मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तमिलनाडु ।
दुनिया के सात अजूबे से कम है क्या?
दुनिया के सात अजूबे से कम है क्या?
जानते हो मुगलों ने हमारे मंदिरो को क्यों तोड़ा ? क्योकिं हमारे जैसे मंदिर बनवाने की उनकी औकात नहीं थी ।
आज से 1100 साल पहले बने इस मंदिर को मुगलों ने बालू और चुना भरवा कर पूजा बंद करवा दी थी, कुछ समय के लिए यह मंदिर टापू जैसा लगने लगा था ।
मंदिर, मध्यप्रदेश
आज से 1100 साल पहले बने इस मंदिर को मुगलों ने बालू और चुना भरवा कर पूजा बंद करवा दी थी, कुछ समय के लिए यह मंदिर टापू जैसा लगने लगा था ।
मंदिर, मध्यप्रदेश
क्या तुम्हें पता था?
कुतुब मीनार परिसर में लौह स्तंभ के शीर्ष पर विष्णचक्र था और शीर्ष पर विष्णु का चित्र भी था।
इसका मूल नाम विष्णु द्वाजा था, जैसा कि गुप्त काल के शिलालेख में उसके मुख पर लिखा गया है।
स्तंभ विष्णु मंदिर का एक ध्वज था।Iltutmish
लोहा स्तंभ प्राचीन हिंदू धातुकर्मियों द्वारा प्राप्त कौशल के उच्च स्तर का प्रमाण है।यह 1600 वर्षों के लिए जंग का सामना किया है।
एक कारण कि मुस्लिम सुल्तानों ने सिर्फ इसे नष्ट करने के बजाय स्तंभ को विनियमित किया।ऐसा एक स्तंभ नहीं बना सकता था
Iit-कानपुर में धातुकर्म इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बलसुब्रमण्यम ने, जो लौह स्तंभ के विशेषज्ञ हैं, पुनर्निर्माण की व्यवस्था की है।
कुतुब मीनार परिसर में लौह स्तंभ के शीर्ष पर विष्णचक्र था और शीर्ष पर विष्णु का चित्र भी था।
इसका मूल नाम विष्णु द्वाजा था, जैसा कि गुप्त काल के शिलालेख में उसके मुख पर लिखा गया है।
स्तंभ विष्णु मंदिर का एक ध्वज था।Iltutmish
लोहा स्तंभ प्राचीन हिंदू धातुकर्मियों द्वारा प्राप्त कौशल के उच्च स्तर का प्रमाण है।यह 1600 वर्षों के लिए जंग का सामना किया है।
एक कारण कि मुस्लिम सुल्तानों ने सिर्फ इसे नष्ट करने के बजाय स्तंभ को विनियमित किया।ऐसा एक स्तंभ नहीं बना सकता था
Iit-कानपुर में धातुकर्म इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बलसुब्रमण्यम ने, जो लौह स्तंभ के विशेषज्ञ हैं, पुनर्निर्माण की व्यवस्था की है।
Forwarded from भक्ति भजन
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे गोविंद* 🙏🏻🌹
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
💥 *भारतियों मंदिरों का वो इतिहास जो आप से छुपाया गया* 💥
👆🏻👇🏻वीडियो- 🎥▶️6.45
*🙏🏻🌹 हरे कृष्ण 🙏🏻🌹*
🙏🏻🌹 *जय जय श्री राधे* 🙏🏻🌹
💥 *भारतियों मंदिरों का वो इतिहास जो आप से छुपाया गया* 💥
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#ध्यानपूर्वक_समझे
छतों की #कलाकृति को देखें और समझे हजारों सालों पहले क्या हम अशिक्षित थे या #खानाबदोश जो हमे आज इतिहास में पढ़ाई जा रही है।
हम तो उनके #वंशज है जो विश्वमानव थे #षंडयत्र रचकर हमे कई सदियों से छला जा रहा है और हम अपने #उदारवादी नीतियों के अधीन होकर छले जा रहे सोचिएगा जरूर की
जो #सभ्यता थी उसका विनाश किया गया #संस्कृति नष्ट कर दी गयी और आज हम यँहा तक पहुँच गए क्या हम #जागरूक होकर एकमत न हुए तो बच पाएंगे ?
