Forwarded from The Narrative
दक्षिणेश्वर काली मन्दिर , पश्चिम बंगाल
(बांग्ला: দক্ষিণেশ্বর কালীবাড়ি; उच्चारण:दॊख्खिनॆश्शॉर कालिबाड़ी),
उत्तर कोलकाता बैरकपुर में, विवेकानन्द सेतु के कोलकाता छोर के निकट, हुगली नदी के किनारे यह ऐतिहासिक मन्दिर है। इस मंदिर की मुख्य देवी, भवतारिणी हैं , जो माँ काली का रूप हैं। इस मंदिर को वर्ष 1854 में रानी रासमणि जी ने बनवाया था।
यह मन्दिर, प्रख्यात दार्शनिक एवं धर्मगुरु, स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि रही है, जो सिद्ध संत थे तथा रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। वर्ष 1857 - 68 के बीच, स्वामी रामकृष्ण इस मंदिर के प्रधान पुरोहित रहे।
मेरी संस्कृति ..मेरा देश ..मेरा अभिमान 🚩
(बांग्ला: দক্ষিণেশ্বর কালীবাড়ি; उच्चारण:दॊख्खिनॆश्शॉर कालिबाड़ी),
उत्तर कोलकाता बैरकपुर में, विवेकानन्द सेतु के कोलकाता छोर के निकट, हुगली नदी के किनारे यह ऐतिहासिक मन्दिर है। इस मंदिर की मुख्य देवी, भवतारिणी हैं , जो माँ काली का रूप हैं। इस मंदिर को वर्ष 1854 में रानी रासमणि जी ने बनवाया था।
यह मन्दिर, प्रख्यात दार्शनिक एवं धर्मगुरु, स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि रही है, जो सिद्ध संत थे तथा रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। वर्ष 1857 - 68 के बीच, स्वामी रामकृष्ण इस मंदिर के प्रधान पुरोहित रहे।
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Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
श्री नन्द भवन,
चौरासी खम्बा मंदिर,
दर्शन🙏🏻
पुरानी गोकुल
पोस्ट महावन
मथुरा से
चौरासी खम्बा मंदिर,
दर्शन🙏🏻
पुरानी गोकुल
पोस्ट महावन
मथुरा से
Forwarded from The Narrative
चाँद बावडी
जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-11) पर स्थित दौसा जिले में स्थित है "चाँद बावडी"।
9वीं शताब्दी में निर्मित इस बावडी का निर्माण राजा मिहिर भोज (जिन्हें कि चाँद नाम से भी जाना जाता था) ने करवाया था, और उन्हीं के नाम पर इस बावडी का नाम चाँद बावडी पडा।
दुनिया की सबसे गहरी यह बावडी चारों ओर से लगभग 35 मीटर चौडी है तथा इस बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं, जिससे पानी का स्तर चाहे कितना ही हो, आसानी से भरा जा सकता है।
13 मंजिला यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 3500 सीढियाँ (अनुमानित) हैं।
तीन मंजिला इस बावडी में नृत्य कक्ष व गुप्त सुरंग बनी हुई है।
इनकी दीवारों पर हिंदू धर्म के सभी 33 करोड देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे गये हैं। बावडी की सीढियों को आकर्षक एवं कलात्मक तरीके से बनाया गया है और यही इसकी खासियत भी है कि बावडी में नीचे उतरने वाला व्यक्ति वापस उसी सीढी से ऊपर नहीं चढ सकता।
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जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-11) पर स्थित दौसा जिले में स्थित है "चाँद बावडी"।
9वीं शताब्दी में निर्मित इस बावडी का निर्माण राजा मिहिर भोज (जिन्हें कि चाँद नाम से भी जाना जाता था) ने करवाया था, और उन्हीं के नाम पर इस बावडी का नाम चाँद बावडी पडा।
दुनिया की सबसे गहरी यह बावडी चारों ओर से लगभग 35 मीटर चौडी है तथा इस बावडी में ऊपर से नीचे तक पक्की सीढियाँ बनी हुई हैं, जिससे पानी का स्तर चाहे कितना ही हो, आसानी से भरा जा सकता है।
