Forwarded from सनातन संस्कृत के वीडियो
*…✍️चैन्नाकेशव मंदिर ऐतिहासिक धरोहर…*
*भारतीय शिल्पकला का अद्भुत नजारा…*👌👌
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Video from जैकी मनवानी
हजारो सालों पहले बना यह शिवमंदिर, क्या वास्तव में मानवों द्वारा निर्मित है ??
यह मंदिर तमिलनाडु के Kulumalagai पंचायत में स्तिथ है। यह मंदिर एक ही पहाड़ को काटकर बना है। पहाड़ो पर तो यह मंदिर है ही....लेकिन यह मंदिर पहाड़ो को काटकर भी उससे भी 25 फिट गहरा हैं।
क्या यह मंदिर किसी मानव द्वारा निर्मित लगता भी है ?? या फिर यह कोई UFO है ??
अंग्रेजी चैनल पर एक सीरीज चलाई गई थी Ancient alians अर्थात प्राचीन परग्रही ।। जो धरती पर आते थे। हमारे प्रत्येक पुराणों में देवताओं का अन्य लोको से आना लिखा है, हमारे प्रत्येक पुराणों धर्मग्रंथों आदि में वर्णित है, देवता अपना विमान लेकर आते थे, ओर वह हवा से भी ज़्यादा तेज गति से चलने वाले होते थे, की पलक झपकते ही आंखों से ओझल। महाभारत में वेदव्यास पांडवों से जब भी मिलने आते है, उनका आना भी अचानक, ओर जाना भी अचानक ही होता था।
हमे किसी बात को एकदम नकार देने से बचना चाहिए, जो लिखा है, ओर जो बातें बाहर हो रही है, भले ही वह विदेशी कर रहा हो, उसे एकदम से नही झुठलाया जा सकता ।।
अगर हमने अपने मन मे यह विश्वास कर लिया कि एक शक्ति है, जो टेक्नॉलजी में हमसे आगे नही, बहुत आगे है, ओर हमे खुद जो टेक्नॉलजी मिलती है, उन्ही के माध्यम से मिलती है...तो भगवान पर आस्था और विश्वास...दुगना हो जाएगा... फिर शायद आपको कोई भी पाखंड में फंसने की जरूरत ना पड़े, या कोई भी प्राचीन परम्परा आपको पाखंड लगे ही न....
इस मंदिर को देखते रहिए, और हैरान होते रहिए....
सुप्रभात हर हर महादेव 🙏🚩🚩
#हरेकृष्णा #हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #history #मोदीजी #मंदिर #temples #श्याम #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #mandir #modiji #temple #radhe #krishna #ram #harekrishna #india #राम #राधेगोविंद #radhegovind #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #sanatan #sanatandharam #yatra #madidarshan #मन्दिरदर्शन #भारत #शिव #shiv
यह मंदिर तमिलनाडु के Kulumalagai पंचायत में स्तिथ है। यह मंदिर एक ही पहाड़ को काटकर बना है। पहाड़ो पर तो यह मंदिर है ही....लेकिन यह मंदिर पहाड़ो को काटकर भी उससे भी 25 फिट गहरा हैं।
क्या यह मंदिर किसी मानव द्वारा निर्मित लगता भी है ?? या फिर यह कोई UFO है ??
अंग्रेजी चैनल पर एक सीरीज चलाई गई थी Ancient alians अर्थात प्राचीन परग्रही ।। जो धरती पर आते थे। हमारे प्रत्येक पुराणों में देवताओं का अन्य लोको से आना लिखा है, हमारे प्रत्येक पुराणों धर्मग्रंथों आदि में वर्णित है, देवता अपना विमान लेकर आते थे, ओर वह हवा से भी ज़्यादा तेज गति से चलने वाले होते थे, की पलक झपकते ही आंखों से ओझल। महाभारत में वेदव्यास पांडवों से जब भी मिलने आते है, उनका आना भी अचानक, ओर जाना भी अचानक ही होता था।
हमे किसी बात को एकदम नकार देने से बचना चाहिए, जो लिखा है, ओर जो बातें बाहर हो रही है, भले ही वह विदेशी कर रहा हो, उसे एकदम से नही झुठलाया जा सकता ।।
अगर हमने अपने मन मे यह विश्वास कर लिया कि एक शक्ति है, जो टेक्नॉलजी में हमसे आगे नही, बहुत आगे है, ओर हमे खुद जो टेक्नॉलजी मिलती है, उन्ही के माध्यम से मिलती है...तो भगवान पर आस्था और विश्वास...दुगना हो जाएगा... फिर शायद आपको कोई भी पाखंड में फंसने की जरूरत ना पड़े, या कोई भी प्राचीन परम्परा आपको पाखंड लगे ही न....
