अद्भुत ! स्वर्ग मंडप
ऐसा साल में एक से दो बार होता है जब चंद्रमा स्वर्ग मंडप के बीचो-बीच होता है । चौंकाने वाली बात है कि ऐसा केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही होता है ।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की दशा और दिशा को ध्यान में रखकर इस मंडप को बनाना ही प्राचीन भारत के वास्तुकला के उन्नत होने का प्रमाण है ।
(कोपेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र)
ऐसा साल में एक से दो बार होता है जब चंद्रमा स्वर्ग मंडप के बीचो-बीच होता है । चौंकाने वाली बात है कि ऐसा केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही होता है ।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की दशा और दिशा को ध्यान में रखकर इस मंडप को बनाना ही प्राचीन भारत के वास्तुकला के उन्नत होने का प्रमाण है ।
(कोपेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र)
वो इतने क्रूर थे कि उन्होंने पहले हमारे मंदिरों को नष्ट किया फिर दावा किया कि सनातन सभ्यता एक गरीब सभ्यता थी..क्योकिं उन्होंने हमारे पास दिखाने को कुछ नही छोड़ा था ।
मुस्लिम आक्रमणकारियों की ऐसी ही क्रूरता का गवाह है खजुराहो, कभी यहाँ 85 मंदिर हुआ करते थे आज 22 बचे हैं, वो भी टूटे-फूटे ..!
(खजुराहो, मध्य प्रदेश)
मुस्लिम आक्रमणकारियों की ऐसी ही क्रूरता का गवाह है खजुराहो, कभी यहाँ 85 मंदिर हुआ करते थे आज 22 बचे हैं, वो भी टूटे-फूटे ..!
(खजुराहो, मध्य प्रदेश)
वामपंथ समर्थित सरकारों ने इन मंदिरों को विश्व आश्चर्य बनाने के लिए यूनेस्को पर दबाव क्यों नही डाला ?
विश्व के सभी आश्चर्यों से इसकी तुलना कर लो, काल-खंड की प्राचीनता और आधुनिक हथियारों की गैरमौजूदगी में बना यह अद्भुत मंदिर हर हाल में सभी आश्चर्यों से आगे निकल जायेगा ।
(एकम्बरेश्वर मंदिर, तमिलनाडु)
विश्व के सभी आश्चर्यों से इसकी तुलना कर लो, काल-खंड की प्राचीनता और आधुनिक हथियारों की गैरमौजूदगी में बना यह अद्भुत मंदिर हर हाल में सभी आश्चर्यों से आगे निकल जायेगा ।
(एकम्बरेश्वर मंदिर, तमिलनाडु)
पुरातत्वविदों ने भी पुष्टि कर दी है कि यह सब 'खराद मशीन' का उपयोग करके बनाया गया था,
लेकिन वे यह नहीं जानते कि उस समय हमारे पूर्वजों को खराद मशीन कैसे मिली !
फ्रेंड्स यह मत भूलिए कि हम +1000 साल पहले की बात कर रहे हैं ।
(होयसला मंदिर, कर्नाटक)
लेकिन वे यह नहीं जानते कि उस समय हमारे पूर्वजों को खराद मशीन कैसे मिली !
फ्रेंड्स यह मत भूलिए कि हम +1000 साल पहले की बात कर रहे हैं ।
(होयसला मंदिर, कर्नाटक)
" धर्म रक्षा के लिए अपने स्वामी विष्णु को लेकर उड़ने के लिए तैयार 100 मिलियन डॉलर और 4000 टन, तांबा पीतल और स्टील से निर्मित गरुण "
विदेशों में ऐसी प्रतिमाएं देखकर विश्वास हो जाता है कि सनातन को मिटाने वालों सपना पुरा नहि होने वाला
(गरुण-विष्णु प्रतिमा, इंडोनेशिया)
विदेशों में ऐसी प्रतिमाएं देखकर विश्वास हो जाता है कि सनातन को मिटाने वालों सपना पुरा नहि होने वाला
(गरुण-विष्णु प्रतिमा, इंडोनेशिया)
आर्याना बना अफगानिस्तान .. 😓
17 वीं सदी तक अफगानिस्तान नाम का कोई राष्ट्र नहीं था..
26 मई 1739 को दिल्ली के मुगल बादशाह मुहम्मद शाह अकबर ने ईरान के नादिर शाह से हारने के बाद .. मुआवजे के तौर पर #आर्याना उसे सौंप दिया था..जो बाद में बदल कर अफगानिस्तान हो गया ..
यहॉ के जनपदों के नाम गांधार, कम्बोज, कुंभा, वर्णु, सुवास्तु आदि क्षेत्र थे..
इसके उत्तरी क्षेत्र में #गांधार महाजनपद था जिसके बारे में भारतीय स्रोत महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है..
सन् 843 ईस्वी में कल्लार नामक राजा ने हिन्दूशाही की स्थापना की..
तत्कालीन सिक्कों से पता चलता है कि कल्लार के पहले भी रुतविल या रणथल, स्पालपति और लगतुरमान नामक हिन्दू या बौद्घ राजाओं का गांधार प्रदेश में राज था..
हिन्दू राजाओं को ‘काबुलशाह' या ‘महाराज धर्मपति' कहा जाता था..इन राजाओं में कल्लार, सामंतदेव, भीम, अष्टपाल, जयपाल, आनंदपाल, त्रिलोचनपाल, भीमपाल आदि उल्लेखनीय हैं..
इन राजाओं ने लगभग 350 साल तक अरब आततायियों और लुटेरों को जबर्दस्त टक्कर दी और उन्हें सिंधु नदी पार करके भारत में नहीं घुसने दिया, लेकिन 1019 में महमूद गजनी से त्रिलोचनपाल की हार के साथ अफगानिस्तान का इतिहास पलटी खा गया..
