साँसे है,धड़कने भी है ,
बस दिल तुमको दे बैठें है...!!
अजीब से दोराहे पर है
जिंदा तो है,पर तुम पर मर बैठें हैं...!! ❤️
@kataizaharila
बस दिल तुमको दे बैठें है...!!
अजीब से दोराहे पर है
जिंदा तो है,पर तुम पर मर बैठें हैं...!! ❤️
@kataizaharila
❤10
नाजुक होंठों को दांतो से चबाया जा रहा है,
बहुत देर से मेरा सब्र आजमाया जा रहा है,
बात तो सिर्फ एक गालों के चुम्बन की है,
मगर बात को बेवजह बढ़ाया जा रहा है...
@kataizaharila
बहुत देर से मेरा सब्र आजमाया जा रहा है,
बात तो सिर्फ एक गालों के चुम्बन की है,
मगर बात को बेवजह बढ़ाया जा रहा है...
@kataizaharila
😁15❤4
❤17
मर्यादा की पावन परिधि में बंधा मेरा यह प्रेम पूर्ण समर्पण की घोषणा है,
कि तुम मेरे अंतर्मन का वह पावन सत्य हो, जिसे शब्दों की आवश्यकता नहीं।❤️
@kataizaharila
कि तुम मेरे अंतर्मन का वह पावन सत्य हो, जिसे शब्दों की आवश्यकता नहीं।❤️
@kataizaharila
❤19👍3
कि हां है मुझे इश्क तुमसे जिस्मानी
पर बंद कमरे सा नहीं
हां चाहता हूं मैं तुम्हें छूना पर तुम्हारे माथे पर बिंदी लगाते वक्त तुम्हारे बालों को सवारते वक्त तुम्हारे कानों में झुमके पहनाते वक्त
तुम्हारे हाथों में चूड़ियां पहनाते वक्त
तुम्हारे पैरों में पायल पहनाते वक्त हां..
हां मैं तुम्हें छूना चाहता हूं पर इश्क के सफर में जब तुम छत पर बैठ जाओ तुम्हें गोद में उठा के ले जाऊं उस वक्त
और छूना मैं बस ऐसा चाहता हूं कि तुम पे कोई दाग ना हो और मेरे इश्क का रंग सबको हर जगह दिखे...
@kataizaharila
पर बंद कमरे सा नहीं
हां चाहता हूं मैं तुम्हें छूना पर तुम्हारे माथे पर बिंदी लगाते वक्त तुम्हारे बालों को सवारते वक्त तुम्हारे कानों में झुमके पहनाते वक्त
तुम्हारे हाथों में चूड़ियां पहनाते वक्त
तुम्हारे पैरों में पायल पहनाते वक्त हां..
हां मैं तुम्हें छूना चाहता हूं पर इश्क के सफर में जब तुम छत पर बैठ जाओ तुम्हें गोद में उठा के ले जाऊं उस वक्त
और छूना मैं बस ऐसा चाहता हूं कि तुम पे कोई दाग ना हो और मेरे इश्क का रंग सबको हर जगह दिखे...