इस मंदिर को देखते रहिए, और हैरान होते रहिए....
सुप्रभात हर हर महादेव 🙏🚩🚩
#हरेकृष्णा #हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #history #मोदीजी #मंदिर #temples #श्याम #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #mandir #modiji #temple #radhe #krishna #ram #harekrishna #india #राम #राधेगोविंद #radhegovind #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #sanatan #sanatandharam #yatra #madidarshan #मन्दिरदर्शन #भारत #शिव #shiv
यह #अलौकिक_सत्य घटना है।
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले की है।
"चन्द्रमा जनेऊ और मस्तक पर बिंदी.!"
इन अद्भुत चिन्हों वाले इस शिवलिंग के बारे में सत्रह साल के ( बालक ) नाविक के स्वप्न मेँ आया ।
स्वप्न में यह कहा गया कि मुझे यंहा से बाहर निकाल मैं नर्मदा जी के मध्य में स्थित हूँ।
विशेष बात है कि जिस स्थान पर शिवलिंग निकला उस बालक की नाव वंहा रुक जाती थी।
उसे कुछ समझ नही आता था उसने यह बात दूसरे नाविकों को बताई वो उस स्थान पर गए वंहा जाकर उन्होंने पानी मेँ डुबकी लगाई।
उन्हें शिवलिंग नजर आया लेकिन वह उन लोगो से हिल भी नही पाया फिर उन्होंने उसी लडके को पानी मेँ उतारा।
यह कह कर कि तुझे स्वप्न आया तो तू ही निकाल फिर लडके ने अकेले ही शिवलिंग निकाल कर नाव पर रख दिया।
ये सच्ची घटना दवाना के पास ब्राह्मणगाँव की है।
अभी शिवलिंग घाट पर ही रखा है बड़ा ही विलक्षण शिवलिंग है।
फिलहाल गांव वालों ने मन्दिर निर्माणकार्य शुरू कर दिया है।
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले की है।
"चन्द्रमा जनेऊ और मस्तक पर बिंदी.!"
इन अद्भुत चिन्हों वाले इस शिवलिंग के बारे में सत्रह साल के ( बालक ) नाविक के स्वप्न मेँ आया ।
स्वप्न में यह कहा गया कि मुझे यंहा से बाहर निकाल मैं नर्मदा जी के मध्य में स्थित हूँ।
विशेष बात है कि जिस स्थान पर शिवलिंग निकला उस बालक की नाव वंहा रुक जाती थी।
उसे कुछ समझ नही आता था उसने यह बात दूसरे नाविकों को बताई वो उस स्थान पर गए वंहा जाकर उन्होंने पानी मेँ डुबकी लगाई।
उन्हें शिवलिंग नजर आया लेकिन वह उन लोगो से हिल भी नही पाया फिर उन्होंने उसी लडके को पानी मेँ उतारा।
यह कह कर कि तुझे स्वप्न आया तो तू ही निकाल फिर लडके ने अकेले ही शिवलिंग निकाल कर नाव पर रख दिया।
ये सच्ची घटना दवाना के पास ब्राह्मणगाँव की है।
अभी शिवलिंग घाट पर ही रखा है बड़ा ही विलक्षण शिवलिंग है।
फिलहाल गांव वालों ने मन्दिर निर्माणकार्य शुरू कर दिया है।
