जो लोग अपना इतिहास भुला देते हैं,,, इतिहास उन्हे भुला देता है....!
#मार्तण्ड_सूर्य_मंदिर , अनंतनाग , कश्मीर (भारत)!
#मार्तण्ड_सूर्य_मंदिर , अनंतनाग , कश्मीर (भारत)!
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#एरावतेश्वर_मंदिर_तमिलनाडु
मैं दुनियाभर के पुरातत्वविदों को चैलेंज करता हूँ क्या वो मेरे इन तीन प्रश्नों का जवाब दे पाएंगे ?
🔸क्या ऐसी नक्काशियों के लिए किसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया ?
🔸अगर नहीं तो क्या आधुनिक औजारों के इस्तेमाल के बगैर आज के वास्तुकार ऐसे मंदिरों का निर्माण कर सकते हैं ?
🔸अगर नहीं कर सकते तो..आप कैसे कह सकते हैं कि प्राचीन काल में टेक्नोलॉजी नहीं थी ?
इतिहास लिखना वामपंथियों के हाथ में था लेकिन इतिहास बनाना हमारे हाथों में है ।
आओ हम इसका प्रचार कर जन जन तक पहुँचाए l
मैं दुनियाभर के पुरातत्वविदों को चैलेंज करता हूँ क्या वो मेरे इन तीन प्रश्नों का जवाब दे पाएंगे ?
🔸क्या ऐसी नक्काशियों के लिए किसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया ?
🔸अगर नहीं तो क्या आधुनिक औजारों के इस्तेमाल के बगैर आज के वास्तुकार ऐसे मंदिरों का निर्माण कर सकते हैं ?
🔸अगर नहीं कर सकते तो..आप कैसे कह सकते हैं कि प्राचीन काल में टेक्नोलॉजी नहीं थी ?
इतिहास लिखना वामपंथियों के हाथ में था लेकिन इतिहास बनाना हमारे हाथों में है ।
आओ हम इसका प्रचार कर जन जन तक पहुँचाए l
#अंकोरवाट_मंदिर_कंबोडिया
हमारे देश के प्राचीन मंदिर अपनी भव्यता एवं धार्मिक महत्ता के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन फिर भी क्या आप जानते हैं कि विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत में नहीं है। भारत से 4800 कि.मी. दूर एक ऐसा देश जहां पर है विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी । जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक विशालकाय हिन्दू मंदिर की। यह मंदिर है अंकोरवाट मंदिर जो कम्बोडिया के अंकोर में स्थित है। इसका पुराना नाम यशोधपुर था। मीकांक नदी के किनारे सिमरिप शहर में बसे इस मंदिर को टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के पांच आश्चर्यजनक चीज़ों में शुमार किया था। इसका फैलाव सैंकड़ों वर्ग मील में है।
यह मंदिर जगत के पालनहार विष्णु भगवान को समर्पित है। जबकि इससे पूर्व के शासकों ने यहां बड़े-बड़े शिव के मंदिरों का निर्माण करवाया था।इंडोनेशिया के निवासी इस मंदिर को पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचा भी कहते है। अंकोरवाट का यह हिन्दू मंदिर इतना ख़ास है कि यह कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है, जिसकी तस्वीर को यहां के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित किया गया है। यह मंदिर मेरु पर्वत का प्रतीक भी माना जाता है।
इस मंदिर की दीवारों पर रामायण एवं महाभारत जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण शिल्पकारों ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया हुआ है। जगह-जगह अप्सराओं के नृत्य मुद्रा में भित्ति चित्र हैं व असुर और देवताओं के मध्य हुए समुद्र मंथन जैसे दृश्यों को दीवारों पर चित्रित किया गया है। विश्व का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ ही इस मंदिर को 1992 में यूनेस्को ने विश्व विरासत में भी शामिल किया है ।
आखिर किसने बनवाया यह मंदिर?dk
इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने सं 1112 से 1153 के बीच कराया था। मंदिर का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया था परन्तु इसका समापन धरणीन्द्रवर्मन के शासन काल में हुआ था । देवालय की रक्षा के लिए चारों तरफ एक विशाल खाई बनाई गई थी जिसकी लम्बाई ढाई मील और चौड़ाई 650 फ़ीट है । दूर से देखने पर यह खाई सुन्दर झील के समान दिखती है । अगर हम किवदंतियों पर चर्चा करें तो इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि स्वयं देवराज इंद्र ने महल के तौर पर अपने पुत्र के लिए इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में अपनी आलौकिक शक्तियों के द्वारा किया था ।
