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एक स्त्री का प्रेम प्रसाद की तरह होता है,
जो हर व्यक्ति के भाग्य में नहीं होता,
वो उसी को नसीब होता है,
जो उसके सामने झुकता है,
मैं ये नही कहूँगा ,, कि किसी स्त्री को पत्नी बनाना,
उसके प्रेम को प्राप्त कर लेना है..
क्योंकि स्त्री पति को सिर्फ उसका अधिकार देती है प्रेम नही .
प्रेम को पाने के लिए उतना ही समर्पण चाहिए
जितना हम भगवान को पाने के लिए करते है,
क्योंकि प्रेम को हम नही प्रेम हमको चुनता हैं..!
@kataizaharila
जो हर व्यक्ति के भाग्य में नहीं होता,
वो उसी को नसीब होता है,
जो उसके सामने झुकता है,
मैं ये नही कहूँगा ,, कि किसी स्त्री को पत्नी बनाना,
उसके प्रेम को प्राप्त कर लेना है..
क्योंकि स्त्री पति को सिर्फ उसका अधिकार देती है प्रेम नही .
प्रेम को पाने के लिए उतना ही समर्पण चाहिए
जितना हम भगवान को पाने के लिए करते है,
क्योंकि प्रेम को हम नही प्रेम हमको चुनता हैं..!
@kataizaharila
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बेनाम शायर💌✍️ pinned «हमने नहीं सोचा था इतना दूर तक का सोचोगे, एक कन्धा चाहिए था, चार लेकर आ गए तुम @kataitaharila»
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अगर कोई ज़ोर दे कर पूछेगा,🌻 हमारी मुहब्बत की कहानी...🌻
तो हम भी धीरे से कहेंगे, मुलाक़ात को तरस गए...❤
@kataizaharila
तो हम भी धीरे से कहेंगे, मुलाक़ात को तरस गए...❤
@kataizaharila
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कभी कभी🌻
मन में सवाल उठता है🌻
कोई इतना भी आवश्यक क्यों हो जाता है ..?🌻
वो न मिले🌻
तो लगता है जैसे🌻
कुछ भी तो नही मिला🌻
जैसे 🌻
उसके बिन सब अधूरा है🌻
यहां तक की चलती हुई सांसें भी
थमी थमी सी नजर आती हैं🌻
और ऐसे में🌻
वो कहीं से मिल जाए तो🌻
मन करता है थोड़ा सा और🌻
पा लूं उसे🌻
जो पाया है कहीं छुपा लूं उसे🌻
मृत पड़ती देह के लिए🌻
उससे बस एक मुलाकात ही🌻
संजीवनी बन जाती है 🌻
बताओ ना 🌻
आखिर क्यों कोई इतना आवश्यक हो जाता है ..?🌻
@kataizaharila
मन में सवाल उठता है🌻
कोई इतना भी आवश्यक क्यों हो जाता है ..?🌻
वो न मिले🌻
तो लगता है जैसे🌻
कुछ भी तो नही मिला🌻
जैसे 🌻
उसके बिन सब अधूरा है🌻
यहां तक की चलती हुई सांसें भी
थमी थमी सी नजर आती हैं🌻
और ऐसे में🌻
वो कहीं से मिल जाए तो🌻
मन करता है थोड़ा सा और🌻
पा लूं उसे🌻
जो पाया है कहीं छुपा लूं उसे🌻
मृत पड़ती देह के लिए🌻
उससे बस एक मुलाकात ही🌻
संजीवनी बन जाती है 🌻
बताओ ना 🌻
आखिर क्यों कोई इतना आवश्यक हो जाता है ..?🌻
@kataizaharila
❤🔥13👍5❤1
हम दोस्त थे
भावातिरेक में एक दिन
मैंने उसे चूम लिया,
हम प्रेमी हो गए
हमारे बीच चुम्बनों का विनिमय था,
एक दिन विदा लेते हुए उसने कहा
पर हम दोस्त तो रह सकते हैं न?
मैंने कहा
तुम्हें चूमने की इच्छा को मारकर
तुम्हारा हाल-चाल पूछने का
अभिनय मुझसे नहीं होगा,
अब हम अजनबी हैं..!!
💔
@kataizaharila
भावातिरेक में एक दिन
मैंने उसे चूम लिया,
हम प्रेमी हो गए
हमारे बीच चुम्बनों का विनिमय था,
एक दिन विदा लेते हुए उसने कहा
पर हम दोस्त तो रह सकते हैं न?
