जब दुनियाँ पत्थरों को घिसकर आग जलाना सीख रही थी
तब हमारे पूर्वज पहाड़ो को तोड़कर महादेव को अपनी अदम्य शक्ति का सबूत दे रहे थे ।
(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)
सत्य सनातन धर्म 🙏🙏
तब हमारे पूर्वज पहाड़ो को तोड़कर महादेव को अपनी अदम्य शक्ति का सबूत दे रहे थे ।
(शिव मंदिर, थिरुमायम फोर्ट, तमिलनाडु)
सत्य सनातन धर्म 🙏🙏
#आपको_ताजमहल_अजूबा_लगता_है,तो यह पढ़िए बारिश की पूर्व सूचना देता है कानपुर का जगन्नाथ मंदिर ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए
ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा
यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य
यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -
ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है
अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है
वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर
क्या आप कल्पना कर सकते हैं किसी ऐसे भवन की जिसकी छत चिलचिलाती धूप में टपकने लगे बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए
ये घटना है तो हैरान कर देने वाली लेकिन सच है उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकास खंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा
यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य
यह घटनाक्रम किसी आम ईमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में
छत टपकने से हो जाती है बारिश की आहट -
ग्रामीण बताते हैं कि बारिश होने के छह-सात दिन पहले मंदिर की छत से पानी की बूंदे टपकने लगती हैं इतना ही नहीं जिस आकार की बूंदे टपकती हैं उसी आधार पर बारिश होती है
अब तो लोग मंदिर की छत टपकने के संदेश को समझकर जमीनों को जोतने के लिए निकल पड़ते हैं हैरानी में डालने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बारिश शुरु होती है छत अंदर से पूरी तरह सूख जाती है
वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए रहस्य -
मंदिर
VID-20220604-WA0012.mp4
9.2 MB
👆 *करक हाइवे मलेशिया स्थित यह शिवलिंग पर साल के 365 दिन पानी से जलाभिषेक होता है, पर पानी कहाँ से आता है, कोई नहीं जानता...शिवलिंगम के ठीक ऊपर आसमान से गिरता है। शिवलिंगम के आसपास कोई पानी गिरने का झरना या पहाड़ी भी नहीं है। कितना अद्भुत और आश्चर्यजनक और चमत्कारी शिवलिंग है....ॐ नमः शिवाय..!*
क्या ये लकड़ी है??,,,काठ से बना है???
नहीं,,ये पत्थर है,,,
अचरज मत करिए,,ये तो सनातन स्थापत्य विज्ञान का छोटा सा नमूना है,,,
जो मिटा दिया है आपकी किताबों से इतिहासकारों ने,,
काशीराज_काली_मंदिर_बनारस
नहीं,,ये पत्थर है,,,
अचरज मत करिए,,ये तो सनातन स्थापत्य विज्ञान का छोटा सा नमूना है,,,
जो मिटा दिया है आपकी किताबों से इतिहासकारों ने,,
काशीराज_काली_मंदिर_बनारस
*🟠●आर्यावर्त का●अघोर अतीत●🟠*
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🌹प्राचीन हिन्दू राजाओं के विस्तृत साम्राज्य का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वैभवशाली मंदिर भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में है ।
यह 235 हिंदू मंदिरों के खंडहरों का एक समूह है,
1549 ईसवी में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद यहाँ सैकड़ो मंदिर सदियों तक लावा में दबे रहे, पुरातत्वविदों ने 1885 ईसवी में इलाके की खुदाई शुरू की, आसपास के लोग मंदिरो की विशालता और वैभव को देखकर दंग रह गए, यहां तक कि फ्रांसीसी यात्री जूल लिखते हैं कि दूसरे धर्म के हाजियों का भी स्वाभिमान जाग उठा और मंदिर की ओर पूजा करने के लिए दौड़ पड़े ।
(प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया)
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹प्राचीन हिन्दू राजाओं के विस्तृत साम्राज्य का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वैभवशाली मंदिर भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में है ।
यह 235 हिंदू मंदिरों के खंडहरों का एक समूह है,
1549 ईसवी में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद यहाँ सैकड़ो मंदिर सदियों तक लावा में दबे रहे, पुरातत्वविदों ने 1885 ईसवी में इलाके की खुदाई शुरू की, आसपास के लोग मंदिरो की विशालता और वैभव को देखकर दंग रह गए, यहां तक कि फ्रांसीसी यात्री जूल लिखते हैं कि दूसरे धर्म के हाजियों का भी स्वाभिमान जाग उठा और मंदिर की ओर पूजा करने के लिए दौड़ पड़े ।
(प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया)
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
*🟠● हमारी ●ঔৣ● धरोहर ●🟠*
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🌹लाखामंडल शिव मंदिर देहरादून, उत्तराखंड
हजार वर्ष प्राचीन इस भव्य मंदिर का शिवलिंग ग्रेफाइट से बना एक अनोखा चमकता शिवलिंग हैं I जिस पर जल अर्पित करने पर यह दर्पण की तरह चमकता हैं I और अासपास उपस्थित दृश्य को प्रतिबिंबित करता हैं I