@kataizaharila
❤15
तुम्हारी हँसी का वह निश्छल स्वर मेरे अंतर्मन में इस प्रकार गूँजता है,
— जैसे किसी देवालय में भोर की पहली पावन घंटी बजी हो।
@kataizaharila
— जैसे किसी देवालय में भोर की पहली पावन घंटी बजी हो।
@kataizaharila
❤7
❤8😁6
जब मैंने तुम्हें खोया…
हम दोनों ने ही खोया।
मैंने खोया… क्योंकि तुम ही वो लड़की थीं
जिससे मैंने सबसे ज़्यादा, सबसे सच्चा प्यार किया।
और तुमने खोया… क्योंकि मैं ही वो लड़का था
जिसने तुम्हें सबसे ज़्यादा दिल से चाहा।
लेकिन जितना मैंने खोया…
उससे ज़्यादा तुमने खोया।
क्योंकि मैं शायद किसी दिन
किसी और को उसी तरह प्यार कर पाऊँ…
जैसा मैंने तुम्हें किया था।
पर तुम्हें कोई नहीं कर पाएगा
वैसा प्यार…
जैसा मैंने तुम्हें किया।
जितना मैंने खोया…
उससे ज़्यादा तुमने खोया।
@kataizaharila
हम दोनों ने ही खोया।
मैंने खोया… क्योंकि तुम ही वो लड़की थीं
जिससे मैंने सबसे ज़्यादा, सबसे सच्चा प्यार किया।
और तुमने खोया… क्योंकि मैं ही वो लड़का था
जिसने तुम्हें सबसे ज़्यादा दिल से चाहा।
लेकिन जितना मैंने खोया…
उससे ज़्यादा तुमने खोया।
क्योंकि मैं शायद किसी दिन
किसी और को उसी तरह प्यार कर पाऊँ…
जैसा मैंने तुम्हें किया था।
पर तुम्हें कोई नहीं कर पाएगा
वैसा प्यार…
जैसा मैंने तुम्हें किया।
जितना मैंने खोया…
उससे ज़्यादा तुमने खोया।
@kataizaharila
❤13🔥2💯1
कोई अनजाना सा क्यों अपना लगता है,
ना हाथ छुआ फिर भी वो अपना लगता है।
ना नाम पता है, ना चेहरा जाना लगता है,
फिर भी हर लफ्ज़ उसका अपना लगता है।
अजनबी होकर भी वो पहचाना लगता है,
जैसे सदियों से रिश्ता पुराना लगता है।
उसकी हँसी से दिल को सुकून आता है,
उसकी बातों से मौसम सुहाना लगता है।
ना उसने बाँधा है, ना मैंने बाँधा लगता है,
फिर भी दिल उसी से बंधा-बँधा लगता है।
रूहें पहले मिलती हैं, ये अब जाना लगता है,
इसीलिए वो अनजाना भी अपना लगता है।✨♥️
@kataizaharila
ना हाथ छुआ फिर भी वो अपना लगता है।
ना नाम पता है, ना चेहरा जाना लगता है,
फिर भी हर लफ्ज़ उसका अपना लगता है।
अजनबी होकर भी वो पहचाना लगता है,
जैसे सदियों से रिश्ता पुराना लगता है।
उसकी हँसी से दिल को सुकून आता है,
उसकी बातों से मौसम सुहाना लगता है।
ना उसने बाँधा है, ना मैंने बाँधा लगता है,
फिर भी दिल उसी से बंधा-बँधा लगता है।
रूहें पहले मिलती हैं, ये अब जाना लगता है,
इसीलिए वो अनजाना भी अपना लगता है।✨♥️
@kataizaharila
❤7
फासलों का फैसला आसान नहीं था
कौन कहता है, दिल परेशान नहीं था
आँसू छिपें थे खामोशी के पीछे
कौन कहता है दर्द का निशान नहीं था
ख्वाब देखा था उम्र भर साथ का
कौन कहता है, कोई अरमान नहीं था
🖤🖤
@kataizaharila
कौन कहता है, दिल परेशान नहीं था
आँसू छिपें थे खामोशी के पीछे
कौन कहता है दर्द का निशान नहीं था
ख्वाब देखा था उम्र भर साथ का
कौन कहता है, कोई अरमान नहीं था
🖤🖤
@kataizaharila
❤15
क्यों होंठ तेरे खामोश हैं,
आओ इन्हें चूम कर अल्फ़ाज़ दे दूं,
तेरे तन्हा लम्हों को,
आओ एक मुलाकात दे दूँ
मैं खुद से हूं भले परेशान,
तुझे खुश रहने का अंदाज़ दे दूं
तुम कल ना जाने कहाँ हो,
आओ तुम्हे मैं अपना आज दे दूं
@kataizaharila
आओ इन्हें चूम कर अल्फ़ाज़ दे दूं,
तेरे तन्हा लम्हों को,
आओ एक मुलाकात दे दूँ
मैं खुद से हूं भले परेशान,
तुझे खुश रहने का अंदाज़ दे दूं
तुम कल ना जाने कहाँ हो,
आओ तुम्हे मैं अपना आज दे दूं
@kataizaharila
❤13
कमरे में बे आवाज टहलती है तेरी यादें रात भर....
मेरी नींदें तेरे ख्वाबों की खुशबू से हैरान रहती है..!!