पूरे देश को एकसाथ जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया गया ..
❤️ प्राचीन भारतीय नदियों के नाम #वक्षु, #कुभा, #कुरम, #रसा, #नारायणी, #जलदेवी के नाम से जानते थे..
👺 उनका नाम बदल कर आमू, काबुल, कुर्रम, रंगा, गोमल, हरिरुद कर दिया ..
❤️ जिन जनपदों के नाम कुभा ,गंधार, बाल्हीक, वोक्काण, कपिशा, मेरू, कम्बोज, पुरुषपुर (पेशावर), सुवास्तु, पुष्कलावती आदि के नाम से जाना जाता था..
👺 उनके नाम बदल कर काबुल, कंधार, बल्ख, वाखान, बगराम, पामीर, बदख्शां, पेशावर, स्वात, चारसद्दा कर दिया ..
17 वीं सदी तक अफगानिस्तान नाम का कोई राष्ट्र नहीं था..
26 मई 1739 को दिल्ली के मुगल बादशाह मुहम्मद शाह अकबर ने ईरान के नादिर शाह से हारने के बाद .. मुआवजे के तौर पर #आर्याना उसे सौंप दिया था..जो बाद में बदल कर अफगानिस्तान हो गया ..
यहॉ के जनपदों के नाम गांधार, कम्बोज, कुंभा, वर्णु, सुवास्तु आदि क्षेत्र थे..
इसके उत्तरी क्षेत्र में #गांधार महाजनपद था जिसके बारे में भारतीय स्रोत महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है..
सन् 843 ईस्वी में कल्लार नामक राजा ने हिन्दूशाही की स्थापना की..
तत्कालीन सिक्कों से पता चलता है कि कल्लार के पहले भी रुतविल या रणथल, स्पालपति और लगतुरमान नामक हिन्दू या बौद्घ राजाओं का गांधार प्रदेश में राज था..
हिन्दू राजाओं को ‘काबुलशाह' या ‘महाराज धर्मपति' कहा जाता था..इन राजाओं में कल्लार, सामंतदेव, भीम, अष्टपाल, जयपाल, आनंदपाल, त्रिलोचनपाल, भीमपाल आदि उल्लेखनीय हैं..
इन राजाओं ने लगभग 350 साल तक अरब आततायियों और लुटेरों को जबर्दस्त टक्कर दी और उन्हें सिंधु नदी पार करके भारत में नहीं घुसने दिया, लेकिन 1019 में महमूद गजनी से त्रिलोचनपाल की हार के साथ अफगानिस्तान का इतिहास पलटी खा गया..
पूरे देश को एकसाथ जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया गया ..
❤️ प्राचीन भारतीय नदियों के नाम #वक्षु, #कुभा, #कुरम, #रसा, #नारायणी, #जलदेवी के नाम से जानते थे..
👺 उनका नाम बदल कर आमू, काबुल, कुर्रम, रंगा, गोमल, हरिरुद कर दिया ..
❤️ जिन जनपदों के नाम कुभा ,गंधार, बाल्हीक, वोक्काण, कपिशा, मेरू, कम्बोज, पुरुषपुर (पेशावर), सुवास्तु, पुष्कलावती आदि के नाम से जाना जाता था..
👺 उनके नाम बदल कर काबुल, कंधार, बल्ख, वाखान, बगराम, पामीर, बदख्शां, पेशावर, स्वात, चारसद्दा कर दिया ..
जम्बुकेश्वर_मन्दिर_तमिलनाडु
अपने बच्चों को बताना की हिंदू मंदिरों के रहस्यों का पता लगाने के लिए कई जन्म लेने की आवश्यकता है फिर भी पूरे नही समझ सकते
1800 वर्ष पुराने जम्बुकेश्वर मन्दिर के गर्भगृह में एक भूमिगत जलधारा है और पानी को बाहर पंप करने के बावजूद यह हमेशा पानी से भरा रहता है
यह मन्दिर भगवान शिव व माता पार्वती को समर्पित है
अपना इतिहास अपनी आने वाली मूर्ख पीढ़ी तक भी पहुंच सके इसलिये ये पोस्ट कर रहा हु ताकि अपने पूर्वजो के महान कार्यों को देखकर स्वयं भी ऐसा कार्य करो कि तुम्हारी भी आनेवाली पीढ़ी तुमपे गर्व कर सके ये नही की Tik Tok में तुम कैसे जोकर बने उसे देखकर शर्मिंदा हो
इसलिए शेयर करो और सबको समझाओ की तुम भी कल अपने इतिहास स्वयं लिखो
जय सनातन धर्म की 🙏
अपने बच्चों को बताना की हिंदू मंदिरों के रहस्यों का पता लगाने के लिए कई जन्म लेने की आवश्यकता है फिर भी पूरे नही समझ सकते
1800 वर्ष पुराने जम्बुकेश्वर मन्दिर के गर्भगृह में एक भूमिगत जलधारा है और पानी को बाहर पंप करने के बावजूद यह हमेशा पानी से भरा रहता है
यह मन्दिर भगवान शिव व माता पार्वती को समर्पित है
अपना इतिहास अपनी आने वाली मूर्ख पीढ़ी तक भी पहुंच सके इसलिये ये पोस्ट कर रहा हु ताकि अपने पूर्वजो के महान कार्यों को देखकर स्वयं भी ऐसा कार्य करो कि तुम्हारी भी आनेवाली पीढ़ी तुमपे गर्व कर सके ये नही की Tik Tok में तुम कैसे जोकर बने उसे देखकर शर्मिंदा हो
इसलिए शेयर करो और सबको समझाओ की तुम भी कल अपने इतिहास स्वयं लिखो
जय सनातन धर्म की 🙏