बदलते भारत की सुनहरी छवि।😊
आज तक मॉल में जहां सिर्फ़ क्रिसमस ट्री और वैलेंटायन डे की सजावट होती थी,
पहली बार किसी मॉल में भारतीय संस्कृति के अनुरूप: भव्य राम मंदिर की सजावट की गयी। #जय_श्री_राम
(चित्र: पसिफ़िक मॉल, टगोर गार्डेन दिल्ली)
आज तक मॉल में जहां सिर्फ़ क्रिसमस ट्री और वैलेंटायन डे की सजावट होती थी,
पहली बार किसी मॉल में भारतीय संस्कृति के अनुरूप: भव्य राम मंदिर की सजावट की गयी। #जय_श्री_राम
(चित्र: पसिफ़िक मॉल, टगोर गार्डेन दिल्ली)
Forwarded from Sadhak Swami
Why does Diwali come exactly 21 days after Dussehra every year? If you don't believe, check the calendar. Valmiki sage says that it took 21 days (504 hours) to reach Ayodhya on foot from Sri Lanka for Lord Ramachandra's army !!!! So 504 hours divided by 24 hours, the answer will be 21.00 is 21 days.
I was surprised. To confirm, I searched on Google map out of curiosity. I was shocked to see the distance from Sri Lanka to Ayodhya on foot is 3145 km and time taken to walk is 504 hr !!!!
Google Map is completely reliable these days. We celebrate Dussehra and Diwali since Tretayug, according to the tradition.
If you don't believe me, do a Google search and share this information with others. Valmiki sage had written Ramayana with accuracy. *How great is our Hindu culture.Be proud of being born in Hindu culture!*
*Jai Shriram. Jai Shriram.*
🙏🙏
I was surprised. To confirm, I searched on Google map out of curiosity. I was shocked to see the distance from Sri Lanka to Ayodhya on foot is 3145 km and time taken to walk is 504 hr !!!!
Google Map is completely reliable these days. We celebrate Dussehra and Diwali since Tretayug, according to the tradition.
If you don't believe me, do a Google search and share this information with others. Valmiki sage had written Ramayana with accuracy. *How great is our Hindu culture.Be proud of being born in Hindu culture!*
*Jai Shriram. Jai Shriram.*
🙏🙏
*2021 साल में हरिद्वार में होने वाले कुंभ स्नान की तिथियां सहित जानकारी,*
*सनातन संस्कृति के पर्व को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें* 🙏🏻🙏🏻
*सनातन संस्कृति के पर्व को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें* 🙏🏻🙏🏻
प्राचीन मंदिर ग्राम बाघोलन फतेहगंज खोही बरौंधा बीरगढ़ मंदिर मड़फा मंदिर जंगल जिला सतना मध्यप्रदेश
बरसों लग गये इस परिवर्तन को लाने में वरना सदियों से तो केवल क्रिसमस ट्री और संता क्लाज ही नजर आते थे।.