मैंने कहा
तुम्हें चूमने की इच्छा को मारकर
तुम्हारा हाल-चाल पूछने का
अभिनय मुझसे नहीं होगा,
अब हम अजनबी हैं..!!
💔
@kataizaharila
❤10💔7👍2
उसके न मिलने का मलाल तो रहेगा
खुद को लाख समझाऊँ मगर
ख्याल तो रहेगा
मै इस जहाँ मे एक शख्स का भी हकदार
नही था क्या
खुद से मेरा ता जिंदगी सवाल तो रहेगा।।
@kataizaharila
खुद को लाख समझाऊँ मगर
ख्याल तो रहेगा
मै इस जहाँ मे एक शख्स का भी हकदार
नही था क्या
खुद से मेरा ता जिंदगी सवाल तो रहेगा।।
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तुम अपनी मजबूरियों के क़िस्से ज़रूर लिखना वज़ाहतों से
जो मेरी आँखों में जल-बुझी हैं वो ख़्वाहिशें भी शुमार करना 🥺❤️
@kataizaharila
जो मेरी आँखों में जल-बुझी हैं वो ख़्वाहिशें भी शुमार करना 🥺❤️
@kataizaharila
❤5👍3🔥1
नज़्म लिखें या एहसास लिखें
सोचते हैं!
आज तुम्हारे लिए कुछ ख़ास लिखें।
कब के बिछड़े थे तुम,
ये तो हमें याद नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुमसे मिल के कभी ना बिछड़ने की
एक फ़रियाद लिखें
ख्वाहिशें कब उतरीं इन आंखों से
ठीक ठीक तो याद नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुम्हें अपनी आंखों के ख्वाबों का
सरताज लिखें
नज़्मों में कितने अल्फाज़ ज़रूरी हैं
ये तो हमें मालूम नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुम्हें अपने लिए ज़रूरी अपनी
सांस लिखें
तुम्हारे लिए कुछ ख़ास लिखें..
@kataizaharila
सोचते हैं!
आज तुम्हारे लिए कुछ ख़ास लिखें।
कब के बिछड़े थे तुम,
ये तो हमें याद नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुमसे मिल के कभी ना बिछड़ने की
एक फ़रियाद लिखें
ख्वाहिशें कब उतरीं इन आंखों से
ठीक ठीक तो याद नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुम्हें अपनी आंखों के ख्वाबों का
सरताज लिखें
नज़्मों में कितने अल्फाज़ ज़रूरी हैं
ये तो हमें मालूम नहीं, पर
सोचते हैं आज कि
तुम्हें अपने लिए ज़रूरी अपनी
सांस लिखें
तुम्हारे लिए कुछ ख़ास लिखें..
@kataizaharila
❤7👍2
मैंने कभी नहीं चाहा तुम्हें इतना कि,
किसी ईश्वर से मांग लूं तुम्हें
तुम्हारे लिए कभी इतना प्रेम नहीं उमड़ा कि
तुम्हारी तलाश में अनन्त यात्रा पर निकल जाऊं
नहीं हो सका, इतना समर्पित मैं कभी कि
तुम्हारी वेदनाआें को अपने हृदय में बांध सकूं
मैंने केवल तुम्हें इतना ही चाहा
जितना चाहता है एक बगुला अपने साथी को
तुम्हारे लिए केवल उतना ही प्रेम है मेरे पास
जितना प्रेम बचता है, मरते हुए प्रेमियों में
और, केवल उतना ही समर्पित हूं मैं तुम्हें
जितने समर्पित थे शिव सती के लिए।
@kataizaharila
किसी ईश्वर से मांग लूं तुम्हें
तुम्हारे लिए कभी इतना प्रेम नहीं उमड़ा कि
तुम्हारी तलाश में अनन्त यात्रा पर निकल जाऊं
नहीं हो सका, इतना समर्पित मैं कभी कि
तुम्हारी वेदनाआें को अपने हृदय में बांध सकूं
मैंने केवल तुम्हें इतना ही चाहा
जितना चाहता है एक बगुला अपने साथी को
तुम्हारे लिए केवल उतना ही प्रेम है मेरे पास
जितना प्रेम बचता है, मरते हुए प्रेमियों में
और, केवल उतना ही समर्पित हूं मैं तुम्हें
जितने समर्पित थे शिव सती के लिए।
@kataizaharila
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