13 मंजिला यह बावडी 100 फ़ीट से भी ज्यादा गहरी है, जिसमें भूलभुलैया के रूप में 3500 सीढियाँ (अनुमानित) हैं।
तीन मंजिला इस बावडी में नृत्य कक्ष व गुप्त सुरंग बनी हुई है।
इनकी दीवारों पर हिंदू धर्म के सभी 33 करोड देवी-देवताओं के चित्र भी उकेरे गये हैं। बावडी की सीढियों को आकर्षक एवं कलात्मक तरीके से बनाया गया है और यही इसकी खासियत भी है कि बावडी में नीचे उतरने वाला व्यक्ति वापस उसी सीढी से ऊपर नहीं चढ सकता।
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Forwarded from The Narrative
अंकोरवाट मंदिर , कंबोडिया 🛕
यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थान है जो
लगभग 2 किलोमीटर के क्षैत्रफल में फैला हुआ है।
यह मूल रूप से खमेर साम्राज्य के लिए भगवान विष्णु के एक हिंदू मंदिर के रूप में बनाया गया था, जो धीरे-धीरे 12 वीं शताब्दी के अंत में बौद्ध मंदिर में बदल गया।
यह कंबोडिया के अंकोर में है जिसका पुराना नाम यशोधरपुर था। इसका निर्माण 1112 से 1153 ई सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में हुआ था।
अंकोरवाट मंदिर के निर्माण का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने शुरू किया और उनके उत्तराधिकारी धरणीन्द्रवर्मन के शासनकाल में पूरा हुआ।
अंकोरवाट मंदिर बहुत विशाल है और मंदिर के शिलाचित्रों में बताई गई है रामकथा ।
वर्ष 1986 से लेकर वर्ष 1993 तक भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस मंदिर के संरक्षण का जिम्मा संभाला था।
फ्रांस से स्वतंत्रता मिलने के बाद अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया देश का प्रतीक बन गया। राष्ट्र के लिए सम्मान के प्रतीक इस मंदिर को 1983 से कंबोडिया के राष्ट्रध्वज में भी स्थान दिया गया है।
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यह दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थान है जो
लगभग 2 किलोमीटर के क्षैत्रफल में फैला हुआ है।
यह मूल रूप से खमेर साम्राज्य के लिए भगवान विष्णु के एक हिंदू मंदिर के रूप में बनाया गया था, जो धीरे-धीरे 12 वीं शताब्दी के अंत में बौद्ध मंदिर में बदल गया।
यह कंबोडिया के अंकोर में है जिसका पुराना नाम यशोधरपुर था। इसका निर्माण 1112 से 1153 ई सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय के शासनकाल में हुआ था।
अंकोरवाट मंदिर के निर्माण का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने शुरू किया और उनके उत्तराधिकारी धरणीन्द्रवर्मन के शासनकाल में पूरा हुआ।
अंकोरवाट मंदिर बहुत विशाल है और मंदिर के शिलाचित्रों में बताई गई है रामकथा ।
वर्ष 1986 से लेकर वर्ष 1993 तक भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस मंदिर के संरक्षण का जिम्मा संभाला था।
फ्रांस से स्वतंत्रता मिलने के बाद अंकोरवाट मंदिर कंबोडिया देश का प्रतीक बन गया। राष्ट्र के लिए सम्मान के प्रतीक इस मंदिर को 1983 से कंबोडिया के राष्ट्रध्वज में भी स्थान दिया गया है।
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Forwarded from The Narrative
केटस राज मंदिर , पाकिस्तान🛕
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Forwarded from The Narrative
शारदा माता मंदिर, मैहर 🛕
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Forwarded from The Narrative
आज का पञ्चाङ्ग 🚩
सभी मित्रों को बैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी,
आनन्द संवत्सर विक्रम संवत 2078,बैशाख
की राम राम!