*जयश्रीराम*
*Pacific_mall_gaziabad*
*जयश्रीराम*
*Pacific_mall_gaziabad*
नामची में चारधाम,भारत 🙏🚩🚩
इसे सिक्किम में सिद्धेश्वर धाम कहा जाता है, जिसमें शिव की 108 फीट ऊंची प्रतिमा है, 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति और पवित्र चारधाम के मॉडल हैं।
नामची सिक्किम में सोलोफोक पहाड़ी पर चारधाम
नामची सिक्किम प्रदेश में सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित चारधाम भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों की एक ही जगह समेट कर पर बनायी गयी प्रतिकृति है। यहां पर भारत के चारों कोनों में स्थित चार धाम, जैसे रामेश्वरम, सोमनाथ, पुरी और बद्रीनाथ और पूरे भारतखंड में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग शामिल हैं। सिद्धेश्वर धाम के नाम से जाने इस स्थल के आकर्षण का शिखर बिन्दु भगवान शिव की ऊँची-लंबी प्रतिमा है।
दक्षिण सिक्किम में बसा हुआ, सिक्किम के दक्षिण जिले का जिला मुख्यालय होने के बावजूद नामची एक छोटा सा शहर है। रंगीत नदी के किनारे बसे बाईगुने में कुछ सुंदर दिन बिताने के बाद हम नामची की ओर बढ़े। हमारे लिए नामची के दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण यहां की सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित चारधाम या सिद्धेश्वर धाम था। हमसे एक दिन पहले जो लोग पहाड़ी का दौरा कर आए थे उनसे हमने इस तीर्थ स्थल के बारे में बहुत सुना था। हम वहाँ के नवनिर्मित परिसर, जो सिक्किम पर्यटन का पसंदीदा गंतव्य बन चुका था, को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित थे।
नामची सिक्किम के सोलोफोक पहाड़ी का इतिहास
महाकाव्य महाभारत में एक ऐसा अध्याय है जहां पर अर्जुन शिव भगवान से पशुपतिअस्त्र प्राप्त करने के लिए कड़ी तपस्या करते हैं। जब शिवजी उनके समर्पित धीरज से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने अर्जुन के समुख प्रकट होकर उन्हें पशुपतिअस्त्र का वरदान दे दिया। कहा जाता है कि यह प्रकरण नामची की सोलोफोक पहाड़ी पर घटित हुआ था। मैंने धार्मिक सिक्किम पर एक किताब पढ़ी थी जिसके अनुसार, अर्जुन को पशुपतिअस्त्र का आशीर्वाद देने के लिए इस पहाड़ी पर शिव भगवान के अवतरण की खुशी मनाने के प्रतीक स्वरूप चारधाम का परिसर बनवाया गया था। इस परिसर का उद्घाटन नवंबर 2011 में श्री जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज और अनेकों धार्मिक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्राण प्रतिष्ठान के साथ हुआ।
ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण मेघ हमेशा इस अद्वितीय तीर्थ यात्रा का हिस्सा बनते हैं। इन बादलों के बीच से गुजरते हुए आप मंदिरों और भगवान शिव की मूर्ति को बादलों के बीच से उभरते हुए देख सकते हैं, जो आपको एक झलक देकर वापस बादलों के बीच खो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है, मानो भगवान आपको दूसरे कामों के लिए आगे बढ़ने से पहले दर्शन दे रहे हैं। अगर बादल इस जगह को थोडा फीका बनाते हैं, तो यहाँ के फूल अपने रंगों की जीवंतता से पूरे वातावरण में खुशी भर देते हैं। चारों ओर इतने सुंदर पहाड़ी फूल हैं कि हम रास्ते में रुक-रुक कर उनकी तस्वीरें खिचते रहे।
नामची सिक्किम में चारधाम का परिसर