जबकि इतिहासकारों की माने तो राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के द्वारा 12 वी सदी में बनाया गया था।
फिर भी इसे देखकर सबक ले कि ये धरती और मन्दिर कितने वैदिक मंत्रों से गूंजता होगा जो आज खण्डरों में बदल गया वीरान है क्या कल भारत के मंदिरों में भी लोग खोजे जाएंगे कि कौन बनाया और कितने हिन्दू यँहा थे सोचिएगा जरूर।
सनातन धर्म की जय🚩
हमारे देश के प्राचीन मंदिर अपनी भव्यता एवं धार्मिक महत्ता के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन फिर भी क्या आप जानते हैं कि विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत में नहीं है। भारत से 4800 कि.मी. दूर एक ऐसा देश जहां पर है विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी । जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक विशालकाय हिन्दू मंदिर की। यह मंदिर है अंकोरवाट मंदिर जो कम्बोडिया के अंकोर में स्थित है। इसका पुराना नाम यशोधपुर था। मीकांक नदी के किनारे सिमरिप शहर में बसे इस मंदिर को टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के पांच आश्चर्यजनक चीज़ों में शुमार किया था। इसका फैलाव सैंकड़ों वर्ग मील में है।
यह मंदिर जगत के पालनहार विष्णु भगवान को समर्पित है। जबकि इससे पूर्व के शासकों ने यहां बड़े-बड़े शिव के मंदिरों का निर्माण करवाया था।इंडोनेशिया के निवासी इस मंदिर को पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचा भी कहते है। अंकोरवाट का यह हिन्दू मंदिर इतना ख़ास है कि यह कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है, जिसकी तस्वीर को यहां के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित किया गया है। यह मंदिर मेरु पर्वत का प्रतीक भी माना जाता है।
इस मंदिर की दीवारों पर रामायण एवं महाभारत जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण शिल्पकारों ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया हुआ है। जगह-जगह अप्सराओं के नृत्य मुद्रा में भित्ति चित्र हैं व असुर और देवताओं के मध्य हुए समुद्र मंथन जैसे दृश्यों को दीवारों पर चित्रित किया गया है। विश्व का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ ही इस मंदिर को 1992 में यूनेस्को ने विश्व विरासत में भी शामिल किया है ।
आखिर किसने बनवाया यह मंदिर?dk
इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने सं 1112 से 1153 के बीच कराया था। मंदिर का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया था परन्तु इसका समापन धरणीन्द्रवर्मन के शासन काल में हुआ था । देवालय की रक्षा के लिए चारों तरफ एक विशाल खाई बनाई गई थी जिसकी लम्बाई ढाई मील और चौड़ाई 650 फ़ीट है । दूर से देखने पर यह खाई सुन्दर झील के समान दिखती है । अगर हम किवदंतियों पर चर्चा करें तो इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि स्वयं देवराज इंद्र ने महल के तौर पर अपने पुत्र के लिए इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में अपनी आलौकिक शक्तियों के द्वारा किया था ।
जबकि इतिहासकारों की माने तो राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के द्वारा 12 वी सदी में बनाया गया था।
फिर भी इसे देखकर सबक ले कि ये धरती और मन्दिर कितने वैदिक मंत्रों से गूंजता होगा जो आज खण्डरों में बदल गया वीरान है क्या कल भारत के मंदिरों में भी लोग खोजे जाएंगे कि कौन बनाया और कितने हिन्दू यँहा थे सोचिएगा जरूर।
सनातन धर्म की जय🚩
#लाल_किला किसने बनाया ??