#सोमनाथपुरा के कावेरी नदी के तट कर स्थित इस मंदिर को #केशव_मन्दिर भी बोलते है ये होयसल #राजा_नरसिम्हा_तृतीय के द्वारा 1258 ई में #पवित्र निर्मित किया गया था ।
ये पूर्ण #वैष्णव मन्दिर है जिसमे #भगवान_विष्णु के अवतारों का प्रतिमा है वैसे तो सभी देवों देवियों की है परंतु आकर्षण विष्णु रूपों की ही है
मन्दिर में तराशे हुए #पत्थरों की अनूठी दास्तान जो #विस्मयकारी है।
#चेन्नाकेशव_मन्दिर_सोमनाथपुरम_कर्नाटका
#पृथ्वीराजसनातन
छतों की #कलाकृति को देखें और समझे हजारों सालों पहले क्या हम अशिक्षित थे या #खानाबदोश जो हमे आज इतिहास में पढ़ाई जा रही है।
हम तो उनके #वंशज है जो विश्वमानव थे #षंडयत्र रचकर हमे कई सदियों से छला जा रहा है और हम अपने #उदारवादी नीतियों के अधीन होकर छले जा रहे सोचिएगा जरूर की
जो #सभ्यता थी उसका विनाश किया गया #संस्कृति नष्ट कर दी गयी और आज हम यँहा तक पहुँच गए क्या हम #जागरूक होकर एकमत न हुए तो बच पाएंगे ?
#सोमनाथपुरा के कावेरी नदी के तट कर स्थित इस मंदिर को #केशव_मन्दिर भी बोलते है ये होयसल #राजा_नरसिम्हा_तृतीय के द्वारा 1258 ई में #पवित्र निर्मित किया गया था ।
ये पूर्ण #वैष्णव मन्दिर है जिसमे #भगवान_विष्णु के अवतारों का प्रतिमा है वैसे तो सभी देवों देवियों की है परंतु आकर्षण विष्णु रूपों की ही है
मन्दिर में तराशे हुए #पत्थरों की अनूठी दास्तान जो #विस्मयकारी है।
#चेन्नाकेशव_मन्दिर_सोमनाथपुरम_कर्नाटका
#पृथ्वीराजसनातन
बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु)
👉 ग्रेनाइट से बने इस मंदिर के शिखर पर 1000 साल पहले 80 टन का पत्थर रखा गया
👉इस मंदिर के अंदर एक ही पत्थर को काटकर 13 फीट ऊँचा नंदी बनाया गया
👉उस समय कोई क्रेन या आधुनिक मशीन नहीं थी
👉इस मंदिर के गोपुरम की सूर्य के प्रकाश में छाया नहीं बनती
और
👉 इस मंदिर के आसपास 60 किमी तक कोई पत्थर का स्रोत भी नहीं है फिर इतने भारी भरकम पत्थर कहाँ से और कैसे लाये गए ?
ऐसा है महान प्राचीन इतिहास हमारा।
आज के विज्ञान से कहीं ज़्यादा विकसित
👉 ग्रेनाइट से बने इस मंदिर के शिखर पर 1000 साल पहले 80 टन का पत्थर रखा गया
👉इस मंदिर के अंदर एक ही पत्थर को काटकर 13 फीट ऊँचा नंदी बनाया गया
👉उस समय कोई क्रेन या आधुनिक मशीन नहीं थी
👉इस मंदिर के गोपुरम की सूर्य के प्रकाश में छाया नहीं बनती
और
👉 इस मंदिर के आसपास 60 किमी तक कोई पत्थर का स्रोत भी नहीं है फिर इतने भारी भरकम पत्थर कहाँ से और कैसे लाये गए ?
ऐसा है महान प्राचीन इतिहास हमारा।
आज के विज्ञान से कहीं ज़्यादा विकसित
🤔ऐसा अद्भुत अलौकिक सनातन अजूबा जिसे देखकर आँखें स्तब्ध और जिव्हा निशब्द हो जाए। सोचने पर मजबूर कर दे हमारे पूर्वज मानव ही थे या देवात्मा शिल्पी।
चैन्नाकेशव मंदिर, कर्नाटका की आश्चर्यजनक नक्काशी :O
ऐसी अप्रतिम और विस्मयकारी मूर्तिकला, वास्तुकला, सदियों पुरानी इंजीनियरिंग को विज्ञापनों मे जगह नहीं।
आप खुद लोगो तक पहुँचाइए!
सादर साभार
(नोट: हर निर्माण के पीछे वैज्ञानिक कारण आज भी अकाट्य हैं)
चैन्नाकेशव मंदिर, कर्नाटका की आश्चर्यजनक नक्काशी :O
ऐसी अप्रतिम और विस्मयकारी मूर्तिकला, वास्तुकला, सदियों पुरानी इंजीनियरिंग को विज्ञापनों मे जगह नहीं।
आप खुद लोगो तक पहुँचाइए!
सादर साभार
(नोट: हर निर्माण के पीछे वैज्ञानिक कारण आज भी अकाट्य हैं)