@kataizaharila
मेरी नींदें तेरे ख्वाबों की खुशबू से हैरान रहती है..!!
@kataizaharila
❤6
❤10👏4
ज़रूरी तो नहीं जो पसंद हो वही हासिल भी हो,
कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी ज़िंदगी भर खास होते हैं।
कभी-कभी जिसे दिल से चाहो, वो मुकद्दर में नहीं होता,
और जो मुकद्दर में लिखा हो, उसे चाहना ज़रूरी नहीं होता।
@kataizaharila
कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी ज़िंदगी भर खास होते हैं।
कभी-कभी जिसे दिल से चाहो, वो मुकद्दर में नहीं होता,
और जो मुकद्दर में लिखा हो, उसे चाहना ज़रूरी नहीं होता।
@kataizaharila
❤18🔥3
फिर किसी को चाह कर दिल को दुखाना क्यों
एक तरफा वादों को बार-हा निभाना क्यों
बात जो बन सके तो बना लेना ही चाहिए
बात की गहराई में आख़िरश जाना क्यों
यार! ढूंढते हैं हँसने को बहाने ये लोग
दिल का ज़ख्म किसी को दिखाना क्यों ❤️
@kataizaharila
एक तरफा वादों को बार-हा निभाना क्यों
बात जो बन सके तो बना लेना ही चाहिए
बात की गहराई में आख़िरश जाना क्यों
यार! ढूंढते हैं हँसने को बहाने ये लोग
दिल का ज़ख्म किसी को दिखाना क्यों ❤️
@kataizaharila
❤6
😁9❤6
जब तेरी चूड़ियाँ खनकती हैं गरबे की ताल पर
लगता है जैसे इश्क़ उतर आया हो रात के हर ख़याल पर
@kataizaharila
लगता है जैसे इश्क़ उतर आया हो रात के हर ख़याल पर
@kataizaharila
❤6
पुनर्जन्म का पहला
स्पर्श-संकेत~~~💟💟
कहते हैं,
आत्माएँ जब जन्म बदलती हैं,
तो स्मृतियाँ पीछे छूट जाती हैं।
पर प्रेम...
वह कभी नहीं भूलता
पहले स्पर्श की दिशा।
शायद इसलिए
जब इस जन्म में
तुम पहली बार मेरे निकट आई,
हवा ने अचानक
रातरानी की ख़ुशबू ओढ़ ली,
और मेरी धड़कनों ने
ऐसे काँपना शुरू किया,
जैसे किसी सूफ़ी ने
बरसों बाद
अपने पीर की आहट सुन ली हो।
तुमने कुछ नहीं कहा।
बस
तुम्हारी उँगलियों की परछाईं
मेरी हथेली के पास से गुज़री,
और मेरी रूह में
एक बंद पड़ा दरवाज़ा
धीरे से खुल गया।
वह स्पर्श
त्वचा पर नहीं उतरा,
वह तो मेरी रूह के उस हिस्से तक पहुँचा,
जहाँ पिछले जन्म की
अनकही प्रार्थनाएँ
अब भी दीपक की लौ बनकर जल रही थीं।
मुझे लगा,
यह पहली मुलाक़ात नहीं,
यह तो सदियों पहले
अधूरी छूट गई
एक इबादत का
दूसरा सज्दा है।
तुम्हारी साँसों की नरम गरमाहट
जब मेरे क़रीब आई,
तो लगा
जैसे सावन की पहली फुहार
सूखी धरती को नहीं,
मेरे भीतर बरसों से प्रतीक्षा करती
किसी विरहिणी आत्मा को भिगो रही हो।
तुम्हारी मुस्कान—
वह कोई मुस्कान नहीं थी,
वह उस चाँद की चाँदनी थी
जो हर जन्म
मेरी अँधेरी रातों का रास्ता जानती रही।
मैंने तुम्हारी आँखों में देखा,
और वहाँ
अपने ही अधूरे जन्मों का प्रतिबिंब पाया।
ऐसा लगा,
मानो तुम्हारी पलकों की छाँव में
मेरी सारी भटकन विश्राम माँग रही हो।
उस क्षण
मैंने तुम्हें बाँहों में नहीं लिया,
मैंने तुम्हें
अपनी दुआओँ में समेट लिया।
क्योंकि कुछ प्रणय
स्पर्श से नहीं,
समर्पण से ही पूर्ण होते हैं।
और कुछ रतियाँ
देह में नहीं,
दो आत्माओं के बीच
बहती हुई ख़ामोशी में खिलती हैं।
उस दिन समझ आया—
पुनर्जन्म का पहला स्पर्श
हाथों से नहीं होता है,
बल्कि वह तब होता है,
जब दो रूहें
एक-दूसरे की उपस्थिति में
अपने अधूरे जन्मों की प्यास पहचान लेती हैं।
और तब
इश्क़,
सिर्फ़ प्रेम नहीं रहता—
वह ज़िक्र बन जाता है,
वह इबादत बन जाता है,
वह वह नूर बन जाता है
जिसे न मृत्यु बुझा पाती है,
न समय भुला पाता है।।
@kataizaharila
स्पर्श-संकेत~~~💟💟
कहते हैं,
आत्माएँ जब जन्म बदलती हैं,
तो स्मृतियाँ पीछे छूट जाती हैं।
पर प्रेम...