यह जानना रोचक है कि लाल किले के दरवाजे पर #हाथी की मूर्ति स्थापित है। इतना ही नहीं तो #वराह के मुंह वाले चार नल आज भी लाल किले के एक ख़ास महल में विद्यमान हैं। #वामपंथी इतिहासकार बताते हैं कि लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया, लेकिन अगर इसे #शाहजहाँ ने बनवाया होता तो क्या इस्लामी मान्यता के अनुसार किसी भी प्रकार की मूर्ति वहां होतीं और वराह अर्थात उनकी नजर में सूअर की प्रतिमा तो कतई नहीं होती। ऐसे ही सैकड़ो मजबूत साक्ष्य हैं।
भैया यह लाल किला #पृथ्वीराज_चौहान के नाना #अनंतपाल ने बनाया था। तुम किताबें लिख सकते हो लेकिन #तथ्य नहीं बदल सकते और अब तुम्हारी असलियत सामने आ गई है।
ऐसी ही अन्य भारतीय वास्तु कलाओं की जानकारी के लिए इस पेज पुराण विद्या को फॉलो करें और हमसे जुड़ें। धन्यवाद
#भारत_माता_की_जय
#वंदे_मातरम
#जय_श्री_राम🙏
यह जानना रोचक है कि लाल किले के दरवाजे पर #हाथी की मूर्ति स्थापित है। इतना ही नहीं तो #वराह के मुंह वाले चार नल आज भी लाल किले के एक ख़ास महल में विद्यमान हैं। #वामपंथी इतिहासकार बताते हैं कि लाल किला शाहजहाँ ने बनवाया, लेकिन अगर इसे #शाहजहाँ ने बनवाया होता तो क्या इस्लामी मान्यता के अनुसार किसी भी प्रकार की मूर्ति वहां होतीं और वराह अर्थात उनकी नजर में सूअर की प्रतिमा तो कतई नहीं होती। ऐसे ही सैकड़ो मजबूत साक्ष्य हैं।
भैया यह लाल किला #पृथ्वीराज_चौहान के नाना #अनंतपाल ने बनाया था। तुम किताबें लिख सकते हो लेकिन #तथ्य नहीं बदल सकते और अब तुम्हारी असलियत सामने आ गई है।
ऐसी ही अन्य भारतीय वास्तु कलाओं की जानकारी के लिए इस पेज पुराण विद्या को फॉलो करें और हमसे जुड़ें। धन्यवाद
#भारत_माता_की_जय
#वंदे_मातरम
#जय_श्री_राम🙏
#एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, सोलन, हिमाचल प्रदेश।
39 साल में बना यह अद्भुत शिव मंदिर, यहां पत्थर को थपथपाने पर आती है #डमरू जैसी ध्वनि 🚩
.
कला का बेजोड़ नमूना है हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित जटोली शिव मंदिर। इसे एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है । मंदिर दक्षिण-द्रविड़ शैली से बना है। मंदिर को बनने में ही करीब 39 साल का समय लगा।
जटोली मंदिर के पीछे मान्यता है कि पौराणिक समय में भगवान शिव यहां आए और कुछ समय यहां रहे थे। बाद में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहां आकर तपस्या की। उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण हुआ। .
.
मंदिर में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। -मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार यह मंदिर एशिया के सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल है।
🚩🚩🚩🚩🚩
39 साल में बना यह अद्भुत शिव मंदिर, यहां पत्थर को थपथपाने पर आती है #डमरू जैसी ध्वनि 🚩
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कला का बेजोड़ नमूना है हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित जटोली शिव मंदिर। इसे एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है । मंदिर दक्षिण-द्रविड़ शैली से बना है। मंदिर को बनने में ही करीब 39 साल का समय लगा।
जटोली मंदिर के पीछे मान्यता है कि पौराणिक समय में भगवान शिव यहां आए और कुछ समय यहां रहे थे। बाद में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने यहां आकर तपस्या की। उनके मार्गदर्शन और दिशा-निर्देश पर ही जटोली शिव मंदिर का निर्माण हुआ। .
