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कोलकाता में विश्व धरोहर सप्ताह के दौरान गोमीरा मुखौटा नृत्य मुख्य मंच पर रहा।

श्री श्री गोहिली मुखोस नृत्य दल के कलाकारों ने पारंपरिक गोमीरा मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया — उत्तर बंगाल की लगभग 300 साल पुरानी कला शैली जो अपने विशिष्ट लकड़ी के मुखौटों के लिए जानी जाती है — 2025 विश्व धरोहर सप्ताह समारोह के भाग के रूप में कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में, जो हर साल 19 से 25 नवंबर तक मनाया जाता है.

📸 Debasish Bhaduri, PTI

#kolkata #worldheritage #maskdance #prelims
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Source: Indian Express
आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बनाम जीनोम संपादित (जीई) फसलें

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Source: Indian Express आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) बनाम जीनोम संपादित (जीई) फसलें @KevalHindi 🦚
"जीएम फसलें जीनोम एडिटिंग की ओर: भारत की यात्रा"(GM crops to genome editing: India's journey)

1. जीएम फसलों का संशोधन (GM Crops Modification)
- बीटी कॉटन (BT Cotton) के बाद भारत में नई जीएम तकनीक का विकास हो रहा है
- जीनोम एडिटिंग तकनीक (CRISPR) का उपयोग करके फसलों में सुधार किया जा रहा है
- यह पारंपरिक प्रजनन से भिन्न है - जीन को सीधे संपादित किया जाता है

2. महत्वपूर्ण FM फसलें और उनके लक्ष्य (Major Crops & Traits):

| फसल | जीन की संख्या | मुख्य विशेषताएं |
---------------------
| चावल| 45 | अधिक उपज, सूखा सहनशीलता, कीट प्रतिरोध, नमी सहिष्णुता |

| गेहूँ | 10 | नाइट्रोजन दक्षता, तनाव सहनशीलता, प्रारंभिक परिपक्वता |

| मकई | 6 | उच्च रोपण घनत्व, सूखा सहनशीलता, कम प्रोटीन |

| सरसों | 21 | उन्नत उपज, बीज तितर-बितर प्रतिरोध, कीटनाशक सहिष्णुता |

| सोयाबीन | 12 | बीज तेल, सूखा सहनशीलता, जल भराव सहन |

| गन्ना | 19 | फसल सूखा सहनशीलता, बिच्छू घास प्रतिरोध |

3. नीति और कार्यान्वयन (Policy Framework):
- MOEFCC (पर्यावरण मंत्रालय) के तहत नियम हैं
- जेनेटिकली इंजीनियर्ड क्रॉप्स कमेटी (GEAC) अनुमोदन देती है
- बायोसेफ्टी नियम सभी जीएम फसलों पर लागू होते हैं
- जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति पर्यावरणीय जोखिम का आकलन करती है

4. ICAR की भूमिका (ICAR's Role):
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 310 वर्ग फसलों को चिन्हित किया है
- 40 प्रजातियों के लिए जानवरों के जीन की पहचान की गई है
- भारतीय कृषि विश्वविद्यालय अनुसंधान कर रहे हैं

5. लाभ और उद्देश्य (Benefits):
✓ जलवायु परिवर्तन से अनुकूलन - सूखा, बाढ़ सहिष्णुता
✓ उपज में वृद्धि - खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना
✓ पोषण गुणवत्ता - पोषक तत्वों में सुधार
✓ कीट और रोग प्रतिरोध - जैव विविधता संरक्षण
✓ रासायनिक उपयोग में कमी - पर्यावरण के अनुकूल

6. अंतर: BT Cotton vs GE Crops की नीति (Difference):
- BT Cotton (पारंपरिक जीएम) = विदेशी जीन (Bacillus thuringiensis)
- GE Crops (जीनोम एडिटिंग) = स्वदेशी अनुसंधान, भारतीय संसाधन
- GE फसलें "मुक्त ऑक्सीजन परिचय" नहीं, बल्कि जीन को संपादित करती हैं

7. महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms):
- जीनोम एडिटिंग = DNA में सीधे परिवर्तन
- CRISPR = जीन संपादन तकनीक
- GEAC = जेनेटिक इंजीनियरिंग अनुमोदन समिति
- बायोसेफ्टी = पर्यावरणीय सुरक्षा
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#mains #prelims #pre26
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"जीएम फसलें जीनोम एडिटिंग की ओर: भारत की यात्रा"(GM crops to genome editing: India's journey) 1. जीएम फसलों का संशोधन (GM Crops Modification) - बीटी कॉटन (BT Cotton) के बाद भारत में नई जीएम तकनीक का विकास हो रहा है - जीनोम एडिटिंग तकनीक (CRISPR) का उपयोग…
UPSC के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न:

❓ भारत में जीएम फसलों की नीति क्या है?
❓ GEAC की भूमिका क्या है?
❓ जीनोम एडिटिंग और पारंपरिक जीएम में अंतर?
❓ जलवायु परिवर्तन से निपटने में GE फसलें कैसे मदद कर सकती हैं?
❓ भारत में कौन सी फसलें संशोधन के तहत हैं?
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75 Years 75 facts Indian Constitution .pdf
16.3 MB
✅75 Years - 75 Facts of Indian Constitution

