Forwarded from BHUSHAN SINGH
S.p Jain College Sasaram👇
आवश्यक सूचना
स्नातकोतर कार्यालय
PG Sem-IV, Session (2024-2026) एवं PG Sem-II, Session (2025-2027) के छात्रों को सूचित किया जाता है कि उनका नामांकन महाविद्यालय के वेवसाइट www.spjainsasaram.co.in पर दिनांक 13.02.2026 से 28.02.2026 तक किया जाएगा ।
नोट: (1) PG Sem-|| में नामांकन हेतु PG Sem-1 में Pass अथवा Promoted होना अनिवार्य है।
(2) PG Sem-IV में नामांकन हेतु PG Sem-I, PG Sem-॥ एवं PG Sem-III में Pass होना अनिवार्य है।
(3) नामाकन प्रपत्रों को महाविद्यालय में जमा करने हेतु सूबना बाद में प्रकाशित की जायेगी
आवश्यक सूचना
स्नातकोतर कार्यालय
PG Sem-IV, Session (2024-2026) एवं PG Sem-II, Session (2025-2027) के छात्रों को सूचित किया जाता है कि उनका नामांकन महाविद्यालय के वेवसाइट www.spjainsasaram.co.in पर दिनांक 13.02.2026 से 28.02.2026 तक किया जाएगा ।
नोट: (1) PG Sem-|| में नामांकन हेतु PG Sem-1 में Pass अथवा Promoted होना अनिवार्य है।
(2) PG Sem-IV में नामांकन हेतु PG Sem-I, PG Sem-॥ एवं PG Sem-III में Pass होना अनिवार्य है।
(3) नामाकन प्रपत्रों को महाविद्यालय में जमा करने हेतु सूबना बाद में प्रकाशित की जायेगी
Forwarded from BHUSHAN SINGH
*🔰बिहार बेरोजगारी भत्ता योजना 2026, ग्रेजुएशन पास और इंटरमीडिएट पास सभी बेरोजगार छात्र-छात्राओं को Rs.1,000/- रूपया प्रति माह 2 वर्षों तक मिलेगा आवेदन शुरू है इस 👇 लिंक से अभी आवेदन करें 👇*
https://www.7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in/addFtrUserPage
🔴ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रिंट आउट और सभी डॉक्यूमेंट अपने जिला के DRCC OFFICE में सत्यापित कराकर अवश्य जामा करें।
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🔴ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रिंट आउट और सभी डॉक्यूमेंट अपने जिला के DRCC OFFICE में सत्यापित कराकर अवश्य जामा करें।
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Forwarded from BHUSHAN SINGH
स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने की बाधा दूर
Feb 18, 2026 08:14 pm IST
हिन्दुस्तान, पटना
राज्य के स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को प्रोत्साहन राशि मिलने की प्रक्रिया में तेजी आई है। अगले 15 दिनो में 1.5 लाख छात्राओं के खातों में 50-50 हजार रुपये भेजे जाने की संभावना है। वित्त विभाग ने 750 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है और अब आंतरिक वित्तीय सलाहकार की बाधा दूर कर राज्य के स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने की बाधा लगभग दूर हो गई है। माना जा रहा है कि अगले 15 दिनो में डेढ लाख स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के खाता 50-50 हजार की दर से प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी। ये छात्राएं पिछले लगभग डेढ साल से प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रही हैं। पिछले दिनों शिक्षा विभाग की मांग पर वित्त विभाग ने इस मद में 750 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन नये बने उच्च शिक्षा विभाग मे आंतरिक वित्तीय सलाहकार नही होने के कारण राशि निकासी का मामला फंस गया था। अब आंतरिक वित्तीय सलाहकार की यह बाधा दूर करा ली गई है।
Feb 18, 2026 08:14 pm IST
हिन्दुस्तान, पटना
राज्य के स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को प्रोत्साहन राशि मिलने की प्रक्रिया में तेजी आई है। अगले 15 दिनो में 1.5 लाख छात्राओं के खातों में 50-50 हजार रुपये भेजे जाने की संभावना है। वित्त विभाग ने 750 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है और अब आंतरिक वित्तीय सलाहकार की बाधा दूर कर राज्य के स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने की बाधा लगभग दूर हो गई है। माना जा रहा है कि अगले 15 दिनो में डेढ लाख स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के खाता 50-50 हजार की दर से प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी। ये छात्राएं पिछले लगभग डेढ साल से प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रही हैं। पिछले दिनों शिक्षा विभाग की मांग पर वित्त विभाग ने इस मद में 750 करोड़ रुपए देने की स्वीकृति दे दी थी, लेकिन नये बने उच्च शिक्षा विभाग मे आंतरिक वित्तीय सलाहकार नही होने के कारण राशि निकासी का मामला फंस गया था। अब आंतरिक वित्तीय सलाहकार की यह बाधा दूर करा ली गई है।