VID-20220714-WA0252.mp4
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*द्रोणेश्वर महादेव साँसनगिर गिर गढ्डा से नजदीक सौराष्ट्र गुजरात ये मंदिर में नंदेश्वर जी के मुँह से जलधारा निकल रहा है मच्छउंड्री नदी के किनारे पर है ये मंदिर आजतक किसीको भी पता नही है ये जलधारा कहां से आ रही है हर ऋतु में जलधारा होती रहती है ये मंदिर 8000 वर्ष पुराना है अपने पुराणों में भी इस मंदिर का उल्लेख है 🙏🏻जय जय हो भोलेनाथ की जय हो द्रोनेश्वर महादेव की*🕉️🙏🏻🚩🙌🏻
*देवाधिदेव महादेव🙏🏻 के ज्योतिर्लिंगों में से एक रावणेश्वर महादेव,*
*बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड।*
*इस ज्योतिर्लिंग की कुछ विशिष्टताएँ हैं।*
*सामान्यतः शिव🙏🏻मन्दिरों के शिखर पर कलश और त्रिशूल लगा होता है किन्तु बैद्यनाथ धाम मन्दिर विश्व का इकलौता मन्दिर है जिसके ऊपर त्रिशूल नहीं "पञ्चशूल" स्थापित है, इसीलिए इस शिव मन्दिर का महत्व अन्य से विशिष्ट है।*
*ऐसी मान्यता है जिस प्रकार काशी शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है और बाबा विश्वनाथ🙏🏻 काशी की सुरक्षा स्वयं करते हैं उसी प्रकार बैद्यनाथ धाम पञ्चशूल पर टिका हुआ है और इसकी सुरक्षा बाबा रावणेश्वर करते हैं। ये पञ्चशूल सम्पूर्ण देवघर नगर का सुरक्षा कवच है।*
*पञ्चशूल दर्शन का महत्व शिवलिङ्ग स्पर्श के समतुल्य माना जाता है। यह पञ्चशूल विश्व गौरव है।*
*बाबा बैद्यनाथ मन्दिर का स्वर्ण कलश व पञ्चशूल भगवान शिव के पञ्चरूप रुद्रावतार हैं। यह लगभग २०७५ वर्ष पुरातन मन्दिर माना जाता है।*
*इस पञ्चशूल को प्रतिवर्ष एक बार शिवरात्रि में नीचे उतार कर लाया जाता है और पञ्चशूल का विधि विधान से पूजन अर्चन, अभिषेक विशेष प्रक्रिया से किया जाता है। पूजन के उपरांत पञ्चशूल को पुनः र्स्थापित कर दिया जाता है !!सभी सनातनियों को श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं🕉️🙏🏻💐हर हर महादेव शिव शंभु"*🕉️🙏🏻🚩🙌🏻🔱
*बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड।*
*इस ज्योतिर्लिंग की कुछ विशिष्टताएँ हैं।*
*सामान्यतः शिव🙏🏻मन्दिरों के शिखर पर कलश और त्रिशूल लगा होता है किन्तु बैद्यनाथ धाम मन्दिर विश्व का इकलौता मन्दिर है जिसके ऊपर त्रिशूल नहीं "पञ्चशूल" स्थापित है, इसीलिए इस शिव मन्दिर का महत्व अन्य से विशिष्ट है।*
*ऐसी मान्यता है जिस प्रकार काशी शिव के त्रिशूल पर टिका हुआ है और बाबा विश्वनाथ🙏🏻 काशी की सुरक्षा स्वयं करते हैं उसी प्रकार बैद्यनाथ धाम पञ्चशूल पर टिका हुआ है और इसकी सुरक्षा बाबा रावणेश्वर करते हैं। ये पञ्चशूल सम्पूर्ण देवघर नगर का सुरक्षा कवच है।*