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मंदिर में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। -मंदिर की ऊंचाई 111 फुट है और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार यह मंदिर एशिया के सबसे ऊंचे मंदिरों में शामिल है।
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" भारत के हर कोने में इतनी अनूठी और जटिल सनातन विरासत संचनाएँ हैं की पश्चिमी देशों और वामपंथी इतिहासकारों के ब्रेनवाश किये हुए भारतीयों को घूमने के लिए एक जिंदगी कम पड़ जाएगी "
अनगिनत सीढ़ियों वाली इस शानदार बावड़ी को देखिए, माना जाता है कि तुला संक्रांति के दिन कावेरी का पानी इस बावड़ी में रहस्यमय तरीके से प्रवेश करता है, यहीं वजह है कि श्रद्धालुओं के नहाने के लिए इसमें सदैव पानी भरा रहता है ।
(सुब्रमण्य मंदिर, केरल)
अनगिनत सीढ़ियों वाली इस शानदार बावड़ी को देखिए, माना जाता है कि तुला संक्रांति के दिन कावेरी का पानी इस बावड़ी में रहस्यमय तरीके से प्रवेश करता है, यहीं वजह है कि श्रद्धालुओं के नहाने के लिए इसमें सदैव पानी भरा रहता है ।
(सुब्रमण्य मंदिर, केरल)
इस स्तम्भ को देखो, और इसे बनाने वालों के दिमाग के बारे में सोचो ..कितने ब्रिलिएंट रहे होंगे ।
आखिर वो लोग बिना किसी त्रुटि के छोटी से छोटी डिटेल की नक्काशी कैसे कर लेते थे ? छेनी पर हथौड़े का एक गलत प्रहार महीनों के कड़ी मेहनत को नष्ट कर सकती थी ।
वामपंथी इतिहासकारों के तर्क अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि इसे बनाने के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया होगा ।
(पिल्लला मर्री मंदिर, तेलंगाना)
आखिर वो लोग बिना किसी त्रुटि के छोटी से छोटी डिटेल की नक्काशी कैसे कर लेते थे ? छेनी पर हथौड़े का एक गलत प्रहार महीनों के कड़ी मेहनत को नष्ट कर सकती थी ।
वामपंथी इतिहासकारों के तर्क अपनी जगह है लेकिन मेरा मानना है कि इसे बनाने के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया होगा ।
(पिल्लला मर्री मंदिर, तेलंगाना)
दोस्तो क्या आप विश्वास करोगे अगर मैं कहूँ की यह एक-दो नहीं बल्कि पाँच हजार साल पुराना है ?
आधुनिक पेंटर वैसे चित्र भी नहीं बना सकते जैसी कलाकृति हजारों साल पहले हमारे पूर्वज बना कर चले गए ।
(तिरुवत्तार मंदिर, तमिलनाडु)
आधुनिक पेंटर वैसे चित्र भी नहीं बना सकते जैसी कलाकृति हजारों साल पहले हमारे पूर्वज बना कर चले गए ।
(तिरुवत्तार मंदिर, तमिलनाडु)
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*तुंगनाथ शिव मंदिर* *उत्तराखंड* *दुनिया में सबसे ज्यादा उंचाई पर है*
यह श्रीलंका का प्रसिद्ध सिगिरिया रॉक किला है जिसे रावण के सोने के महल का स्थान माना जाता है, जिसे कुबेर ने डिजाइन किया था।
ऐसा माना जाता है की इसके नीचे कई गुफाओं में से एक गुफा में माँ सीता को बंदी बनाया गया था ।
श्रीलंका का बच्चा बच्चा जानता है कि प्रभु राम यहाँ आये थे मगर भारत के ही कुछ वामपंथियों को लगता है कि राम काल्पनिक हैं ।
ऐसा माना जाता है की इसके नीचे कई गुफाओं में से एक गुफा में माँ सीता को बंदी बनाया गया था ।
श्रीलंका का बच्चा बच्चा जानता है कि प्रभु राम यहाँ आये थे मगर भारत के ही कुछ वामपंथियों को लगता है कि राम काल्पनिक हैं ।
" लोगों को ताजमहल और लालकिला इसलिए अच्छा लगता है क्योकिं उन्होंने अभी तक हमारे मंदिरों को नहीं देखा "
ताजमहल ही तेजोमहालय शिवालय है और लाल किला लाल कोट है।
( योगी स्मृति मंदिर, गुजरात )
ताजमहल ही तेजोमहालय शिवालय है और लाल किला लाल कोट है।
( योगी स्मृति मंदिर, गुजरात )