"कहाँ-कहाँ से समेटूं तुझे ऐ ज़िंदगी, जिधर भी देखूँ तू बस बिखरी पड़ी है ! 😔
कोशिशें बहुत कीं तुझे सँवारने की, पर तू तो वक़्त की रेत सी हाथों से फिसली पड़ी है।"♥️
#LIFE
कोशिशें बहुत कीं तुझे सँवारने की, पर तू तो वक़्त की रेत सी हाथों से फिसली पड़ी है।"♥️
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