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Forwarded from BHUSHAN SINGH
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह खबर चर्चा में थी कि खान सर भोजपुर जिले के कोईलवर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदकर एक विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। बताया गया था कि जमीन की रजिस्ट्री के लिए वे स्वयं कार्यालय भी पहुंचे थे और शुरुआती चरण में कुछ एकड़ जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी थी।
लेकिन अब स्थिति बदल गई है। खान सर ने स्वयं जानकारी दी है कि वे खरीदी हुई जमीन को बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं और विश्वविद्यालय बनाने का उनका सपना फिलहाल टूट गया है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र के समग्र विकास का एक व्यापक विज़न था। उनकी योजना लगभग 1000 एकड़ जमीन में एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त कैंपस बनाने की थी। प्रारंभिक चरण में कई जमीन मालिकों से बातचीत हो चुकी थी और बाजार दर से अधिक कीमत पर सौदे भी तय कर लिए गए थे। कई जमीन मालिकों को अग्रिम राशि दी जा चुकी थी तथा लगभग 10–15 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई थी।
खान सर के अनुसार, स्थिति तब बदल गई जब स्थानीय स्तर पर यह खबर फैल गई कि कोईलवर में एक बड़े विश्वविद्यालय का निर्माण होने वाला है। इसके बाद कई जमीन मालिकों ने जमीन की कीमत अचानक कई गुना बढ़ा दी और अग्रिम राशि लेने के बावजूद तय दर पर रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि कुछ मामलों में जमीन की कीमत पहले से तय दर से कई गुना, यहां तक कि दस गुना तक बढ़ा दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले ही बाजार दर से अधिक कीमत दे रहे थे और अधिकांश मामलों में समझौता अंतिम चरण में था, लेकिन अचानक बदली परिस्थितियों और बढ़ती जटिलताओं के कारण परियोजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका। हालात ऐसे बन गए कि उन्हें पहले से खरीदी गई जमीन भी बेचने का निर्णय लेना पड़ा।
खान सर का मानना है कि यदि यह विश्वविद्यालय बन पाता, तो क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार होता, खासकर इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र पटना के नजदीक होने के साथ-साथ बेहतर कनेक्टिविटी भी रखता है।
लेकिन अब स्थिति बदल गई है। खान सर ने स्वयं जानकारी दी है कि वे खरीदी हुई जमीन को बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं और विश्वविद्यालय बनाने का उनका सपना फिलहाल टूट गया है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं था, बल्कि पूरे क्षेत्र के समग्र विकास का एक व्यापक विज़न था। उनकी योजना लगभग 1000 एकड़ जमीन में एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त कैंपस बनाने की थी। प्रारंभिक चरण में कई जमीन मालिकों से बातचीत हो चुकी थी और बाजार दर से अधिक कीमत पर सौदे भी तय कर लिए गए थे। कई जमीन मालिकों को अग्रिम राशि दी जा चुकी थी तथा लगभग 10–15 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई थी।
खान सर के अनुसार, स्थिति तब बदल गई जब स्थानीय स्तर पर यह खबर फैल गई कि कोईलवर में एक बड़े विश्वविद्यालय का निर्माण होने वाला है। इसके बाद कई जमीन मालिकों ने जमीन की कीमत अचानक कई गुना बढ़ा दी और अग्रिम राशि लेने के बावजूद तय दर पर रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि कुछ मामलों में जमीन की कीमत पहले से तय दर से कई गुना, यहां तक कि दस गुना तक बढ़ा दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले ही बाजार दर से अधिक कीमत दे रहे थे और अधिकांश मामलों में समझौता अंतिम चरण में था, लेकिन अचानक बदली परिस्थितियों और बढ़ती जटिलताओं के कारण परियोजना को आगे बढ़ाना संभव नहीं हो सका। हालात ऐसे बन गए कि उन्हें पहले से खरीदी गई जमीन भी बेचने का निर्णय लेना पड़ा।
खान सर का मानना है कि यदि यह विश्वविद्यालय बन पाता, तो क्षेत्र के विकास, रोजगार सृजन और शिक्षा के स्तर में व्यापक सुधार होता, खासकर इसलिए क्योंकि यह क्षेत्र पटना के नजदीक होने के साथ-साथ बेहतर कनेक्टिविटी भी रखता है।