नामची के चारधाम परिसर का केंद्रीय आकर्षण 87 फीट ऊँची शिव मूर्ति है जो पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। यहां से शिव भगवान पूरे चारधाम परिसर और उसके चारों ओर की घाटियों की निगरानी करते हैं। यह मूर्ति पहाड़ी के पश्चिमी छोर पर पूर्वी दिशा की ओर मुख किए स्थित है। यह मूर्ति 12 ज्योतिर्लिंगों से घिरी है।यह 12 प्रसिद्ध शिव मंदिर पूरे भारत के धार्मिक भूगोल पर फैले हैं। यहां का हर एक शिवलिंग अपने मूल जगह पर स्थापित शिवलिंग की सटीक प्रतिकृति है।
#भारतवर्ष #सिद्धेश्वरधाम
#राहुल
#रितेश
#हिन्दू
#हिन्दुराष्ट्र
*दिपावली आ रही है दोस्तो.सामान ऐसी जगह से खरीदे जिसका दूकानदार आपकी वजह से दशहरा दिपावली मना सके और उन दुकानदारो का विशेष ध्यान रखे जिन्होने CAA के विरोध मे दुकान बंद की थी।*
*उन दुकानदार का भी ध्यान रखे जिनकी औलादे सोशल मिडिया पर राम मंदिर को तोड़ने का कैंपेन चला रही है। इनका आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार करे।*
*आपकी वजह से कोई दिपावली मना सके ऐसे दुकानदार से सामान ले ऐसे दुकान से कभी नही जो अपनी कमाई का एक हिस्सा आतंकी संगठनो को देता हो।*
*हलाल सर्टीफाइड प्रोडक्ट और उसकी कंपनी का बहिष्कार करे*
"""मुझसे जुड़ने के लिए मेरी प्रॉफाइल *राहुल जरीवाला* को खोल कर follow पर क्लिक करे एवम see first सेलेक्ट करे"""
सभार:-®.जागले।
🇮🇳🕉️हिन्दुराष्ट्रम🕉️🇮🇳
🇮🇳🕉️जय माँ भारती🕉️🇮🇳
🇮🇳🕉️उत्तिष्ठ भारतः🕉️🇮🇳
🇮🇳🕉️माँ तुझे प्रणाम🕉️🇮🇳
इसे सिक्किम में सिद्धेश्वर धाम कहा जाता है, जिसमें शिव की 108 फीट ऊंची प्रतिमा है, 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृति और पवित्र चारधाम के मॉडल हैं।
नामची सिक्किम में सोलोफोक पहाड़ी पर चारधाम
नामची सिक्किम प्रदेश में सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित चारधाम भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों की एक ही जगह समेट कर पर बनायी गयी प्रतिकृति है। यहां पर भारत के चारों कोनों में स्थित चार धाम, जैसे रामेश्वरम, सोमनाथ, पुरी और बद्रीनाथ और पूरे भारतखंड में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग शामिल हैं। सिद्धेश्वर धाम के नाम से जाने इस स्थल के आकर्षण का शिखर बिन्दु भगवान शिव की ऊँची-लंबी प्रतिमा है।
दक्षिण सिक्किम में बसा हुआ, सिक्किम के दक्षिण जिले का जिला मुख्यालय होने के बावजूद नामची एक छोटा सा शहर है। रंगीत नदी के किनारे बसे बाईगुने में कुछ सुंदर दिन बिताने के बाद हम नामची की ओर बढ़े। हमारे लिए नामची के दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण यहां की सोलोफोक पहाड़ी पर स्थित चारधाम या सिद्धेश्वर धाम था। हमसे एक दिन पहले जो लोग पहाड़ी का दौरा कर आए थे उनसे हमने इस तीर्थ स्थल के बारे में बहुत सुना था। हम वहाँ के नवनिर्मित परिसर, जो सिक्किम पर्यटन का पसंदीदा गंतव्य बन चुका था, को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित थे।
नामची सिक्किम के सोलोफोक पहाड़ी का इतिहास
महाकाव्य महाभारत में एक ऐसा अध्याय है जहां पर अर्जुन शिव भगवान से पशुपतिअस्त्र प्राप्त करने के लिए कड़ी तपस्या करते हैं। जब शिवजी उनके समर्पित धीरज से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने अर्जुन के समुख प्रकट होकर उन्हें पशुपतिअस्त्र का वरदान दे दिया। कहा जाता है कि यह प्रकरण नामची की सोलोफोक पहाड़ी पर घटित हुआ था। मैंने धार्मिक सिक्किम पर एक किताब पढ़ी थी जिसके अनुसार, अर्जुन को पशुपतिअस्त्र का आशीर्वाद देने के लिए इस पहाड़ी पर शिव भगवान के अवतरण की खुशी मनाने के प्रतीक स्वरूप चारधाम का परिसर बनवाया गया था। इस परिसर का उद्घाटन नवंबर 2011 में श्री जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज और अनेकों धार्मिक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्राण प्रतिष्ठान के साथ हुआ।
ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण मेघ हमेशा इस अद्वितीय तीर्थ यात्रा का हिस्सा बनते हैं। इन बादलों के बीच से गुजरते हुए आप मंदिरों और भगवान शिव की मूर्ति को बादलों के बीच से उभरते हुए देख सकते हैं, जो आपको एक झलक देकर वापस बादलों के बीच खो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है, मानो भगवान आपको दूसरे कामों के लिए आगे बढ़ने से पहले दर्शन दे रहे हैं। अगर बादल इस जगह को थोडा फीका बनाते हैं, तो यहाँ के फूल अपने रंगों की जीवंतता से पूरे वातावरण में खुशी भर देते हैं। चारों ओर इतने सुंदर पहाड़ी फूल हैं कि हम रास्ते में रुक-रुक कर उनकी तस्वीरें खिचते रहे।
नामची सिक्किम में चारधाम का परिसर
नामची के चारधाम परिसर का केंद्रीय आकर्षण 87 फीट ऊँची शिव मूर्ति है जो पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। यहां से शिव भगवान पूरे चारधाम परिसर और उसके चारों ओर की घाटियों की निगरानी करते हैं। यह मूर्ति पहाड़ी के पश्चिमी छोर पर पूर्वी दिशा की ओर मुख किए स्थित है। यह मूर्ति 12 ज्योतिर्लिंगों से घिरी है।यह 12 प्रसिद्ध शिव मंदिर पूरे भारत के धार्मिक भूगोल पर फैले हैं। यहां का हर एक शिवलिंग अपने मूल जगह पर स्थापित शिवलिंग की सटीक प्रतिकृति है।
#भारतवर्ष #सिद्धेश्वरधाम
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*उन दुकानदार का भी ध्यान रखे जिनकी औलादे सोशल मिडिया पर राम मंदिर को तोड़ने का कैंपेन चला रही है। इनका आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार करे।*
*आपकी वजह से कोई दिपावली मना सके ऐसे दुकानदार से सामान ले ऐसे दुकान से कभी नही जो अपनी कमाई का एक हिस्सा आतंकी संगठनो को देता हो।*
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🇮🇳🕉️हिन्दुराष्ट्रम🕉️🇮🇳
🇮🇳🕉️जय माँ भारती🕉️🇮🇳
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*प्रशासक समिति✊🚩*
(०४/०३)
*📚📚✒️आओ सही इतिहास पढें:- ०३)*
*🤺वीरों/वीरांगनाओं की गाथा ⚔️*
*👉३) महाप्रतापी, 64 सिद्धियों के धनी "राजा भोज"*
*👇आपने वो कहावत ज़रूर सुनी होगी -*
" _कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगुतेली!"_
*👆जिसका अर्थ होता है, दो लोगों के बीच बहुत अधिक अतंर होना या फिर किन्हीं दो लोगों के बीच बेमेल तुलना। आइए आज हम पढ़ते हैं उस राजा के बारे में जिनके साथ ये कहावत जुड़ा हुआ है। आइए हम पढ़ते हैं 'राजा भोज' के बारे में।*
*🤺राजा भोज कौन थे!🚩* *✍️भारतीय इतिहास में सर्वाधिक लोकप्रिय राजाओं की अग्रिम पंक्ति में अपनी पहचान बनाने वाले राजा भोज का नाम भला किसने नहीं सुना होगा! लेकिन अफसोसजनक बात ये है कि उनके बारे में लोगों को ज्यादा कुछ ज्ञात नहीं है। ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इतिहास के किताबों में उन्हें वो स्थान दिया ही नहीं गया जिसके वो दावेदार थे।*
*🙏सहनशील, दयालु, प्रजापालक, वीर, प्रतापी आदि गुणों के स्वामी राजा भोज!*
वीरता, साहस और न्यायप्रियता की जीवंत मूरत राजा भोज उस समय केवल भारतवर्ष में ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में प्रचलित थे।
*✍️वैसे तो 'भोज' नाम से और भी कई राजा हुए हैं। लेकिन हम यहां बात कर रहे हैं उन राजा भोज की जिन्होंने अपनी राजधानी उज्जैनी के बदले धार को बनाया था।*
