,
इस दिल पर बरस जा.
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बस कर अब मान भी जा।
रातों की तनहाइयाँ,
जीने नहीं देती,
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मुझे तो मत सता।
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कैसे भूल सकूंगा?
तेरी पायल की छनक,
कैसे भूल सकूंगा?
तेरे कानों की बाली,
याद नहीं आएगी?
तेरे होठों की लाली,
क्या नहीं तड़पाएगी?
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मेरी सांसें महका।
तेरी झील सी आंखें,
नींद चुरा लेगी,
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कहाँ सोने देगी?
तेरे बालों की लटें,
जब गाल पर आएगी,
तब ये कमबख्त,
मुझे बहुत जलाएगी।
इन आँखों के काजल से,
घायल कर जाएगी,
फिर से मुझे लगता है,
तू दीवाना बनाएगी।
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