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कुछ लोगों के नामो का उल्लेख किया गया था जिनके ओहदे थे
बाकी सब इत्यादि थे
इत्यादि तादात में हमेशा ही ज्यादा होते थे
इत्यादि भाव ताव कर के सब्जी खरीदते थे और खाना वाना खा कर
खास लोगों के भाषण सुनने जाते थे
इत्यादि हर गोष्ठियों में उपस्थिति बढ़ाते थे
इत्यादि जुलूस में जाते थे तख्तियां उठाते थे नारे लगाते थे
इत्यादि लम्बी लाइनों में लग कर मतदान करते थे
उन्हें लगातार ऐसा भ्रम दिया गया था कि वो ही
इस लोकतंत्र में सरकार बनाते थे
इत्यादि हमेशा ही आन्दोलनों में शामिल होते थे
इसलिए कभी कभी पुलिस की गोली से मार दिए जाते थे।
#poetry
बाकी सब इत्यादि थे
इत्यादि तादात में हमेशा ही ज्यादा होते थे
इत्यादि भाव ताव कर के सब्जी खरीदते थे और खाना वाना खा कर
खास लोगों के भाषण सुनने जाते थे
इत्यादि हर गोष्ठियों में उपस्थिति बढ़ाते थे
इत्यादि जुलूस में जाते थे तख्तियां उठाते थे नारे लगाते थे
इत्यादि लम्बी लाइनों में लग कर मतदान करते थे
उन्हें लगातार ऐसा भ्रम दिया गया था कि वो ही
इस लोकतंत्र में सरकार बनाते थे
इत्यादि हमेशा ही आन्दोलनों में शामिल होते थे
इसलिए कभी कभी पुलिस की गोली से मार दिए जाते थे।
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