आज है नृसिंह जयंती
दिन मंगलवार
अंग्रेजी तिथी 25 मई 2021
आज का दिन सबके लिए मङ्गलमय और कल्याणकारी हो 🙏
सभी मित्रों को बैशाख शुक्ल पक्ष चतुर्दशी,
आनन्द संवत्सर विक्रम संवत 2078,बैशाख
की राम राम!
आज है नृसिंह जयंती
दिन मंगलवार
अंग्रेजी तिथी 25 मई 2021
आज का दिन सबके लिए मङ्गलमय और कल्याणकारी हो 🙏
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माँ भट्टारिका देवी मंदिर , ओड़िसा🛕
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Forwarded from Malook Peethadhishwar Swami Shri Rajendra Das Ji Maharaj (Jaikey Manwani)
कुछ ऑडियो फाइल्स कम्पलीट नही आ पा रही है इसका हमे खेद है कृपया कर के उन ऑडियो फाइल्स को रीनेम कीजिये और लाभ लीजिये।
वीडियो देखें🙏🙏👇👇
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Forwarded from हरे कृष्णा
Media is too big
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#कुतुब_मीनार 12वीं शताब्दी में किसी #कुतुबुद्दीन_ऐबक द्वारा नहीं बनवाया गया था। इसे 4वीं शताब्दी में बनाया गया था, जिसे उस समय '#ध्रुव_स्तम्भ’ के रूप में जाना जाता था।
ध्रुव स्तम्भ जिसे #राजा_विक्रमादित्य के शासन में बनाया गया था, जो एक भारतीय सम्राट था जो दुनिया के 3/4 हिस्से पर राज करता था।
ध्रुव स्तम्भ, जिसे क़ुतुबमीनार कहा जाता है, यह मुस्लिम शासकों द्वारा इतिहास को नष्ट करने के अलावा और कुछ नहीं है, मीनार एक ध्रुव स्तम्भ है ...
यह एक प्राचीन आर्य खगोलीय वेधशाला का केंद्रीय अवलोकन टॉवर है, इस टॉवर पर 24 पंखुड़ियों वाले कमल के फूल हैं। यह, प्रत्येक एक घंटे का प्रतिनिधित्व करते हैं।
साभार : Indian Culture and Tradition
प्रस्तुति सहयोग : ऋतु जस्सल
ध्रुव स्तम्भ जिसे #राजा_विक्रमादित्य के शासन में बनाया गया था, जो एक भारतीय सम्राट था जो दुनिया के 3/4 हिस्से पर राज करता था।
ध्रुव स्तम्भ, जिसे क़ुतुबमीनार कहा जाता है, यह मुस्लिम शासकों द्वारा इतिहास को नष्ट करने के अलावा और कुछ नहीं है, मीनार एक ध्रुव स्तम्भ है ...
यह एक प्राचीन आर्य खगोलीय वेधशाला का केंद्रीय अवलोकन टॉवर है, इस टॉवर पर 24 पंखुड़ियों वाले कमल के फूल हैं। यह, प्रत्येक एक घंटे का प्रतिनिधित्व करते हैं।
साभार : Indian Culture and Tradition
प्रस्तुति सहयोग : ऋतु जस्सल
Forwarded from The Narrative
आज का पञ्चाङ्ग
सभी मित्रों को बैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा,
आनन्द संवत्सर विक्रम संवत 2078, बैशाख
की राम राम 🙏
आज है बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती), कूर्म जयंती
पूर्णिमा, पूर्णिमा व्रत और सत्य व्रत
अंग्रेजी तिथी 26 मई 2021
दिन बुधवार
आज का दिन सबके लिए मङ्गलमय और कल्याणकारी हो
सभी मित्रों को बैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा,
आनन्द संवत्सर विक्रम संवत 2078, बैशाख
की राम राम 🙏
आज है बुद्ध पूर्णिमा (बुद्ध जयंती), कूर्म जयंती
पूर्णिमा, पूर्णिमा व्रत और सत्य व्रत
अंग्रेजी तिथी 26 मई 2021
दिन बुधवार
आज का दिन सबके लिए मङ्गलमय और कल्याणकारी हो
Forwarded from The Narrative
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अग्नि केली - एक अद्भुत परंपरा , कर्नाटक 🔥
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