Forwarded from BHUSHAN SINGH
बिहार के अल्पसंख्यक महाविद्यालय, मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज के 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द हो गई है. पटना हाईकोर्ट के डबल बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है. कोर्ट ने माना है कि अल्पसंख्यक महाविद्यालय ने नियमों का घोर उल्लंघन किया है. चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के पहले के फैसले को बरकरार रखा है. अब इस फैसले के बाद 20 असिस्टेंट प्रोफेसर अपनी नौकरी से हाथ धो बैठे हैं.
20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द:
कोर्ट ने विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने का हवाला दिया है. इस बहाली में पाया गया है कि नियमों का घोर उल्लंघन हुआ है. कोर्ट ने माना है कि बहाली प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियों और सिलेक्शन कमेटी का गलत गठन कर बहाली की गई है, जिन विषयों में बहाली हुई थी उनमें फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स और साइकोलॉजी विषय शामिल थे.
20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द
2024 में सिंगल बेंच ने सुनाया था फैसला: इस बहाली मामले पर पहले जस्टिस अंजनी कुमार शरण ने 2024 में सुनवाई करते हुए बहाली प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां पाए जाने पर रद्द कर दिया था. प्रभावित टीचरों ने एकल जज बेंच के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने कोई राहत नहीं दी है.
2019 में विज्ञापन कर दिया गया था रद्द: इस केस की डिटेल्स के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पहली बार मार्च 2018 में विज्ञापन दिया गया था और फरवरी 2019 में इंटरव्यू हुआ था. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन समिति ने बिना कोई कारण बताए अक्टूबर 2019 में विज्ञापन को रद्द कर दिया और पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन देकर फिर से बहाली की प्रक्रिया की थी. इसमें गड़बड़ी को लेकर कुछ एप्लीकेंट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसी को लेकर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.
2021 में दी गई थी चुनौती: मिर्जा गालिब कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अली हुसैन ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि 2021 की भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. 2021 में 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली हुई थी. बहाली पर पहले से कॉलेज में एडहॉक पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने आरोप लगाया था कि भरती में नियमों का पालन नहीं किया गया है. कॉलेज प्रबंधन समिति पर नियमों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने 2021 में ही बहाली के विरुद्ध हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
नियमों का हुआ था उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखते हुए हवाला दिया था कि साक्षात्कार आयोजित करने के लिए चयन समिति बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम धारा 57 ए और 57 बी में निहित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. साक्षात्कार चयन समिति वैधानिक आदेश के अनुसार गठन नहीं किया गया है.
20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द:
कोर्ट ने विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने का हवाला दिया है. इस बहाली में पाया गया है कि नियमों का घोर उल्लंघन हुआ है. कोर्ट ने माना है कि बहाली प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियों और सिलेक्शन कमेटी का गलत गठन कर बहाली की गई है, जिन विषयों में बहाली हुई थी उनमें फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथमेटिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इकोनॉमिक्स और साइकोलॉजी विषय शामिल थे.
20 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति रद्द
2024 में सिंगल बेंच ने सुनाया था फैसला: इस बहाली मामले पर पहले जस्टिस अंजनी कुमार शरण ने 2024 में सुनवाई करते हुए बहाली प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां पाए जाने पर रद्द कर दिया था. प्रभावित टीचरों ने एकल जज बेंच के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने कोई राहत नहीं दी है.
2019 में विज्ञापन कर दिया गया था रद्द: इस केस की डिटेल्स के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए पहली बार मार्च 2018 में विज्ञापन दिया गया था और फरवरी 2019 में इंटरव्यू हुआ था. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन समिति ने बिना कोई कारण बताए अक्टूबर 2019 में विज्ञापन को रद्द कर दिया और पदों के लिए नए सिरे से विज्ञापन देकर फिर से बहाली की प्रक्रिया की थी. इसमें गड़बड़ी को लेकर कुछ एप्लीकेंट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इसी को लेकर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.
2021 में दी गई थी चुनौती: मिर्जा गालिब कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ अली हुसैन ने इस बात की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि 2021 की भर्ती को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. 2021 में 20 असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली हुई थी. बहाली पर पहले से कॉलेज में एडहॉक पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने आरोप लगाया था कि भरती में नियमों का पालन नहीं किया गया है. कॉलेज प्रबंधन समिति पर नियमों का उल्लंघन का आरोप लगाते हुए रीना कुमारी और मुजफ्फर आलम ने 2021 में ही बहाली के विरुद्ध हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
नियमों का हुआ था उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखते हुए हवाला दिया था कि साक्षात्कार आयोजित करने के लिए चयन समिति बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम धारा 57 ए और 57 बी में निहित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. साक्षात्कार चयन समिति वैधानिक आदेश के अनुसार गठन नहीं किया गया है.
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