वह कभी नहीं भूलता
पहले स्पर्श की दिशा।
शायद इसलिए
जब इस जन्म में
तुम पहली बार मेरे निकट आई,
हवा ने अचानक
रातरानी की ख़ुशबू ओढ़ ली,
और मेरी धड़कनों ने
ऐसे काँपना शुरू किया,
जैसे किसी सूफ़ी ने
बरसों बाद
अपने पीर की आहट सुन ली हो।
तुमने कुछ नहीं कहा।
बस
तुम्हारी उँगलियों की परछाईं
मेरी हथेली के पास से गुज़री,
और मेरी रूह में
एक बंद पड़ा दरवाज़ा
धीरे से खुल गया।
वह स्पर्श
त्वचा पर नहीं उतरा,
वह तो मेरी रूह के उस हिस्से तक पहुँचा,
जहाँ पिछले जन्म की
अनकही प्रार्थनाएँ
अब भी दीपक की लौ बनकर जल रही थीं।
मुझे लगा,
यह पहली मुलाक़ात नहीं,
यह तो सदियों पहले
अधूरी छूट गई
एक इबादत का
दूसरा सज्दा है।
तुम्हारी साँसों की नरम गरमाहट
जब मेरे क़रीब आई,
तो लगा
जैसे सावन की पहली फुहार
सूखी धरती को नहीं,
मेरे भीतर बरसों से प्रतीक्षा करती
किसी विरहिणी आत्मा को भिगो रही हो।
तुम्हारी मुस्कान—
वह कोई मुस्कान नहीं थी,
वह उस चाँद की चाँदनी थी
जो हर जन्म
मेरी अँधेरी रातों का रास्ता जानती रही।
मैंने तुम्हारी आँखों में देखा,
और वहाँ
अपने ही अधूरे जन्मों का प्रतिबिंब पाया।
ऐसा लगा,
मानो तुम्हारी पलकों की छाँव में
मेरी सारी भटकन विश्राम माँग रही हो।
उस क्षण
मैंने तुम्हें बाँहों में नहीं लिया,
मैंने तुम्हें
अपनी दुआओँ में समेट लिया।
क्योंकि कुछ प्रणय
स्पर्श से नहीं,
समर्पण से ही पूर्ण होते हैं।
और कुछ रतियाँ
देह में नहीं,
दो आत्माओं के बीच
बहती हुई ख़ामोशी में खिलती हैं।
उस दिन समझ आया—
पुनर्जन्म का पहला स्पर्श
हाथों से नहीं होता है,
बल्कि वह तब होता है,
जब दो रूहें
एक-दूसरे की उपस्थिति में
अपने अधूरे जन्मों की प्यास पहचान लेती हैं।
और तब
इश्क़,
सिर्फ़ प्रेम नहीं रहता—
वह ज़िक्र बन जाता है,
वह इबादत बन जाता है,
वह वह नूर बन जाता है
जिसे न मृत्यु बुझा पाती है,
न समय भुला पाता है।।
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❤7❤🔥1😱1