*पञ्चशूल दर्शन का महत्व शिवलिङ्ग स्पर्श के समतुल्य माना जाता है। यह पञ्चशूल विश्व गौरव है।*
*बाबा बैद्यनाथ मन्दिर का स्वर्ण कलश व पञ्चशूल भगवान शिव के पञ्चरूप रुद्रावतार हैं। यह लगभग २०७५ वर्ष पुरातन मन्दिर माना जाता है।*
*इस पञ्चशूल को प्रतिवर्ष एक बार शिवरात्रि में नीचे उतार कर लाया जाता है और पञ्चशूल का विधि विधान से पूजन अर्चन, अभिषेक विशेष प्रक्रिया से किया जाता है। पूजन के उपरांत पञ्चशूल को पुनः र्स्थापित कर दिया जाता है !!सभी सनातनियों को श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं🕉️🙏🏻💐हर हर महादेव शिव शंभु"*🕉️🙏🏻🚩🙌🏻🔱
*कम से कम सोशल मीडिया पर तो अपने मंदिरों का प्रचार कीजिये ।*
✍ *हम अपनी संस्कृति के कमजोर प्रचारक है, ओर इसका हमे बहुत नुकसान उठाना पड़ा है ।*
✍ *हम कभी भी अपने मंदिरों की यात्रा नहीं करते और ना ही मंदिरो के लिए कोई उत्सुकता है।*
✍ *यदि हम चाहते हैं कि हमारे मंदिर अजूबों की लिस्ट में शामिल हों, तो विदेशियों से आशा ना रखकर सबसे पहले हमें अपने मंदिरों का भ्रमण और सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार करना पड़ेगा ।*
🚩 *हमारे सौराष्ट्र के समुद्र तट पर स्थित भगवान श्री कृष्ण का मंदिर*
🚩 *(श्री द्वारिकाधीश मंदिर, गुजरात)*
✍ *अगर इसे मुगलों ने बनवाया होता तो यह हमारे इतिहास की किताबों में पहले पन्ने पर होता।*
*सुंदर और आकर्षक है .. !!*
*भारतीय शिल्प कला का अद्भुत नमूना है .. !!*
*पर अफ़सोस देश इसके बारे में कहाँ जानता है। ये दुनिया की सबसे श्रेष्ठ वास्तु है। अद्भुत....!
✍ *हम अपनी संस्कृति के कमजोर प्रचारक है, ओर इसका हमे बहुत नुकसान उठाना पड़ा है ।*
✍ *हम कभी भी अपने मंदिरों की यात्रा नहीं करते और ना ही मंदिरो के लिए कोई उत्सुकता है।*
✍ *यदि हम चाहते हैं कि हमारे मंदिर अजूबों की लिस्ट में शामिल हों, तो विदेशियों से आशा ना रखकर सबसे पहले हमें अपने मंदिरों का भ्रमण और सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार करना पड़ेगा ।*
🚩 *हमारे सौराष्ट्र के समुद्र तट पर स्थित भगवान श्री कृष्ण का मंदिर*
🚩 *(श्री द्वारिकाधीश मंदिर, गुजरात)*
✍ *अगर इसे मुगलों ने बनवाया होता तो यह हमारे इतिहास की किताबों में पहले पन्ने पर होता।*
*सुंदर और आकर्षक है .. !!*
*भारतीय शिल्प कला का अद्भुत नमूना है .. !!*
*पर अफ़सोस देश इसके बारे में कहाँ जानता है। ये दुनिया की सबसे श्रेष्ठ वास्तु है। अद्भुत....!
