🤔क्या कोई इस मिस्ट्री को सुलझा सकता है ...?
तंजौर मंदिर के रहस्य --- टॉप पर कैप पत्थर है।
तंजोर मंदिर के शीर्ष पर टोपी के पत्थर का वजन वजन 80 टन है।
इस मंदिर की परछाईं ज़मीन पर नहीं पड़ती,,,
कैप स्टोन के बारे में मुख्य उद्गार यह है कि तंजौर मंदिर के निर्माणकर्ता कैसे आए और तंजौर मंदिर में गोपुरम के शीर्ष पर टोपी का पत्थर रखने में सक्षम कैसे हुए??
इन कार्यों को करने के लिए उन दिनों में कोई क्रैन या कोई चीज का उच्च उपयोग नहीं किया गया था। केवल एक चीज जो हाथियों की मदद ले सकते थे।
तंजौर बड़े मंदिर की विशाल टोपी इस तरहसे बनाई गई है कि तंजौर के मंदिर गोपुरम का मैदान जमीन पर नहीं गिरेगा। यह बस अपने जगह पर ही गिर सकती है।
इस विशेष योजना और निर्माण के प्रकार के बारे में ज्ञान होना एक आसान काम नहीं है ...।
मैं इसी लिए कहता रहता हूं दुनिया जब नंगी पेड़ पत्ते लपेट कर रहती थी ओर जानवर मारकर खाती थी तब हमारे पास परमात्मा की वाणी वेद थे और आधुनिक इंजीनियर तो कल बने है पर सनातन के कला कौशल ने सदियो पहले भव्य भारत का निर्माण कर दिया था ,गर्व करो कि हम सनातनी है और इस भारत भूमि पर जन्मे है।
तंजौर मंदिर के रहस्य --- टॉप पर कैप पत्थर है।
तंजोर मंदिर के शीर्ष पर टोपी के पत्थर का वजन वजन 80 टन है।
इस मंदिर की परछाईं ज़मीन पर नहीं पड़ती,,,
कैप स्टोन के बारे में मुख्य उद्गार यह है कि तंजौर मंदिर के निर्माणकर्ता कैसे आए और तंजौर मंदिर में गोपुरम के शीर्ष पर टोपी का पत्थर रखने में सक्षम कैसे हुए??
इन कार्यों को करने के लिए उन दिनों में कोई क्रैन या कोई चीज का उच्च उपयोग नहीं किया गया था। केवल एक चीज जो हाथियों की मदद ले सकते थे।
तंजौर बड़े मंदिर की विशाल टोपी इस तरहसे बनाई गई है कि तंजौर के मंदिर गोपुरम का मैदान जमीन पर नहीं गिरेगा। यह बस अपने जगह पर ही गिर सकती है।
इस विशेष योजना और निर्माण के प्रकार के बारे में ज्ञान होना एक आसान काम नहीं है ...।
मैं इसी लिए कहता रहता हूं दुनिया जब नंगी पेड़ पत्ते लपेट कर रहती थी ओर जानवर मारकर खाती थी तब हमारे पास परमात्मा की वाणी वेद थे और आधुनिक इंजीनियर तो कल बने है पर सनातन के कला कौशल ने सदियो पहले भव्य भारत का निर्माण कर दिया था ,गर्व करो कि हम सनातनी है और इस भारत भूमि पर जन्मे है।
ऐसा अद्भुत आलोकित सनातन अजूबा जिसे देखकर आखे स्तब्ध और जिव्हा निशब्द हो जाए, सोचने पर मजबूर कर दे हमारे पूर्वज मानव ही थे या देवात्मा शिल्पी
चैन्नाकेशव मंदिर की आश्चर्यजनक नक्काशी मूर्तिकला वास्तुकला सदियों पुरानी इंजीनियरिंग को विज्ञापनों मे जगह नही
आप खुद लोगो तक पहुचाईए!🚩
चैन्नाकेशव मंदिर की आश्चर्यजनक नक्काशी मूर्तिकला वास्तुकला सदियों पुरानी इंजीनियरिंग को विज्ञापनों मे जगह नही
आप खुद लोगो तक पहुचाईए!🚩
भगवान शिव का वाहन (वाहन) नंदीशिव के अधिकांश मंदिरों में आप उन्हें महादेव के सामने देख सकते हैं लेकिन काशी में वे ज्ञानवमी मस्जिद की तरफ मुंह किए हुए हैं।
ऐसा माना जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर की मुख्य संरचना मुगल शासकों द्वारा वहां पर एक मस्जिद बनाने के लिए ध्वस्त कर दी गई थी।नंदी की यह मूर्ति अब भी अपने स्वामी के लौटने की प्रतीक्षा कर रही है।
ऐसा माना जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर की मुख्य संरचना मुगल शासकों द्वारा वहां पर एक मस्जिद बनाने के लिए ध्वस्त कर दी गई थी।नंदी की यह मूर्ति अब भी अपने स्वामी के लौटने की प्रतीक्षा कर रही है।
इस स्तम्भ को देखो, और इसे बनाने वालों के दिमाग के बारे में सोचो ..कितने ब्रिलिएंट रहे होंगे ।
आखिर वो लोग बिना किसी त्रुटि के छोटी से छोटी डिटेल की नक्काशी कैसे कर लेते थे ? छेनी पर हथौड़े का एक गलत प्रहार महीनों के कड़ी मेहनत को नष्ट कर सकती थी ।
वामपंथी इतिहासकारों के तर्क अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि इसे बनाने के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया होगा ।
(पिल्लला मर्री मंदिर, तेलंगाना)
आखिर वो लोग बिना किसी त्रुटि के छोटी से छोटी डिटेल की नक्काशी कैसे कर लेते थे ? छेनी पर हथौड़े का एक गलत प्रहार महीनों के कड़ी मेहनत को नष्ट कर सकती थी ।
वामपंथी इतिहासकारों के तर्क अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि इसे बनाने के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया होगा ।
(पिल्लला मर्री मंदिर, तेलंगाना)
#तमिलनाडु के #रामेश्वरम में यह #रामनाथस्वामी_मंदिर है!इसका अद्भूत सोंदर्य और वास्तुकला देखने योग्य है😲
इस आर्किटेक्चरल मार्वल की तुलना स्टैड,स्टफ और बेरंग ताजमहल से करें और आपको पता चल जाएगा कि कैसे इतिहासकारों के कॉमेडी गिरोह ने स्वदेशी वास्तुशिल्प विरासत को गिराने की साजिश रची और ताजमहल को वास्तुविद के रूप में प्रस्तुत किया जिसे भारत का एकमात्र हिस्सा माना जा रहा है!