मान्यता है कि इस शिवलिंग पर जिसका चेहरा प्रतिबिंबित हो जाता है वो धन्य हो जाता है ।। वह पाप और दुर्भाग्य से मुक्त हो जाता है I
लाखमंडल का इतिहास महाभारत कालीन है, यहां पांडव गुफा भी है ।।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
🌹लाखामंडल शिव मंदिर देहरादून, उत्तराखंड
हजार वर्ष प्राचीन इस भव्य मंदिर का शिवलिंग ग्रेफाइट से बना एक अनोखा चमकता शिवलिंग हैं I जिस पर जल अर्पित करने पर यह दर्पण की तरह चमकता हैं I और अासपास उपस्थित दृश्य को प्रतिबिंबित करता हैं I
मान्यता है कि इस शिवलिंग पर जिसका चेहरा प्रतिबिंबित हो जाता है वो धन्य हो जाता है ।। वह पाप और दुर्भाग्य से मुक्त हो जाता है I
लाखमंडल का इतिहास महाभारत कालीन है, यहां पांडव गुफा भी है ।।
*꧁༒ॐ हर हर महादेव ॐ ༒꧂*
पाकिस्तान में ये प्रतिमा 11 मुट्ठी मिट्टी हटाने पर मिली थी, भक्त आज भी लगाते हैं 11 परिक्रमाएं
जीवन मंत्र डेस्क. अविभाजित भारत का एक हनुमान मंदिर बंटवारे में पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। कराची शहर में मौजूद पंचमुखी हनुमान का ये मंदिर बहुत चमत्कारी माना जाता है। ये मंदिर अपने आप में अलग और अनोखा है। कराची के इस हनुमान मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है। कहा जाता है कि इस मंदिर की पंचमुखी हनुमान मूर्ति हजारों साल पुरानी है।
कुछ जगह पर उल्लेख मिलता है कि भगवान राम भी इस जगह एक बार आ चुके हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर में हनुमानजी के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है।माना जाता है कि जिस जगह पर यह मंदिर है, वहां से 11 मुट्ठी मिट्टी हटाने पर यह पंचमुखी हनुमान मूर्ति प्रकट हुई थी। इस मंदिर का और अंक 11 का गहरा संबंध है। इस मंदिर में भगवान हनुमान की 11 परिक्रमा लगाने पर भक्तों की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती है।
1882 में किया गया था मंदिर का पुनर्निर्माण
मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर कई लाख साल पुराना है, लेकिन आज का जो मंदिर है उसका इतिहार 18वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर का वर्ष 1882 में पुनर्निर्माण किया गया था।
जीवन मंत्र डेस्क. अविभाजित भारत का एक हनुमान मंदिर बंटवारे में पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। कराची शहर में मौजूद पंचमुखी हनुमान का ये मंदिर बहुत चमत्कारी माना जाता है। ये मंदिर अपने आप में अलग और अनोखा है। कराची के इस हनुमान मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना है। कहा जाता है कि इस मंदिर की पंचमुखी हनुमान मूर्ति हजारों साल पुरानी है।
कुछ जगह पर उल्लेख मिलता है कि भगवान राम भी इस जगह एक बार आ चुके हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर में हनुमानजी के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है।माना जाता है कि जिस जगह पर यह मंदिर है, वहां से 11 मुट्ठी मिट्टी हटाने पर यह पंचमुखी हनुमान मूर्ति प्रकट हुई थी। इस मंदिर का और अंक 11 का गहरा संबंध है। इस मंदिर में भगवान हनुमान की 11 परिक्रमा लगाने पर भक्तों की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती है।
1882 में किया गया था मंदिर का पुनर्निर्माण
मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर कई लाख साल पुराना है, लेकिन आज का जो मंदिर है उसका इतिहार 18वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर का वर्ष 1882 में पुनर्निर्माण किया गया था।
ये निर्माण आपको मानने पर मजबूर कर देंगे कि ताजमहल तो केवल खूबसूरत है लेकिन असली आश्चर्य तो हमारे मंदिर ही हैं..।
इस मंदिर की छत को देखिए । रिंग, नट, बोल्ट, छड़ और यहां तक कि एक सजावटी सांप और पूरी छत - ये सभी ग्रेनाइट पत्थरों से बने हैं ।
है ना आश्चर्य ?
लेकिन इन्हें हमारे पाठ्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया क्योकिं हमारे फर्जीपंथी इतिहासकारों को मुगलों के मकबरों की प्रशंसा करने से फुर्सत नहीं मिल सकी ।
(अथमनाथस्वामी मंदिर, तमिलनाडु)
#हरेकृष्णा #हनुमान #ऐतिहासिकमंदिर #मंदिर #सिद्ध #history #मोदीजी #मंदिर #temples #श्याम #कृष्णा #शिव #नारायण #ब्रम्हा #mandir #modiji #temple #radhe #krishna #ram #harekrishna #india #राम #राधेगोविंद #radhegovind #सनातनधर्म #संस्कृति #आस्था #sanatan #sanatandharam #yatra #madidarshan #मन्दिरदर्शन
इस मंदिर की छत को देखिए । रिंग, नट, बोल्ट, छड़ और यहां तक कि एक सजावटी सांप और पूरी छत - ये सभी ग्रेनाइट पत्थरों से बने हैं ।
है ना आश्चर्य ?
लेकिन इन्हें हमारे पाठ्यक्रमों में शामिल नहीं किया गया क्योकिं हमारे फर्जीपंथी इतिहासकारों को मुगलों के मकबरों की प्रशंसा करने से फुर्सत नहीं मिल सकी ।
(अथमनाथस्वामी मंदिर, तमिलनाडु)
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