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धन्य है वो स्कूल जिसमे ऐसी शिक्षा दी जाती है🙏🏻👇
*🟠● हमारी ●ঔৣ● धरोहर ●🟠*
~~~~~~
🌹#अचलेश्वर महादेव मंदिर,ग्वालियर
ग्वालियर के इस मंदिर का विशेष महत्व है। शिवजी के हठ का ये जीता-जागता साक्ष्य है। भक्तों की माने तो यहां पर महादेव अपनी जिद्द के कारण ही बीच सड़क पर विराजमान है। महादेव को इस स्थान से हटाने के भऱसक प्रयास हुए लेकिन इंच भर भी कोई हिला नहीं पाया। महादेव की शक्ति देखकर भक्तों ने यहीं पर बीच सड़क मंदिर को स्थापित कर दिया।
अचलेश्वर महादेव जी का नामकरण सिंधिया रियासत के शासकों ने किया है। भक्तों के मुताबिक तत्कालीन शासकों का काफिला इस मार्ग से गुजर रहा था। तब उन्होंने महादेव की पिंडी को बीच रास्ते में देखा। उन्होंने पिंडी को हटाने का आदेश दिया। राजा की सेना ने पिंडी को हटाने के लिए हर संभव प्रयास किया। पिंडी को रस्सियों से बांधकर हाथियों से खिंचवाया लेकिन हिला भी न पाए। तब उन्हें महादेव की शक्ति का अहसास हुआ और इसका नाम अचलेश्लर पड़ा। अब ये स्थान आस्था का केंद्र बन चुका है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताएं जानकर आप हैरान रह जाएंगे। मंदिर में लगा सवा क्विंटल का घंटा इसकी महिमा बयान करते हैं। दूध और जल से महादेव का अभिषेक होता है। डमरु और घंटे की ध्वनी से सारा माहौल शिवमयी हो जाता है। मंदिर में 1 किलो 170 ग्राम सोने का मुकुट भी है। मुकुट के उपरी हिस्से में महादेव जी की प्रतिमा इस पर उकेरी गई है। इसके चारों ओर बाहरी हिस्से मे 12 ज्योतिर्लिंगो के दर्शन किए जा सकते हैं।
महादेव के मंदिर में आने वाले कई ऐसे भी भक्त हैं जिनको भोलेनाथ के साक्षात दर्शन होने का दावा करते हैं और कहते हैं कि उनकी एक-एक सांस सिर्फ बाबा की कृपा से ही चल रही है। महाकाल की नगरी के अदभुत दर्शन करने जो भी यहां पर आता है उसके मन की मुराद महादेव जी अवश्य ही पूरा करते हैं। भक्तों को कोई भी कष्ट हो अचलेश्वर महादेव जरुर हर लेते हैं।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹#अचलेश्वर महादेव मंदिर,ग्वालियर
ग्वालियर के इस मंदिर का विशेष महत्व है। शिवजी के हठ का ये जीता-जागता साक्ष्य है। भक्तों की माने तो यहां पर महादेव अपनी जिद्द के कारण ही बीच सड़क पर विराजमान है। महादेव को इस स्थान से हटाने के भऱसक प्रयास हुए लेकिन इंच भर भी कोई हिला नहीं पाया। महादेव की शक्ति देखकर भक्तों ने यहीं पर बीच सड़क मंदिर को स्थापित कर दिया।
अचलेश्वर महादेव जी का नामकरण सिंधिया रियासत के शासकों ने किया है। भक्तों के मुताबिक तत्कालीन शासकों का काफिला इस मार्ग से गुजर रहा था। तब उन्होंने महादेव की पिंडी को बीच रास्ते में देखा। उन्होंने पिंडी को हटाने का आदेश दिया। राजा की सेना ने पिंडी को हटाने के लिए हर संभव प्रयास किया। पिंडी को रस्सियों से बांधकर हाथियों से खिंचवाया लेकिन हिला भी न पाए। तब उन्हें महादेव की शक्ति का अहसास हुआ और इसका नाम अचलेश्लर पड़ा। अब ये स्थान आस्था का केंद्र बन चुका है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर की विशेषताएं जानकर आप हैरान रह जाएंगे। मंदिर में लगा सवा क्विंटल का घंटा इसकी महिमा बयान करते हैं। दूध और जल से महादेव का अभिषेक होता है। डमरु और घंटे की ध्वनी से सारा माहौल शिवमयी हो जाता है। मंदिर में 1 किलो 170 ग्राम सोने का मुकुट भी है। मुकुट के उपरी हिस्से में महादेव जी की प्रतिमा इस पर उकेरी गई है। इसके चारों ओर बाहरी हिस्से मे 12 ज्योतिर्लिंगो के दर्शन किए जा सकते हैं।
महादेव के मंदिर में आने वाले कई ऐसे भी भक्त हैं जिनको भोलेनाथ के साक्षात दर्शन होने का दावा करते हैं और कहते हैं कि उनकी एक-एक सांस सिर्फ बाबा की कृपा से ही चल रही है। महाकाल की नगरी के अदभुत दर्शन करने जो भी यहां पर आता है उसके मन की मुराद महादेव जी अवश्य ही पूरा करते हैं। भक्तों को कोई भी कष्ट हो अचलेश्वर महादेव जरुर हर लेते हैं।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*