✅Source : PIB Reserch Unit (GoI)
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Now Nepal includes Indian regions in its map! #Nepal #ArunachalPradesh
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Kesa hua EPFO Ka Exam ??
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Indigo mess.
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🔵 "राइट टू डिसकनेक्ट बिल" उस प्रस्तावित कानून को संदर्भित करता है जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को कार्य-घंटों के बाहर कार्य-संबंधी इलेक्ट्रॉनिक संचार (ईमेल, कॉल, संदेश) को अनदेखा करने का कानूनी अधिकार देना है, ताकि उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर के बिना ऐसा करने की स्वतंत्रता हो सके।

हालांकि फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने इस कानून के संस्करणों को लागू किया है, हाल की चर्चाएँ भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पेश किए गए विधेयकों पर केंद्रित हैं।

🔶 भारत में स्थिति (2025)

वर्तमान में, “राइट टू डिसकनेक्ट” भारत में निजी विधेयकों (Private Member's Bills) का विषय है, जिसका अर्थ है कि इन्हें व्यक्तिगत सांसदों द्वारा पेश किया गया है, न कि सरकार द्वारा। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे विधेयकों के कानून बनने में कठिनाई होती है।

🔹 राष्ट्रीय विधेयक: “राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025” हाल ही में लोकसभा (भारत की निचली सदन) में सांसद सुप्रिया सुले द्वारा पेश किया गया। यह उनके द्वारा 2019 में पेश किए गए समान विधेयक के बाद आता है।

🔹 केरल राज्य विधेयक: केरल राज्य ने भी "केरल राइट टू डिसकनेक्ट बिल, 2025" को एक निजी विधेयक के रूप में पेश किया है, जिसका उद्देश्य राज्य के निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को "ऑलवेज-ऑन" कार्य संस्कृति से बचाना है।

🔶 प्रस्तावित विधेयकों के मुख्य प्रावधान

भारतीय विधेयक कर्मचारियों में थकावट, तनाव और “इन्फो-ओबेसिटी” को संबोधित करने का उद्देश्य रखते हैं:

🔹 अधिकार प्रदान करना: कर्मचारियों को अपने सहमत कार्य-घंटों और छुट्टियों के बाद कार्य से संबंधित कॉल या ईमेल का जवाब देने से इनकार करने का अधिकार होगा।

🔹 कर्मचारियों की रक्षा: नियोक्ता कर्मचारियों के खिलाफ इस अधिकार का प्रयोग करने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे बर्खास्तगी या पदावनति) नहीं कर सकेंगे।

🔹 प्राधिकरण की स्थापना: विधेयक कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण या जिला स्तर की शिकायत निवारण समिति के गठन का प्रस्ताव करता है, जो अनुपालन की निगरानी और शिकायतों का समाधान करेगी।

🔹 बातचीत को अनिवार्य बनाना: 10 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को कार्य-घंटों के बाद काम से संबंधित नीतियों पर कर्मचारी प्रतिनिधियों या यूनियनों के साथ बातचीत कर उन्हें औपचारिक रूप देना होगा।

🔹 ओवरटाइम भुगतान प्रदान करना: यदि कोई कर्मचारी सहमति से आधिकारिक घंटों के बाहर काम करता है (आपसी सहमति की शर्तों के तहत), तो उसे ओवरटाइम भुगतान दिया जाएगा।

🔹 दंड लगाना: अनुपालक नहीं रहने वाली कंपनियों पर उनके कुल कर्मचारी पारिश्रमिक का 1% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

🔶 वैश्विक संदर्भ

भारत में यह पहल डिजिटल युग में कार्य-जीवन संतुलन पर चल रही वैश्विक चर्चा का हिस्सा है। कई देशों ने कानूनी ढांचे या दिशा-निर्देश लागू किए हैं:

🔹 फ्रांस: “एल खॉमरी” कानून, जो 2017 से प्रभावी है, ने “राइट टू डिसकनेक्ट” का वैधानिक अधिकार स्थापित किया।

🔹 ऑस्ट्रेलिया: 2024 की शुरुआत में पारित कानून कर्मचारियों को कार्य-घंटों के बाद संपर्क की उपेक्षा करने का अधिकार देता है, जब तक कि संपर्क को “अविवेकपूर्ण” न माना जाए।

🔹 अन्य देश: स्पेन, इटली, बेल्जियम, आयरलैंड और स्लोवाकिया में भी ऐसे कानून या आचार संहिता लागू हैं।


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रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण यूक्रेन पिछले 3-4 वर्षों से खबरों में रहा है.

कुछ स्थान जो हाल ही में समाचारों में रहे:
1. Pokrovsk
2. Myrnohrad


#location #pre26 @KevalHindi 🦚
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Punjab PCS 2025 GS Paper.

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