♦️परमार वंश के इस राजा का जन्म सन् 980 में महाराजा विक्रमादित्य की नगरी उज्जैनी में एक राजपरिवार में हुआ। पन्द्रह वर्ष की छोटी आयु में ही उनका राज्य अभिषेक मालवा के राजसिंहासन पर हो गया था। अल्पायु में सिंहासनारोहण के समय महान राजा भोज चारों ओर से शत्रुओं से घिरे थे। उत्तर में तुर्को से, उत्तर-पश्चिम में राजपूत सामंतों से, दक्षिण में विक्रम चालुक्य से, पूर्व में युवराज कलचुरी से तथा पश्चिम में भीम चालुक्य से उन्हें लोहा लेना पड़ा। उन्होंने एक-एक कर सब को हराया। तेलंगाना के तेलप और तिरहुत के गांगेयदेव को हराने के बाद एक कहावत बनी जिन्हें लोग आज भी प्रयोग करते हैं - ''कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली''
*🤺परमारवंशी इस महाप्रतापी राजा का साम्राज्य मालवा, कोंकण, खानदेश, भिलसा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़ एवं गोदावरी घाटी तक फैला हुआ था।*
*✊महमूद गजनवी को किया भागने पर मजबूर!*
जब लुटेरा महमूद गजनवी ने सोमनाथ मन्दिर का ध्वंस किया, तो शैव भक्त राजा भोज यह खबर सुनकर बहुत क्षुब्द हुए।
राजा ने अपनी सेना के साथ गजनवी पर हमला कर दिया, लेकिन गजनवी मौका देख सिंध के रेगिस्तान में भाग गया।
गजनवी तो बच गया, लेकिन राजा भोज ने हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना एकत्रित करके गजनवी के पुत्र सालार मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर सोमनाथ का बदला ले लिया, और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल (जो कि उस समय भोजपाल नाम से जाना जाता था) से 32 किमी पर स्थित भोजपुर में शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी। इस मंदिर की ख्याति इतनी अधिक थी कि इसे 'पूर्व का सोमनाथ' कहा जाने लगा।
*🙏महाज्ञानी राजा भोज!*
राजा भोज, लुटेरे मुगल के किसी मूर्ख वंशज की तरह नहीं थे। वो खुद एक विद्वान थे जो काव्यशास्त्र और व्याकरण के बड़े जानकार थे और _उन्होंने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं।_
*🚩मान्यता अनुसार भोज ने 64 प्रकार की सिद्धियां प्राप्त की थीं तथा उन्होंने सभी विषयों पर 84 ग्रंथ लिखे जिसमें धर्म, ज्योतिष, आयुर्वेद, व्याकरण, वास्तुशिल्प, विज्ञान, कला, नाट्यशास्त्र, संगीत, योगशास्त्र, दर्शन, राजनीतिशास्त्र आदि प्रमुख हैं।*
*✍️ये बहुत दुःख की बात है कि इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद राजा भोज को इतिहास में वो स्थान नहीं दिया गया, जो तुर्क, मंगोली लुटेरों एवं उनके मुग़ल वशंजों को मिला है।*
➖➖➖➖➖➖➖➖➖
*👇समिति की सभी ज्ञानवर्धक, आध्यात्मिक और सत्य दर्शाती हुई तथ्यात्मक पोस्ट प्रतिदिन प्राप्त करने हेतु समिति के टेलिग्राम चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें, जहां प्रतिदिन कम संख्या में उत्तम पोस्ट समिति द्वारा की जाती हैं*
https://t.me/HarGharBhagwa/2802
🙏🚩🇮🇳🔱🏹🐚🕉️
(०४/०३)
*📚📚✒️आओ सही इतिहास पढें:- ०३)*
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*👉३) महाप्रतापी, 64 सिद्धियों के धनी "राजा भोज"*
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" _कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगुतेली!"_
*👆जिसका अर्थ होता है, दो लोगों के बीच बहुत अधिक अतंर होना या फिर किन्हीं दो लोगों के बीच बेमेल तुलना। आइए आज हम पढ़ते हैं उस राजा के बारे में जिनके साथ ये कहावत जुड़ा हुआ है। आइए हम पढ़ते हैं 'राजा भोज' के बारे में।*
