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फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट–इंडिया (FIU-IND), जो भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए मुख्य रेगुलेटर है, ने अपनी एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला (CFT) करने वाली गाइडलाइंस को अपडेट किया है।
नई गाइडलाइंस की मुख्य बातें:
1. अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों और वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VDASPs) को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत "रिपोर्टिंग एंटिटी" के रूप में रजिस्टर करना होगा।
2. बेहतर ड्यू डिलिजेंस: सख्त नो योर कस्टमर (KYC) और क्लाइंट ड्यू डिलिजेंस (CDD) नियम लागू किए गए हैं।
3. बैंक वेरिफिकेशन: "पेनी-ड्रॉप" तरीके से बैंक खातों का वेरिफिकेशन अब अनिवार्य है।
4. हाई-रिस्क एक्टिविटीज़ पर रोक: फंड के सोर्स या डेस्टिनेशन को छिपाने के लिए डिज़ाइन की गई एक्टिविटीज़, जैसे कि टम्बलर और मिक्सर के इस्तेमाल पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं।
5. पब्लिक ऑफरिंग को हतोत्साहित करना: एक्सचेंजों को इनिशियल कॉइन ऑफरिंग (ICO) और इनिशियल टोकन ऑफरिंग (ITO) को बढ़ावा देने या सुविधाजनक बनाने से हतोत्साहित किया जाता है।
भारत में कानूनी स्थिति:
क्रिप्टोकरेंसी को भारत में कानूनी मुद्रा के रूप में मान्यता नहीं है। हालांकि, उन पर इनकम-टैक्स एक्ट के तहत टैक्स लगता है। रेगुलेटरी निगरानी पारंपरिक मुद्रा कानूनों के बजाय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के माध्यम से की जाती है।
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