इस आर्किटेक्चरल मार्वल की तुलना स्टैड,स्टफ और बेरंग ताजमहल से करें और आपको पता चल जाएगा कि कैसे इतिहासकारों के कॉमेडी गिरोह ने स्वदेशी वास्तुशिल्प विरासत को गिराने की साजिश रची और ताजमहल को वास्तुविद के रूप में प्रस्तुत किया जिसे भारत का एकमात्र हिस्सा माना जा रहा है!
👆👆👆🙏🙏🧏♂☝👉🚩🕉️⚜️🇮🇳 #कोणार्क_सूर्य_मंदिर का भीतरी गर्भगृह और ऊपर मंडप, जिसके ऊपर सूर्य देवता की मूर्ति को मैग्नेट और लोड पत्थर के प्रभाव के कारण हवा में तैरते हुए कहा गया था
और #जगमोहन के अंदर
1903 में जगमगाना के पतन को रोकने के लिए मंदिर को सील कर दिया गया और रेत से भर दिया गय😢😢😢इस तरह से हमारी सदियों पुरानी सभ्यता को नष्ट किया
और #जगमोहन के अंदर
1903 में जगमगाना के पतन को रोकने के लिए मंदिर को सील कर दिया गया और रेत से भर दिया गय😢😢😢इस तरह से हमारी सदियों पुरानी सभ्यता को नष्ट किया
#ताजमहल तो केवल एक झांकी है, हमारा पूरा देश एक से बढ़ कर एक अस्चार्यजनक वास्तु कलाओं से भरा हुआ है।
विद्याशंकर मंदिर में 12 स्तंभ हैं, जिसपर सौर चिन्ह बने हैं। हर सुबह जब सूरज की किरणें यहाँ प्रवेश करती हैं, तो वे वर्ष के महीने का संकेत देने वाले एक विशेष स्तंभ से टकराती हैं। है ना अस्चर्य…?
लेकिन क्या हमारे बच्चों को यह दिखाया जाता है? हमारे बच्चों को तो बस लाल किला उअर क़ुतुब मीनार वाला हिन्दुस्तान दिखाया जाता है।
जय सनातन धर्म
जय श्री राम 🚩🚩🎪🎪
विद्याशंकर मंदिर श्रृंगेरी, कर्नाटक में स्थित है। यह विशाल मंदिर कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। माना जाता है कि 'विद्यारान्य' नाम के एक ऋषि ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। यहाँ आने वाले पर्यटक कई शिलालेख भी यहाँ देख सकते हैं, जो भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध 'विजयनगर साम्राज्य' के योगदान को दर्शाते हैं।
विद्याशंकर मंदिर में 12 स्तंभ हैं, जिसपर सौर चिन्ह बने हैं। हर सुबह जब सूरज की किरणें यहाँ प्रवेश करती हैं, तो वे वर्ष के महीने का संकेत देने वाले एक विशेष स्तंभ से टकराती हैं। है ना अस्चर्य…?
लेकिन क्या हमारे बच्चों को यह दिखाया जाता है? हमारे बच्चों को तो बस लाल किला उअर क़ुतुब मीनार वाला हिन्दुस्तान दिखाया जाता है।
जय सनातन धर्म
जय श्री राम 🚩🚩🎪🎪
विद्याशंकर मंदिर श्रृंगेरी, कर्नाटक में स्थित है। यह विशाल मंदिर कर्नाटक के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। माना जाता है कि 'विद्यारान्य' नाम के एक ऋषि ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। यहाँ आने वाले पर्यटक कई शिलालेख भी यहाँ देख सकते हैं, जो भारतीय इतिहास के प्रसिद्ध 'विजयनगर साम्राज्य' के योगदान को दर्शाते हैं।
फिर से चौंक गए ?
हाँ इसपर किसी छेनी के निशान भी नहीं हैं
हाँ इसे हजारों साल पहले बनाया गया
हाँ तब आज की तरह आधुनिक औजार नहीं थे
हाँ इसके पीछे की तकनीक हमारे पाठ्यक्रम में नहीं है । क्योकिं ?
उन्हें मुगलों के महिमामंडन से फुर्सत नहीं मिली ।
अब हम क्या करें ? आओ हम अपने पूर्वजों की विरासत का प्रचार करें ।
हाँ इसपर किसी छेनी के निशान भी नहीं हैं
हाँ इसे हजारों साल पहले बनाया गया
हाँ तब आज की तरह आधुनिक औजार नहीं थे
हाँ इसके पीछे की तकनीक हमारे पाठ्यक्रम में नहीं है । क्योकिं ?
उन्हें मुगलों के महिमामंडन से फुर्सत नहीं मिली ।
अब हम क्या करें ? आओ हम अपने पूर्वजों की विरासत का प्रचार करें ।