*🤺राजा भोज कौन थे!🚩* *✍️भारतीय इतिहास में सर्वाधिक लोकप्रिय राजाओं की अग्रिम पंक्ति में अपनी पहचान बनाने वाले राजा भोज का नाम भला किसने नहीं सुना होगा! लेकिन अफसोसजनक बात ये है कि उनके बारे में लोगों को ज्यादा कुछ ज्ञात नहीं है। ऐसा हम इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इतिहास के किताबों में उन्हें वो स्थान दिया ही नहीं गया जिसके वो दावेदार थे।*
*🙏सहनशील, दयालु, प्रजापालक, वीर, प्रतापी आदि गुणों के स्वामी राजा भोज!*
वीरता, साहस और न्यायप्रियता की जीवंत मूरत राजा भोज उस समय केवल भारतवर्ष में ही नहीं अपितु संपूर्ण विश्व में प्रचलित थे।
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♦️परमार वंश के इस राजा का जन्म सन् 980 में महाराजा विक्रमादित्य की नगरी उज्जैनी में एक राजपरिवार में हुआ। पन्द्रह वर्ष की छोटी आयु में ही उनका राज्य अभिषेक मालवा के राजसिंहासन पर हो गया था। अल्पायु में सिंहासनारोहण के समय महान राजा भोज चारों ओर से शत्रुओं से घिरे थे। उत्तर में तुर्को से, उत्तर-पश्चिम में राजपूत सामंतों से, दक्षिण में विक्रम चालुक्य से, पूर्व में युवराज कलचुरी से तथा पश्चिम में भीम चालुक्य से उन्हें लोहा लेना पड़ा। उन्होंने एक-एक कर सब को हराया। तेलंगाना के तेलप और तिरहुत के गांगेयदेव को हराने के बाद एक कहावत बनी जिन्हें लोग आज भी प्रयोग करते हैं - ''कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली''
*🤺परमारवंशी इस महाप्रतापी राजा का साम्राज्य मालवा, कोंकण, खानदेश, भिलसा, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़ एवं गोदावरी घाटी तक फैला हुआ था।*
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जब लुटेरा महमूद गजनवी ने सोमनाथ मन्दिर का ध्वंस किया, तो शैव भक्त राजा भोज यह खबर सुनकर बहुत क्षुब्द हुए।
राजा ने अपनी सेना के साथ गजनवी पर हमला कर दिया, लेकिन गजनवी मौका देख सिंध के रेगिस्तान में भाग गया।
गजनवी तो बच गया, लेकिन राजा भोज ने हिंदू राजाओं की संयुक्त सेना एकत्रित करके गजनवी के पुत्र सालार मसूद को बहराइच के पास एक मास के युद्ध में मारकर सोमनाथ का बदला ले लिया, और फिर 1026-1054 की अवधि के बीच भोपाल (जो कि उस समय भोजपाल नाम से जाना जाता था) से 32 किमी पर स्थित भोजपुर में शिव मंदिर का निर्माण करके मालवा में सोमनाथ की स्थापना कर दी। इस मंदिर की ख्याति इतनी अधिक थी कि इसे 'पूर्व का सोमनाथ' कहा जाने लगा।
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राजा भोज, लुटेरे मुगल के किसी मूर्ख वंशज की तरह नहीं थे। वो खुद एक विद्वान थे जो काव्यशास्त्र और व्याकरण के बड़े जानकार थे और _उन्होंने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं।_
*🚩मान्यता अनुसार भोज ने 64 प्रकार की सिद्धियां प्राप्त की थीं तथा उन्होंने सभी विषयों पर 84 ग्रंथ लिखे जिसमें धर्म, ज्योतिष, आयुर्वेद, व्याकरण, वास्तुशिल्प, विज्ञान, कला, नाट्यशास्त्र, संगीत, योगशास्त्र, दर्शन, राजनीतिशास्त्र आदि प्रमुख हैं।*
*✍️ये बहुत दुःख की बात है कि इतनी बड़ी उपलब्धियों के बावजूद राजा भोज को इतिहास में वो स्थान नहीं दिया गया, जो तुर्क, मंगोली लुटेरों एवं उनके मुग़ल वशंजों को मिला है।*
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३) राजा भोज
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३) राजा भोज
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